12/24/2016 02:20:00 pm
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राजस्थान में सहकारिता का इतिहास करीब एक शताब्दी पुराना है। समय गुजरने के साथ-साथ सहकारी संस्थाएं लगातार मजबूत होती गई। आज स्थिति यह है कि सहकारिता आंदोलन से किसान और ग्रामीणों के साथ-साथ शहरी समुदाय भी लाभान्वित होने लगा है। सहकारिता आंदोलन की इससे बड़ी उपलब्धि और क्या हो सकती है कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं भी सहकारिता से जुड़ रही हैं। महिला कल्याण में सहकारिता आंदोलन की बड़ी भूमिका है। करीब साढ़े चार हजार विभिन्न सहकारी संस्थाओं से जुड़कर महिलाएं अपना और अपने आसपास के लोगों का जीवन बेहतरी की ओर मोड़ चुकी हैं। आज गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी सहकारी संस्थाओं ने अपनी पहचान बनाई है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए जहां उपभोक्ता भण्डारों के प्रति लोगों में विश्वास है, वहीं बीमारी की स्थिति में उपभोक्ता दवा केन्द्र आमजन और पैंशनर्स के लिए एक मिशन की तरह काम कर रहे हैं। सहकारिता का सिद्धान्त परस्पर सहयोग की भावना पर आधारित है, जिसका मूल मंत्र है ’’एक सबके लिए-सब एक के लिए’’।
  • राजस्थान में सबसे पहले वर्ष 1904 में अजमेर में सहकारिता की शुरुआत हुई, इसके बाद भरतपुर में 1915, कोटा में 1916, बीकानेर में 1926, अलवर में 1934, किशनगढ़ में 1935, जोधपुर में 1938 और जयपुर में वर्ष 1944 में सहकारिता का कानून अस्तित्व में आया। 
  • राज्य में 1965 का सहकारिता अधिनियम अस्तित्व में था। 
  • बदलते आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सहकारी संस्थाओं को और अधिक स्वायत्तता देने और निष्पक्ष और समयबद्ध चुनाव आदि के लिए 14 नवम्बर, 2002 से राज्य का नया सहकारिता अधिनियम एवं 2009 में नए नियम अस्तित्व में आए। 
  • भारतीय संविधान के 97वें संशोधन प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए 24 अप्रेल, 2013 को सहकारिता अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए गए। 
  • राज्य की सहकारी संस्थाओं को मजबूती प्रदान करने एवं बिना हस्तक्षेप के स्वतंत्रतापूर्वक दायित्वों के निर्वहन के लिए राज्य में 4 अक्टूबर, 2016 से राजस्थान सहकारी सोसायटी (संशोधन) अधिनियम, 2016 लागू किया है। 
  • राज्य में 29 केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा 6 हजार से अधिक ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से समिति के सदस्य किसानों को फसली सहकारी ऋण उपलब्ध कराया जाता है। काश्तकारों को उनकी स्वीकृत साख सीमा तक सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फसली सहकारी ऋण वितरित किया जाता है। 
  • इसी प्रकार राज्य के सहकारी भूमि विकास बैंकों के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए वितरित दीर्घकालीन सहकारी ऋणों के ब्याज पर राज्य सरकार द्वारा पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान देने के निर्देश जारी किए गए हैं। 
  • राज्य के 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों द्वारा काश्तकारों को 12.8 प्रतिशत तक ब्याज दर पर दीर्घकालीन सहकारी ऋण उपलब्ध कराए जाते थे, जो अब 8.5 प्रतिशत तक पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों द्वारा ऋणी काश्तकारों से ऋण चुकाने के समय पांच प्रतिशत कम ब्याज वसूला जा रहा है। 
  • राज्य के 36 सहकारी भूमि विकास बैंकों के माध्यम से काश्तकारों को लघु सिंचाई साधनों में नया कुआं बनाने, कुआं गहरा कराने, नलकूप, पंपसैट, फव्वारा व बूंद-बूंद सिंचाई, कुएं पर विद्युतीकरण, नाली निर्माण, हौज व डिग्गी निर्माण आदि के लिए ऋण दिया जाता है। 
