Skip to main content

राज्य मंत्रिमण्डल की कैबिनेट की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय - मेयर, सभापति एवं चेयरमैन के चुनाव अब अप्रत्यक्ष प्रणाली से

राज्य मंत्रिमण्डल की कैबिनेट की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय-

मेयर, सभापति एवं चेयरमैन के चुनाव अब अप्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे-

जयपुर, 14 अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। कैबिनेट ने यह निर्णय किया कि प्रदेश में नगरीय निकायोें में नगर निगम मेयर, नगर परिषद् सभापति एवं नगर पालिका चेयरमैन के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ना होकर अप्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे। मंत्रिमंडल ने समाज में सहिष्णुता, समरसता, प्रेम और भाईचारा बनाए रखने, जनप्रतिनिधियों की लगातार मांग एवं व्यापक जनहित में यह निर्णय लिया है। 

मीसा, डीआईआर तथा सीआरपीसी बंदियों की पेंशन एवं परिलाभ बंद--

कैबिनेट ने अहम निर्णय करते हुए मीसा, डीआईआर तथा सीआरपीसी बंदियों को पिछली सरकार के समय शुरू की गई पेंशन, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य परिलाभ बंद करने को मंजूरी दी है। मंत्रिमण्डल ने इसके लिए राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि नियम, 2008 को निरस्त कर दिया है। इससे राजकोष पर पडने वाला करीब 40 करोड़ रूपये सालाना वित्तीय भार कम होगा।

टीएसपी क्षेत्र में शादी होने पर नॉन टीएसपी की महिला को भी आरक्षण का लाभ-

मंत्रिमण्डल ने अपने फैसले में कार्मिक विभाग द्वारा अनुसूचित क्षेत्र के लिए 4 जुलाई, 2016 को जारी अधिसूचना के अतिक्रमण में नई अधिसूचना जारी करने का निर्णय किया है। इससे अनुसूचित क्षेत्र के निवासी से विवाह करने वाली गैर अनुसूचित क्षेत्र की महिला को भी अनुसूचित क्षेत्र में देय आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

विधवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए कम्यूटर योग्यता में छूट-

कैबिनेट ने राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय लिपिकवर्गीय सेवा नियम-1999, राजस्थान सचिवालय लिपिकवर्गीय सेवा नियम-1970, एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग (लिपिकवर्गीय और अधीनस्थ सेवाएं) नियम और विनियम, 1999 में संशोधन को मंजूरी दी है। मंत्रिमण्डल के इस निर्णय से अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त विधवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लिपिक ग्रेड द्वितीय/कनिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति के लिए वांछित कम्प्यूटर योग्यता में शिथिलता मिलेगी और इन महिला कार्मिकों की निर्धारित समयावधि में पदोन्नति हो सकेगी।

कर्मचारी हित में विभिन्न सेवा नियमों में छूट

  • कर्मचारियों के हित को देखते हुए राज्य मंत्रिमण्डल ने विभिन्न सेवा नियमों में छूट देने संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें नागरिक उड्डयन विभाग में सृजित अर्ध कुशल मैकेनिक तथा अकुशल मैकेनिक के पदों की प्रविष्टि राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम-2017 में सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे इन पदों को सातवें वेतनमान का लाभ मिल सकेगा। 
  • इसके साथ ही मंत्रिमण्डल ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में साइकोलॉजिकल काउंसलर के पद को राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम-1965 से विलोपित करते हुए इस पद को राज्य सेवा में सम्मिलित किए जाने के कारण राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम-2017 में संशोधन को स्वीकृति दी है। इस संशोधन के बाद इस पद के अधिकारियों को पे मैट्रिक्स में लेवल-14 का वेतन मिलेगा।
  • कैबिनेट ने राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम-2008 में सहायक सांख्यिकी अधिकारी (कृषि) तथा सांख्यिकी सहायक कृषि विभाग की ग्रेड-पे में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे कृषि विभाग में नियुक्त सहायक सांख्यिकी अधिकारी तथा सांख्यिकी सहायक को आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सहायक सांख्यिकी अधिकारी तथा सांख्यिकी सहायक के समान वेतनमान प्राप्त हो सकेगा। 
  • मंत्रिमण्डल ने इसके साथ ही राजस्थान विधानसभा सचिवालय (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम-1992 में संशोधन करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इससे राजस्थान विधानसभा सचिवालय में सहायक अनुभाग अधिकारी से अनुभाग अधिकारी की पदोन्नति के लिए कार्य अनुभव तीन वर्ष के स्थान पर दो वर्ष किया जा सकेगा।

Comments

Popular posts from this blog

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

Vedic Period - Early Vedic Society वैदिक काल- प्रारम्भिक वैदिक समाज

प्रारम्भिक वैदिक समाज Vedic Period - Early Vedic Society प्रारम्भिक वैदिक समाज कबीलाई समाज था तथा वह जातीय एवं पारिवारिक संबंधों पर आधारित था। प्रारम्भिक वैदिक समाज जाति के आधार पर विभाजित नहीं था एवं विभिन्न व्यावसायिक समूह अर्थात् मुखिया, पुरोहित, कारीगर आदि एक ही जन समुदाय के हिस्से थे। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीले के लिए ‘जन’’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था और ऋग्वेद में विभिन्न जन का उल्लेख है। विभिन्न कबीलों में पारस्परिक संघर्ष सामान्य थे, जैसे ऋग्वेद में ‘‘दशराज युद्ध’’ का वर्णन हुआ है और इसी युद्ध के वर्णन से हमें कुछ कबीलों के नाम प्राप्त होते हैं जैसे भरत, पुरु, यदु, द्रहयु, अनू और तुरवासू। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीलों के युद्ध जैसे कि पहले भी कहा गया है पशुओं के अपरहय एवं पशुओं की चोरी को लेकर होते रहते थे। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’- कबीले का मुखिया ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ होता था। वह युद्ध में नेता तथा कबीले का रक्षक था। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ का पद अन्य व्यावसायिक समूहों की भांति ही पैतृक नहीं था बल्कि उसका जन के सदस्यों में से चुनाव होता था। ‘राजन्य’- योद्धा को ‘राजन्य’ क...