12/22/2016 07:55:00 pm
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दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना

1-उद्देश्यः-

राजस्थान राज्य की लगभग 77 प्रतिशत जनसंख्या 39753 गांवों में निवास करती है । ग्रामीण विकास की अनेक योजनाओं के उपरान्त भी अधिकांश ग्रामों में कुछ आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। जनसंख्या के बढ़ते दबाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बिजली, सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं आदि मूलभूत सुविधाओं की मांग निरन्तर बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र की आबादी का पलायन शहरों की ओर होने लगा है। ग्रामीण विकास की वर्तमान अवधारणा पर पुनःविचार कर गांवों के समग्र विकास की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि वहां के लोगों को आर्थिक एवं सामाजिक आधारभूत सुविधाऐं उपलब्ध हो सके एवं उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। उक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2006-07 से ‘‘दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना’’ प्रारम्भ करने का निर्णय लिया।

2-चयनः-

राज्य के सभी छोटे-बड़े ग्रामो में सामाजिक एवं आर्थिक आधारभूत सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराया जाना सम्भव नहीं है। प्रथम चरण में राज्य सरकार ने वर्ष 2006-07 में 50 गांवों को ‘‘दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम’’ बनाने का निर्णय लिया। इस प्रकार राज्य में प्रति 10 लाख की आबादी पर एक ग्राम का चयन किया जाने का प्रावधान किया गया। ग्राम पंचायत मुख्यालय वाले ऐसे ग्राम जिनकी जनसंख्या 3000 अथवा इससे अधिक हो, ‘‘दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम’’ के लिए आवेदन करने के लिए पात्र रखे गए। इनका चयन ग्रामीणों की मांग एवं सहभागिता के आधार पर किया गया। उपरोक्तानुसार पात्रता वाली इच्छुक ग्राम पंचायते अपनी ग्राम सभा में निम्न बिन्दुओं पर सर्व-सम्मति से प्रस्ताव पारित कर आवेदन पत्र मय संकल्प जिला परिषद को भिजवाना निश्चित किया गया:
2.1-ग्राम में विवादों को स्थानीय स्तर पर आपसी समझौते से यथा-सम्भव निपटारा करने का संकल्प ।
2.2-चरागाह भूमि पर उसके एक भाग, जो एक चौथाई से कम न हो पशुओं की खुली चराई पर प्रतिबन्ध लगाना, उसमें चारा विकास एवं वृक्षारोपण करना ।
2.3-ग्राम के रास्तों, आबादी भूमि एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग की सम्पति के अतिक्रमणों को तीन माह में हटवाना ।
2.4-पानी की प्रत्येक बूँद की बचत के लिए घरों में एवं सामुदायिक सुविधाओं में जल संग्रहण को अपनाना ।
2.5-ग्राम के प्रत्येक परिवार द्वारा प्रतिमाह दो दिवस का श्रमदान देना अथवा रू.150 प्रति माह देना, जो ग्राम की विकास योजनाओं में काम में ली जा सकें ।
2.6- वृक्षारोपण को बढ़ावा देना ।
2.7-बाल विवाह एवं मृत्युभोज की कुप्रथा को रोकना ।
2.8-परिवार नियोजन को अपनाते हुए दो बच्चों तक ही परिवार को सीमित रखने का संकल्प ।
2.9- 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा दिलाना ।
2.10-सभी बच्चों को टीकाकरण करवाना ।
2.11-संस्थागत प्रसव को अपनाना या ग्राम की प्रशिक्षित दाई से प्रसव करवाना।
2.12-सभी पात्र महिलाओं एवं बच्चों को आँगनबाड़ी केन्द्रों पर भेजकर आवश्यक पोषाहार एवं सेवाएं दिलवाना।
2.13-आधुनिक कृषि तकनीकी अपनाने का संकल्प जिसमें वर्मी कम्पोस्ट, उन्नत बीज, उन्नत पौध तैयार करना व पानी का कुशलतम उपयोग हेतु फव्वारा सिंचाई , ड्रिप सिंचाई पद्वति को अपनाना ।
2.14- भविष्य में ग्राम की आबादी विस्तार के लिये ‘‘मास्टर -प्लान’’ तैयार कर उसी के अनुरूप विकास कराना।

