7/15/2011 01:11:00 pm
2

राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा कस्बे में स्थित वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी के मंदिर में दीपावली के दूसरे दिन रात्रि में अन्नकूट महोत्सव एवं मेला आयोजित होता है जिसमें हजारों आदिवासियों का सैलाब उमड़ता है। यहाँ अन्नकूट लूटने की यह परंपरा सैंकडों वर्षों से चली आ रही है। इस परम्परा के तहत दिवाली के दूसरे दिन आसपास के गाँवों तथा कुंभलगढ़, गोगुन्दा और राजसमंद क्षेत्र से आदिवासी स्त्री पुरुष दोपहर से ही आना प्रारंभ हो जाते हैं। अन्नकूट में लगभग 20 क्विंटल पकाए हुए चावल के ढेर का पर्वत डोल तिबारी के बाहर बना कर सजाया जाता है तथा भगवान श्रीनाथजी को भोग लगाया जाता है। इसके अलावा अन्नकूट में श्रीखंड, हलवा (शीरा), बड़ा, पापड़, विभिन्न प्रकार के लड्डू, मोहनथाल, बर्फी, सागर, ठोर, खाजा, पकौड़े, खिचड़ी सहित लगभग 60 प्रकार के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। श्रीनाथजी के अन्नकूट के दर्शन में भारी संख्या में भीड़ जमा होती है। अन्नकूट के दर्शन के लिए राजस्थान के विभिन्न हिस्सों के अलावा गुजरात, मुंबई एवं मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दो तीन दिन पूर्व ही श्रीनाथजी की नगरी में आ जाते हैं। आम लोगों के लिए अन्नकूट के दर्शन रात्रि में लगभग 10 बजे खुलते हैं और 12 बजे तक चलते हैं। इसके बाद लोगों को बाहर निकाल कर मंदिर के द्वार केवल आदिवासियों के लिए खोल दिए जाते हैं। मंदिर पर केवल आदिवासियों का कब्जा हो जाता है। वे परंपरागत शैली में चिल्लाते हुए मंदिर में प्रवेश करते हैं तथा दर्शन करके अन्नकूट के प्रसाद और चावल के ढेर को लूटते हैं और अपने गमछे या धोती से विशेष तरह से बनाई गई झोली में प्रसाद भरते हैं तथा दौड़ते हुए मंदिर से बाहर निकलते हैं। बाहर उपस्थित आदिवासी स्त्रियों को वो प्रसाद थमाकर वे पुनः अन्नकूट लूटने के लिए मंदिर में प्रवेश कर जाते हैं। अन्नकूट लूट की परंपरा अपने आप में अनोखा, अविस्मरणीय व अद्भुत दृश्य होता है। अन्नकूट के प्रसाद में बनाया जाने वाला चावल का ढेर अत्यंत गर्म होता है लेकिन ये आदिवासी इसकी परवाह किए बिना इस पर टूट पड़ते हैं और अपने हाथों से झोली में भरते हैं। अतिउत्साह में वे कई बार इस ढेर पर चढ़ भी जाते हैं और झुलस जाते हैं। भक्ति भावना से पूर्ण ये आदिवासी इस प्रसाद को पाने के लिए अत्यंत व्यग्र रहते हैं। गुजराती भक्तों व स्थानीय लोगों के लिए भी इस चावल का अत्यंत महत्व है। वे आदिवासियों से अन्नकूट के थोड़े से चावल लेकर इन्हें सुखाकर अपने घर में तिजोरी में रखते हैं। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर मृतक के मुँह में गंगाजल के अलावा इन चावल को भी रखने की परंपरा है।




