Skip to main content

राजस्थान सामान्य ज्ञान-
राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र

पश्चिम क्षेत्र सीनियर पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में राजस्थान चैम्पियन

महाराष्ट्र के नागपुर में दिनांक 12 जून को सम्पन्न हुई पश्चिम क्षेत्र राष्ट्रीय सीनियर पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में राजस्थान टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरूष वर्ग में 2 स्वर्ण, 1 रजत व 2 कांस्य पदक जीते जबकि महिला वर्ग में 1 स्वर्ण व एक कांस्य पदक जीतकर टीम चैम्पियनशिप पर कब्जा जमाया। महाराष्ट्र टीम उप-विजेता रही। राजस्थान के पदक विजेता इस प्रकार हैं-

स्वर्ण पदक-
1. 66 किलोग्राम भारवर्ग- समीर खान
2. 74 किलोग्राम भारवर्ग- पुलिस के भूपेन्द्र व्यास
3. 72 किलोग्राम भारवर्ग महिला- इंदिरा भण्डारी

रजत पदक-
105 किलोग्राम भारवर्ग- शिवनारायण व्यास

कांस्य पदक-
1. 93 किलो भार- मनोहरसिंह
2. 105 किलो भार- प्रेमरतन पुरोहित
3. 47 किलोग्राम भार महिला वर्ग- रक्षा व्यास

राष्ट्रीय सब-जूनियर पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता-
105 किलोग्राम भार वर्ग में शिवनारायण व्यास स्वर्ण पदक जीत कर राष्ट्रीय चैम्पियन बने।

किशनगढ़ में बनेगा मार्बल हैंडीक्राफ्ट मार्केट

मार्बल हैंडीक्राफ्ट मार्केट स्थापित कर श्रमिकों के विकास करने के लिए राज्य सरकार ने किशनगढ़ में मार्बल हैंडीक्राफ्ट क्लस्टर बनाने की योजना तैयार कर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी है।
किशनगढ़ का मार्बल हैंडीक्राफ्ट देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ करीब 60 से अधिक मार्बल हैंडीक्राफ्ट निर्माण इकाइयाँ हैं जिनमें लगभग 500 श्रमिक काम करते हैं। यहां के मार्बल से बनी मूर्तियां, शिलालेख, खिलौने, फर्नीचर, शोपीस सहित अन्य उत्पादों की अत्यधिक मांग रहती है, किंतु मार्बल पर महीन नक्काशी कर उत्कृष्ट व आकर्षक कलाकृतियां उकेरने वाले श्रमिकों को इनके उत्पादों की सही कीमत नहीं मिल पाती है।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए सरकार देगी 20 हजार रुपए

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वर्ष 2011-12 की बजट घोषणा के अनुसार कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को सरकार अब 20 हजार की आर्थिक सहायता देगी। यह सहायता राजस्थान के उन मूल निवासियों को ही मिलेगी, जो स्थाई रूप से यहीं निवास कर रहे हैं। कैलाश मान सरोवर यात्रा करने वाले श्रद्धालु इस आर्थिक सहायता के लिए अपने क्षेत्र के उपखंड अधिकारी एवं देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त से संपर्क कर सकते हैं। इस संबंध में देवस्थान विभाग के आयुक्त ने सभी जिला कलेक्टर को निर्देश जारी किए हैं।

सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रहा राजस्थान चौथे स्थान पर-

