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राजस्थान सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी - 28 सितंबर 2011

1. राजस्थान में किस त्यौहार पर महिलाएँ नर बछड़े वाली दुधारू गाय की पूजा करती है, बिना कटी सब्जी व मक्का की रोटी खाती है तथा गाय का दूध काम में नहीं लेती है?

उत्तर- वत्स द्वादशी या बच्छ बारस को

2. राजस्थान में खेतों में सिंचाई करने की प्रक्रिया को कहते हैं?

उत्तर- पाणत करना

3. राजस्थान में बंधुआ मजदूरी प्रथा का अन्य नाम क्या है?

उत्तर- सागड़ी प्रथा

4. राजस्थान में सती प्रथा को सर्वप्रथम किस रियासत में गैर कानूनी घोषित किया था?

उत्तर- बूँदी में

5. राजस्थान में साझा द्वारा खेती की प्रथा में कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की जमीन पर खेती करता है जिसमें उसे उपज का आधा या निश्चित हिस्सा मिलता है। इस प्रकार खेती करने वाले व्यक्ति को क्या कहते हैं?
उत्तर- सिजारी

6. किस प्रथा को सहगमन या अन्वारोहण भी कहा जाता था?

उत्तर- सती प्रथा को

7. किसी व्यक्ति की मृत्यु पर इसके 11 वें या 12 वें पर दिए जाने वाले भोज को क्या कहते हैं?

उत्तर- मौसर

8. विवाह के दूसरे दिन दिए जाने वाले सामूहिक प्रीतिभोज को क्या कहा जाता है?

उत्तर- बढ़ार

9. बारात की विदाई पर वधू पक्ष द्वारा बारातियों को दिया जाने वाला उपहार देने की परंपरा को क्या कहते हैं?

उत्तर- पहरावणी या रंगबरी

10. राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में शाक सब्जी व अन्य सामान खरीदने के बदले में दिया जाने वाला अनाज को क्या कहते हैं?

उत्तर- कीणा या आकीणा

Comments

  1. आपने बहुत अच्छा ब्लॉग बनाया है ...बहुत ही लाभ प्रद है |...धन्यवाद

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  2. सराहना के लिए अत्यधिक आभार। कृपया इस ब्लॉग को इसी प्रकार स्नेह सिंचित करते रहें।

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  3. aapne bahut hi ache blog like h aishi jaankari hame bade bade writter ki books se bi nahi mil sakti thanku very very thanku

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  4. आपका कोटिश: धन्यवाद। आप पाठकों की सराहना हमारा उत्साहवर्धन करती है।रा उत्साहवर्धन करती है।

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  5. Is blog me sanchit jaankari ek pustak se bhi adhik hai aur woh bhi nishulk uplabdh.
    Aapka saadhuvaad

    ReplyDelete
  6. आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको हमारा यह प्रयास पसंद आया। इस ब्लॉग का मकसद राजस्थान के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को उत्कृष्ट सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराना ही रहा है। आप जैसे सुधी पाठकों के पसंद करने से ही हमारा उत्साह बढ़ा तथा एक वर्ष के इस सफर में इस पत्रिका ने एक नए मुकाम को छुआ। करने को अभी बहुत कुछ बाकी है किंतु संसाधनों और समय के अभाव में उस गति से नहीं कर पा रहें हैं। फिर भी प्रयास जारी है। आशा है आपका स्नेह और संबल निरंतर बना रहेगा।

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