Skip to main content

Jan Suchana Portal Rajasthan सूचना के अधिकार से एक कदम और आगे ’जन सूचना पोर्टल’

सूचना के अधिकार से एक कदम और आगे ’जन सूचना पोर्टल’


राजस्थान सरकार ने सूचना के अधिकार से एक कदम और आगे बढ़ाने की बात की है। देश में राजस्थान पहला राज्य है जिसने आप की सूचना, आपका हक की परिभाषा को अंगीकार करते हुए सूचना को ’जन सूचना पोर्टल ( Jan Suchana Portal Rajasthan) के माध्यम से आप की सूचना आपके हाथ तक पहुंचा दी है। ’जन सूचना पोर्टल पर राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों की योजनाओं से सम्बन्धित सूचनाओं को वेब पोर्टल के माध्यम से पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है
सरकार का मानना है कि ’जन सूचना पोर्टलसे जहां आम आदमी को राहत मिलेगी वही सरकारी कामकाज में गति आएगी, वहीँ लालफीताशाही, भ्रष्टाचार से निजात मिलेगी तथा सरकारी विभागों से आरटीआई के तहत मांगी जाने वाली जानकारियों की अर्जियों में कमी आएगी और आम आदमी को संबंधित जानकारी घर बैठे सुलभ हो जाएगी।

सूचना के अधिकार को लेकर राजस्थान में ही जन आंदोलन की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय की अगुवाई में सन 1994 मैं पाली जिले के कोटकिरान से हुई थी, सन 2005 में श्रीमती सोनिया गांधी जी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने सूचना के अधिकार अधिनियम की परिकल्पना की जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने लागू किया। यह अधिनियम सरकार के कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ देश के नागरिकों को सशक्त करने के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। राजस्थान में यह अधिनियम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दूसरे कार्यकाल के समय लागू कर दिया गया।


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वे सूचना के अधिकार के प्रारंभ से ही समर्थक रहे तथा उनकी पहल पर राज्य सरकार ने जन सूचना पोर्टल की परिकल्पना की और उसे साकार करते हुए 13 सितंबर को 2019 को प्रदेश की जनता को समर्पित कर दिया। राज्य सरकार का कहना है कि जन सूचना पोर्टल के माध्यम से आमजन को सूचनाएं आसानी से उपलब्ध होगी जो सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 (2) की मूल भावना से प्रेरित है इस पोर्टल के माध्यम से प्रथम चरण में प्रदेश के नागरिकों को 13 विभागों से जुड़ी सूचनाएं सरल भाषा में एक ही प्लेटफार्म पर मिलनी प्रारंभ हो गई है

जन सूचना पोर्टल-2019 का उद्देश्य-

इसका उद्देश्य सोशल ऑडिट के साथ-साथ आम-जन को सरकारी विभागों, प्राधिकरणों, निगमों आदि में संधारित सूचनाएं क्षेत्रवार व निजी जानकारी के अनुसार सरल भाषा व आसान तरीके से उपलब्ध करवाया जाना है। परिवर्तित बजट 2019-2020 के बिन्दु संख्या 180 के अनुसार ‘‘लोकसेवकों की जवाबदेही के लिये ‘सार्वजनिक जवाबदेही कानून‘ लाया जायेगा, जो समस्त विभागों, प्राधिकरणों व निगमों पर लागू होगा।” जन-सूचना पोर्टल-2019 http://jansoochna.rajasthan.gov.in के द्वारा भी उसी कानून के तहत निष्पक्ष सूचनाएं आम-जन को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाई जावे।
जन सूचना पोर्टल-2019 अपनी तरह का पहला ऐसा प्रयास है जिसमें सरकार द्वारा वार्ड/पंचायत में क्रियान्वित सभी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध करवाई जा रही है। यह सूचना के अधिकार, 2005 क धारा 4(2) को क्रियान्वित करता हैः ”प्रत्येक लोक अधिकारी का निरंतर यह प्रयास होगा कि वह उपधारा (1) के खंड (ख) की अपेक्षाओं के अनुसार, स्वप्रेरणा से, जनता को नियमित अन्तरालों पर संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिनके अन्तर्गत इंटरनेट भी है, इतनी अधिक सूचना उपलब्ध कराने के लिए उपाय करे जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिये इस अधिनियम का कम से कम अवलंब लेना पडे़”।
जन सूचना पोर्टल 2019 पर 13 विभागों की 23 योजनाओं एवं सेवाओं की सूचना शुरुआत में शामिल की गई है जल्दी ही संख्या में इजाफा किया जाएगा। 1 वर्ष के भीतर सभी विभागों और राज्य की सभी योजनाओं को इस पोर्टल के द्वारा जोड़ा जाएगा और प्रदेश की जनता के हाथ सभी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाएगी। प्रथम चरण में सम्मिलित किए गए विभागों में ऊर्जा विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, सहकारिता विभाग, श्रम एवं रोजगार विभाग, भू प्रबंध विभाग प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ,खान एवं भूविज्ञान विभाग ,जनजाति क्षेत्रीय विकास परिषद तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग को शामिल किया गया है।

