Skip to main content

राजस्थान की योजनाएँ-
महिलाओं को कम्प्यूटर बेसिक कोर्स प्रशिक्षण की नई योजना

राजस्थान सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने घरेलू व कामकाजी दोनों ही वर्गों की महिलाओं को राज्य सरकार की ओर से कंप्यूटर का बेसिक प्रशिक्षण दिलवाने की नई योजना प्रारंभ की है जिसमें प्रशिक्षण का पूरा व्यय राज्य सरकार उठाएगी। इस योजना में अलग अलग शैक्षिक योग्यता के आधार पर महिलाओं को कम्प्यूटर के दो पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा जिनके नाम क्रमशः R.S.C.I.T. (राजस्थान स्टेट सर्टिफिकेट कोर्स इन इंफोर्मेशन टेक्नोलोजी) एवं डिजिटल सहेली हैं। आरएससीआईटी के 3 महीने के पाठ्यक्रम में 16 से 45 वर्ष तक की दसवीं पास महिलाएं प्रवेश ले सकेंगी जबकि एक महीने के डिजिटल सहेली पाठयक्रम में 11 से 50 वर्ग तक की पांचवी पास महिलाएँ प्रवेश ले सकेगी। महिलाएँ दोनों पाठ्यक्रमों में से किसी एक में ही आवेदन कर सकेंगी।
यह प्रशिक्षण RKCL (राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के स्थानीय केन्द्र में दिया जाएगा। प्रशिक्षण हेतु महिलाएँ अपनी इच्छा अनुसार आरकेसीएल सेंटर का चयन कर सकेगी। आवेदन पत्र में उसे इसके लिए दो विकल्प भरकर देने होंगे। राज्य सरकार द्वारा फिलहाल आरएससीआईटी में 20 हजार तथा डिजिटल सहेली में 48 हजार महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें प्रति सेंटर लगभग 15 महिलाओं का लक्ष्य तय किया गया है। सभी महिलाओं को पाठ्यक्रम पूरा होने पर प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। प्रशिक्षण की इच्छुक निर्धारित योग्यताधारी आशार्थी महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट, आरकेसीएल की वेबसाइट अथवा स्थानीय आरकेसीएल केन्द्र से आवेदन पत्र भरकर महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी या उपनिदेशक कार्यालय या आरकेसीएल केन्द्र पर 15 जुलाई तक जमा करा सकेगी। इसके बाद सभी आवेदन पत्र उपनिदेशक कार्यालय में एकत्रित किए जाएंगे। जिला स्तर पर उपनिदेशक, कार्यक्रम अधिकारी, आरकेसीएल जिला प्रभारी की देखरेख में आवेदन पत्रों की जांच की जाएगी तथा जिलेवार लक्ष्यों के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। लक्ष्य की तुलना में अधिक आवेदन होने पर स्वयं सहायता समूह, किशोरी मंडल की सदस्य, ग्रामीण प्रशिक्षणार्थी तथा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला स्तरीय चयन सूची का प्रकाशन 25 जुलाई को किया जाएगा।

Comments

Popular posts from this blog

Aastha Scheme of Rajashan - आस्था योजना, राजस्थान Aasha Scheme of Rajashan

योजना का नाम-                 आस्था योजना     प्रारंभ होने का वर्ष-              2004-05   लाभान्वित वर्ग-        ऐसे परिवार जिनमें दो या दो से अधिक सदस्य ''40 प्रतिशत से अधिक विशेष योग्यजन (निःशक्त जन )'' है।    योजना के तहत देय लाभ-   आस्था योजना के अन्तर्गत आस्था कार्डधारी परिवार को बी.पी.एल. के समान सुविधाएं यथा-  निःशुल्क चिकित्सा,  राशन सामग्री,  इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निशुल्क आवास इत्यादि।   पात्रता की शर्तें -   1. ऐसे परिवार जिनमें दो या दो से अधिक सदस्य 40 प्रतिशत से अधिक विशेष योग्यजन होने पर, उन परिवारों को आस्था कार्ड जारी किये जाते है।   2. परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख से अधिक नहीं है। वर्तमान में आस्था कार्डधारी परिवारों को राज्य सरकार के सभी संबंधित विभागों द्वारा BPL के लिये चलाई जा रही योजन...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...