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राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र-
बाड़मेर में होगी कोल गैस से विद्युत उत्पादित

राज्य में कोल गैसिफिकेशन से विद्युत उत्पादन की तैयारी

उदयपुर स्थित राजस्थान राज्य माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) ओपन माइनिंग के साथ ही अब राज्य में पहली बार अण्डर ग्राउण्ड कोल गैसिफिकेशन से विद्युत उत्पादन की तैयारी में है। राज्य में इस प्रकार का पहला संयंत्र बाड़मेर में शीघ्र स्थापित किया जाएगा।
राजस्थान में कोयला कम मात्रा में उपलब्ध है तथा यह लिग्नाइट कोयला भी भूमि में 30 मीटर नीचे है। कोयले के खुदाई के बाद जब यह 50-60 मीटर नीचे तक पहुँच जाता है तो लागत बढ़ जाने पर खनन अनार्थिक होने लगता है। इसी कारण RSMML ने बाड़मेर में 175 से 200 मीटर नीचे तक फैले भूमिगत लिग्नाइट को गैस में रूपांतरित कर विद्युत उत्पादन की योजना तैयार की है। बाड़मेर में इस विधि से बिजली तैयार करने का संयंत्र स्थापित करने में 500 से 600 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

क्या है यह विधि-

इस विधि से विद्युत तैयार करने के लिए जमीन में दो गहरे होल (इंजेक्शन होल व प्रॉडक्शन होल) किए जाएंगे। इनमें से इंजेक्शन होल में कंप्रेसर से हवा डाली जाएगी। हवा के सम्पर्क में आते ही लिग्नाइट जलने लगेगा और इससे गर्म गैस बनेगी। यह गैस प्रॉडक्शन होल से बाहर निकलेगी, जिसे प्रो-बॉयलर में ले जाया जाएगा जिससे विद्युत जनरेटर चला कर बिजली बनाई जाएगी।

भारत सरकार के उपक्रम नवेली लिग्नाइट कार्पोरेशन की ओर से बाड़मेर के सांचोर बेसिन में किए गए सर्वे के मुताबिक उस क्षेत्र में 253 मिलियन टन लिग्नाइट है जिसका समुचित दोहन इस विधि से किया जाएगा।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री दौलतराम सारण का निधन

पूर्व केन्द्रीय आवास और शहरी विकास मंत्री और कांग्रेसी नेता दौलत राम सारण का निधन हो गया। वे 87 साल के थे। सारण का जन्म 13 जनवरी 1924 को चूरू के ढाणी गांव में हुआ था। वे कांग्रेस पार्टी से लोकसभा में सांसद रहे थे। सारण पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हें हाल ही में इलाज के लिए मानसरोवर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सारण ने गांधीजी के आह्वान पर आजादी के आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। वे 1945 से 1948 तक बीकानेर राज्य प्रजा परिषद् की प्रतिनिधि सभा के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने बीकानेर क्षेत्र में किसानों की समस्याओं एवं उनकी जागृति के लिए महत्वपूर्ण काम किए। वे गरीबों और किसानों में काफी लोकप्रिय थे। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वे वर्ष 1957, 1962 तथा वर्ष 1967 में लगातार तीन बार डूंगरगढ़ से राजस्थान विधानसभा के सदस्य चुने गए। वे वर्ष 1957 से 1966 तक राजस्थान सरकार में कृषि, पशुपालन, सहकारिता, पंचायतीराज, स्थानीय निकाय व सिंचाई विभाग में मंत्री रहे। वर्ष 1977 एवं 1980 में वे चूरू लोकसभा क्षेत्र से क्रमश: छठी तथा सातवीं लोकसभा के सदस्य रहे। वर्ष 1989 में वे नौवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित हुए और चंद्रशेखर के प्रधानमंत्रित्व काल में केंद्रीय नगरीय विकास मंत्री रहे। वे चूरू क्षेत्र से केंद्र में केबिनेट मंत्री रहने वाले एकमात्र नेता रहे हैं।

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