इन विभागों की जिन 23 योजना और सेवाओं को जन सूचना पोर्टल 2019  से जोड़ा गया है वे इस प्रकार हैं-
  1. महात्मा गांधी नरेगा के श्रमिकों से संबंधित जानकारी 
  2. पंचायती राज संस्थाओं के विकास कार्यों की जानकारी
  3. आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों की जानकारी
  4. खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की जानकारी
  5. राशन कार्ड धारकों की जानकारी
  6. सहकारी अल्पकालीन फसली ऋण 2019 के वितरण की जानकारी
  7. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन व तिलहन की खरीद की जानकारी
  8. शाला दर्पण शाला दर्शन की सूचनाएं
  9. सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों की जानकारी
  10. श्रमिक कार्ड धारकों की जानकारी
  11. स्टेट रेजिडेंट डाटा रिपोर्सीट्री (State Resident Data Repositry (SRDR) कार्ड धारकों की जानकारी
  12. गिरदावरी की नकल
  13. विद्युत उपभोक्ता एवं आवेदनों से संबंधित जानकारी
  14. ग्रामीण क्षेत्रें में खुले में शौच मुक्त लाभार्थियों की जानकारी
  15. मुख्यमंत्री निशुल्क दवा एवं जांच योजना की जानकारी
  16. सूचना के अधिकार की जानकारी
  17. उचित मूल्य की दुकानों की जानकारी
  18. राजस्थान कृषि योजना-2019 के लाभार्थियों की जानकारी
  19. विशेष योग्य जनों के लाभार्थियों की जानकारी
  20. पालनहार योजना एवं लाभार्थियों की जानकारी
  21. Clearance Report DMFT (District Mineral Foundation Trust) की जानकारी
  22. ईमित्र कियोस्क की जानकारी तथा 
  23. वन अधिकार अधिनियम की जानकारियां
जन सूचना पोर्टल-2019 की सूचनाएं सेल्फ सर्विस ‘‘ई-मित्र प्लस‘‘ कियोस्क के माध्यम से आमजन के लिए अपनी नजदीकी ग्राम पंचायत/पंचायत समिति/शहरी क्षेत्र में भी उपलब्ध होगी। जिसको मोबाइल एप से भी जोड़ा जा रहा है।

Comments

  1. hello,
    Your Site is very nice, and it's very helping us this post is unique and interesting, thank you for sharing this awesome information. and visit our blog site also
    best place to visit in Rajasthan

    ReplyDelete

Post a Comment

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

Popular posts from this blog

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

Vedic Period - Early Vedic Society वैदिक काल- प्रारम्भिक वैदिक समाज

प्रारम्भिक वैदिक समाज Vedic Period - Early Vedic Society प्रारम्भिक वैदिक समाज कबीलाई समाज था तथा वह जातीय एवं पारिवारिक संबंधों पर आधारित था। प्रारम्भिक वैदिक समाज जाति के आधार पर विभाजित नहीं था एवं विभिन्न व्यावसायिक समूह अर्थात् मुखिया, पुरोहित, कारीगर आदि एक ही जन समुदाय के हिस्से थे। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीले के लिए ‘जन’’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था और ऋग्वेद में विभिन्न जन का उल्लेख है। विभिन्न कबीलों में पारस्परिक संघर्ष सामान्य थे, जैसे ऋग्वेद में ‘‘दशराज युद्ध’’ का वर्णन हुआ है और इसी युद्ध के वर्णन से हमें कुछ कबीलों के नाम प्राप्त होते हैं जैसे भरत, पुरु, यदु, द्रहयु, अनू और तुरवासू। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीलों के युद्ध जैसे कि पहले भी कहा गया है पशुओं के अपरहय एवं पशुओं की चोरी को लेकर होते रहते थे। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’- कबीले का मुखिया ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ होता था। वह युद्ध में नेता तथा कबीले का रक्षक था। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ का पद अन्य व्यावसायिक समूहों की भांति ही पैतृक नहीं था बल्कि उसका जन के सदस्यों में से चुनाव होता था। ‘राजन्य’- योद्धा को ‘राजन्य’ क...