जी हाँ। जब से मुझे ये बात पता चली तब से ही गहरे सदमे में हूँ। एक प्रयास शुरू किया था पूरी मेहनत के साथ अच्छी और सारगर्भित वो सामग्री उपलब्ध कराने का जो इंटरनेट पर राजस्थान के बारे में उपलब्ध नहीं थी। एक गहरा धक्का उस समय लगा जब एक A Way For Sure Success... के नाम से झाँसा देने वाली और RPSC की प्रतियोगिताओं की तैयारी का दावा करने वाली तथाकथित PORTAL वेबसाइट ने एक ही दिन में मेरे ब्लॉग के सौ से अधिक पोस्ट ज्यों के त्यों कॉपी करके अपने नाम से प्रकाशित कर दिए। इतना गहरा सदमा लगने के बावजूद मैंने बेमन से लिखना जारी रखा लेकिन अब हिम्मत जवाब दे रही है। सोच रहा हूँ कि अब लिखना छोड़ दूँ ! दोस्तों एक पोस्ट को तैयार करने में दो से तीन घंटे लगते हैं। सामग्री जुटाने के लिए कई संदर्भ देखने पड़ते हैं। कहीं अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद भी करना पड़ता है। एक और बात कि मैं डेस्कटॉप से नहीं लिख रहा हूँ अपितु मोबाइल से ही टाइप कर रहा हूँ। बड़ी मेहनत लग रही है। लेकिन उन भाईसाहब ने तो एक ही दिन में मेरी मेहनत का सारा माल उड़ा कर अपनी वेबसाइट बना डाली। तो अब अलविदा कहने का वक्त आ गया है। अब और पोस्ट नहीं??
राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास) राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...
दोस्तों सदमें से उबर कर मैंने फिर लिखना प्रारंभ कर दिया है। आपके सहयोग व स्नेह की अपेक्षा है।
ReplyDeletehello Friend, RPSCPORTAL is a Non Profit Knowledge Based Website.. we are not intrested to heart ur feelings.. but we want to explore all the knowledge to our official website.. if u want to make money with us then ur welcome neither our member can take ur useful contents to publish in all our the world...for more informaiton please visit www.rpscportal.com or contact us at rpscportal@hotmail.com
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