बंगलुरू में दिनांक 14 जून को संपन्न हुई सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में राजस्थान कुल तीन स्वर्ण, तीन रजत तथा दो कांस्य पदक जीत कर चौथे स्थान पर रहा जबकि केरल पुरूष वर्ग में चार स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य तथा महिला वर्ग में नौ स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक जीत कर ओवरआल चैंपियन बना। राजस्थान की ओर से सबसे पहले 11 जून को मंजूबाला और खेताराम के क्रमश: हैमर थ्रो और 10000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किए जबकि पुरुष डिस्कस थ्रो में विकास पूनिया ने एक कांस्य पदक जीता। दिनांक 11 जून से प्रारंभ होकर 14 जून तक चली इस सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार आगाज करने वाले राजस्थान ने टूर्नामेंट के दूसरे दिन भी अपनी धाक कायम रखते हुए एक स्वर्ण, दो रजत व एक कांस्य पदक जीता। इस दिन हाल ही में चीन में हुई एशियन ग्रांप्री में रजत पदक की हैट्रिक जमाने वाले जोधपुर के घमंडाराम ने 1500 मीटर ट्रैक पर स्वर्णिम दौड़ लगाई। उन्होंने इस दौड़ में 3 मिनट 48.12 सैकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता। घमंडा ने फरवरी में झारखंड में हुए नेशनल गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली कृष्णा पूनिया अपने पहले अवसर के बाद मुकाबले से हट गईं, हालांकि पहले अवसर पर ही उन्होंने 55.45 मीटर डिस्कस फेंक दिया और रजत पदक जीता।
भरतपुर के राहुल कुमार ने डेकाथलॉन स्पर्धा में कुल 6875 अंक हासिल करके रजत जीता। कुछ दिनों पूर्व की चोट से उबर रही कृष्णा पूनिया से भी स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा। डिस्कस थ्रो की इस स्पर्धा में चूरू की प्रवीण कुमारी (49.21) ने कांस्य पदक जीता।
अंतिम दिन 14 जून को घमंडाराम इस राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 800 मी. की दौड़ में रजत पदक ही जीत सके।

राजस्थान की उपलब्धि पर एक नजर-

स्वर्ण पदक-
1. मंजूबाला - हैमर थ्रो
2. खेताराम - दस हजार मी. दौड़
3. घमंडाराम - 1500 मी. दौड़

रजत पदक-
1. घमंडाराम - 800 मी. दौड़
2. राहुल कुमार - डेकाथलॉन
3. कृष्णा पूनिया - डिस्कस थ्रो

काँस्य पदक -
1. विकास पूनिया - डिस्कस थ्रो
2. प्रवीण कुमारी - डिस्कस थ्रो

Comments

Popular posts from this blog

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

Main breeds of Indian horses - जानिये भारतीय घोड़ों की मुख्य नस्लें

Main breeds of Indian horses - भारतीय अश्वों की मुख्य नस्लें 1. मारवाड़ी (मालानी) घोड़े - मारवाड़ी घोड़े का इस्तेमाल राजाओं के ज़माने में युद्ध के लिए किया जाता था। इसलिए कहा जाता है कि इन घोड़ों के शरीर में राजघराने का लहू दौड़ता है। मालानी नस्ल के घोड़े अपनी श्रेष्ठ गुणवता के कारण देश-विदेश मे पहचान बना चुके हैं और इनकी खरीद-फरोख्त के लिए लोग बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा मेले में पहुँचते है। पोलो एवं रेसकोर्स के लिए इन घोड़ों की माँग लगातार बढ़ रही है। दौड़ते समय मालानी नस्ल के घोड़े के पिछले पैर, अपने पैरों की तुलना में, अधिक गतिशील होने के कारण अगले पैरों से टक्कर मारते हैं, जो इसकी चाल की खास पहचान है। इनके ऊँचे कान आपस में टकराने पर इनका आकर्षण बढ़ जाता हैं और ये घोड़े कानों के दोनों सिरों से सिक्का तक पकड़ लेते हैं। चाल व गति में बेमिसाल इन घोड़ों की सुन्दरता, ऊँचा कद, मजबूत कद-काठी देखते ही बनती हैं। राजस्थान में  घोड़े जोधपुर, बाड़मेर, झालावाड़, राजसमन्द, उदयपुर, पाली एवं उदयपुर आदि स्थानों में पाये जाते है। जन्म स्थान :   इस नस्ल के घोड़ों का...