5/18/2015 09:20:00 am
0






भूकंप से संबंधित मुख्य तथ्य-
भूकम्प पृथ्वी के आन्तरिक भागों में विवर्तनिक घटनाओं एवं तापीय दशाओं में परिवर्तन से उत्पन्न होते हैं
प्रतिवर्ष पृथ्वी पर लगभग 80 हज़ार भूकम्प आते हैं।
प्लेट विवर्तन सिद्धांत के माध्यम से भूकम्पों के उत्पन्न होने की सम्पूर्ण प्रक्रिया की भली-भांति व्याख्या संभव हो सकी है।
धरातलीय सतह के जिस भाग पर सबसे पहले भूकम्पीय तरंगों को अंकित किया जाता है, उसे इपीसेन्टर कहते हैं।
भूकम्प का अभिलेखन सीस्मोग्राफ द्वारा करते हैं।
भूकम्प की तीव्रता एवं परिमाण का मापन रिक्टर स्केल द्वारा करते हैं।
रिक्टर स्केल की रचना चार्ल्स एफ. रिक्टर ने की थी।
रिक्टर स्केल पर अंकित अंक 0 से 9 के बीच होते हैं।
रिक्टर स्केल का मापक लघुगणकीय (लोग्रिथिमिक) होता है।
रिक्टर स्केल की रचना सन् 1935 में हुई थी।
रिक्टर स्केल पर 8 या इससे ऊपर के परिमाप के भूकम्प से सर्वनाश हो जाता है
भारत के भूकम्पीय इतिहास में 21वीं सदी में आया प्रथम विनाशकारी भूकम्प 'भुज का भूकम्प' था
भुज का भूकम्प 26 जनवरी 2001 को आया था।
भुज (गुजरात) भूकम्प का इपीसेन्टर भुज शहर के पास था।
भुज भूकम्प में अनुमानतः एक लाख लोग मारे गये थे
भुज के भूकम्प में अंजार एवं भचाऊ नामक दो कस्बे पूरी तरह नष्ट हो गये।
भुज के भूकम्प का रिक्टर पैमाने पर परिमाण 8.1 था।
भूकम्पों की तीव्रता एवं परिमाण मापन का एक अन्य मापक मरकेल स्केल है।
मरकेली स्केल पर 1 से 12 तक अंक अंकित होते हैं।
मरकेली स्केल पर 'एक'  इकाई पर निर्युक्त ऊर्जा 3×1012 अर्ग होती है
सर्वनाश करने वाले भूकम्प में निर्मुक्त ऊर्जा लगभग 1025 अर्ग होती है
भूकम्प उत्पत्ति के केन्द्र को उसका फोकस कहते हैं
फोकस के ठीक ऊपर स्थित बिन्दु को इपीसेन्टर कहते हैं।
भूकम्प से प्रभावित क्षेत्रों में फोकस से सर्वाधिक करीब इपीसेन्टर बिन्दु होता है
भूकम्प के इपीसेन्टर बिन्दु पर तरंगों की तीव्रता सर्वाधिक होती है
फोकस सदा सदैव धरातलीय सतह के नीचे पाया जाता है।
अत्यधिक गहरे भूकम्पों के फोकस लगभग 700 किमी गहराई पर होते हैं।
सामान्य भूकम्प के फोकस साधारणतः  50 किमी. तक गहराई पर होते हैं
प्लूटॉनिक भूकम्पों के फोकस 250 किमी. से 700 किमी. तक गहराई पर पाये जाते हैं
फोकस से उत्पन्न होकर भूकम्पीय तरंगें चारों ओर अग्रसर होती हैं।
हिमालय क्षेत्र के प्रमुख भूकम्पों के फोकस लगभग 20 से 30 किमी गहराई तक पाए जाते हैं।
विश्व भूकम्पों की 3 मेखलायें पाई जाती हैं
विश्व भूकम्पों की तीनों भूकम्प मेखलाओं के नाम है - परिप्रशांत मेखला, मध्य महाद्वीपीय मेखला तथा मध्य अटलांटिक मेखला
सर्वाधिक विनाशकारी भूकम्प अभिसारी प्लेट किनारों के सहारे पाए जाते हैं।