रात्रि में आयोजित होने वाले अन्नकूट उत्सव से पूर्व दिन में मंदिर के तिलकायत, उनके परिवार के लोगों, मंदिर के सेवक एवं अन्य श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर के गोवर्धन पूजा के चौक में गोबर से बड़ा सा गोवर्धन बनाकर उसकी तथा गायों की पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा के लिए नाथूवास स्थित श्रीनाथजी की गौशाला से विशेष श्रृंगार करके सुंदर सजाई हुई सैकड़ों गाए दीपावली के दिन ही करीब 11-12 लाई जाती है। इन गायों के पैरों और गले में घुंघरू बँधे होते हैं। ये गाए रुनझून करती हुई दौड़ती हुई मंदिर में प्रवेश करती है तथा बाल ग्वालों की परम्परागत हींड गायन होता है, जिसे कान्ह जगाई की रस्म कहते हैं। इन गायों की पूजा करने के बाद खेखरा का आयोजन किया जाता है जिसमें ब्रजवाली ग्वाल गायों की विशिष्ट तरीके से खेलाने के अद्वितीय और अनूठे गौक्रीडा उत्सव का आयोजन करते हैं। दीपावली के दूसरे दिन भी गोवर्धन पूजा से पूर्व एवं पश्चात गौक्रीड़ा की जाती है। यह खेखरा नाथद्वारा की विशिष्ट पहचान है तथा ऐसा गौक्रीड़ा उत्सव पूरे विश्व में और कहीं नहीं होता है। इसे देखने के लिए दूर-दराज से भारी तादाद में पर्यटक आते हैं। भीड़ का नजारा इतना अधिक होता है कि नाथद्वारा के मुख्य मार्गों पर पैर रखने की जगह भी नहीं मिलती है। गौ क्रीड़ा के लिए ग्वाल बालों की मंडली द्वारा मोरपंखों से बने टिपारे के साज, बेड़े, फूंदों, मेहंदी, हल्दी व अन्य रंगों से जतन के साथ गायों को सजाया और संवारा जाता है। श्रीनाथजी की मुख्य गऊ (जिसे स्थानीय भाषा में "माबोल" कहा जाता है) का अत्यंत आकर्षक श्रृंगार देखते ही बनता है। यह गाय सैकड़ों गायों में अलग ही पहचानी जा सकती है। इसके बदन पर श्रीनाथजी का चित्र भी बनाया जाता है। यह गाय वैष्णवों के लिए अत्यंत पूजनीय होती है। वैष्णव इसके चरण स्पर्श कर पूंछ सिर पर फेरते हैं। भीड़ में इसे मात्र छू लेने का मौका मिलने पर भी लोग स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं।

video

गऊओं के खेखरे के खेल में ग्वाल बाल किलकारी करते हुए हाथ में झुनझुना लेकर गाय के मुँह के पास बजाते हैं तो गाय बिदकती है और ग्वाल को मारने के लिए दौड़ती है तथा ग्वाल अपना बचाव करते हैं। इस उत्सव में दूसरे दिन लगभग दोपहर 12 बजे से शाम को 6-7 बजे तक ग्वाल दल गायों को खूब रिझाकर खेलाते हैं। गाएं भी उन्हें खूब छकाती है। जो गाय जितनी बिदकती, ग्वाल उसे उतना खेलाते हैं। इस बीच कोई गाय किसी ग्वाल को गिरा भी देती और घायल भी कर देती है। मंदिर मार्ग में उपस्थित भीड़ भी इन गायों के आने पर बचाव के लिए इधर उधर दौड़ती है।

2 टिप्पणियाँ:

  1. jay shree krishna. radhe radhe. aapka shreenath ji ke bare me annakoot lootne ka blog padhkar bahut hi achha laga. kripya shreenath ji bawa ke bare me hame aur bhi si tarah ki bate apne blog ke dwara batayen .shreeenath ji ke bare me padhkar bahut hi achha lagat he. isi tarah se shreenath ji se related Unki leelaye Aur Shreenath ji ke mandir ke bare me bhi jankari de. aur ye shreenath ji ko Unki dadhi me jo heera laga he vo kisne diya tha. is tarah ke kai sare Question he jo kripya aap apne blogs ke dwra hame bataye. AApka bahut bahut dhanyawaad. jay shree krishna.

    ReplyDelete
  2. श्रीमान जी आपका स्वागत है। आपके सुझाव के अनुरूप जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।

    ReplyDelete

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

स्वागतं आपका.... Welcome here.