  • इसके साथ ही कृषि यंत्रीकरण में टे्रक्टर, थ्रेशर, कंबाइन हार्वेस्टर के साथ ही डेयरी, भूमि सुधार, भूमि समतलीकरण, खेती के लिए जमीन खरीदने, ग्रामीण गोदाम निर्माण, वर्मी कपोस्ट, भेड़-बकरी-सुअर-मुर्गी पालन, बागवानी और ऊंट व बैलगाड़ी आदि के लिए सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण दिया जाता है। 
  • प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समितियों को कार्यालय व गोदाम निर्माण के लिए दस-दस लाख रुपए प्रति समिति उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी तरह से दस करोड़ की लागत से जीर्ण-शीर्ण गोदामों की मरम्मत का काम भी कराया जा रहा है।  इससे गांव में ही किसानों के लिए खाद-बीज का अग्रिम भण्डारण, कृषि उपज की खरीद कर भण्डारण और उपभोक्ता सामग्री के वितरण के लिए भण्डारण की व्यवस्था उपलब्ध हो रही है, जिसका सीधा लाभ किसान और ग्रामीणों को हो रहा है। 
  • सहकारिता विभाग द्वारा विकेन्द्रीकृत खरीद व्यवस्था में गेहूं की खरीद का भुगतान सीधे काश्तकार के खाते में करते हुए उसी दिन संबंधित काश्तकार को एसएमएस के माध्यम से जानकारी देने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। किसानों की सुविधा के लिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों में भी खरीद केन्द्र स्थापित किए जाने लगे हैं, जिनमें कप्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत हाथों-हाथ पंजीयन की सुविधा भी है। 
  • इसके साथ ही राजफैड और तिलम संघ के खरीद केन्द्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था भी की गयी है। गांवों में सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सहकारी संस्थाओं का बड़ा सहयोग रहता है। 
  • भामाशाह, जनधन योजना, मनरेगा सहित विभिन्न पेंशन व नकद हस्तातंरण योजनाओें का लाभ सहकारी बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए राज्य में लगभग 7 हजार 489 ई-मित्र केन्द्रों को केन्द्रीय सहकारी बैंकों का बिजनेस कोरेस्पोंडेंट बनाया जा चुका है। सहकारी बैंकों की सभी शाखाओं को कोर बैंकिंग प्लेटफार्म पर लाने के बाद अब ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कप्यूटरीकरण के काम को गति दी जा रही है। 
  • इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग से सात सौ से अधिक पेक्स में कप्यूटरीकरण का काम जारी है।
  •  शहरी जनता को उपभोक्ता सामग्री उचित दरों पर उपलब्ध कराने के लिए जिलों में 3-3 पेक्स में सुपर मार्केट व हर जिले में एक-एक महिला सुपर मार्केट खोले जा रहे हैं। उपभोक्ता भंडाराें और इन सुपर मार्केट्स के जरिए जैविक उत्पादों के बिक्री केन्द्र शुरु करने की कार्ययोजना को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। 
  • राज्य में आदिवासी क्षेत्र में लेम्पस को ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केन्द्र के रुप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उदयपुर संभाग के सरकार आपके द्वार के दौरान टामटिया लेम्पस की गतिविधियों के अवलोकन के बाद संभाग की तीस लेम्पस को आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही सभी लेम्पस को भामाशाह योजना के क्रियान्वयन के लिए बीजनेस कोरेस्पोंडेंट बनाने के निर्देश दिए थे। 
  • आजादी के समय राज्य में 2669 सहकारी समितियां कार्यरत थी और केवल एक प्रतिशत ग्रामीण परिवार ही सहकारिता के दायरे में थे। आज राज्य में 33 हजार से ज्यादा सहकारी समितियों के करीब एक करोड़ से अधिक सदस्य हो गए हैं। राज्य की सहकारी संस्थाओं की हिस्सा राशि 3396 करोड़ रुपए हो गई है। राज्य की सहकारी संस्थाएं लगभग 62 हजार करोड़ रुपए की कार्यशील पूंजी से देश के आर्थिक विकास में हिस्सेदारी निभा रही हैं।  
सहकारिता से संचालित प्रमुख योजनाएं -

