Skip to main content

Palaces of Rajasthan राजस्थान के प्रमुख महल -




1
चन्द्रमहल (सिटी पैलेस)
जयपुर (सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित)
2
हवामहल
जयपुर में स्थित हवामहल महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा 1799  ई. में निर्मित है। पाँच मंजिला इस इमारत में 953 खिड़कियाँ है। भारतीय फारसी शैली में निर्मित इस महल की आकृति कृष्ण मुकुट के समान है। इसके वास्तुकार लालचंद उस्ता थे। 
3
शीशमहल
सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित यह महल आमेर (जयपुर) में है 
4
नारायण निवास
जयपुर
5
मुबारक महल
जयपुर (सवाई माधोसिंह द्वारा निर्मित)
6
रामनिवास बाग पैलेस
जयपुर
7
मोती डूंगरी महल
जयपुर
8
सिसोदिया रानी का महल
जयपुर
9
दीवान-ए-आम
जयपुर
10
दीवान-ए-खास
जयपुर
11
जल महल
जयपुर (सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित)
12
मोती डूंगरी महल
जयपुर (मोती सिंह जी द्वारा निर्मित)
13
जगमंदिर
उदयपुर (महाराणा जगतसिंह द्वारा निर्मित)
14
जगनिवास महल
उदयपुर (महाराणा जगतसिंह द्वारा निर्मित)
15
खुश महल
उदयपुर
16
फूल महल
उदयपुर (राणा अभयसिंह द्वारा निर्मित)
17
जूना महल
डूंगरपुर
18
एक थम्बिया महल
डूंगरपुर
19
गोपाल भवन (जल महल)
डीग (भरतपुर)
20
विनय मंदिर महल
अलवर (महाराजा जयसिंह द्वारा 1918 में निर्मित)
21
शिलादेवी महल
सिलीसेढ़ झील अलवर (महाराजा विनयसिंह द्वारा 1845 में निर्मित)
22
सरिस्का महल
अलवर (महाराजा जयसिंह द्वारा निर्मित)
23
सिटी पैलेस
अलवर
24
विजय मंदिर पैलेस
अलवर
25
पद्मनी महल
चित्तौड़गढ़ (राणा रतनसिंह द्वारा निर्मित)
26
गोरा बादल महल
चित्तौड़गढ़ (राणा रतनसिंह द्वारा निर्मित)
27
राणाकुंभा महल
चित्तौड़गढ़ (राणा कुंभा द्वारा निर्मित)
28
उम्मेद भवन पैलेस
जोधपुर (राजा उम्मेद सिंह द्वारा निर्मित)
29
तलहटी के महल
जोधपुर
30
मान महल
पुष्कर (आमेर के राजा मानसिंह द्वारा निर्मित)
31
नवलखा महल
बूंदी
32
छत्रमहल
बूंदी
33
गुलाब महल
कोटा (महाराव जैतसिंह द्वारा निर्मित)
34
जूनागढ़ महल
बीकानेर (राजा रायसिंह द्वारा निर्मित)
35
लालगढ़ पैलेस
बीकानेर
36
अनूप महल
बीकानेर
37
बादल महल
जैसलमेर
38
जवाहर महल
जैसलमेर
40
खेतड़ी महल
झुंझुनूं
41
सूरज महल
भरतपुर
42
सुजान महल
तारागढ़ अजमेर
43
काठ का रैन बसेरा महल
झालावाड़
44
मानसून पैलेस
सज्जनगढ़, उदयपुर
45
हाड़ी रानी का महल
सलूम्बर (उदयपुर)
46
फतह प्रकाश महल
उदयपुर (महाराणा फतह सिंह द्वारा निर्मित)
47
देवीगढ़  पेलेस
देलवाड़ा (राजसमन्द)
48
चौमूं महल
चौमूं (जयपुर)
49
रूठी रानी का महल
जयसमंद (उदयपुर)
50
रूठी रानी का महल
जोधपुर (मालदेव द्वारा अपनी रानी उमादे के लिए निर्मित)
51
फूल महल पैलेस
किशनगढ़ (अजमेर)
52
देवगढ़ महल
देवगढ़ (राजसमन्द)
53
दीपक महल
नागौर
54
रानी महल
नागौर
55
अमर सिंह महल
नागौर
56
राजा मानसिंह का महल
जालौर
57
राइकाबाग पैलेस
जोधपुर
58
सूरसागर के महल
जोधपुर
59
बदनोर महल
बदनौर (भीलवाड़ा)
60
खानपुर महल
धौलपुर
61
रावल पैलेस (सिटी पैलेस)
करौली (अर्जुनपाल द्वारा 14वीं शताब्‍दी में निर्मित, वर्तमान स्वरुप राजा गोपाल सिंह द्वारा)
62
हिरण्यकश्यप के महल

