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Current Affairs- समसामयिक घटनाचक्र

ऊर्जा बचत में चमका राजस्थान, मिले चार राष्ट्रीय पुरस्कार
नई दिल्ली। ऊर्जा संरक्षण के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए राजस्थान को चार राष्ट्रीय पुरस्कार दिए गए। यहां आयोजित राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार समारोह-2016 में राजस्थान की चार विभिन्न संस्थाओं/विभागों को अलग-अलग क्षेत्रों में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण अवार्ड से नवाजा गया। केन्द्रीय खान एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने राजस्थान में स्ट्रीट लाइटों के माध्यम से ऊर्जा बचत के लिए स्थानीय निकाय को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। यह पुरस्कार स्वायत्त विभाग के प्रमुख सचिव डॉं. मंजीत सिंह ने ग्रहण किया।
 इसी तरह राजस्थान के 12 जिलों में वर्ष 2015-16 के दौरान रिकार्ड 48 लाख 28 हजार 90 पुराने बल्बों को एलईडी बल्बों से बदलकर 138 मिलियन यूनिट ऊर्जा की बचत की गई। इसके अलावा विद्युत वितरण में नवीन तकनीक अपनाकर विद्युत संरक्षण के लिए जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार निगम के अधीक्षण अभियंता (वाणिज्य) के.के.पुरोहित ने ग्रहण किया। 
भीलवाड़ा स्थित हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड को भी खान क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार से नवाजा गया। यह पुरस्कार इकाई के महाप्रबंधक बाला सुब्रमणियम ने ग्रहण किया। हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड की भीलवाड़ा जिला स्थित इकाई द्वारा जिंक की शोधन-परिशोधन प्रक्रिया में ऊर्जा बचत को बढ़ावा दिया गया है। कंपनी ने प्रथम वर्ष में 222.17 लाख रुपये की बिजली बचाकर रिकार्ड स्थापित किया है। समारोह में राजस्थान के जयपुर स्थित जयमहल होटल को होटल श्रेणी में ऊर्जा बचत का रिकार्ड स्थापित करने के लिए उत्कृष्ठता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

डिजिटल पेमेन्ट प्रोत्साहन योजना 

पिछले ढाई वर्ष में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। एक हजार और पाँच सौ रूपये के नोट को बंद करने संबंधित निर्णय भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1000 और 500 के नोट के ढेर ने देश के अंर्थतंत्र में अनेक बुराइयों को आश्रय दिया। भविष्य में भी देश फिर से एक बार भ्रष्टाचार एवं काले धन का शिकार न हो, इसलिए भविष्यलक्षी स्थाई योजनाओं को लागू करना बहुत ही आवश्यक है।

आज तकनीक (technology) के  माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग , ई-वॉलेट, डेबिट कार्ड के ज़रिए डिजिटल बिज़नेस ट्रांसज़ेक्शन संभव है। ऐसे कई वैकल्पिक साधनों के ज़रिए डिजिटल से डिजी-धन (digi-dhan)की  दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी। अफ्रीका में केन्या  जैसे विकासशील देश न  ऐसा करके दिखाया है। भारत जैसा देश जिसकी 65% जनसंख्या 35 वर्ष की आयु से कम है, भारत जो पूरी दुनिया में आईटी कौशल के लिए जाना जाता है, भारत जिसके करोड़ों-करोड़ अनपढ़ और गरीब व्यक्ति ईवीएम से वोट देते हैं, ऐसी क्षमता वाले देश के नागरिक निश्चित ही मौजूदा अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलने में सक्षम हैं। जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। 