ज्ञान सागर योजना -  

राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक की केन्द्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से संचालित होने वाली ज्ञान सागर योजना में दूर ढाणी में बैठे काश्तकार के बेटे-बेटियों से लेकर शहरों में निवास करने वाले उच्च अध्ययन के इच्छुक युवा ऋण सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसके तहत देश व प्रदेश में उच्च एवं तकनीकी अध्ययन के लिए तीन लाख रुपये और विदेश में अध्ययन के लिए पांच लाख रुपये तक का ऋण दिया जा सकेगा। ज्ञान सागर योजना में छात्र-छात्राओं के साथ ही वेतन भोगी एवं व्यवसायी भी उच्च शिक्षा के लिए ऋण प्राप्त कर सकते हैं। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्धेश्य से आधा प्रतिशत कम ब्याज लेने का निर्णय किया गया है। 

ज्ञान सागर योजना में तकनीकी, व्यावसायिक, इन्जीनियरिंग, आई.टी.आई., मेडिकल, होेटल मैनेजमेन्ट, एम.बी.ए.कम्प्यूटर, आदि विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए ऋण प्राप्त किया जा सकता है। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्धेश्य से आधा प्रतिशत कम ब्याज लेने का निर्णय किया गया है।दो लाख रुपये तक के ऋण पर साढ़े ग्यारह प्रतिशत और अधिक के ऋण पर बारह प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जायेगा। योजना का उद्धेश्य आर्थिक अभाव से शिक्षा से वंचित लोगों को शिक्षा के पूरे अवसर उपलब्ध कराना है।

सहकार स्वरोजगार योजनाः  

कृषि, अकृषि एवं सेवा क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सहकारी बैंकों द्वारा यह योजना शुरू की गई है । इस योजना में विभिन्न प्रयोजनों के लिए अधिकतम दो लाख रुपए तक का ऋण दो व्यक्तियों को जमानत पर दिया जा रहा है। 25 हजार रूपये तक के ऋणों पर कालेटरल सिक्योरिटी भी नहीं ली जाती है । ऋणों का चुकारा मासिक, त्रैमासिक या अर्द्धवार्षिक किश्तों में किया जा सकता है ।

जनमंगल आवास ऋण योजना - 

पचास हजार से अधिक आबादी वाले शहरों और कस्बों में मकान खरीदने या बनाने के लिए 25 हजार से 5 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराने के लिए जनमंगल आवास ऋण योजना शुरू की गई है । योजना में दुकानों, गोदाम, शोरूम के निर्माण के साथ ही रिहायशी मकानों या दुकानों की अभिवृद्धि या मरम्मत के लिए भी ऋण सुविधा उपलब्ध है। इस ऋण योजना में राज्य सरकार, अर्द्ध सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं निजी क्षेत्र के स्थायी कर्मचारी या तीन वर्ष से आयकर सारणी भरने वाले गैर कर्मचारी वर्ग के व्यक्ति भी ऋण प्राप्त कर सकते है । यह ऋण तीन किश्तों में किया जायेगा ।

नकद ऋण वितरण व्यवस्था -

दीर्घकालीन सहकारी ऋण वितरण व्यवस्था से बिचौलियों को हटाने के लिए नकद ऋण वितरण व्यवस्था शुरू की गई है। योजना के अनुसार ट्रेक्टर व लघुपथ परिवहनों को छोड़कर शेष कृषि यंत्रों, पम्पसैट, स्प्रिंन्कलर, अन्य मशीनरी उपकरणों व संयत्रों की खरीद के लिए भूमि विकास बैंकों द्वारा अब सीधे किसानों को चैक किया जाता है। किसान स्वयं अपनी पसंद के मेक व फर्म से तत्संबंधी यंत्र खरीद कर 15 दिवस में खरीद प्रस्तुत कर ऋण से खरीदी गई वस्तु का भौतिक सत्यापन कर सकता है ।इस योजना का  प्रदेश के सभी 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण प्राप्त करने वाले ग्रामीण लाभ उठा सकते हैं ।

महिला विकास ऋण योजना -

राज्य के 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंकों के कार्यक्षेत्र में रहने वाली महिलाओं को बिना अचल सम्पत्ति गिरवी रखे ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था महिला विकास ऋण योजना में की गई है। इस योजना में महिलाओं को कुटीर व ग्रामीण उद्योग धन्धों, छोटे-मोटे रोजगार के साधनों, कपड़े, मसाले, बुनाई, पापड, मंगोडी, जरी, चमड़े आदि के कार्यों के लिए 50 हजार रुपए तक का ऋण दिया जाता है। ऋण राशि को तीन माह की ग्रेस अवधि सहित पांच वर्षों में चुकाने की सुविधा है ।

