Skip to main content

राजस्थान की योजनाएँ-
मुख्यमंत्री सहायता कोष

दुर्घटना में घायल/मृतक आश्रित हेतु सहायता-

आकस्मिक दुर्घटना में घायल होने वालों तथा प्राकृतिक आपदा/आकस्मिक दुर्घटना में मृतकों के आश्रितों को इस कोष से तात्‍कालिक सहायता स्‍वीकृत की जाती है। मृतक के आश्रितों को 20,000/- तक तथा गम्‍भीर रूप से घायल व्‍यक्ति को 5000/- एवं साधारण रूप से घायल व्‍यक्ति को 2500/- तक की सहायता स्‍वीकृत की जाती है। सहायता सम्‍बन्धित जिला कलेक्‍टर द्वारा स्‍वीकृत की जाती है। सहायता स्‍वीकृति हेतु सम्‍बन्धित जिला कलेक्‍टर के कार्यालय में साधारण प्रार्थना पत्र, चोट प्रतिवेदन/पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट, एफआई.आर. की प्रति प्रस्‍तुत करना होता है।

गंभीर रोग के उपचार हेतु सहायता-

राजस्‍थान में स्थित किसी भी राजकीय चिकित्‍सालय, औषधालय अथवा मुख्यमंत्री सहायता कोष से अधिकृत सुपर स्‍पेशियलिटी चिकित्‍सालयों में इलाज हेतु आर्थिक सहायता दी जाती है।

> इस योजना में वे परिवार आते हैं जिनकी वार्षिक आय 60000/- या इससे कम हैं।

> ह्रदय रोग, गुर्दा रोग, केंसर रोग इत्यादि गम्‍भीर रोग के लम्‍बे समय तक चलने वाले उपचार के लिए एकमुश्‍त सहायता स्‍वीकृत की जाती है।

> उपचार से पूर्व आवेदन प्रस्‍तुत करना आवश्‍यक है।

प्रार्थना पत्र के साथ निम्‍नलिखित प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्‍यक है-

(i) गम्‍भीर रोग से पीड़ितों के चिकित्‍सा हेतु सहायता के लिए सादा कागज पर प्रार्थना पत्र।
प्रार्थना पत्र निम्नलिखित पते पर भेजना होता है-
मुख्‍यमंत्री सहायता कोष कमरा नं. 22-पी, मुख्‍य भवन, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान

(ii) तहसीलदार द्वरा जारी किया गया आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 60000/- या इससे कम होने का प्रमाण पत्र (मूल अथवा सत्यापित प्रति)

(iii) अनुमानित चिकित्‍सा व्‍यय का चिकित्‍सक द्वारा प्रमाणित विवरण, जिस पर उपचार अवधि, ऑपरेशन दिनांक आदि अंकित हो तथा संबंधित चिकित्‍सालय की स्‍पष्‍ट मोहर अंकित हो।

(iv) परिवार की वार्षिक आय का 10/- नॉन ज्‍यूडिशियल स्‍टाम्‍प पेपर पर नोटरी पब्लिक से प्रमाणित शपथ पत्र।

(v) राशन कार्ड की फोटो प्रति।

सामान्य सहायता-

सामान्य सहायता मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न संस्था/व्यक्तियों को स्वीकृत की जाती है।