इस सपने को पूरा करने के लिए, ई-पेमेंट (e-payment) को बढ़ावा देना, ई-वॉलेट (e-wallet) और मोबाइल बैंकिग के प्रचलन को बढ़ाना, डिजिटल (digital ) से समाज को डिजी-धन (digi-dhan) की ओर ले जाना अपरिहार्य हो गया है। 1000 और 500 रू. के नोटों के विमुद्रीकरण के पश्चात डिजिटल पेमेन्ट्स में काफी वृद्धि हुई है। यह आवश्यक है कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का प्रचलन समाज के हर वर्ग में फैले। अतः नीति आयोग स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) से अनुरोध किया जाए कि वह डिजीटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शीघ्र लागू करें। उल्लेखनीय है कि NPCI एक गैर-लाभकारी कम्पनी है जो भारत को कैशलेस समाज की ओर ले जाने के लिए प्रयासरत है।

प्रोत्साहन योजना के मुख्य बिन्दु: 
वो उपभोक्ता (Consumers) और विक्रेता (Merchants) जो इलेक्टॉनिक पेमेंट (Electronic Payment) का उपयोग करते हैं,इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इस योजना में दो तरह की प्रोत्साहन धनराशि की व्यवस्था है-
  • प्रत्येक सप्ताह भाग्यशाली विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए जाने की रूपरेखा बनाई जाएगी।
  •  हर तीन माह में उपभोक्ताओं में से कुछ को एक बड़ा पुरस्कार दिया जाएगा।
  • योजना में यह ध्यान रखा जाएगा कि गरीबों, निम्न-मध्यम वर्ग तथा छोटे व्यापारियों को प्राथमिकता मिले।
इस योजना में निम्न प्रकार के डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) अनुमन्य होगें- USSDAEPSUPI और RuPay Card
विक्रेताओं के लिए उनके द्वारा स्थापित POS मशीन पर किये गये  ट्रांज़ेक्शंस (Transactions) इस योजना हेतु मान्य होगीं।
 योजना की रुपरेखा शीध्र ही देश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी किन्तु यहसुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे जितने लोग डिजिटल पेमेन्ट प्रणाली का उपयोग कर रहे है वे इस योजना के लाभ उठाने के हक़दार होंगे।
·         वर्तमान में दो प्रकार के सुझाव चल रहे हैं कि प्रोत्साहन योजना 6 महीने चलाई जाए अथवा एक वर्ष तक चलाई जाए।
·        राज्य सरकारोंउनके उपक्रमोंजिलोंमहानगर निगमों एवं पंचायतों में भी जहां कैशलेस ट्रांज़ेक्शंस (Cashless Transactions को प्रोत्साहित करने हेतू उल्लेखनीय कार्य किया गया होउन्हें भी पुरस्कृत किया जाएगा।

पीएसएलवी-सी36 द्वारा रिसोर्ससैट -2ए रिमोट सेंसिंग उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

अपनी 38वीं उड़ान (पीएसएलवी-सी36) में, इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान ने आज प्रात: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्रीहरिकोटा से 1,235 किलो भार के रिसोर्ससैट -2ए उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रेक्षपण किया। यह पीएसएलवी का लगातार 37वां सफल मिशन है।

पीएसएलवी-सी36 ने अपने प्रथम चरण के प्रज्वलन के साथ पहले लॉन्च पैड से प्रात: 10:25 उड़ान भरी। इसके बाद स्‍ट्रेप-ऑन प्रज्‍वलन और विलगन, प्रथम चरण विलगन, दूसरा चरण प्रज्वलन, पेलोड के बाद विलगन, दूसरा चरण विलगन, तीसरा चरण प्रज्वलन और विलगन, चौथा चरण प्रज्वलन और कट-ऑफ जैसे महत्‍वपूर्ण उड़ान कार्य योजना के अनुसार हुये। 17 मिनट 05 सेकंड की उड़ान के बाद यान ने धुव्र की ओर 98.725 डिग्री के कोण की ओर झुकी 824 किमी ऊंचाई पर स्थित ध्रुवीय सूर्य समकालिक कक्षा अर्जित की और 47 सेकंड बाद रिसोर्ससैट -2ए पीएसएलवी चौथे चरण से अलग हो गया था।

