Skip to main content

प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीण व मनरेगा में राज्य को मिले 11 पुरस्कार

प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीण व मनरेगा में राज्य को मिले 11 पुरस्कार

आवास पूर्ण कराने की श्रेणी में राज्य देश में प्रथम

प्रदेश के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को प्रदेश में महात्मा गांधी नरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सफल क्रियान्वयन के लिए 11 राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है व आवास पूर्ण कराने की श्रेणी में देश में राज्य को प्रथम पुरस्कार मिला है।  
 
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने बृहस्पतिवार 19 दिसम्बर को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह में  राज्य, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

 ये पुरस्कार निम्नांकित हैं-
  1. राजस्थान में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य को आवास पूर्ण कराने की श्रेणी में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 
  2. बांसवाडा की पंचायत समिति घाटोल को आवास पूर्ण करने की श्रेणी में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर पुरस्कृत किया गया।
  3. राज्य की ग्राम पंचायत रेटा, पंचायत समिति झूथरी, जिला डूंगरपुर की सरपंच श्रीमती सविता देवी को क्षेत्रीय स्तर पर योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए पुरस्कृत किया गया ।
  4. ग्राम पंचायत अजीतपुरा पंचायत समिति भादरा जिला हनुमानगढ़ के ग्राम विकास अधिकारी श्री प्रकाश सिंह को क्षेत्रीय स्तर पर योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए पुरस्कृत किया गया।
  5. राजस्थान में महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत जिला स्तर पर जियो टेगिंग मनरेगा इनिशियेटिव के तहत कोटा जिले को देश में द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
  6. महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर जियो टेगिंग मनरेगा इनिशियेटिव-एमएसई के तहत डूंगरपुर जिले की सरा ग्राम पंचायत को पुरस्कृत किया गया है ।
  7. ग्राम पंचायत स्तर पर मनरेगा के सर्वोत्तम क्रियान्वयन के लिये जैसलमेर की हरनाव ग्राम पंचायत को पुरस्कार प्रदान किया गया।
  8. ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वश्रेष्ठ आधारभूत ढांचा निर्माण व जल संग्रहण ढांचा निर्माण में वृद्धि के लिये भीलवाड़ा जिले के आसीन्द ब्लॉक की मोतीपुर ग्राम पंचायत को पुरस्कृत किया गया है । 
  9. विभाग की जोधुपर एवं उदयपुर स्थित आरसेटी (ICICI RSETI) प्रशिक्षण संस्था को देश में 1st and 2nd पुरस्कार प्रदान किया गया।
  10. पंचायती राज विभाग को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। राजस्थान को यह पुरस्कार ‘बेस्ट ओवर ऑल परफॉरमेंस इन टर्म्स ऑफ क्वालिटी ऑफ रोड्स इंस्पेक्टेड बाय नेशनल क्वालिटी मॉनिटर्स’ श्रेणी में दिया गया है। इस पुरस्कार के लिए राजस्थान का चयन पीएमजीएसवाई के तहत प्रदेशभर में पूरे हो चुके एवं प्रगतिरत सड़क निर्माण कार्यों तथा मेंटेनेंस कार्यों की उच्च गुणवत्ता के आधार पर किया गया।

Comments

Post a Comment

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

Popular posts from this blog

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

Main breeds of Indian horses - जानिये भारतीय घोड़ों की मुख्य नस्लें

Main breeds of Indian horses - भारतीय अश्वों की मुख्य नस्लें 1. मारवाड़ी (मालानी) घोड़े - मारवाड़ी घोड़े का इस्तेमाल राजाओं के ज़माने में युद्ध के लिए किया जाता था। इसलिए कहा जाता है कि इन घोड़ों के शरीर में राजघराने का लहू दौड़ता है। मालानी नस्ल के घोड़े अपनी श्रेष्ठ गुणवता के कारण देश-विदेश मे पहचान बना चुके हैं और इनकी खरीद-फरोख्त के लिए लोग बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा मेले में पहुँचते है। पोलो एवं रेसकोर्स के लिए इन घोड़ों की माँग लगातार बढ़ रही है। दौड़ते समय मालानी नस्ल के घोड़े के पिछले पैर, अपने पैरों की तुलना में, अधिक गतिशील होने के कारण अगले पैरों से टक्कर मारते हैं, जो इसकी चाल की खास पहचान है। इनके ऊँचे कान आपस में टकराने पर इनका आकर्षण बढ़ जाता हैं और ये घोड़े कानों के दोनों सिरों से सिक्का तक पकड़ लेते हैं। चाल व गति में बेमिसाल इन घोड़ों की सुन्दरता, ऊँचा कद, मजबूत कद-काठी देखते ही बनती हैं। राजस्थान में  घोड़े जोधपुर, बाड़मेर, झालावाड़, राजसमन्द, उदयपुर, पाली एवं उदयपुर आदि स्थानों में पाये जाते है। जन्म स्थान :   इस नस्ल के घोड़ों का...