3-चयन में प्राथमिकताः-

पात्रता वाले ग्रामों के आवेदन पत्र जिला परिषद को प्राप्त होने पर उनकी प्राथमिकताऐं निम्न बिन्दुओं के आधार पर तय की गई:-
3.1- गत पंचायत चुनावों में निर्विरोध चुनी गई ग्राम पंचायत वाले ग्राम।
3.2-जिन ग्रामों मे गत तीन वर्षो में कोई एफ.आई.आर दर्ज नही हुई हो या न्यूनतम दर्ज हुई हो।
3.3-जिला परिषद की साधारण सभा में सर्व सम्मति से लिया गया निर्णय ।
         उपरोक्तानुसार पात्र ग्रामों की प्राथमिकता की सूची जिला परिषद द्वारा राज्य सरकार को अन्तिम चयन हेतु भिजवाई जाती है। राज्य स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदन के पश्चात् ‘‘दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्रामों’’ की स्वीकृति पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की जाती है ।

4-योजना का प्रचार प्रसार:-

सभी गांवों की ग्राम सभाओं में इस योजना का सघन प्रचार-प्रसार ।

5-आदर्श ग्राम की रूपरेखाः-

आदर्श ग्राम के लिये चयनित ग्राम का समग्र विकास कराने की दृष्टि से निम्नांकित आर्थिक एवं सामाजिक आधारभूत सुविधाऐं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है:-

6-आर्थिक आधारभूत सुविधाऐंः-

6.1-चयनित ग्राम के आसपास के ग्रामों से पक्की सड़कों द्वारा सम्पर्क।
6.2-चयनित ग्राम का विद्युतीकरण।
6.3-सार्वजनिक परिवहन सुविधा 2 किलोमीटर क्षेत्र में ।
6.4-कृषि आदान एवं ऋण सुविधाएं ।
6.5-दूरभाष सुविधाएं ।
6.6-ई-कियोस्क, ई-चौपाल।
6.7-वर्षा जल संचय ।
6.8-जल ग्रहण विकास ।
6.9-चरागाह विकास ।
6.10-स्थानीय उपज पर आधारित लघु उद्योग, कुटीर उद्योग एवं हैण्डीक्राफ्ट को प्रोत्साहन ।
6.11-कृषि उपज आधारित व्यापार को प्रोत्साहन ।
6.12-क्षमता निर्माण हेतु तकनीकी प्रशिक्षण ।
6.13-स्वयं सहायता समूह, विशेष रुप से महिला समूह के माध्यम से आर्थिक उत्पादन को बढ़ावा ।

7-सामाजिक आधारभूत सुविधाऐं:-

7.1-प्राथमिक शाला/माध्यमिक विद्यालय ।
7.2-आंगनबाड़ी केन्द्र ।
7.3-शुद्ध पेयजल ।
7.4- गंदे पानी की निकासी व्यवस्था ।
7.5-चौपाल ।
7.6-खेल के मैदान ।
7.7-घरेलू कचरा डालने एवं गाड़ने के लिए स्थान का निर्धारण।
7.8-स्वच्छता (घरेलू सुलभ शौचालय, सामुदायिक शौचालय एवं इनकी सफाई व्यवस्था)
7.9-उचित मूल्य की दुकान ।
7.10-ए.एन.एम./प्रशिक्षित दाई ।
7.11-कृत्रिम गर्भाधान व मूल पशु स्वास्थ्य हेतु गोपाल ।
7.12-गांव में उद्यान ।
7.13-सौर ऊर्जा की स्ट्रीट लाईट ।
7.14-पोषण सुधार हेतु घरेलू सब्जी उत्पादन ।
7.15-पुस्तकालय ।
7.16- छत के पानी हेतु घरेलू टांका ।
7.17-प्रत्येक घर में निर्धूम चूल्हा ।
7.18-कम से कम 30 % घरों में गोबर गैस प्लान्ट ।
7.19-बी0पी0एल के सभी परिवारों को आर्थिक सहायता, राजकीय कार्यक्रमों के अन्तर्गत प्रशिक्षण, परिवार के एक सदस्य को 100 दिवस का रोजगार एवं उनके लिए खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य देख-भाल व शिक्षा ।
7.20-ग्राम की विरासत एंव संस्कृति की रक्षा को बनाये रखने के लिए धार्मिक स्थलों पर्वो, त्यौहारो एंव स्थानीय मेलों एवं स्थानिय खेलों को सुरक्षित रखना।
7.21-भविष्य में ग्राम का विकास मास्टर प्लान के अनुसार कराना ।
7.22-हड्डारोडी का निश्चित स्थान पर विकास ।