विलगन के बाद, रिसोर्ससैट -2ए की दो सौर सरणियां स्वचालित रूप से तैनात हुई और बेंगलुरू में इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएससी) ने उपग्रह का नियंत्रण संभाल लिया। आने वाले दिनों में इस उपग्रह को अंतिम परिचालन विन्यास में लाया जाएगा, जिसके बाद यह अपने तीन कैमरों की मदद से फोटो भेजना शुरू कर देगा। रिसोर्ससैट -2ए द्वारा भेजे गए डेटा फसल क्षेत्र और फसल उत्पादन अनुमान, सूखे की निगरानी, मिट्टी मानचित्रण, फसल प्रणाली विश्लेषण और कृषि परामर्श से संबंधित कृषि अनुप्रयोगों में उपयोगी हो जाएगा।

अपने पूर्ववर्ती रिसोर्ससैट -1 और 2 की तरह रिसोर्ससैट -2ए भी विशिष्‍ट थ्री-टियर टायर इमेजिंग प्रणाली और उन्नत वाइड फील्ड सेंसर (एडब्‍ल्‍यूएफएस) रैखिक इमेजिंग सेल्‍फ स्कैनर -3 (एलआईएसएस-3) और रैखिक इमेजिंग सेल्‍फ स्कैनर-4 (एलआईएसएस- 4) कैमरों से युक्‍त है। एडब्‍ल्‍यूएफएस 56 मीटर की सैंपलिंग वाले फोटो 740 किलोमीटर पट्टी के साथ, जबकि एलआईएसएस-3 23.5 मीटर सैंपलिंग और 141 किमी. पट्टी के साथ फोटो उपलब्‍ध कराएगा। एलआईएसएस-4 5.8 मीटर सैंपलिंग और 70 किमी पट्टी के साथ फोटो उपलब्‍ध कराएगा।

आज के प्रक्षेपण के साथ ही पीएसएलवी ने एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया है। आज के रिसोर्ससैट -2ए के प्रेक्षपण सहित भारत के पीएसएलवी यान द्वारा प्रेक्षपित उपग्रहों की कुल संख्या 122 तक पहुँच गई है, जिनमें 43 उपग्रह भारतीय हैं और शेष 79 विदेशों के हैं। 

आई एन एस सुमित्रा का डार्विन, ऑस्‍ट्र‍ेलिया का दौरा

भारत की ‘’एक्‍ट ईस्‍ट‘’ नीति के अनुरूप और मित्र देशों में पहुंच के लिए भारतीय नौसेना का जहाज सुमित्रा 6 दिसंबर, 2016 डार्विन, ऑस्‍ट्रेलिया पहुंच गया है। यह जहाज रॉयल न्‍यूजीलैंड नौसेना के अंतरराष्‍ट्रीय नौसेना समीक्षा 2016 में प्रतिभागिता के बाद भारत लौटते समय 6 से 9 दिसंबर, 2016 तक तीन दिन के लिए यहां रहेगा। इससे पहले इस जहाज ने 4-7 नवंबर, 2016 तक सिडनी का दौरा किया था।

ऑस्‍ट्रेलिया दौरे का उद्देश्‍य द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ कर दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाना है। बंदरगाह में ठहरने के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग और आपसी समझ बढ़ाने के लिए आर ए एन के साथ व्‍यावसायिक बातचीत और अंतर संचालनता बढ़ाने पर चर्चा सहित कई कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके अतिरिक्‍त वरिष्‍ठ सरकारी और सैन्‍य अधिकारियों के साथ मुलाकात, खेलकूद और सांस्‍कृतिक आदान प्रदान तथा बेहतर तरीकों को भी साझा किया जाएगा। इस जहाज की वापसी के समय आरएएन जहाजों के साथ पैसेज एक्‍सरसाइज (पेसेक्‍स) भी की जाएगी।