भूकम्पीय तरंगें 3 प्रकार की होती हैं- P, S एवं L  तरंग
P तरंग का अर्थ प्राथमिक तरंग (Primary waves) है।
P तरंग ध्वनि की लहर के समान तरंगें होती हैं।
P- भूकम्पीय तरंगों को 'अनुदैर्ध्य तरंग' भी कहा जाता है क्योंकि इन तरंगों के कम्पनों की दिशा तरंग की गति की दिशा में ही होती है।
S तरंग का अर्थ द्वितीयक तरंग (Secondary waves) है।
L तरंग का अर्थ अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudnal waves) है।
L  तरंग केवल सतह पर गमन करने वाली भूकम्पीय तरंग है
P तरंग सर्वाधिक वेगवान भूकम्पीय लहर होती है। इनकी औसत गति 8  किमी/सेकंड होती है।
भूकम्पीय S-तरंग की गति जल तरंगों के समान होती है।
S-  भूकम्पीय तरंगों के कम्पनों की दिशा तरंग की गति की दिशा के समकोण पर होती है। अतः इन तरंगों को 'अनुप्रस्थ तरंग' भी कहते हैं।
भूकम्पीय L  तरंग की गति सबसे कम होती है। इन तरंगों की औसत गति 3  किमी/सेकंड होती है
भूकम्पीय L  तरंग सर्वाधिक भयंकर होती है।
P तरंग पृथ्वी के ठोस भाग में अत्यधिक गति से प्रवाहित होने वाली तरंग है।
S-तरंगें तरल भाग (सागरीय भाग) में लुप्त हो जाती हैं।
L - तरंगों को सर्वाधिक लम्बा मार्ग तय करना पड़ता है
L - तरंगों की विनाशलीला जल-थल दोनों जगह होती है।
P-तरंगें सबसे पहले धरातल पर पहुंचती हैं
P- भूकम्पीय तरंगें पृथ्वी के प्रत्येक भाग में गमन करती हैं।
P- भूकम्पीय तरंगों को 'अनुदैर्ध्य तरंग' भी कहा जाता है
इपीसेन्टर से 120° कोण पर S- तरंगें लुप्त हो जाती हैं।
भारत मध्य महाद्वीपीय भूकम्प पेटी में पड़ता है।
विश्व के लगभग 21 प्रतिशत भूकम्प मध्य महाद्वीपीय पेटी में आते हैं
क्षति जोखिम के परिमाण के आधार पर भारत को 5 भूकम्प जोन (क्षेत्रों) में बांटा गया है
इन क्षेत्रों में अत्यधिक क्षति जोखिम वाला जोन 'पंचम जोन' है
पंचम ज़ोन में प्रमुखतः उत्तर व पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय भू-भाग से लगे क्षेत्र एवं  कच्छ क्षेत्र के भू-भाग शामिल हैं।
गंगा का मैदान प्रमुखतः प्रथम भूकम्पीय ज़ोन में आता है।
हिमालय क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा भूकम्प क्षेत्र है।
हिमालय क्षेत्र के भूकम्प एशियन एवं भारतीय प्लेटों के टकराव के प्रतिफल हैं।
जनहानि की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा भूकम्प सन् 1737 का कोलकाता भूकम्प था।
सन् 1737 के कोलकाता के भूकम्प में लगभग 3 लाख लोग मारे गये थे।
भारत में अब तक सर्वाधिक तीव्रता का भूकम्प सन् 1887 में शिलांग में रिकॉर्ड किया गया है
सन् 1887 के शिलांग भूकम्प की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 8.7 थी
भारत में बीसवीं शताब्दी में सर्वाधिक तीव्रता का भूकम्प 1905 में कांगड़ा घाटी में आया था।