8-विकास प्लान तैयार करने के निर्देश:-

ग्राम में विद्यमान आधारभूत सुविधाओं एवं आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की पहचान कर, इसकी कमी की पूर्ति के लिए तीन वर्षो का विकास प्लान तैयार करना ।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अनुभवी स्वयं सेवी संस्था अथवा अच्छी साख वाली संस्था के माध्यम से ग्राम का विकास प्लान, ग्रामीणों के तथा पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेकर, ग्राम सेवक ग्राम स्तरीय एवं ब्लाॅक स्तरीय विभिन्न विभागीय अधिकारियों, विकास अधिकारी आदि के सहयोग से यह विकास प्लान वर्ष 2006-09 तैयार करने के निर्देश हैं।
विकास प्लान में आर्थिक एवं सामाजिक आधारभूत सुविधाओं की वर्तमान स्थिति, इनकी आवश्यकता, इनकी कमी को पूरा करने हेतु निश्चित लक्ष्य एवं इनकी प्राप्ति के लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाने का ध्यान रखा जाना है। वर्तमान में चल रही योजनाओं के भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य एवं उनकी प्राप्ति के लिए समयबद्ध कार्यक्रम आदि को दर्शाने तथा प्लान में प्रस्तावित निर्माण कार्यो के एस्टीमेट भी बनाकर संलग्न करने के निर्देश हैं। प्रस्तावित प्लान में शामिल गतिविधियों के लिए वर्तमान योजनाओं से उपलब्ध होने वाली राशि एवं शेष आवश्यक राशि को दर्शाना प्लान में अनिवार्य है। उपरोक्तानुसार ग्राम का समग्र विकास प्लान तैयार करके  तथा इसका अनुमोदन ग्राम सभा में करवाकर स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजा जाने के निर्देश हैं। राज्य स्तरीय समिति से अनुमोदित होने पर, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता अनुसार विकास प्लान की प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृति पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की जाती है।

9- गाँव का मास्टर प्लान तैयार करनाः-

अनुभवी संस्था से ग्राम का मास्टर प्लान निम्नांकित बिन्दुओं के मध्यनजर तेैयार कराना होता है :-
9.1-वर्तमान बसावट की स्थिति के अनुसार मैपिंग ।
9.2-आगामी 25 वर्षो के विस्तार को ध्यान में रखते हुए पर्सपेक्टिव प्लान।
9.3-ग्राम की धरोहर को बनाए रखना ।
9.4-वर्तमान सामुदायिक सुविधाओं में सुधार/विस्तार को अंकित करना ।
ग्रामीणों के सहयोग से उपरोक्तानुसार तैयार किये गये मास्टर प्लान को अनुमोदन ग्राम सभा में कराना आवश्यक है ।

10-ग्रामीण समुदाय की जागरूकता, सहभागिता -

चयनित ग्राम को आदर्श बनाने की प्रक्रिया के साथ-साथ ग्रामीण समुदाय में जागरूकता, सहभागिता अत्यन्त आवश्यक है। सामाजिक बदलाव के लिए ग्रामीणों के रहन सहन, स्वच्छता, सफाई, जल बचत, परिवार कल्याण, बाल विवाह, मृत्यु भोज आदि विभिन्न गतिविधियों पर प्रारम्भ से ध्यान देकर सघन क्रियान्विति की आवश्यकता है । यह कार्य एक स्वयं सेवी संस्था के माध्यम से करवाना प्रस्तावित है।

11- दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम की क्रियान्वितिः-

दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम की क्रियान्विति के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम विकास समिति, जिला स्तर एवं राज्य स्तर की समितियों का गठन निम्नानुसार किया जाता है -

