Skip to main content

Notable compositions of Rajasthani language in medieval time - मध्यकाल में राजस्थानी भाषा की उल्लेखनीय रचनाएं-



क्र. सं.
लेखक
रचनाएं
1
आसानंद बारठ (वि. 1563-1660)
दूहा राव रिणमल रा
दूहा भाटी सत्ता रा
उमा दे भटियाणी रा कवित्त
राउ चोरसेन रा रूपक
रावळ माता सळखावत रो गुण
2
मीराबाई (वि. 1561-1610)
मीरां पदावली
नरसीजी रो मायरो
राग सोरठ
राग गोविन्द
3
दुरसा आढ़ा (वि. 1592-1712)

विरुद छिहत्तरी
किरतारबावनी
राव सुरतांण रा कवित्त,
श्री कुमार आजाजीनी भूचर मौरी नी गतगत
झूलणा राव श्री अमरसिंघजी रा
दूहा सोळंकी वीरमदेव रा
4
ईसरदास (वि. 1515-1675)

हरिरस
छोटो हरिरस
गरुड़ पुराण
गुण आगम
देवियाण
गुण-वैराठ
हाला झाला री कुंडलिया
रास कैलास
दांणलीला
सामला रा दूहा
5
प्रिथिराज राठौड़ (वि. 1606- )  
वेलि क्रिसण रुकमणी री
दसम भागपत रा दूहा
गंगा लहरी
वसदे रावडत
दसरथ रावडत
6
कुसल लाभ (वि. 1595-1655)
माधवानल कामकंदला चौपई
ढोला मारवणी चौपई
तेजसार रास
जिनपालित जिन रक्षित संधि गाथा
अगड़दत्त रास
थंभण पारसनाथ स्तवन
गोड़ी पारसनाथ स्तवन
श्री पूज्य वाहण गीत
संत्रुंजय यात्रा स्तवन
भीमसेन हंसराज चौपई
पिंगल सिरोमणि
महामाई दुरगा सातसी
7
समय सुंदर (वि. 1620-)
सिंहलसुत प्रियमेलक रास
चंपक सेठ चौपई
नलदमयन्ती रास
मृगावती रास
वस्तुपाल-तेजपाल रास
सीताराम चौपई
पुण्य सार चौपई
चार बुद्धि रास
8
दादू दयाल (वि. 1601-1660)
वाणी
9
जांभोजी (वि. 1508-1593)
सबदवाणी
जंभवाणी
जंभगीता
10
बखनाजी (वि. 1640-1670)
वाणी
11
रज्जब (वि. 1624-1746)

