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राजस्थान के धरातलीय प्रदेश- अरावली पर्वत श्रेणी और पहाड़ी प्रदेश-
अरावली पर्वत श्रृंखला प्रदेश राजस्थान की मुख्य एवं विशिष्ट पर्वत श्रेणी है। यह विश्व की प्राचीनतम् पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह दक्षिण-पश्चिम में सिरोही से प्रारंभ होकर उत्तर-पूर्व में खेतड़ी तक तथा आगे उत्तर में छोटी-छोटी श्रृंखलाओं के रूप में दिल्ली तक विस्तृत है। भूगर्भिक इतिहास की दृष्टि से अरावली पर्वत श्रेणी धारवाड़ समय के समाप्त होने के साथ से संबधित है। यह श्रृंखला समप्राय: थी और केम्ब्रियन युग में पुन: उठी और विध्ययन काल के अंत तक यह पर्वत श्रृंखला अपने अस्तित्व में आयी। यह पर्वत श्रृंखला सर्वप्रथम मेसाजोइक युग में समप्राय: हुई और टरशरी काल के रंभ में इसका पुरुत्थान हुआ। इसका दक्षिण की ओर विस्तार इस समय समुद्र के नीचे है जो टरशरी काल में दक्कन ट्रेप के एकत्रीकरण के पश्चात विस्तृत हुआ। इस प्रदेश में फाइलाईट्स, नीस, शिष्ट और ग्रेनाइट चट्टानों की प्रधानता है। इस प्रदेश की औसत ऊँचाई 1225 मीटर है। इस पर्वत श्रेणी की प्रमुख चोटियों में गुरुशिखर (1727 मीटर) सर्वाधिक ऊँची है।
     अन्य प्रमुख चोटियाँ निम्नांकित है-
1. सेर (1597 मीटर),
2. जरगा (1431 मीटर),
3. अचलगढ़ (1370 मीटर),
4. रघुनाथगढ़ (1055 मीटर),
4. खौ (920 मीटर),
5. तारागढ़ (873 मीटर),
6. बाबाई (792 मीटर),
7. भैराच (792 मीटर)
8. बैराठ (704 मीटर)
अरावली पर्वत क्रम का विस्तार बाँसवाड़ा, सिरोही, जयपुर, अजमेर, सीकर और अलवर जिलों में है।
इस पर्वत श्रृंखला को चार भागों में बाँटा जा सकता है:-
1. उत्तरी-पूर्वी पर्वत श्रेणी 
2. मध्य अरावली पर्वत श्रेणी

       इसे पुन: दो भागों में बाँटा जा सकता है:-

   () शेखावटी निम्न पहाड़ियाँ
    () मेरवाड़ पहाड़ियाँ
3. मेवाड़ पहाड़ियाँ और भोराट पठार

4. आबू पर्वत श्रृंखला

1. उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी प्रदेश -
इसका विस्तार जयपुर जिले के उत्तरी-पश्चिमी भागों में तथा अलवर जिले के अधिकांश भागों में है। अरावली के इस भाग में चट्टानी एवं प्रपाती पहाड़ियों के कई समानान्तर कटक शामिल हैं। अरावली का यह भाग फाइलाईट तथा क्वार्टज से निर्मित है। इस क्षेत्र में दिल्ली क्रम की अन्य चट्टानें चूने के पत्थर से निर्मित है। दिल्ली के दक्षिण में स्थित पहाड़ियों की ऊँचाई समुद्रतल से लगभग 306 मीटर है। अन्य प्रमुख पहाड़ियों में भैराच (792 मीटर), बैराठ (704 मीटर) अलवर जिले में, बाबाई (792 मीटर)खौ (920 मीटर) जयपुर जिले में तथा रघुनाथगढ़ (1055 मीटर) सीकर जिले में है।
2. मध्य अरावली पर्वत श्रेणी - 
यह पर्वत श्रृंखला जयपुर, अजमेर तथा टोंक जिलों के दक्षिण-पश्चिम में अवस्थित है। यह अरावली पर्वत क्रम का मध्यवर्ती भाग है। इसमें पश्चिम में बिखरे कटक, अलवर पहाड़ियाँ, करोली उच्च भूमि तथा बनास मैदान शामिल है।
इसे निम्नांकित दो भागों  में विभाजित किया जा सकता है-
       () शेखावटी निम्न पहाड़ी प्रदेश             () मेरवाड़ पहाड़ी प्रदेश
      () शेखावटी निम्न पहाड़ी प्रदेश-
इस प्रदेश में सबसे लंबी पर्वत श्रेणी झुंझुनू जिले में सिहना तक जाती है, जो सांभर झील से प्रारंभ होती है। इनके अतिरिक्त यहाँ कई छोटी-छोटी पहाड़ियां हैं जिनमें नाहरगढ़, पुराना धाट, आड़ा, डूंगर, तोरावाटी, राहोड़ी आदि हैं। इस प्रदेश की औसत ऊँचाई 400 मीटर है।