कांगड़ा घाटी भूकम्प की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8.6 मापी गयी थी।
भूकम्पीय तरंगों की गति तथा भ्रमण पथ के आधार पर पृथ्वी के आन्तरिक भाग के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
एक ही स्वभाव वाले ठोस धरातलीय भाग में भूकम्पीय तरंगों की प्रकृति सीधी होती है।
पृथ्वी के भीतर तरंगें वक्राकार मार्ग का अनुसरण करती हैं, इससे पता चलता है कि पृथ्वी के भीतर घनत्व में भिन्नता है।
भूकम्पीय प्रमाणों के आधार पर पता चलता है कि पृथ्वी का क्रोड तरल अवस्था में है।
पृथ्वी का क्रोड लोहा व  निकल धातुओं से बना है।
धरातल से अत्यधिक गहराई पर उत्पन्न होने वाले भूकम्पों को प्लूटॉनिक भूकम्प कहते हैं।
जब भूकम्प का उद्भव प्राकृतिक कारणों से होता है, तो उसे प्राकृतिक भूकम्प कहते हैं।
जब भूकम्प के मूल सागरीय भाग के भूगर्भ में होते हैं, तो उन्हें सागरीय भूकम्प कहते हैं।
सागरीय भूकम्पों द्वारा उत्पन्न होने वाली विशाल विनाशकारी समुद्री लहरों को सुनामी कहा जाता है।
महासागरीय भूकम्प से उत्पन्न 'सुनामी' शब्द जापानी भाषा का शब्द है।
प्रमुख भूकम्पीय व ज्वालामुखीय मेखला के कारण प्रशांत महासागरीय तट पर सुनामी का सर्वाधिक ज़ोर रहता है।
अटलांटिक महासागरीय तट पर सुनामी का सबसे कम ज़ोर रहता है।
26 दिसम्बर 2004 में आए विनाशकारी भूकम्प व सुनामी का केन्द्र एसेह प्रांत (इण्डोनशिया) था।
सुनामी की पूर्व सूचना हेतु स्थापित 'प्रशान्त सुनामी चेतावनी केन्द्र' हवाई द्वीप पर स्थित है
भारत ने अपना प्रथम सुनामी चेतावनी केन्द्र हैदराबाद में स्थापित किया था, जिसने 1 अक्तूबर 2007 से कार्य करना प्रारम्भ किया। यह सुनामी चेतावनी केन्द्र हिन्द महासागर में उत्पन्न होने वाले सुनामी की आशंका का  30 मिनट की अवधि के अन्दर संकेत देगा।
भूकम्प विज्ञानियों द्वारा विश्व में 1961 से 1967 के मध्य की अवधि में आये भूकम्प के आधार पर भूकम्प वितरण मानचित्र तैयार किया है।
भारतीय मौसम विभाग भूकम्प के परिमाण के मापन के लिए बॉडी तरंग विधि का प्रयोग करता है।
विश्व में अत्यधिक भूकम्प वाला देश जापान है।
अत्यधिक भूकम्पों के कारण जापान में मकान लकड़ी व दफ्ती के बनाए  जाते हैं।
जापान में प्रतिवर्ष लगभग 1500 भूकम्प के झटके महसूस किये जाते हैं
विश्व के लगभग दो तिहाई भूकम्प प्रशांत महासागर तटीय क्षेत्र में आते हैं।
भारत में भूकम्पलेखी यंत्र दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, पुणे एवं देहरादून आदि प्रमुख शहरों में लगे हैं।
भूकम्पीय तरंगों द्वारा उत्पन्न समान आघात क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा को  आइसोसिस्मल रेखा कहते हैं।

