हस्तशिल्प का नाम |
Name of Handicraft |
स्थान |
Place |
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1. ब्लू पॉटरी |
Blue pottery |
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जयपुर |
Jaipur |
2. ब्लैक पॉटरी |
Black pottery |
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कोटा |
Kota |
3. कागजी पॉटरी |
Paperwork pottery |
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अलवर |
Alwar |
4. थेवा कला |
Thewa Art |
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प्रतापगढ़ |
Pratapgarh |
5. लकड़ी के खिलौने |
Wooden toys |
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उदयपुर, डूंगरपुर, बस्सी (चितौड़) |
Udaipur, Dungarpur, Bassi (Chittorgarh) |
6. पाव रजाई |
Paw Quilt |
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जयपुर |
Jaipur |
7. पिछवाई |
Pichhwai Paintings |
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नाथद्वारा |
Nathdwara |
8. टेराकोटा मूर्तियाँ |
Terracotta Sculptures |
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मोलेला (राजसमंद), हरजी (जालौर) |
Molela (Rajsamand), Harji (Jalore) |
9. नमदा |
Felt (numdah) |
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टौंक |
Tonk |
10. दाबू प्रिंट |
Dabu Print |
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आकोला (चित्तौड़गढ़) |
Akola (Chittorgarh) |
11. मसूरिया साड़ी |
Msuria sari |
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कैथून (कोटा) |
Kaithun (Kota) |
12. अजरक प्रिंट |
Ajrak Print |
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बाड़मेर |
Barmer |
13. मोम-निर्मित दाबू प्रिंट |
Wax made Dabu Print |
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जैसलमेर |
Jaisalmer |
14. बादले |
Badle |
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जोधपुर |
Jodhpur |
15. फड़ पेंटिंग |
Scroll painting (Phad) |
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शाहपुरा (भीलवाड़ा) |
Shahpura (Bhilwara) |
16. उस्ता कला |
Usta art |
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बीकानेर |
Bikaner |
17. कावड़ कला |
Kavd Art |
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बस्सी (चित्तौड़गढ़) |
Bassi (Chittorgarh) |
18. काँच कशीदाकारी- |
Glass Embroidery |
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बाड़मेर |
Barmer |
राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास) राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...


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