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मुख्यमंत्री ने दिया तेरह साहित्यकारों को अमृत सम्मान

मुख्यमंत्री गहलोत ने 28 जनवरी को उदयपुर के टॉउन हॉल स्थित सुखाडिय़ा रंगमंच पर आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में प्रदेश के 13 मूर्धन्य साहित्यकारों को अमृत सम्मान 2012 से सम्मानित किया। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा अकादमी के 55वें स्थापना दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा अकादमी की मासिक पत्रिका मधुमति के ''गीत" विशेषांक का विमोचन भी किया। इस विशेषांक के संपादन श्री किशन दाधीच ने किया है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समस्त प्रतिष्ठित साहित्यकारों का हार्दिक धन्यवाद दिया व बधाई अर्पित की तथा कहा कि साहित्यकारों ने सदैव समाज को नई दिशा प्रदान की है तथा संस्कृति व संस्कारों की रक्षा की है। ऐसे साहित्यकारों का सम्मान समाज व सरकार को सदैव करना चाहिए। हम प्रयास करेंगे कि विभिन्न अकादमियों को पूर्ण स्वायतत्ता तथा आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाए। उन्होंने राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री वेदव्यास को सरकार द्वारा साहित्यकारों तथा लेखकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने तथा उनको आर्थिक सहायता देने के लिए एक कोष की स्थापना करने का प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य व कला 'सत्यं शिवं सुंदरम्' का रूप है, साहित्य समाज का दर्पण है। सरकार का कर्तव्य है कि वह साहित्यकारों व गुणीजनों का संरक्षण दें। उन्होंने साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे समाज में व्याप्त जातिवाद तथा धार्मिक भेदभाव की स्थिति को कम करने के लिए साहित्य का सृजन करें तथा इन बुराइयों को बढ़ाने वाली ताकतों को करारा जवाब दें। श्री गहलोत ने घोषणा की कि जयपुर में निर्माणाधीन राजस्थान साहित्य परिषद के भवन में प्रदेश की आठों अकादमी के चेयरमैन कार्यालय स्थापित होंगे जिससे शिक्षा और साहित्य की दिशा में निर्णय लेने की प्रक्रिया सुलभ हो जाएगी।
साथ ही अकादमियों से मिलने वाले सुझावों पर भी निरंतर अमल करने तथा ग्रामीण एवं शहरी प्रतिभाओं को तराशने का कार्य भी किया जा सकेगा।
सम्मान समारोह के पश्चात मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिवर्ष एक साहित्यकार को जन्नु भाई पुरस्कार से एक लाख रुपए नकद देकर सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार स्वरूप दिए जाएंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते लिए उदयपुर के सांसद रघुवीर मीणा ने साहित्य अकादमी का भवन बनाने के लिए 11 लाख रुपए देने की घोषणा की।

सम्मानित होने वाले 13 साहित्यकारों निम्नांकित है-

1. नाथद्वारा के भगवतीप्रसाद देवपुरा

2. भरतपुर के मोहनलाल मधुकर

3. बीकानेर के श्रीहर्ष

4. जयपुर की श्रीमती नलिनी उपाध्याय

5. जयपुर के मुरलीमनोहर 'मंजुल' (उद्घोषक व क्रिकेट कमेंटट्रेटर भी)

6. उदयपुर के आबिद 'अदीब'

7. जयपुर के जयनारायण गौड

8. जयपुर के सत्येन्द्र चतुर्वेदी

9. जोधपुर के मदनमोहन परिहार

10. जयपुर के सुरेश मिश्रा

11. जोधपुर के भवानीलाल भारतीय

12. जयपुर के रणवीर सहाय वर्मा

13. कोटा के ब्रजेन्द्र कौशिक

सम्मानित होने वाले साहित्यकार को सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, 11000 रुपए सम्मान राशि और शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष वेद व्यास ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राजस्थान साहित्य अकादमी बनने के बाद पहली बार कोई मुख्यमंत्री ऐसे सम्मान समारोह कार्यक्रम में आया है। इसके प्रथम अध्यक्ष पंडित जनार्दन राय नागर थे। वर्तमान में राजस्थान की सभी अकादमियों के सभी अध्यक्ष आम आदमी है। आम आदमी के लिए साहित्य अकादमी को कार्य करना होगा। हम यह प्रयास कर रहे हैं कि राजस्थान के 21 सांस्कृतिक संस्थान मिल कर एक साथ कार्य करें तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पहल करें। अकादमी की ओर से 13 साहित्यकारों को दिया जाने वाला यह अमृत सम्मान पहली बार आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अकादमी ऐसे मूर्धन्य और वरिष्ठ साहित्यकारों को जिनकी आयु 75 वर्ष से अधिक है और जिन्होंने हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति में अपने कृतित्व से महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय योगदान दिया है तथा ऐसे साहित्यकार जिन्होंने हिन्दी पत्रकारिता के माध्यम से हिन्दी साहित्य को गौरवान्वित किया है और ऐसे शिक्षाविद् व समाजसेवी जिन्होंने अपने कृतित्व से समाज में साक्षरता के प्रचार व सामाजिक चेतना जागृति में काम किया है, को अकादमी अमृत सम्मान प्रदान कर रही है।
समारोह में विशिष्ट अतिथि वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के कुलपति डॉ. नरेश दाधीच, राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.एल. शर्मा, मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आई. वी. त्रिवेदी, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री महेन्द्र जीत सिंह मालवीय, सांसद रघुवीर मीणा, विधायक उदयपुर (ग्रामीण) श्रीमती सज्जन कटारा एवं वरिष्ठ साहित्यकार नंद चतुर्वेदी थे। इस अवसर पर विभिन्न अकादमियों के अध्यक्षों को भी शाल ओढा व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित भी किया गया।

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