विफल कूप क्षतिपूर्ति योजना -


प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण प्राप्त कर कुंए खुदवाने पर उनके उद्देश्यों में विफल होने की स्थिति में काश्तकारों को राहत देने के उद्देश्य से विफल कूप क्षतिपूर्ति योजना चलाई जा रही है । योजना के अन्तर्गत ऋणी सदस्यों को उनकी और बकाया राशि के मूलधन की पचास प्रतिशत राशि की क्षतिपूर्ति की जाती है । शेष पचास प्रतिशत राशि की ब्याज का वहन ऋणी सदस्य को करना होता है ।

ग्रामीण दुर्घटना बीमा योजना -


प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के ऋणी सदस्यों की दुर्घटना में स्थाई अपंगता या मृत्यु होने पर राहत देने के उद्देश्य से बीमा कंपनियों के सहयेाग से दुर्घटना बीमा योजना सुविधा उपलब्ध है । दुर्घटना बीमा योजना में ऋणी सदस्य की दुर्घटनावंश मृत्यु होने पर 25 हजार रूपये की वित्तीय सहायता दी जाती है । ऋणी सदस्य की दुर्घटनाहोने की स्थिति में 15 दिवस में एवं मृत्यु होने की स्थिति में 30 दिवस में क्षेत्र की भूमि विकास बैंक एवं बीमा कम्पनी की निकटतम शाखा में सूचना देनी होती है।

ग्रामीण आवास योजना -

ग्रामीण जीवन में गुणात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से 50 हजार तक की आबादी वाले कस्बों एवं गांवों में काश्तकारों की पक्के मकान बनाने के लिए आवास ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ग्रामीण आवास योजना में पुराने मकानों की मरम्मत, परिवर्तन पर परिवर्द्धन के लिए भी ऋण सुविधा दी जाती है। राज्य सहकारी आवासन संघ द्वारा व्यक्तिगत आवास ऋण योजना शुरू की गई। जिसमें मकान/फ्लेट बनाने, खरीदने या उसके विस्तार के लिए अधिकतम पांच लाख रुपए तक के ऋण दिए जाते हैं।

व्यक्तिगत आवास ऋण योजना -


राज्य सहकारी आवासन संघ द्वारा में व्यक्तिगत आवास ऋण योजना शुरू की गई । योजना में मकान/फ्लेट बनाने, खरीदने या उसके विस्तार के लिए अधिकतम पाॅंच लाख रूपये तक के ऋण दिये जाते हैं । 65 वर्ष की आयु तक के स्थाई नौकरी करने वाले तथा निजी व्यवसाय व्यक्तिगत ऋण सुविधा का लाभ उठा सकते हैं ऋण तीन किश्ते में दिया जाता है और 15 वर्षों में आसान किश्तों में ऋण ब्याज तथा ऋण चुकाने की सुविधा दी गई है।

बेबी ब्लैंकेट योजना -

मकानों की मरम्मत, परिवर्तन व परिवर्द्धन के लिए 50 हजार रूपये तक के ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य सहकारी आवासन संघ द्वारा बेबी ब्लैंकेट योजना चलाई जा रही है । योजना में मकान की मरम्मत, रंग रोगन, प्लास्टर, फर्श बनवाने या बदलवाने, बिजली या पानी की लाइनों को बदलने या मरम्मत करवाने दवाजे खिड़की या अन्य इसी तरह के कार्यों के लिए ऋण उपलब्ध कराये जाते हैं । पांच वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध कराये जाते है व ये ऋण दो किश्तों में बांटे जाते हैं और समान मासिक किश्तों में मय ब्याज चुकाने की सुविधा है।

सहकारी किसान कार्ड -


किसानों को आसानी से सहकारी कर्जें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समूचे देश में सबसे पहले सहकारी क्षेत्र में राजस्थान में 29.1.1999 को सहकारी किसान कार्ड योजना लागू की गई । इसी क्रम में ग्राम सेवा सहकारी समितियों के समस्त ऋणी सदस्यों को ”सहकारी किसान कार्ड“ सुविधा से जोडा जा चुका है। राज्य सरकार के इस निर्णय से अब ग्राम सेवा सहकारी समिति के सदस्य किसान सीधे बैंक से चैक प्रस्तुत कर अपनी कृषि संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु इच्छानुसार ऋण प्राप्त कर सकते हैं । इसी तरह से समिति में खाद बीज, डीजल आदि उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में क्षेत्र की क्रय विक्रय सहकारी समिति से खाद बीज आदि भी प्राप्त कर सकते हैं । राज्य सरकार की बजट घोषणा के क्रम में वर्ष 2010-11 में पांच लाख नए सदस्यों को सहकारी ऋण वितरण व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इसमें नए काश्तकारों को सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सहकार सुगम क्रेडिट कार्ड -


