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Some Important Facts About Dairy Development in Rajasthan राजस्थान में डेयरी विकास के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य-

राजस्थान में डेयरी विकास के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य-


  • बेहतरीन दुधारू पशु की नस्लों के साथ राजस्थान के देश का एक प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्य है जो भारत में पांचवां सबसे बड़ा पशु जनसंख्या वाला राज्य भी है।

  • राजस्थान में गिर, थारपारकर, राठी और साहीवाल सबसे अच्छी दुग्ध उत्पादक स्वदेशी नस्लें हैं तथा नागौरी बैल एक प्रमुख प्रजनन नस्ल है।

  • राजस्थान राज्य भैंस जनसंख्या के मामले में भारत में दूसरे स्थान पर है। यह वर्ष 2015 में देश में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य था और राज्य में सकल दुग्ध उत्पादन करीब 17,000 लाख टन था जो भारत के कुल दूध उत्पादन का 12% है।

  • वर्ष 2015 में राजस्थान में दुग्ध उत्पादन में भैंस का सबसे बड़ा योगदान था, जिसके पश्चात् क्रमश: गाय और बकरी का योगदान दूसरा और तीसरा स्थान था।

  • राज्य में समस्त दुग्ध उत्पादन के विपणन को सहकारी समितियों के मजबूत नेटवर्क द्वारा सुगमता से किया जाता है। सहकारी समितियों का नेटवर्क एक राज्य स्तरीय शीर्ष संगठन, RCDF (राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन) के नेतृत्व में कार्यरत है।

  • वर्तमान में राजस्थान में ऐसी 13,878 डेयरी सहकारी समितियां कार्यरत है। राजस्थान में दूध का जबरदस्त उत्पादन दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों और व्यावसायिक डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है।

  • राजस्थान में डेयरी विकास सत्तर के दशक के आरम्भ में राज्य सरकार की ओर से राजस्थान राज्य डेयरी विकास निगम (Rajasthan State Dairy Development Corporation- RSDDC) के तत्वावधान शुरू किया गया था, जिसका पंजीकरण 1975 में करवाया गया था।

  • इसके दो साल बाद राजस्थान राज्य डेयरी विकास निगम-RSDDC के कार्यों में से कई कार्यों के लिए जिम्मेदारी राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) को प्रदान कर दी गई तथा यह राज्य में ऑपरेशन फ्लड के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी बन गया।

  • राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) की स्थापना राजस्थान में डेयरी विकास कार्यक्रमों के लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में 1977 की गई थी जो राजस्थान सहकारी समितियों अधिनियम 1965 के तहत पंजीकृत सहकारी समिति है।

  • राज्य की उल्लेखनीय पशु नस्लों में अजमेर और भीलवाड़ा में गिर, जैसलमेर, बाड़मेर व जोधपुर में थारपारकर, बीकानेर एवं आसपास के क्षेत्रों में राठी, सीकर, झुंझुनूं, जयपुर और गंगानगर में हरयाणवी, बाड़मेर, जालोर, सांचोर व जोधपुर में कांकरेज हैं।

  • पशुपालन राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 9% से अधिक योगदान देता है। राजस्थान भारत में सबसे ज्यादा पशुधन आबादी के साथ ऊन उत्पादन का लगभग 35% और देश के सभी दुग्ध उत्पादन का 9% योगदान देता है। 

  • राजस्थान के पशु आहार संयंत्र-

  • परियोजना                                                         स्थापना                               क्षमता


  • पशु आहार संयंत्र, तबीजी फार्म, अजमेर          1980 में                      300 टन प्रतिदिन






  • पशु आहार संयंत्र, जोधपुर                               1982 में                      300 टन प्रतिदिन



  • पशु आहार संयंत्र, बीकानेर                              1981 में                    300 टन प्रतिदिन



  • पशु आहार संयंत्र नदबई, भरतपुर                    1980 में                    300 टन प्रतिदिन



  • पशु आहार संयंत्र, लाम्बिया कलां, भीलवाड़ा     2014 में                    150  टन प्रतिदिन



  • पशु आहार संयंत्र, कालाडेरा, जयपुर              2016 में                   300 टन प्रतिदिन




   

विदेशी न्यूक्लियस फार्म, बस्सी  (जयपुर)-

विदेशी न्यूक्लियस फार्म (Exotic Nucleus Farm,Bassi) बस्सी में स्थित है जो नस्ल सुधार के द्वारा अच्छी गुणवत्ता वाले बैल का उत्पादन करने के लिए है। यहाँ राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड (RLDB) के आर्थिक सहयोग से भैंस के बछड़ों के साथ शुद्ध जर्सी नस्ल के पशुओं को फार्म पर अनुरक्षित किया जा रहा है। यहाँ से नर जर्सी बैलों को बेचा जाता है तथा बैलों के लिए आहार का भी विकास भी किया जाता है।

हिमित वीर्य बैंक, बस्सी  (जयपुर)-

यह राज्य में एक हिमित वीर्य उत्पादन स्टेशन के रूप में 1979 में स्थापित किया गया था। यह अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित उत्तरी भारत के प्रमुख शुक्राणु स्टेशन से एक है। यह क्रायोप्रिजर्वेशन की हिमित वीर्य टेक्नोलॉजी  पर कार्य करता है तथा दीर्घकाल तक जीवित रहने वाले वीर्य का उत्पादन करता है। एक वीर्य केन्द्र कृत्रिम गर्भाधान (ए आई) कार्यक्रम का केन्द्र होता है । इसका मुख्य उद्देश्य है बेहतर प्रजनन और गर्भधारण दर तथा तेज आनुवंशिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्तावाले हिमित वीर्य का उत्पादन। यहां फील्ड में उपयोग में लाए जाने वाले वीर्य का मूल्यांकन , संसाधन, संग्रहण और तत्पश्चात उसका वितरण किया जाता है।

यहाँ वर्तमान में उच्च वंशावली जर्सी बैल, होल्स्टीन फ़्रिएज़ेन, एचएफ क्रॉस और मुर्रा, राठी, सुरती, सहीवाल, गिर, कांकरेज आदि जैसी स्वदेशी नस्लों के साथ वीर्य उत्पादन के लिए बैल क्षमता 108 (मार्च-11 के अनुसार) है। इस हिमित वीर्य बैंक की उत्पादन क्षमता लगभग 25.0 लाख doses/year है। यह शुक्राणु स्टेशन राज्य के दुग्ध संघों की सम्पूर्ण वीर्य आवश्यकता तथा राज्य सरकार की आवश्यकताओं का 90% से अधिक को पूरा करता है।

चारा बीज फार्म, बस्सी (जयपुर), पाल, रोजारी (बीकानेर) - 

ये केंद्र पशुओं के चारा बीज के विकास लिए कार्यरत है। यहाँ उत्पादित प्रमुख चारा फसलें जौ, ज्वार, बाजरा, तिपतिया घास, सूडान घास, लूसर्न घास आदि हैं।

हिमित वीर्य बैंक / जर्म प्लाज्म स्टेशन, नरवा खिंचिंयान (जोधपुर) - 

यह भी राज्य में स्थापित एक हिमित वीर्य बैंक है जो बेहतर प्रजनन और गर्भधारण दर तथा तेज आनुवंशिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्तावाले हिमित वीर्य के उत्पादन में कार्यरत है, जहां राठी, थारपारकर, राठी, कांकरेज, गिर और मुर्रा प्रकार की स्वदेशी नस्लों के वीर्य प्रजनन के लिए उपलब्ध हैं।

 राजस्थान में दुग्ध उत्पादन -





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