सुमित्रा स्‍वदेशी डिजाइन पर आधारित सरयू वर्ग का चौथा जहाज है, जिसका निर्माण मैसर्स गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, इंडिया ने किया है। वर्ष 2014 में कमीशन किए जाने के बाद से इस जहाज को कई अभियानों में तैनात किया गया। इनमें से सबसे उल्‍लेखनीय अभियान ‘ऑपरेशन राहत’ था, जिसके जरिए 2015 में विभिन्‍न देशों के कई नागरिकों को युद्धग्रस्‍त यमन से बाहर निकाला गया था। इस जहाज के कमांडर के पी श्रीशन हैं।

राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव 2016 के आठ दिवसीय महोत्सव में सातों सांस्कृतिक जोन प्रदर्शित करेंगे अपनी कला 

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 17 से 24 दिसम्बर 2016 तक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव 2016 का आयोजन किया जा रहा है। एक भारत श्रेष्ठ भारत के विचार को चरितार्थ करते हुए इस आठ दिवसीय महोत्सव में देश के सातों सांस्कृतिक जोन अपने-अपने क्षेत्र की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करेंगे। इस बहुसांस्कृतिक महोत्सव में देशभर के ख्यातिलब्ध कलाकार, नाट्यकर्मी, चित्रकार, अभिनेता व अन्य विद्वतजन हिस्सा लेंगे। 

महोत्सव के बारे में जानकारी देते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो.जीसी त्रिपाठी ने बताया कि नृत्य, गायन, वादन व अभिनय से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन विश्वविद्यालय के विभिन्न सभागार में किया जाएगा। सांस्कृतिक महोत्सव में अभिनय प्रशिक्षण कार्यशाला, फिल्म अप्रिसिएशन कार्यशाला, बाल फिल्म महोत्सव, एनीमेशन कार्यशाला और महिलाओं व युवाओं द्वारा राष्ट्रनिर्माण में योगदान पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। संस्कृति सचिव श्री नरेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि महोत्सव के दौरान विश्वविद्यालय के अलावा बनारस के विभिन्न स्थलों पर भी अनेक कार्यक्रमों का जैसे नुक्कड़ नाटक, लोक गीत आदि का आयोजन होगा। कार्यक्रम में जनमानस की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए प्रवेश निशुल्क रखा गया है। आठ दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ दिनांक 17 दिसम्बर 2016 को संध्या में बीएचयू स्थित स्वतंत्रता भवन में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार डा. महेश शर्मा करेंगे। 


राष्ट्रपति द्वारा चीन के प्रोफेसर यू लांग यू को दूसरा ‘गणमान्य भारतविद’ पुरस्कार 
  • राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नें 1 दिसंबर, 2016 को राष्ट्रपति भवन में चीन के प्रोफेसर यू लांग यू को दूसरा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ‘गणमान्य भारतविद’ पुरस्कार प्रदान किया। 
  • विदेशों में कार्य कर रहे जाने माने भारतविद को प्रति वर्ष सम्मानित करने के लिये आईसीसीआर द्वारा ‘गणमान्य भारतविद’ पुरस्कार की शुरूआत वर्ष 2015 से की गई है। 
  • प्रख्यात विद्वानों को भारत दर्शन का अध्ययन/शिक्षण/अनुसंधान, विचार, इतिहास, कला, संस्कृति, भाषा, साहित्य, सभ्यता, समाज के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिये यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। 
  • इसकी पुरस्कार राशि 20000 अमरीकी डॉलर है। 
  • पिछले वर्ष पहला ‘गणमान्य भारतविद’ पुरस्कार जर्मनी के प्रोफेसर हेनरिक फ्रीहेर वॉन स्टीटेनक्रोन को दिया गया था। 
  • आईसीसीआर द्वारा 2015 में 21 से 23 नवंबर तक राष्ट्रपति भवन में विश्व भारतविद सम्मेलन भी आयोजित किया गया था।

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