वाणी
सर्वंगी
13
लालदास (वि. 1597-1705
वाणी



14
चरणदास (वि. 1760-1838)
अस्टांग योग
नासकेत
संदेह सागर
राममाल
भक्ति पदारथ
दानलीला
ब्रह्मग्यान सागर
15
दया बाई (वि. 1750-75)
दयाबोध
16
दयालदास (वि. 1816-1885)
करुणा सागर
17
दरियावजी (वि. 1733-1805)
वाणी
18
धरम समुद्र गणि (वि. 1567-1590)
सुमित्र कुमार रास
रात्रिभोज रास
सकुन्तला रास
19
मालदेव
मनभरता गीत
महावीर पारणा
पुरन्दर चौपई
सील बावनी
राजुल नेमिनाथ धमाल
पद्मावती रास
भोज प्रबन्ध
20
हेमरतन सूरि
गोरा बादिल पद्मनी चौपई
लीलावती कथा
शीलवती कथा
जगदम्बा बावनी
शनिचर छंद
21
लब्धोदय
पद्मनी चरित चौपई
मलय सुंदरी चौपई
रतनचंद मुनिचंद चौपई
गुणावली चौपई
22
उपाध्याय धरमवर्धन
श्रेणिक चौपई (वि. 1719)
अमरसेन वयरसेन चौपई (वि. 1724)
दशार्णभद्र चौपई (वि. 1757)
सुरसुंदरी रास (वि. 1736)
23
बीठू सूजो (वि. 1591-1598)
राव जैतसी रो छंद
24
कायस्थ केशवदास (वि. 1592)
बसंत विलास फाग
25
बीठू मेहो
पाबूजी रा छंद
गोगाजी रा रसावला
26
केसवदास गाडण (वि. 1610-97)
गुण रूपक
राव अमरसिंघ रा दूहा
विवेक वारता
गजगुण चरित
27
सांयाजी झूला (वि. 1632-1703)
नागदमण
रुकमणी हरण
 अंगद पिष्टि
28
माधौदास (वि. 1610-15-1690)
राम रासो
भासा दसमस्कंध
29
अग्रदास (वि. 1632)
श्रीराम भजन मंजरी
उपासना बावनी
अस्ययाम
अग्रसार
30
गिरधर आसियो (वि. 1720)
सगत रासो
31
जोगीदास
हरिपिंगल प्रबंध
32
कुसलधीर
लीलावती रासौ (वि. 1728)
33
उपाध्याय लाभवर्धन
लीलावती रास (वि. 1733)
धरमबुद्धि-पापबुद्धि रास (वि. 1763)
निसांणी महाराज अजीतसिंघ री (वि. 1767)
पांडव चरित चौपई (वि. 1770)
34
संतदास (वि. 1725-1808)
अणभै वाणी
35
दौलत विजय (वि.1725-60)
खुम्माण रासो
36
कुंभकरण (वि. 1723)
रतन रासो
जयचंद रासो
37
वीरभांण चारण (वि. 1745-92)
राजरूपक
38
वृंद (वि. 1700-1780)
वृंद सतसई
यमक सतसई
भाव पंचासिका
सिणगार सिक्षा
वचनिका
39
दयाल दास
राणा रासो
40
हम्मीर रतनू
हम्मीर नाम माला
लखपत पिंगल
पिंगल प्रकास
जदुवंस वंसावली
देसलजी री वचनिका
भरतरी सतक
भगवत दरपण
41
करणीदान कविया
सूरज प्रकास
बिड़द सिणगार
42
मंछाराम सेवग मंछ
रघुनाथ रूपक गीतां रौ
43
रामदास लालस
भीमप्रकास, करणी रूपक
44
उदयराम गूंगा
कवि कुळबोध
45
किसना आढ़ा
रघुवर जस प्रकास
भीमविलास
46
कल्याणदास
गुण गोविन्द (वि. 1725)
47
डूंगरसी
सत्रुसाल रासो (वि. 1710)
48
महाराजा मानसिंघ (वि.1839-1900)
नाथ चरित
जलंधर चंद्रोदय
सिद्ध गंगा
नाथ स्तोत्र
नाथ परद संग्रै
49
बांकीदास (वि. 1828-1890)
सूर छत्तीसी
धवळ पचीसी
मावडिया मिजाज
कुकवि बत्तीसी
भुरजाळ भूसण
झमालनख-सिख
सिद्ध राव छत्तीसी
हमरोट छत्तीसी
50
नाभादास
भगतमाल
51
किरपाराम खिडिया
राजिया रा सोरठा
चाळ कनेची माता
 (सन्दर्भ- कोटा ओपन वि.वि. की राजस्थानी की पुस्तक )



Comments

Popular posts from this blog

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...

Vedic Period - Early Vedic Society वैदिक काल- प्रारम्भिक वैदिक समाज

प्रारम्भिक वैदिक समाज Vedic Period - Early Vedic Society प्रारम्भिक वैदिक समाज कबीलाई समाज था तथा वह जातीय एवं पारिवारिक संबंधों पर आधारित था। प्रारम्भिक वैदिक समाज जाति के आधार पर विभाजित नहीं था एवं विभिन्न व्यावसायिक समूह अर्थात् मुखिया, पुरोहित, कारीगर आदि एक ही जन समुदाय के हिस्से थे। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीले के लिए ‘जन’’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था और ऋग्वेद में विभिन्न जन का उल्लेख है। विभिन्न कबीलों में पारस्परिक संघर्ष सामान्य थे, जैसे ऋग्वेद में ‘‘दशराज युद्ध’’ का वर्णन हुआ है और इसी युद्ध के वर्णन से हमें कुछ कबीलों के नाम प्राप्त होते हैं जैसे भरत, पुरु, यदु, द्रहयु, अनू और तुरवासू। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीलों के युद्ध जैसे कि पहले भी कहा गया है पशुओं के अपरहय एवं पशुओं की चोरी को लेकर होते रहते थे। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’- कबीले का मुखिया ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ होता था। वह युद्ध में नेता तथा कबीले का रक्षक था। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ का पद अन्य व्यावसायिक समूहों की भांति ही पैतृक नहीं था बल्कि उसका जन के सदस्यों में से चुनाव होता था। ‘राजन्य’- योद्धा को ‘राजन्य’ क...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...