12-ग्राम विकास समितिः-

ग्राम स्तर पर योजना की क्रियान्विति के लिए ग्राम सभा द्वारा एक ग्राम विकास समिति का गठन किया जाता है । वहाँ कार्यरत स्वयं सेवी संस्था द्वारा तकनीकी मार्ग दर्शन इस समिति को दिया जाता है। ग्राम पंचायत का सरपंच इस समिति का अध्यक्ष होता है तथा सदस्य सचिव ग्राम सेवक होता है। समिति के अन्य 8-10 सदस्यों का चयन ग्राम सभा में किया जाता है।
विकास कार्यो एवं गतिविधियों का सामाजिक अंकेक्षण प्रत्येक त्रैमासिक ग्राम सभा में किया जाना आवश्यक है।

13-जिला स्तरीय समिति:-

दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना की क्रियान्विति एवं मोनीटरिंग हेतु जिला स्तर पर निम्नानुसार समिति का गठन का प्रावधान है :-
जिला कलेक्टर                                         -     अध्यक्ष
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद   -      सदस्य सचिव
जिला शिक्षा अधिकारी                               -     सदस्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी     -      सदस्य
अधिशाषी अभियंता जन स्वा.अभि.विभाग -      सदस्य
अधिशाषी अभियंता, सार्व.निर्माण विभाग -        सदस्य
अधिशाषी अभियंता, विद्युत विभाग         -        सदस्य
उप निदेशक पशुपालन                             -         सदस्य
संबंधित स्वयं सेवी संस्था का अध्यक्ष      -          सदस्य
जिला समाज कल्याण अधिकारी             -           सदस्य
संबंधित विकास अधिकारी                      -           सदस्य
समस्त आदर्श ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष-   सदस्य

14-राज्य स्तरीय समितिः-

दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना के प्रोजेक्ट को अनुमोदन करने एवं योजना की क्रियान्विति की मोनिटरिंग करने हेतु निम्नानुसार समिति के गठन का प्रावधान है, जिसके आदेश पृथक से प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी किये गए हैं ।
मुख्यमंत्री                                                   -    अध्यक्ष
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री         -     सदस्य
कृषि मंत्री                                                    -     सदस्य
शिक्षा मंत्री                                                   -    सदस्य
जन.स्वा.अभि. एवं सिचाई मंत्री                    -     सदस्य
सार्व.निर्माण मंत्री                                         -     सदस्य
सहकारिता मंत्री                                            -    सदस्य
चिकित्सा मंत्री                                              -     सदस्य
मुख्य सचिव                                                 -     सदस्य
अति.मुख्य सचिव (विकास)                           -     सदस्य
अति.मुख्य सचिव (इन्फ्रास्टेक्चर)                  -     सदस्य
संबंधित विभागों के प्रमुख शासन सचिव/शासन सचिव -  सदस्य
शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज सदस्य -    सचिव

15-योजना के वित्तीय प्रावधानः-

दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना के चयनित गांवों में आर्थिक एवं सामाजिक आधारभूत सुविधाओं का विकास वहाँ चल रही विभिन्न विभागीय योजनाओं के उपलब्ध बजट प्रावधान में प्राथमिकता देकर करने का प्रावधान है। इन साधनों के उपयोग के पश्चात् भी यदि ग्राम के समग्र विकास प्लान (वर्ष 2006-2009) के कार्यो को पूरा करने हेतु अतिरिक्त व्यय राशि की आवश्यकता होती है तो उसे योजना मद से उपलब्ध कराने के निर्देश है। इस प्रकार प्रथम चरण में वर्ष 2006-07 में 50 गांवों का चयन कर उन्हें आदर्श गांव बनाने का प्रावधान किया गया है।

16- योजना से अनुमानित प्रतिफलः-

दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना के सफल क्रियान्वयन से निम्नांकित प्रतिफलों का अनुमान लगाया गया हैः
16.1- ग्रामीण जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार ।
16.2- ग्राम समुदाय के सहयोग से समग्र आर्थिक एवं सामाजिक विकास ।
16.3- प्राकृतिक संसाधनो के नवीनीकरण से आजीविका में सुधार ।
16.4- शहरों की और पलायन में कमी ।
16.5- भविष्य में योजना के विस्तार के लिए अनुभव ।

स्रोत-http://www.rajpanchayat.rajasthan.gov.in/LinkClick.aspx?fileticket=u9f3BrblD3U%3d&tabid=230&portalid=0&mid=1665&language=hi-IN

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