सवाई माधोपुर
शहर
के
निकट
स्थित
रणथम्भौर
दुर्ग
अरावली
पर्वत
की
विषम
आकृति
वाली
सात
पहाडि़यों
से
घिरा
हुआ
है।
यह
किला
यद्यपि
एक
ऊँचे
शिखर
पर
स्थित
है,
तथापि
समीप
जाने
पर
ही
दिखाई
देता
है।
यह
दुर्ग
चारों
ओर
से
घने
जंगलों
से
घिरा
हुआ
है
तथा
इसकी
किलेबन्दी
काफी
सुदृढ़
है।
इसलिए
अबुल
फ़ज़ल
ने
इसे
बख्तरबंद
किला
कहा
है।
ऐसी
मान्यता
है
कि
इसका
निर्माण
आठवीं
शताब्दी
में
चौहान
शासकों
ने
करवाया
था।
हम्मीर
देव
चौहान
की
आन-बान
का
प्रतीक
रणथम्भौर
दुर्ग
पर
अलाउद्दीन
खिलजी
ने
1301
में
ऐतिहासिक
आक्रमण
किया
था।
हम्मीर
विश्वासघात
के
परिणामस्वरूप
लड़ता
हुआ
वीरगति
को
प्राप्त
हुआ
तथा
उसकी
पत्नी
रंगादेवी
ने
जौहर
कर
लिया।
यह
जौहर
राजस्थान
के
इतिहास
का प्रथम
जौहर
माना
जाता
है।
रणथम्भौर
किले
में
बने
हम्मीर
महल,
हम्मीर
की
कचहरी,
सुपारी
महल,
बादल
महल,
बत्तीस
खंभों
की
छतरी,
जैन
मंदिर
तथा
त्रिनेत्र
गणेश
मंदिर
उल्लेखनीय
हैं।
गणेश
मन्दिर
की
विशेष मान्यता
है।
योजना का नाम- आस्था योजना प्रारंभ होने का वर्ष- 2004-05 लाभान्वित वर्ग- ऐसे परिवार जिनमें दो या दो से अधिक सदस्य ''40 प्रतिशत से अधिक विशेष योग्यजन (निःशक्त जन )'' है। योजना के तहत देय लाभ- आस्था योजना के अन्तर्गत आस्था कार्डधारी परिवार को बी.पी.एल. के समान सुविधाएं यथा- निःशुल्क चिकित्सा, राशन सामग्री, इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निशुल्क आवास इत्यादि। पात्रता की शर्तें - 1. ऐसे परिवार जिनमें दो या दो से अधिक सदस्य 40 प्रतिशत से अधिक विशेष योग्यजन होने पर, उन परिवारों को आस्था कार्ड जारी किये जाते है। 2. परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख से अधिक नहीं है। वर्तमान में आस्था कार्डधारी परिवारों को राज्य सरकार के सभी संबंधित विभागों द्वारा BPL के लिये चलाई जा रही योजन...

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