Comments

Popular posts from this blog

Kaun tha Hashmat Wala Raja Rao Maldev - कौन था हशमत वाला राजा राव मालदेव

राव मालदेव राठौड़ का इतिहास | History of Rao Maldev Rathod (मालदेओ राठौड़ इतिहास)   राव मालदेव का जन्म 5 दिसंबर 1511 को हुआ था । वह अपने पिता राव गांगा को मारकर 5 जून, 1532 को जोधपुर के राज्य सिंहासन पर आसीन हुए थे । इसलिए इसे पितृहंता शासक कहते हैं। जिस समय राव मालदेव ने गद्दी संभाली, उस समय दिल्ली के शासक मुगल बादशाह हुमायूँ थे । राव मालदेव की माँ का नाम रानी पद्मा कुमारी था जो सिरोही के देवड़ा शासक जगमाल की पुत्री थी । जैसलमेर के शासक राव लूणकरण की पुत्री उमादे से राव मालदेव का विवाह हुआ था । रानी उमादे विवाह की प्रथम रात्रि को ही अपने पति से रूठ गई और आजीवन उनसे रूठी रही । इस कारण उमादे इतिहास में ‘ रूठी रानी ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गई । राव मालदेव की मृत्यु होने पर रानी उमादे सती हो गई । मालदेव के राज्याभिषेक के समय जोधपुर और सोजत परगने ही उनके अधीन थे। वीर और महत्वाकांक्षी राव मालदेव ने शासन संभालते ही राज्य प्रसार का प्रसार करने पर ध्यान केंद्रित किया और जल्दी ही उन्होंने सींधल वीरा को परास्त कर भाद्राजूण पर अधिकार कर लिया। साथ ही फलौदी को जैसलमेर के भाटी शास...

How to do scientific farming of fennel - कैसे करें सौंफ की वैज्ञानिक खेती

औषधीय गुणों से भरपूर है सौंफ - प्राचीन काल से ही मसाला उत्पादन में भारत का अद्वितीय स्थान रहा है तथा 'मसालों की भूमि' के नाम से विश्वविख्यात है। इनके उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी भूमिका हैं। इस समय देश में 1395560 हैक्टर क्षेत्रफल से 1233478 टन प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन हो रहा है। प्रमुख बीजीय मसालों में जीरा, धनियां, सौंफ व मेथी को माना गया हैं। इनमें से धनिया व मेथी हमारे देश में ज्यादातर सभी जगह उगाए जाते है। जीरा खासकर पश्चिमी राजस्थान तथा उत्तर पश्चिमी गुजरात में एवं सौंफ मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार तथा मध्य प्रदेश के कई इलाकों में उगाई जाती हैं। हमारे देश में वर्ष 2014-15 में सौंफ का कुल क्षेत्रफल 99723 हैक्टर तथा इसका उत्पादन लगभग 142995 टन है, प्रमुख बीजीय मसालों का उत्पादन व क्षेत्रफल इस प्रकार हैं। सौंफ एक अत्यंत उपयोगी पादप है। सौंफ का वैज्ञानिक नाम  Foeniculum vulgare होता है। सौंफ के दाने को साबुत अथवा पीसकर विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे सूप, अचार, मीट, सॉस, चाकलेट इत्यादि में सुगन्धित तथा रूचिकर बनाने में प्रयोग कि...

rajasthan gk Grasses of Rajasthan - राजस्थान में पशुचारे के लिए उपयोगी घासें

1. सेवण घास- सेवण घास का वानस्पतिक नाम: लेसीयूरस सिंडीकस (Lasiurus Sindicus) सेवण एक बहुवर्षीय घास है। यह पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है। यह घास 100 से 350 मिमी. वर्षा वाले क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण घास है। इसमें जड़ तन्त्र अच्छा विकसित होता है, इस कारण यह सूखा सहन कर सकती है। यह कम वर्षा वाली रेतीली भूमि में भी आसानी से उगती है। सेवण का चारा पशुओं के लिए पौष्टिक तथा पाचक होता है। भारत के अलावा यह घास मिश्र, सोमालिया, अरब व पाकिस्तान में भी पाई जाती है। भारत में मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान, पंजाब व हरियाणा में पाई जाती है। राजस्थान में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर व चूरु जिले में यह अन्य घासों के साथ आसानी से उगती हुई पाई जाती है। इसकी मुख्य विशेषता है कि यह रेतीली  मिट्टी में आसानी से पनपती है, इसी कारण यह थार के रेगिस्तान में बहुतायत से विकसित होती है। इसको घासों का राजा भी कहते हैं। इसका तना उर्ध्व, शाखाओं युक्त लगभग 1.2 मीटर तक लम्बा होता है। इसकी पत्तियां रेखाकार, 20-25 सेमी. लम्बी तथा पुष्प गुच्छा 10 सेमी. तक लम्बा होता है। ...