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समसामयिक घटनाचक्र

ऊर्जा संरक्षण भवन दिशा निर्देशों से संबंधित अधिसूचना का अनुमोदन-

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मंत्रिमण्डल की दिनांक 22 मार्च को हुई बैठक में भवनों में ऊर्जा के दक्ष उपयोग एवं इसके संरक्षण के लिए ऊर्जा संरक्षण भवन दिशा निर्देशों से संबंधित अधिसूचना का अनुमोदन किया गया। यह दिशा निर्देश सौ किलोवाट लोड से अधिक उपयोग करने वाले व्यावसायिक भवनों पर लागू होगा। इन दिशा निर्देशों की पालना से 30 से 40 प्रतिशत बिजली की बचत हो सकेगी।

रेफल्स विश्वविद्यालय नीमराना ( अलवर ) विधेयक, 2011 पारित-

राज्य विधानसभा ने 22 मार्च को रेफल्स विश्वविद्यालय नीमराना ( अलवर ) विधेयक, 2011 ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक में गोम्बर एजुकेशन फाउण्डेशन, नई दिल्ली को राज्य में निजी क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित करने की अनुमति दी गई है। इससे राज्य में विश्वस्तरीय उत्कृष्ट शोध, अनुसंधान एवं अध्ययन सुविधाओं का सृजन होगा।

निःशक्तजनों के पेंशन नियमों में संशोधन-

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निःशक्तजन पेंशन नियमों की आय सीमा में संशोधन की स्वीकृति प्रदान की है। अब जिन परिवार की सम्मिलित वार्षिक आय सीमा शहरी क्षेत्र में 16 हजार रुपए एवं ग्रामीण क्षेत्र में 14 हजार रुपए होगी, वे निःशक्तजन पेंशन पाने के पात्र हो सकेंगे। पूर्व में सम्मिलित वार्षिक आय सीमा क्रमशः 12,000 व 10,000 रुपए थी।

धामा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति बने-

राज्यपाल शिवराज पाटिल ने कृषि वैज्ञानिक ए. के. धामा को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया है। राजभवन से इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
वे अभी इंस्टीट्यूट ऑफ एग्री बिजनेस मैनेजमेंट के निदेशक हैं।

मोटर यान कराधान संशोधन अधिनियम-

राज्य विधानसभा में 24 मार्च को राजस्थान मोटर यान कराधान अधिनियम, 1951 में संशोधन पारित कर दिया। इसके पारित होने से सरकार गैर-परिवहन यान व परिवहन यानों से ग्रीन टैक्स के रूप में अलग- अलग राशि उपकर के रूप में वसूल कर सकेंगी।
इस अधिनियम संख्या 11 की धारा 4-घ में संशोधन कर ग्रीन कर का प्रावधान किया गया। इस अधिनियम की धारा 4, 4- ख और 4-ग के अधीन लगाए गए कर के अतिरिक्त वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न उपायों का प्रावधान किया गया है। इसके तहत गैर परिवहन यान की श्रेणी में आने वाले दो पहिया वाहनों से रजिस्ट्री के समय अधिकतम 750 रुपए और दो पहिया से भिन्न वाहनों पर रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र नवीनीकरण के समय अधिकतम 1,500 रुपए उपकर लगेगा। इसी प्रकार परिवहन वाहनों की श्रेणी में आने वाले वाहनों से सही हालत में होने के प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के समय अधिकतम 600 रुपए लिए जाएँगे।

शीतलाष्टमी पर शील की डूंगरी में भरा मेला-

धार्मिक नगरी जयपुर के लिए शुक्रवार दिनांक 25 मार्च का दिन विशेष रहा। शीतलाष्टमी के पावन पर्व पर घर-घर में शीतल व्यंजनों से शीतला माता की आराधना के साथ ही शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर चाकसू स्थित शील की डूंगरी में परंपरागत दो दिवसीय मेला भरा। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी शील की डूंगरी का मेला परवान पर रहा। न कोई अमीर, न कोई गरीब हरेक भक्त मातेश्वरी शीतला माता के दर्शनों की आस्था लिए शील की डूंगरी पर करीब तीन सौ मीटर की सीढ़ियाँ चढ़ कर मंदिर में पहुँचा और अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरा वातावरण शीतला माता के जयकारों से गूंज रहा था। अन्य दिनों में वीरान सी नजर आने वाली शील की डूंगरी का आसपास का करीब पांच किलोमीटर का दायरा हर वर्ग के हजारों भक्तों से भरा था। माता की आस्था के साथ लगे इस दो दिवसीय इस मेले में गुरुवार दिनांक 24 मार्च देर रात से ही माता के दर्शनों के लिए लंबी कतारे लगना शुरू हो गई थी, जो शुक्रवार तक रही। आरोग्य और सुख की कामना से दूर दूर से आए भक्तों ने माता के समक्ष धान अर्पित किया और माता को नारियल, चुनरी भेंट कर मालपुए का भोग लगाया।

यहाँ ये तथ्य उल्लेखनीय है कि-

>शीतला माता के इस मंदिर का पुनः निर्माण माधोसिंह द्वितीय ने करवाया था।

> शीतला माता को चेचक की देवी माना जाता है।

> शीतला माता की पूजा खंडित प्रतिमा के रूप में होती है।

> शीतला माता के पुजारी कुम्हार जाति के लोग होते हैं।

> गधे को शीतला माता का वाहन माना जाता है।

रामद्वारा शाहपुरा का फूलडोल उत्सव-

भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा स्थित रामस्नेही संप्रदाय की प्रधान पीठ रामधाम में गुरुवार 24 मार्च को आस्था का ज्वार के बीच पाँच दिवसीय फूलडोल उत्सव का समापन हुआ। राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब व उत्तराखंड के अलावा सिंगापुर व वियतनाम से यहां पहुंचे हजारों भक्तों ने रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिक फूलडोल महोत्सव में भाग लिया।

इस अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा के समय भक्तजनों पर अहमदाबाद से आए रिमोट संचालित हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई। यह क्रम दो घंटे से भी ज्यादा समय तक चला।

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