राजस्थान के प्रामाणिक ज्ञान की एकमात्र वेब पत्रिका पर आपका स्वागत है।
"राजस्थान की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समसामयिक दृश्यों के विविध रंगों से युक्त प्रामाणिक एवं मूलभूत जानकारियों की एकमात्र वेब पत्रिका"

"विद्यार्थियों के उपयोग हेतु राजस्थान से संबंधित प्रामाणिक तथ्यों को हिंदी माध्यम से देने के लिए किया गया यह प्रथम विनम्र प्रयास है।"

राजस्थान सम्बन्धी प्रामाणिक ज्ञान को साझा करने के इस प्रयास को आप सब पाठकों का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। कृपया आगे भी सहयोग देते रहे। आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है। कृपया प्रतिक्रिया अवश्य दें। धन्यवाद।

विषय सूची

राजस्थान सामान्य ज्ञान (331) Rajasthan GK (295) GK (189) सामान्य ज्ञान (139) क्विज (130) Quiz (111) राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र (94) Rajasthan History (79) समसामयिक घटनाचक्र (75) राजस्थान की योजनाएँ (52) समसामयिकी (44) General Knowledge (43) राजस्थान का इतिहास (42) Science GK (38) विज्ञान क्विज (36) योजनाएँ (35) Science Quiz (34) सामान्य विज्ञान (30) Geography of Rajasthan (25) Question and Answer (20) राजस्थान का भूगोल (19) राजस्थान के मेले (19) राजस्थान के किले (18) Forts of Rajasthan (17) Welfare plans of Rajasthan (16) राजस्थान के दर्शनीय स्थल (15) राजस्थानी साहित्य (15) प्रतिदिन क्विज (14) राजस्थान के लोक नाट्य (14) राजस्थान की कला (13) राजस्थान के प्राचीन मंदिर (13) राजस्थान के मंदिर (12) राजस्थानी भाषा (11) राजस्थान के तीर्थ स्थल (10) राजस्थान के लोक वाद्य (9) लोक देवता (9) Folk Musical Instruments of Rajasthan (8) Minerals of Rajasthan (8) राजस्थान के अनुसन्धान केंद्र (8) राजस्थान के प्रमुख पर्व एवं उत्सव (8) राजस्थान के हस्तशिल्प (8) GK राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र (7) राजस्थान की चित्रकला (7) विज्ञान सामान्य ज्ञान (7) Tourism (6) अनुसंधान केन्द्र (6) राजस्थान के कलाकार (6) राजस्थान के खिलाड़ी (6) राजस्थान के लोक नृत्य (6) होली है (6) Fairs of Rajasthan (5) Geography of India (5) राजस्थान की जनजातियां (5) राजस्थान की नदियाँ (5) राजस्थान की स्थापत्य कला (5) राजस्थान के ऐतिहासिक स्थल (5) राजस्थान सरकार मंत्रिमंडल (5) राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार (5) Rivers of Rajasthan (4) राजस्थान में प्रजामण्डल आन्दोलन (4) राजस्थान रत्न पुरस्कार (4) राजस्थानी साहित्य की प्रमुख रचनाएं (4) forest of Rajasthan (3) अनुप्रति योजना (3) राजस्थान की जनसंख्या (3) राजस्थान के राज्यपाल (3) राजस्थान के संग्रहालय (3) राजस्थान सरकार के उपक्रम (3) राजस्थान साहित्य अकादमी (3) Handicrafts of Rajasthan (2) Metalic Minerals of Rajasthan (2) Ministers of Govt of India (2) Tourist Circuits (2) जिलानुसार झील व बाँध (2) जिलावार तहसीलों की सूची (2) भूकंप (2) राजस्थान की प्रसिद्ध दरगाहें (2) राजस्थान की मीनाकारी (2) राजस्थान की हवेलियां (2) राजस्थान के आभूषण (2) राजस्थान के जिले (2) राजस्थान के जैन तीर्थ (2) राजस्थान के महल (2) राजस्थान के महोत्सव (2) राजस्थान के रीति-रिवाज (2) राजस्थान के लोक सभा सदस्य (2) राजस्थान मदरसा बोर्ड (2) राजस्थान में कृषि (2) राजस्थान में पशुधन (2) राजस्थान में प्राचीन सभ्यताएँ (2) राजस्‍व मण्‍डल राजस्‍थान (2) राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार (2) Livestock in Rajasthan (1) Major Dialects of Rajasthani (1) folk art (1) अपराजिता (1) क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र (1) तलवारों से गैर (1) बिजौलिया किसान आंदोलन (1) बूंदी का किसान आंदोलन (1) बैराठ की सभ्यता (1) भारत की मृदा (1) भारत की स्थिति (1) भारत के उपग्रह (1) भारत के कमांडर-इन-चीफ (1) भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम (1) भारतीय मूर्तिकला (1) मीणा आन्दोलन (1) मीणाओं के आराध्य भूरिया बाबा (1) मौर्य तथा प्राचीन राजस्थान (1) रणकपुर (1) राजकीय संग्रहालय अजमेर (1) राजकीय संग्रहालय आहाड़-उदयपुर (1) राजपूताना में 1857 की क्रांति (1) राजपूतों की उत्पत्ति के मत (1) राजसमन्द का राजप्रशस्ति शिलालेख (1) राजस्थान का एकीकरण (1) राजस्थान का खजुराहो जगत का अंबिका मंदिर (1) राजस्थान का चौहान वंश (1) राजस्थान का जलियावाला बाग हत्याकांड (1) राजस्थान का नामकरण (1) राजस्थान का प्रथम मसाला पार्क (1) राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण (1) राजस्थान का राठौड़ वंश- (1) राजस्थान का वैभवशाली मूर्तिशिल्प (1) राजस्थान की खारे पानी की झीले (1) राजस्थान की प्रसिद्ध बावड़ियां (1) राजस्थान की मृदा (1) राजस्थान की वन सम्पदा (1) राजस्थान की वेशभूषा (1) राजस्थान की सीमा (1) राजस्थान की स्थिति एवं विस्तार (1) राजस्थान के अधात्विक खनिज (1) राजस्थान के उद्योग (1) राजस्थान के कला एवं संगीत संस्थान (1) राजस्थान के चित्र संग्रहालय (1) राजस्थान के तारागढ़ किले (1) राजस्थान के धरातलीय प्रदेश (1) राजस्थान के धात्विक खनिज (1) राजस्थान के प्रमुख व्यक्तियों के उपनाम (1) राजस्थान के प्रमुख शिलालेख (1) राजस्थान के प्रसिद्ध साके एवं जौहर (1) राजस्थान के लोक संत (1) राजस्थान के लोकगीत (1) राजस्थान के विधानसभाध्यक्ष (1) राजस्थान के विविध रंग का रिकार्ड (1) राजस्थान के संभाग (1) राजस्थान के संस्थान (1) राजस्थान निवेश संवर्धन ब्यूरो (1) राजस्थान बजट 2011-12 (1) राजस्थान बार काउंसिल (1) राजस्थान में गौ-वंश (1) राजस्थान में पंचायतीराज (1) राजस्थान में परम्परागत जल प्रबन्धन (1) राजस्थान में प्रथम (1) राजस्थान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक (1) राजस्थान में वर्षा (1) राजस्थान में सडक (1) राजस्थान सुनवाई का अधिकार (1) राजस्थानी की प्रमुख बोलियां (1) राजस्थानी भाषा का वार्ता साहित्य (1) राजस्थानी साहित्य का काल विभाजन- (1) राजा अजीतसिंह (1) राज्य की जलवायु (1) राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (1) राज्य महिला आयोग (1) राज्य वित्त आयोग (1) राज्य सभा सदस्य (1) रावण का श्राद्ध (1) राष्ट्रीय ऊष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (1) राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (1) राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार (1) राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (1) राष्ट्रीय हस्त शिल्प पुरस्कार (1) लैला मजनूं की मज़ार का मेला (1) विजय सिंह पथिक (1) संसदीय सचिव (1) हेरिटेज वॉक एट फोर्ट कुम्भलगढ़ (1)
All rights reserve to Shriji Info Service.. Powered by Blogger.

Disclaimer:

This Blog is purely informatory in nature and does not take responsibility for errors or content posted in this blog. If you found anything inappropriate or illegal, Please tell administrator. That Post would be deleted.

Sponsors

If you want to sponsor us for better Educational work. You are always welcome. Your donation will be used for better education of poor school children.



Please Contact us at- rajasthanstudy65@gmail.com

Advertise

Advertise here for the sake of better Education in my School situated in Rajasthan. This website has a very good numbers of audience. This website is viewed by thousands of people specially youngsters everyday. So you can get a nice audience for your product or service. You can contact us for advertisement of your business or any other kind of work which you want to explore to our audience. If you want to come along with us, then contact us. You are always welcome..



Contact us at rajasthanstudy65@gmail.com