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Prasav Sakhi Programme of Rajasthan - राजस्थान का ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम

राजस्थान का ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम 

(Prasav Sakhi Programme of Rajasthan)

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने 2 अक्टूबर 2016 को प्रदेश में ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रदेश में भी अधिक प्रसवभार वाले 30 राजकीय चिकित्सालयों में तमिलनाडु एवं छत्तीसगढ़ राज्यों की तर्ज पर ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम को पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रारंभ किया गया। इनमें चुनिंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शामिल है। इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों में ‘प्रसव सखी‘ द्वारा प्रसूता को प्रसव पीड़ा में भावनात्मक सहयोग प्रदान करने एवं डिलीवरी के दौरान चिकित्सालय में उसके साथ ‘प्रसव सखी‘ के रह सकने का प्रावधान किया गया है।
इस योजना के तहत प्रसव सखी का चयन करते समय स्वयं के परिवार की प्रसव की अनुभवी महिला को प्राथमिकता दी जाती है। योजना में प्रसव के समय प्रसूता के साथ उसके परिवार की स्वस्थ एवं व्यावहारिक महिला का प्रसव सखी के रूप में सहयोग लिया जा रहा है। प्रसव सखी डिलीवरी के समय प्रसूता को भावनात्मक रूप से सहयोग देने के साथ ही जन्म के तुरंत बाद ही शिशु को स्तनपान प्रारंभ करवाने में भी अहम् भूमिका निभा रही है। प्रसव के बारे में अनुभवी परिवार की ही महिला के प्रसव सखी के रूप में मौजूद रहने से प्रसूता सहजता महसूस करती है। प्रसव सखी प्रसूता के साथ प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान एव प्रसव के पश्चात् उपस्थित रहकर प्रसूता को भावनात्मक संबल प्रदान करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह सिद्ध किया है कि विकासशील देशों में मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए प्रसव सखी का  महत्वपूर्ण योगदान हैं। हमारे देश में प्रसव सखी प्रोग्राम तमिलनाडु व छत्तीसगढ़ में भी प्रारम्भ किया जा चुका है। 

प्रसव सखी के प्रभाव -

  • प्रसव सखी के प्रभाव के बारे में किए गए एक अध्ययन के अनुसार इससे माता और शिशु के बीच में भावनात्मक संबंध स्थापित होता है। 

  • प्रसव सखी से प्रसव पश्चात् होने वाला डिप्रेशन कम होता है एवं प्रसूता व नवजात के लिए आवश्यक स्तनपान को बढ़ावा मिलता है। 

  • विशेषज्ञों के अनुसार प्रसव सखी की उपस्थिति के कारण प्रसूता के तनाव में कमी आती है। इससे गर्भाशय का संकुचन अच्छे से होता है और प्रसव सामान्य होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।  

प्रसव सखी के चयन से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे बुखार, खांसी इत्यादि संक्रमण फैलाने वाले लक्षण न हो। प्रसव कक्ष में प्रवेश करते समय प्रसव सखी द्वारा संक्रमण रोकने के लिए दिए जाने वाली सामग्री गाउन, मास्क, टोपी, चप्पल इत्यादि का उपयोग किया जाता है। प्रसव सखी का प्रसूता की रिश्तेदार होने के कारण कोई वित्तीय भार सरकार या प्रसूता पर नहीं होता। इससे चिकित्सा कर्मियों के दुर्व्यवहार की शिकायतें कम होने के साथ ही बच्चे के बदलने एवं चोरी होनी की संभावना कम होगी।
पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर ‘प्रसव सखी‘ कार्यक्रम  निम्नांकित अस्पतालों में शुरू किया गया है-
1. अजमेर - जेएलएन मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, ए.के.एच., ब्यावर, एसडीएच, किशनगढ़
2. बीकानेर संभाग में पीबीएम मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ व चूरू
3. जयपुर संभाग में सीएचसी चौमूं, फुलेरा,
4. अलवर में जिला अस्पताल अलवर, सीएचसी राजगढ़
5. सीकर जिला अस्पताल
6. दौसा जिला चिकित्सालय,
7. उदयपुर संभाग में जिला अस्पताल, बांसवाड़ा, डूंगरपुर व राजसमंद के चिकित्सालय
8. भरतपुर संभाग में जिला अस्पताल भरतपुर, सीएचसी बयाना, जिला चिकित्सालय धौलपुर
9. कोटा संभाग में जिला चिकित्सालय बूंदी, जिला चिकित्सालय बांरा व सीएचसी केलवा
10. जोधपुर संभाग में जिला चिकित्सालय बाड़मेर, जिला चिकित्सालय जैसलमेर, पाली, जालौर सिरोही के जिला अस्पतालों में तथा जोधपुर की सीएचसी भोपालगढ़ एवं सिरोही जिले की आबूरोड़ सीएचसी
प्रदेश में मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गयी प्रसव सखी योजना प्रसूताओं को प्रसव के समय भावनात्मक सहयोग प्रदान करने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

Comments

  1. Bhilwara me start ni hua kya
    Plz answer me

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