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

स्वागतं आपका.... Welcome here.

राजस्थान के प्रामाणिक ज्ञान की एकमात्र वेब पत्रिका पर आपका स्वागत है।
"राजस्थान की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समसामयिक दृश्यों के विविध रंगों से युक्त प्रामाणिक एवं मूलभूत जानकारियों की एकमात्र वेब पत्रिका"

"विद्यार्थियों के उपयोग हेतु राजस्थान से संबंधित प्रामाणिक तथ्यों को हिंदी माध्यम से देने के लिए किया गया यह प्रथम विनम्र प्रयास है।"

राजस्थान सम्बन्धी प्रामाणिक ज्ञान को साझा करने के इस प्रयास को आप सब पाठकों का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। कृपया आगे भी सहयोग देते रहे। आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है। कृपया प्रतिक्रिया अवश्य दें। धन्यवाद।

विषय सूची

राजस्थान सामान्य ज्ञान (331) Rajasthan GK (295) GK (189) सामान्य ज्ञान (139) क्विज (130) Quiz (111) राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र (95) Rajasthan History (79) समसामयिक घटनाचक्र (75) राजस्थान की योजनाएँ (52) समसामयिकी (44) General Knowledge (43) राजस्थान का इतिहास (42) Science GK (38) विज्ञान क्विज (36) योजनाएँ (35) Science Quiz (34) सामान्य विज्ञान (30) Geography of Rajasthan (25) Question and Answer (20) राजस्थान का भूगोल (19) राजस्थान के मेले (19) राजस्थान के किले (18) Forts of Rajasthan (17) Welfare plans of Rajasthan (16) राजस्थान के दर्शनीय स्थल (15) राजस्थानी साहित्य (15) प्रतिदिन क्विज (14) राजस्थान के लोक नाट्य (14) राजस्थान की कला (13) राजस्थान के प्राचीन मंदिर (13) राजस्थान के मंदिर (12) राजस्थानी भाषा (11) राजस्थान के तीर्थ स्थल (10) राजस्थान के लोक वाद्य (9) लोक देवता (9) Folk Musical Instruments of Rajasthan (8) Minerals of Rajasthan (8) राजस्थान के अनुसन्धान केंद्र (8) राजस्थान के प्रमुख पर्व एवं उत्सव (8) राजस्थान के हस्तशिल्प (8) GK राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र (7) राजस्थान की चित्रकला (7) विज्ञान सामान्य ज्ञान (7) Tourism (6) अनुसंधान केन्द्र (6) राजस्थान के कलाकार (6) राजस्थान के खिलाड़ी (6) राजस्थान के लोक नृत्य (6) राजस्थान सरकार मंत्रिमंडल (6) होली है (6) Fairs of Rajasthan (5) Geography of India (5) राजस्थान की जनजातियां (5) राजस्थान की नदियाँ (5) राजस्थान की स्थापत्य कला (5) राजस्थान के ऐतिहासिक स्थल (5) राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार (5) Rivers of Rajasthan (4) राजस्थान में प्रजामण्डल आन्दोलन (4) राजस्थान रत्न पुरस्कार (4) राजस्थानी साहित्य की प्रमुख रचनाएं (4) forest of Rajasthan (3) अनुप्रति योजना (3) राजस्थान की जनसंख्या (3) राजस्थान के राज्यपाल (3) राजस्थान के संग्रहालय (3) राजस्थान सरकार के उपक्रम (3) राजस्थान साहित्य अकादमी (3) Handicrafts of Rajasthan (2) Metalic Minerals of Rajasthan (2) Ministers of Govt of India (2) Tourist Circuits (2) जिलानुसार झील व बाँध (2) जिलावार तहसीलों की सूची (2) भूकंप (2) राजस्थान की प्रसिद्ध दरगाहें (2) राजस्थान की मीनाकारी (2) राजस्थान की हवेलियां (2) राजस्थान के आभूषण (2) राजस्थान के जिले (2) राजस्थान के जैन तीर्थ (2) राजस्थान के महल (2) राजस्थान के महोत्सव (2) राजस्थान के रीति-रिवाज (2) राजस्थान के लोक सभा सदस्य (2) राजस्थान मदरसा बोर्ड (2) राजस्थान में कृषि (2) राजस्थान में पशुधन (2) राजस्थान में प्राचीन सभ्यताएँ (2) राजस्‍व मण्‍डल राजस्‍थान (2) राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार (2) Livestock in Rajasthan (1) Major Dialects of Rajasthani (1) folk art (1) अपराजिता (1) क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र (1) तलवारों से गैर (1) बिजौलिया किसान आंदोलन (1) बूंदी का किसान आंदोलन (1) बैराठ की सभ्यता (1) भारत की मृदा (1) भारत की स्थिति (1) भारत के उपग्रह (1) भारत के कमांडर-इन-चीफ (1) भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम (1) भारतीय मूर्तिकला (1) मीणा आन्दोलन (1) मीणाओं के आराध्य भूरिया बाबा (1) मौर्य तथा प्राचीन राजस्थान (1) रणकपुर (1) राजकीय संग्रहालय अजमेर (1) राजकीय संग्रहालय आहाड़-उदयपुर (1) राजपूताना में 1857 की क्रांति (1) राजपूतों की उत्पत्ति के मत (1) राजसमन्द का राजप्रशस्ति शिलालेख (1) राजस्थान का एकीकरण (1) राजस्थान का खजुराहो जगत का अंबिका मंदिर (1) राजस्थान का चौहान वंश (1) राजस्थान का जलियावाला बाग हत्याकांड (1) राजस्थान का नामकरण (1) राजस्थान का प्रथम मसाला पार्क (1) राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण (1) राजस्थान का राठौड़ वंश- (1) राजस्थान का वैभवशाली मूर्तिशिल्प (1) राजस्थान की खारे पानी की झीले (1) राजस्थान की प्रसिद्ध बावड़ियां (1) राजस्थान की मृदा (1) राजस्थान की वन सम्पदा (1) राजस्थान की वेशभूषा (1) राजस्थान की सीमा (1) राजस्थान की स्थिति एवं विस्तार (1) राजस्थान के अधात्विक खनिज (1) राजस्थान के उद्योग (1) राजस्थान के कला एवं संगीत संस्थान (1) राजस्थान के चित्र संग्रहालय (1) राजस्थान के तारागढ़ किले (1) राजस्थान के धरातलीय प्रदेश (1) राजस्थान के धात्विक खनिज (1) राजस्थान के प्रमुख व्यक्तियों के उपनाम (1) राजस्थान के प्रमुख शिलालेख (1) राजस्थान के प्रसिद्ध साके एवं जौहर (1) राजस्थान के लोक संत (1) राजस्थान के लोकगीत (1) राजस्थान के विधानसभाध्यक्ष (1) राजस्थान के विविध रंग का रिकार्ड (1) राजस्थान के संभाग (1) राजस्थान के संस्थान (1) राजस्थान निवेश संवर्धन ब्यूरो (1) राजस्थान बजट 2011-12 (1) राजस्थान बार काउंसिल (1) राजस्थान में गौ-वंश (1) राजस्थान में पंचायतीराज (1) राजस्थान में परम्परागत जल प्रबन्धन (1) राजस्थान में प्रथम (1) राजस्थान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक (1) राजस्थान में वर्षा (1) राजस्थान में सडक (1) राजस्थान सुनवाई का अधिकार (1) राजस्थानी की प्रमुख बोलियां (1) राजस्थानी भाषा का वार्ता साहित्य (1) राजस्थानी साहित्य का काल विभाजन- (1) राजा अजीतसिंह (1) राज्य की जलवायु (1) राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (1) राज्य महिला आयोग (1) राज्य वित्त आयोग (1) राज्य सभा सदस्य (1) रावण का श्राद्ध (1) राष्ट्रीय ऊष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (1) राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (1) राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार (1) राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (1) राष्ट्रीय हस्त शिल्प पुरस्कार (1) लैला मजनूं की मज़ार का मेला (1) विजय सिंह पथिक (1) संसदीय सचिव (1) हेरिटेज वॉक एट फोर्ट कुम्भलगढ़ (1)
All rights reserve to Shriji Info Service.. Powered by Blogger.

Disclaimer:

This Blog is purely informatory in nature and does not take responsibility for errors or content posted in this blog. If you found anything inappropriate or illegal, Please tell administrator. That Post would be deleted.

Sponsors

If you want to sponsor us for better Educational work. You are always welcome. Your donation will be used for better education of poor school children.



Please Contact us at- rajasthanstudy65@gmail.com

Advertise

Advertise here for the sake of better Education in my School situated in Rajasthan. This website has a very good numbers of audience. This website is viewed by thousands of people specially youngsters everyday. So you can get a nice audience for your product or service. You can contact us for advertisement of your business or any other kind of work which you want to explore to our audience. If you want to come along with us, then contact us. You are always welcome..



Contact us at rajasthanstudy65@gmail.com