      () मेरवाड़ पहाड़ी प्रदेश-

यह पर्वत श्रेणी मारवाड़ के मैदान को मेवाड़ के उच्च पठार से अलग करती है तथा यह अजमेर के निकट प्रकट होती है। अजमेर में स्थित तारागढ़ (870 मीटर) इस प्रदेश का प्रमुख पर्वत है इसके पश्चिम में नाग पहाड़ है। इस प्रदेश की औसत ऊँचाई 550 मीटर है। ब्यावर तहसील में अरावली श्रेणियों के चार दर्रे स्थित है जिनके नाम हैं -  बर, परवेरिया और शिवपुर घाट, सूरा घाट दर्रा और देबारी।

3. मेवाड़ पहाड़ियाँ और भौराट पठार -

मेवाड़ पहाड़ियाँ और भौराट पठार पूर्वी सिरोही, उदयपुर के पूर्व में संकीर्ण पट्टी को छोड़कर लगभग संपूर्ण उदयपुर और डूंगरपूर जिलों में विस्तृत है। इस भाग के पूर्व में अरावली के पर्वत भ्रशोत्थ के रुप में 1530 मीटर तक है। इस भू-भाग में वलन की सामान्य संरचना उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की तरफ समनति वलनों के नति लम्ब के सहारे प्रकट होती है। इस भाग की औसत ऊँचाई 1225 मीटर है। इसका सर्वाधिक उच्च शिखर जरगा पर्वत (1431 मीटर) है। इस क्षेत्र की अन्य श्रेणियाँ कुम्भलगढ़ (1224मीटर), लीलागढ़ (874मीटर), कमलनाथ की पहाड़ियाँ (1001मीटर) तथा सज्जनगढ़ (938 मीटर) है। उदयपुर के उत्तर-पश्चिम में कुम्भलगढ़ और गोगुन्दा के बीच एक पठारी क्षेत्र हैं जिसे ‘भोराट का पठार’ के नाम से जाना जाता है। भोराट पठार और उसकी समीपवर्ती कटकें संश्लिष्ठ गाँठ जैसा प्रतीत होती है। इस पठार के पूर्व की ओर कई पर्वत स्कन्ध हैं जिनमें दक्षिण सिरे का पर्वत स्कन्ध (500-600 मीटर) महत्त्वपूर्ण है।

 4. आबू पर्वत क्रम -

यह पर्वत क्रम अरावली श्रृंखला के दक्षिण-पश्चिम में अवस्थित है। यह सिरोही जिले में पहाड़ियों के गुच्छे के रुप में विद्यमान है। आबू पर्वत की लम्बाई 19 किलोमीटर  और चौडाई 8  किलोमीटर है तथा यह समुद्रतल से 1200 मीटर ऊँचा है। आबू से सटा हुआ उड़िया पठार आबू से लगभग 160 मीटर ऊँचा है तथा गुरु शिखर के मुख्य शिखर के नीचे है। यहां की प्रमुख पर्वत चोटियां गुरु शिखर (1727 मीटर), सेर (1597 मीटर), अचलगढ़ (1380 मीटर), देलवाड़ा (1442मीटर), आबू (1295 मीटर) और ऋषिकेश (1017मीटर) आदि हैं। आबू के पश्चिम में आबू-सिरोही की श्रेणियां है। यह पहाड़ियां आबू श्रेणियों की अपेक्षा अत्यंत निम्न है एवं  पश्चिम में जाने पर ये श्रेणियां छितरी पहाड़ियों के रुप में मिलती है किन्तु गुजरात के पालनपुर तक पहुँचते-पहुँचते घनी हो जाती है।
अरावली पर्वत प्रदेश पूर्व में आर्द्र जलवायु क्षेत्र तथा पश्चिम में शुष्क जलवायु क्षेत्र के बीच में स्थित होने के कारण यह एक संक्रमणक क्षेत्र  है। राजस्थान के एकमात्र हिल-स्टेशन आबू पर्वत पर गीष्म ॠतु में अत्यंत सुहावनी ठंडक होती है जबकि शीत ॠतु में यहाँ अत्यंत ठंडक रहती है। जनवरी के महीने में यहाँ का तापमान प्राय: 10-16 डिग्री सेल्सियस तथा जून में 30 डिग्री सेल्सियस अधिक रहता है। इस क्षेत्र में सापेक्षिक आद्रता ग्रीष्म ॠतु में 28 प्रतिशत रहती है। अरावली पर्वत प्रदेश में वर्षा की मात्रा उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में 80 से.मी. तक तथा दक्षिणी भागों में आबू पर्वत पर 150 से.मी. होती है। यहाँ सामान्यत: बरगद, जामून, आम, धौकड़ा, गूलर, बबूल खैर आदि के वृक्ष पाए जाते हैं।

