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राजस्थान के विविध रंग- Various Colours Of Rajasthan

"राजस्थान की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समसामयिक दृश्यों के विविध रंगों से युक्त प्रामाणिक एवं मूलभूत जानकारियों की एकमात्र वेब पत्रिका" "यह राजस्थान से संबंधित विभिन्न प्रामाणिक जानकारियों को हिंदी माध्यम से देने के लिए किया गया प्रथम विनम्र प्रयास है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होगा।" राजस्थान के मूलग्राही (Original) तथा प्रामाणिक ज्ञान को साझा करने के इस प्रयास को आप सब पाठकों का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। इस हेतु धन्यवाद।

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राजस्थान सामान्य ज्ञान

Rajasthan General Knowledge

राजस्थान के विविध रंग on facebook

Saturday, May 4, 2013

***राजस्थान का नामकरण-***

वर्तमान राजस्थान के लिए पहले किसी एक नाम का प्रयोग नहीं मिलता है। इसके भिन्न-भिन्न क्षेत्र अलग-अलग नामो से जाने जाते थे। वर्तमान बीकानेर और जोधपुर का क्षेत्र महाभारत काल मे ‘जांगल देश’ कहलाता था। इसी कारण बीकानेर के राजा स्वयं को ‘जंगलधर बादशाह’कहते थे। जांगल देश का निकटवर्ती भाग सपादलक्ष (वर्तमान अजमेर और नागौर का मध्य भाग) कहलाता था, जिस पर चौहानों का अधिकार था। अलवर राज्य का उत्तरी भाग कुरु देश, दक्षिणी और पश्चिमी मत्स्य देश और पूर्वी भाग शूरसेन देश के अन्तर्गत था। भरतपुर और धौलपुर राज्य तथा करौली राज्य का अधिकांश भाग शूरसेन देश के अन्तर्गत थे। शूरसेन राज्य की राजधानी मथुरा, मत्स्य राज्य की विराटनगर और कुरु राज्य की इन्द्रप्रस्थ थी। उदयपुर राज्य का प्राचीन नाम ‘शिवि’ था, जिसकी राजधानी ‘मध्यमिका’ थी। आजकल ‘मध्यमिका’ (मज्झमिका) को “नगरी” कहते हैं। यहाँ पर मेव जाति का अधिकार रहा, जिस कारण इसे मेदपाट अथवा प्राग्वाट भी कहा जाने लगा। डूँगरपुर, बाँसवाड़ा के प्रदेश को वागड़ कहते थे। जोधपुर के राज्य को मरु अथवा मारवाड़ कहा जाता था। जोधपुर के दक्षिणी भाग को गुर्जरत्रा कहते थे। सिरोही के हिस्से को अर्बुद (आबू) देश कहा जाताथा। जैसलमेर को माड तथा कोटा और बूँदी को हाड़ौती पुकारा जाता था। झालावाड़ का दक्षिणी भाग मालव देश के अन्तर्गत गिना जाता था। इस प्रकार स्पष्ट है कि जिस भू-भाग को आजकल हम राजस्थान कहते हैं, वह किसी विशेष नाम से भी प्रसिद्ध नहीं रहा। ऐसी मान्यता है कि 1800 ई में सर्वप्रथम जार्ज थामस ने इस प्रान्त के लिए राजपूताना’ नाम का प्रयोग किया था। प्रसिद्ध इतिहास लेखक कर्नल जेम्स टॉड ने 1829 ई. में अपनी पुस्तक ‘एनल्स एण्ड एण्टीक्वीटीज आफ राजस्थान’ में इस राज्य का नाम ‘रायथान’ अथवा ‘राजस्थान’ रखा। जब भारत स्वतन्त्र हुआ तो इस राज्य का नाम ‘राजस्थान’ स्वीकार कर लिया गया।

Monday, April 1, 2013

***राजस्थान साहित्य अकादमी के वर्ष 2012-13 के पुरस्कार***

राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा शनिवार 24 मार्च 2013 को वर्ष 2012-13 के विभिन्न पुरस्कारों की घोषणा की गई। ये इस प्रकार हैं-

1. सर्वोच्च मीरा पुरस्कार-
भवानी सिंह(जयपुर) को उनकी कथाकृति "मांणस तथा अन्य कहानियों" पर। पुरस्कार स्वरूप 75 हजार रूपए व प्रशस्ति-पत्र।

2. "देवराज उपाध्याय" पुरस्कार-
डॉ. रेणु शाह (जोधपुर) को उनकी कृति "साहित्यालोचन : विविध रंग" पर।

3. कन्हैयालाल सहल पुरस्कार-
 कोटा के डॉ. अतुल चतुर्वेदी को व्यंग्य कृति "घोषणाओं का वसंत" पर।

4. मरूधर मृदुल युवा लेखन पुरस्कार-
अंजीव अंजुम (दौसा) को लघुकथा कृति "समझौता" पर।

5. विजयसिंह पथिक साहित्यिक पत्रकारिता एवं रचनात्मक पुरस्कार-
ईशमधु तलवार (जयपुर) को।

