Skip to main content

राजस्थान इतिहास की प्रमुख घटनाएँ-3

Important Historical Events Of Rajasthan-3

1. बीसलदेव (चतुर्थ विग्रहराज) ने अपने पितृहंता भाई जगदेव को हरा कर अजमेर की राजगद्दी प्राप्त की- 1152 ई

2. राव जैसल सिंह द्वारा जैसलमेर की स्थापना- 1155 ई

3. यादव तवनपाल ने बयाना से 15 मील दूर तवनगढ़ बनवाया- 1158 ई

4. जालौर के सोनगरा कीर्तिपाल ने परमारों से किराडू जीता- 1161 ई

5. इल्तुतमिश द्वारा मण्डोर पर पुन: कब्जा- 1166 ई

6. पृथ्वीराज चौहान तृतीय का जन्म- 1166 ई

7. अलवर राज्य में नीमराणा के मदनलाल ने मंडावर बसाया- 1170 ई

8. मेवाड़ के सामंत सिंह का राज्यारोहण- 1171 ई

9. पृथ्वीराज चौहान तृतीय का राज्यारोहण- 1177 ई

10. आबू के परमार नरेश धरणीवराह धारावर्ष ने मुहम्मद गोरी को हराया- 1178 ई

11. पृथ्वीराज तृतीय ने गुजरात पर आक्रमण किया तथा आबू के परमार नरेश धारावर्ष को हराया- 1187 ई

12. मुहम्मद गोरी द्वारा भटिण्डा दुर्ग पर अधिकार- 1189 ई

13. जयानक द्वारा अजमेर में "पृथ्वीराज विजय" नामक महाकाव्य की रचना- 1190 ई

14. पृथ्वीराज चौहान तृतीय तथा मुहम्मद गोरी के मध्य थानेश्वर के निकट तराइन का प्रथम युद्ध तथा गौरी की पराजय- 1191 ई

15. पृथ्वीराज चौहान तृतीय तथा मुहम्मद गोरी के मध्य तराइन का द्वितीय युद्ध तथा पृथ्वीराज की पराजय- 1192 ई

16. कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा अजमेर पर कब्जा और मुस्लिम शासक नियुक्त- 1194 ई

17. मोईनुद्दीन चिश्ती का अजमेर आगमन- 1195 ई

18. दिल्ली के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा रणथम्भौर पर कब्जा- 1226 ई

19. दिलवाड़ा में तेजपाल और वस्तुपाल द्वारा नेमिनाथ मंदिर का निर्माण- 1231 ई

20. रावत जैत्र सिंह द्वारा इल्तुतमिश पर विजय- 1234 ई

Comments

Popular posts from this blog

Aastha Scheme of Rajashan - आस्था योजना, राजस्थान Aasha Scheme of Rajashan

योजना का नाम-                 आस्था योजना     प्रारंभ होने का वर्ष-              2004-05   लाभान्वित वर्ग-        ऐसे परिवार जिनमें दो या दो से अधिक सदस्य ''40 प्रतिशत से अधिक विशेष योग्यजन (निःशक्त जन )'' है।    योजना के तहत देय लाभ-   आस्था योजना के अन्तर्गत आस्था कार्डधारी परिवार को बी.पी.एल. के समान सुविधाएं यथा-  निःशुल्क चिकित्सा,  राशन सामग्री,  इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निशुल्क आवास इत्यादि।   पात्रता की शर्तें -   1. ऐसे परिवार जिनमें दो या दो से अधिक सदस्य 40 प्रतिशत से अधिक विशेष योग्यजन होने पर, उन परिवारों को आस्था कार्ड जारी किये जाते है।   2. परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख से अधिक नहीं है। वर्तमान में आस्था कार्डधारी परिवारों को राज्य सरकार के सभी संबंधित विभागों द्वारा BPL के लिये चलाई जा रही योजन...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...