अरावली का अन्य विभाजन-

एक अन्य तरीके से अरावली पर्वत प्रदेश को निम्नांकित तीन प्रमुख उप-प्रदेशों में भी विभक्त किया जाता है, ये हैं-

(अ) दक्षिणी अरावली प्रदेश-

इसमें सिरोही, उदयपुर और राजसमंद जिले के पर्वत शामिल किये जाते हैं। यह प्रदेश पूर्णतया पर्वतीय प्रदेश है, जहाँ अरावली की श्रेणियाँ अत्यधिक सघन एवं उच्चता लिये हुए हैं। इस प्रदेश में अरावली पर्वतमाला के अनेक उच्च शिखर स्थित हैं। इसमें गुरुशिखर पर्वत राजस्थान का सर्वोच्च पर्वत शिखर (ऊँचाई 1722 मीटर) सिरोही जिले में माउन्ट आबू क्षेत्र में स्थित है। यहाँ की अन्य प्रमुख उच्च पर्वत चोटियाँ हैं- सेर, अचलगढ़, देलवाड़ा, आबू और ऋषिकेश (सभी माउंट आबू) एवं उदयपुर-राजसमंद क्षेत्र में जरगा पर्वत, कुम्भलगढ़ , लीलागढ़, कमलनाथ की पहाड़ियाँ तथा सज्जनगढ़ है तथा उदयपुर के उत्तर-पश्चिम में कुम्भलगढ़ और गोगुन्दा के बीच एक पठारी क्षेत्र है जिसे भोराट का पठारके नाम से जाना जाता है।

(ब) मध्य अरावली प्रदेश-

यह मुख्यतः अजमेर जिले में फैला है। इस क्षेत्र में पर्वत श्रेणियों के साथ संकीर्ण घाटियाँ और समतल स्थल भी स्थित है। इसमें अजमेर के तारागढ़ एवं नाग पहाड़ शामिल हैं।

(स) उत्तरी अरावली प्रदेश-

इस क्षेत्र का विस्तार जयपुर, दौसा तथा अलवर जिलों में है। इस क्षेत्र में अरावली की श्रेणियाँ अनवरत न होकर दूर-दूर होती जाती हैं। इनमें शेखावाटी की पहाडियाँ, तोरावाटी की पहाड़ियों तथा जयपुर और अलवर की पहाड़ियाँ शामिल हैं।
अरावली का महत्त्व -
अरावली विश्व के प्राचीनतम पर्वतों में से एक है। अत: भौगोलिक अध्ययन के लिए यहां पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। इसकी उच्चतम चोटी गुरु शिखर ग्रीष्मकाल में एक शीतल प्रदेश बन जाती है एवं भारत के मध्यवर्ती भाग में यह सबसे ऊँची चोटी है। इसके अतिरिक्त यह अरब सागर से उठने वाले मानसूनों को रोकता है जिससे इसके पूर्वी प्रदेश में वर्षा हो जाती है परंतु पश्चिमी प्रदेश शुष्क रह जाता है। अरावली से एक अन्य लाभ यह भी है कि यह पश्चिमी रेगिस्तान से चलने वाली रेतीले आँधियों को पूर्वी भाग में आने से रोकता है।
अरावली पर्वत को खनिजों का भी भण्डार गृह भी कहा जाता है। इससे इमारती पत्थर तथा अन्य कई उपयोगी खनिज प्राप्त किए जाते हैं। अरावली से कुछ नदियां निकलती है जो केवल वर्षा ॠतु में प्रवाहित होती है तथा ग्रीष्मकाल में शुष्क हो जाती है। अरावली पर्वत के पूर्वी ढलान पर घने वन पाए जाते हैं जिनसे जलाने फर्नीचर के लिए लकड़ी, गोंद, लाख, शहद, मसाले आदि अनेक उपयोगी वस्तुएं प्राप्त होती हैं अरावली के ढालों पर चारागाह भी उपस्थित हैं। अरावली पर्वत पर कई दर्शनीय स्थल यथा- माउण्ट आबू, उदयपुर, कुम्भलगढ़, चित्तौड़, आमेर, रणकपुर, हल्दी घाटी आदि स्थित है


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