6. कविता विधा का 'सुधीन्द्र' पुरस्कार-
हरीश करमचन्दानी (जयपुर) को काव्यकृति "समय कैसा भी हो" पर ।

7. 'रांगेय राघव' पुरस्कार-
सावित्री रांका (जयपुर) को कथाकृति "पन्ने जिन्दगी के" पर।

8. 'डॉ. आलम शाह खान अनुवाद पुरस्कार'-
 इंदु शर्मा (जयपुर) को उनकी अनुदित कृति "अभिनव-संस्कृत कथा-पंचाशिका" पर। (ये सभी पुरस्कार 31-31 हजार रुपए के हैं)

9. सुमनेश जोशी प्रथम प्रकाशित कृति पुरस्कार-
शारदा शर्मा (संगरिया) को उपन्यास "वैदेही" पर।

10. शंभूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार-
 आबूरोड के त्रिलोक सिंह ठकुरेला को "नया सवेरा" पर। (क्रम संख्या 10 व 11 के पुरस्कार 15-15 हजार रुपए के हैं)

11. महाविद्यालय स्तरीय नवोदित प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार-

 (i) 'चन्द्रदेव शर्मा पुरस्कार' (कविता विधा)-               जयपुर की खुशबू शर्मा को।

(ii) 'चन्द्रदेव शर्मा पुरस्कार' (कहानी विधा)-               जयपुर की पायल कंवर को।

(iii) 'चन्द्रदेव शर्मा पुरस्कार' (निबंध विधा)-
सिरोही के प्रियांश ओझा और जयपुर की निकिता शर्मा को संयुक्त रूप से।

12. महाविद्यालय स्तरीय "डॉ. सुधा गुप्ता पुरस्कार" (निबन्ध विधा में)-
 कोटा की ज्योति चांद सिन्हा को।

 13. परदेशी पुरस्कार योजना-

 (i) "परदेशी पुरस्कार योजना" में (कहानी विधा)- जयपुर की निशा सक्सेना को।

 (ii) "परदेशी पुरस्कार योजना" (निबन्ध विधा)- जयपुर की मोनिका सोलंकी को।

(iii) "परदेशी पुरस्कार योजना" (लघुकथा विधा) - शिवगंज, सिरोही के गिरीश कुमार को। (उक्त सभी पुरस्कार 5-5 हजार रु. के हैं)

अकादमी के अध्यक्ष वेद व्यास ने बताया कि पुरस्कार आगामी दो माह में होने वाले "मीरा सम्मान समारोह" में प्रदान किए जाएंगे।

राजस्थान सामान्य ज्ञान-
***राजस्थान के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें***


* पाली नगर बांडी नदी के किनारे स्थित है। 

* माही नदी को " वागड़ की गंगा" कहते हैं। यह डूंगरपुर तथा बाँसवाड़ा के मध्य सीमा बनाती है।

* सोम नदी उदयपुर तथा डूंगरपुर के बीच सीमा बनाती है। 

* चर्मण्वती और कामधेनू चंबल नदी को कहते हैं। 

* रूपारेल नदी को वराह नदी भी कहा जाता है। 

* बनास नदी को वन की आशा भी कहते हैं। 

* हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के पाट को नाली कहते हैं। 

* घग्घर नदी को मृत नदी के नाम से भी जाना जाता है।

* चंबल नदी द्वारा निर्मित 100 किमी लंबा गार्ज (महाखड्ड) भैंसरोडगढ़ (चित्तौड़गढ़) से कोटा तक है। 

* डूंगरपुर जिले में बेणेश्वर त्रिवेणी संगम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ माही, सोम तथा जाखम नदियों का संगम होता है।

* चंबल नदी द्वारा बनाया गया चूलिया जल प्रपात भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) के निकट है।

* चंबल नदी अपेक्षाकृत कम वर्षा वाले भागों से अधिक वर्षा वाले भागों की ओर प्रवाहित होती है इसलिए इसमें वर्ष भर जल विद्यमान रहता है।

* चंबल नदी की अपवाह प्रणाली वृक्षाकार या पादपाकार है। 

* राज्य में सबसे अधिक सतही जल चंबल नदी में उपलब्ध है। इस मामले में दूसरे स्थान पर बनास तथा तीसरे पर माही नदी है। 

* राजस्थान की अपने पड़ोसी राज्यों के साथ सबसे बड़ी नदी सीमा मध्यप्रदेश के साथ है जो चंबल द्वारा बनाई गई है। यह 252 किमी लंबी है। 

* पार्वती नदी दो बार राजस्थान व मध्यप्रदेश के बीच सीमा बनाती है। 

* गंभीर नदी राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मध्य सीमा बनाती है। 

* सवाई माधोपुर जिले में रामेश्वर पर चंबल बनास तथा सीप नदी का त्रिवेणी संगम है।

* राज्य में प्रवाहित होने वाली सबसे लंबी नदी बनास है। इसकी लंबाई 512 किमी है।

* राज्य में सबसे बड़ा जलग्रहण क्षेत्र बनास नदी का है।

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