लघु उद्यमियों, छोटे व्यापारियों आदि को आसानी से साख सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सुगम क्रेडिट कार्ड योजना शुरू करने की घोषणा की थी । सहकार सुगम क्रेडिट कार्ड योजना में लघु उद्यमियों, छोटे व्यवसाईयों, पारम्परिक कारोबार करने वालों, दस्तकारों व युवाओं को रोजगार के संचालन के लिए पचास हजार रूपये तक की साख सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। 25 हजार रूपये तक की साख सुविधा के लिए कोलेटरल सिक्योरिटी की भी आवश्यकता नहीं है । अब इस योजना का नाम स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना कर दिया गया है।

कृषक मित्र योजना -


राज्य में नकदी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने और छोटे बड़े सभी काश्तकारों को सहकारी दायरे में लाने के उद्देश्य से अगस्त 1997 से कृषक मित्र सहकारी ऋण योजना शुरू की गई है । योजना को सफल बनाते हुए अब चार एकड से अधिक सिंचित कृषि योग्य भूमि वालेू काश्तकारों को उनकी स्वीकृत साख सीमा के अनुसार दो लाख रूपये तक के फसली कर्जें वितरित किये जा सकते हैं। हाल ही में सामान्य क्षेत्र में साढ़े तीन लाख रुपए एवं नहरी क्षेत्रों के किसानों को अधिकतम चार लाख तक के ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है इस योजना के लागू होने से छोटे बड़े सभी काश्तकार सहकारी छाते में बनाकर एक ही स्थान से ऋण जरूरतों की पूर्ति कर सकते हैं। इस योजना में एक जुलाई से 31 जून तक की अवधि के लिए साख सीमा स्वीकृत की जाती है और सहकारी किसान कार्ड से स्वीकृत साख सीमा तक ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। तीन लाख रुपए तक के ऋण सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

सहकार प्रभा योजना -


कृषि, अकृषि एवं फसली सहकारी ऋणों के लिए एक बारीय साख सीमा का निर्धारण कर ऋण स्वीकृति व वितरण में विलम्ब को समाप्त करने के उद्देश्य से सहकारी भूमि विकास बैंकों द्वारा सहकार प्रभा योजना की शुरूआत की गई है । दो एकड कृषि योग्य भूमि वाले, अवधिपार सहकारी ऋणों के दोषी नहीं होने वाले कृषक इस योजना का लाभ उठा सकते है । इस योजना में फसली कार्यों के लिए एक वर्ष के लिए व अन्य ऋण अधिकतम 15 वर्ष की अवधि के लिए दिये जा सकेंगे।

प्रमुख सहकारी संस्थाएं-  

राजस्थान राज्य सहकारी बैंक -

राजस्थान राज्य सहकारी बैंक की स्थापना 14 अक्टूबर, 1953 को ग्रामीण एवं कृषक समुदाय को अल्पकालीन कृषि ऋण, गैर कृषि ऋण, रोजगारोन्मुख योजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए की गई है। बैंक 29 केन्द्रीय सहकारी बैंकों एवं 6476 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से काश्तकारों को सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रहा है।  

राजस्थान राज्य भूमि विकास बैंक - 

राजस्थान राज्य भूमि विकास बैंक की स्थापना 26 मार्च 1957 को हुई। ग्रामीण साख के क्षेत्र में राज्य भूमि विकास बैंक द्वारा 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंकों एवं उनकी 133 शाखाओं के माध्यम से दीर्घकालीन ऋण वितरण किया जा रहा है।  

राजस्थान राज्य क्रय-विक्रय सहकारी संघ - 

राजस्थान राज्य क्रय-विक्रय सहकारी संघ (राजफैड) की स्थापना 26 नवम्बर, 1957 को हुई थी। 249 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तथा वाणिज्यिक आधार पर कृषि उपज की खरीद कर बिचौलियों से राहत प्रदान करने का काम किया जा रहा है।  

राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ -

राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ की स्थापना 23 मार्च 1967 को हुई थी। इसके द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित सहकारी संस्थाओं से अधिकृत डीलर के माध्यम से अनियंत्रित वस्तुओं का व्यवसाय कर राज्य के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाती है।

राजस्थान राज्य सहकारी मुद्रणालय लिमिटेड,जयपुर - 


राजस्थान राज्य सहकारी मुद्रणालय लिमिटेड,जयपुर एक राज्य स्तरीय शीर्ष सहकारी संस्था है, जिसका उद्देश्य सदस्य व असदस्य सहकारी संस्थाओं व सरकारी विभागों में प्रयोगार्थ सामग्री का मुद्रण कार्य करना है। इस मुद्रणालय की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी। राज्य सरकार ने मुद्रणालय के कार्य की विशिष्टताओं को देखते हुए इस मुद्रणालय को राज्य केन्द्रीय मुद्रणालय के समकक्ष दर्जा प्रदान कर राज्य के सभी विभागों को इस मुद्रणालय से मुद्रणकार्य करवाने के लिये अधिकृत किया है। वर्तमान में इस सहकारी मुद्रणालय में एच.एम.टी. लि0 से क्रय की गई की दो टू कलर ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन सहित कुल सात ऑफसेट प्रिंटिंग मशीनें, आठ कम्प्यूटर सिस्टम, कैमरा, प्लेट मेकिंग, सीटी पोलीजेट सिस्टम सहित इत्यादि आधुनिक उपकरण स्थापित है।

राजस्थान राज्य सहकारी संघ, जयपुर -


राजस्थान राज्य सहकारी संघ की स्थापना 21 दिसम्बर, 1957 को हुई थी। यह एक राज्य स्तरीय शीर्ष एवं प्रवक्ता सहकारी संस्था है। इस संस्था का गठन सहकारी संस्था अधिनियमान्तर्गत है, जिसका उद्धेश्य राज्य के सहकारी आन्दोलन को प्रतिनिधित्व प्रदान करना है। इस हेतु यही एक मात्र राज्य स्तरीय वैधानिक संस्था है।
राज्य सहकारी संघ का मुख्य उद्धेश्य सहकारी शिक्षण प्रशिक्षण एवं प्रचार प्रसार है एवं राज्य सरकार द्वारा  एवं भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ, नई दिल्ली द्वारा सौपें गये दायित्व  का पालन करना है। सहकारी शिक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्तमान में संघ द्वारा चार सहकारी शिक्षा क्षेत्रीय परियोजनाएं क्रमशः जयपुर, अजमेर, जोधपुर व सवाई माधोपुर में संचालित है तथा सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत सहकारी प्रशिक्षण केंद्र, जयपुर संचालित है। सहकारी शिक्षण कार्यक्रम का उद्धेश्य राज्य के सहकारी संस्थाओं (यथा केंद्रीय सहकारी बैंक , प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक, क्रय-विक्रय सहकारी समितियां, उपभोक्ता भंडार, ग्राम सेवा सहकारी समितियां, लैम्पस, डेयरी, महिला सहकारी बचत समितियां एवं स्वयं सहायता समूह) के पदाधिकारियों सदस्यों को सहकारी सिद्धांतों, सहकारी नियम, उपनियम,संचालक मण्डल के अधिकार एवं कर्तव्य, सहकारी साख व विपणन आदि के बारे में जानकारी के साथ-साथ सहकारी नवाचारों के बारे में भी शिक्षण-प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत पैक्स एवं सी.सीबी., पी.एल.डी.बी., मार्केटिगं एवं उपभोक्ता भण्डारों के  कार्मिकों को प्रशिक्षित किया जाता है। इस सहकारी शिक्षण प्रशिक्षण के माध्यम से सहकारी संस्थाएं जागरुक होकर राज्य के सहकारी आंदोलन को सफल बनाने में अपना योगदान कर सके।

4 टिप्पणियाँ:

  1. Kya sahkari samiti ke kcc par durghatna bima apne aap hi lagu hota h ya krwana parta h

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  2. जब तक जी ऐस ऐस को मजबूत नही किया जायेगा तबतक कुछ नहीं होगा

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