हिण्डौन सिटी (करौली)

63

भंवर विलास पैलेस

 

करौली (राजा गणेशपाल देव बहादुर के द्वारा 1938 में निर्मित)

64

हम्मीर महल

रणथंभौर दुर्ग (सवाई माधोपुर)

65

पुष्पक महल

रणथंभौर दुर्ग (सवाई माधोपुर)

66

पृथ्वी विलास महल

झालावाड़

67

राज निवास पैलेस (धौलपुर पैलेस)

धौलपुर

68

उदय सिंह का महल

प्रतापगढ़ (उदय सिंह द्वारा 1867 ई. में निर्मित)

69

राजा भर्तृहरि का महल

अचलगढ़, माउंट आबू

70

मोती महल

बूंदी

71

अनिरुद्ध महल

बूंदी

72

मोती महल

नाथद्वारा (राजसमन्द)

73

नीमराणा फोर्ट पैलेस

नीमराणा (अलवर)


Comments

  1. Its useful for youth who prepare the competitive exam.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thank you so much for appreciating this effort.

      Delete
  2. 40. खेतड़ी महल झुंझुनू में स्थित है खेतड़ी में नहीं।खेतड़ी में तो भोपालगढ है।

    ReplyDelete

Post a Comment

Your comments are precious. Please give your suggestion for betterment of this blog. Thank you so much for visiting here and express feelings
आपकी टिप्पणियाँ बहुमूल्य हैं, कृपया अपने सुझाव अवश्य दें.. यहां पधारने तथा भाव प्रकट करने का बहुत बहुत आभार

Popular posts from this blog

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

Vedic Period - Early Vedic Society वैदिक काल- प्रारम्भिक वैदिक समाज

प्रारम्भिक वैदिक समाज Vedic Period - Early Vedic Society प्रारम्भिक वैदिक समाज कबीलाई समाज था तथा वह जातीय एवं पारिवारिक संबंधों पर आधारित था। प्रारम्भिक वैदिक समाज जाति के आधार पर विभाजित नहीं था एवं विभिन्न व्यावसायिक समूह अर्थात् मुखिया, पुरोहित, कारीगर आदि एक ही जन समुदाय के हिस्से थे। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीले के लिए ‘जन’’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था और ऋग्वेद में विभिन्न जन का उल्लेख है। विभिन्न कबीलों में पारस्परिक संघर्ष सामान्य थे, जैसे ऋग्वेद में ‘‘दशराज युद्ध’’ का वर्णन हुआ है और इसी युद्ध के वर्णन से हमें कुछ कबीलों के नाम प्राप्त होते हैं जैसे भरत, पुरु, यदु, द्रहयु, अनू और तुरवासू। प्रारम्भिक वैदिक समाज में कबीलों के युद्ध जैसे कि पहले भी कहा गया है पशुओं के अपरहय एवं पशुओं की चोरी को लेकर होते रहते थे। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’- कबीले का मुखिया ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ होता था। वह युद्ध में नेता तथा कबीले का रक्षक था। ‘‘राजा’’ या ‘‘गोपति’’ का पद अन्य व्यावसायिक समूहों की भांति ही पैतृक नहीं था बल्कि उसका जन के सदस्यों में से चुनाव होता था। ‘राजन्य’- योद्धा को ‘राजन्य’ क...