1. इलेक्ट्रोन वोल्ट किसका मात्रक है?
उत्तर- ऊर्जा का
2. प्रकाश विद्युत उत्सर्जन में ऊर्जा रूपांतरण किस प्रकार होता है?
उत्तर- प्रकाश ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण होता है।
3. फोटोन का विराम द्रव्यमान कितना होता है?
उत्तर- शून्य
4. चट्टानों पर उगने वाले पादप क्या कहलाते हैं?
उत्तर- शैलोद्भिद
5. मोलर द्रव्यमान की इकाई क्या होती है?
उत्तर- ग्राम प्रति मोल
6. यूरिया पोधों में किस तत्व की आपूर्ति करता है?
उत्तर- नाईट्रोजन
7. स्थानीय वनस्पति के नमूनों का संग्रह क्या कहलाता है?
उत्तर- हर्बेरियम
8. लाल, हरे एवं बैंगनी रंग के प्रकाश में से सबसे कम आवृति व अधिक तरंग देर्ध्य का फोटोन किसका होता है?
उत्तर- लाल रंग के प्रकाश का
9. पारा, जर्मेनियम, अभ्रक तथा कार्बन में से कौन परावैद्युत पदार्थ है?
उत्तर- अभ्रक
10. एक साबुन के बुलबुले को ऋणावेशित करने पर उसकी त्रिज्या पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर- बढ़ जाएगी।
"राजस्थान की कला, संस्कृति, इतिहास, भूगोल और समसामयिक दृश्यों के विविध रंगों से युक्त प्रामाणिक एवं मूलभूत जानकारियों की एकमात्र वेब पत्रिका" "यह राजस्थान से संबंधित विभिन्न प्रामाणिक जानकारियों को हिंदी माध्यम से देने के लिए किया गया प्रथम विनम्र प्रयास है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होगा।" राजस्थान के मूलग्राही (Original) तथा प्रामाणिक ज्ञान को साझा करने के इस प्रयास को आप सब पाठकों का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। इस हेतु धन्यवाद।
राजस्थान के मूलभूत ज्ञान की एकमात्र वेब पत्रिका पर आपका स्वागत है।
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Wednesday, June 29, 2011
Tuesday, June 28, 2011
आज की क्विज- 28 जून 2011
आज से हम एक नई क्विज शुरू कर रहे हैं जिसमें हमारी पिछली पोस्ट से प्रश्न से या और कहीं से प्रश्न दिया जाएगा। आप कृपया कमेन्ट में अपना उत्तर दें।
प्रश्न- नाथद्वारा की पिछवाई चित्रकला में चित्र किस पर बनाए जाते हैं?
(अ) कागज पर
(ब) लकड़ी पर
(स) कपड़े पर
(द) मार्बल पर
प्रश्न- नाथद्वारा की पिछवाई चित्रकला में चित्र किस पर बनाए जाते हैं?
(अ) कागज पर
(ब) लकड़ी पर
(स) कपड़े पर
(द) मार्बल पर
प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए लहर (LEHAR- Learning Enhancement Activity in Rajasthan) कार्यक्रम
प्राथमिक शिक्षा में विद्यार्थियों के नामांकन और ठहराव को बढ़ाने एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सत्र 2008-09 में राज्य में सर्व शिक्षा अभियान द्वारा UNICEF के सहयोग से लहर (LEHAR) कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। लहर का पूरा नाम Learning Enhancement Activity in Rajasthan है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में सर्व शिक्षा अभियान का संचालन करने वाली "राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद, जयपुर" की ओर से चयनित प्राथमिक विद्यालयों में विभिन्न विषयों की वर्क-बुक्स, बच्चों को सरल व रोचक ढंग से गणित, हिन्दी व अंग्रेजी की अवधारणा स्पष्ट करने के लिए गतिविधि आयोजन के लिए किट, विभिन्न गतिविधियों के कार्ड आदि सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस सामग्री से विद्यार्थी गिनती, जोड-बाकी, अंकों की पहचान, सामान्य ज्ञान, शब्दों की पहचान आदि की सहजता से अधिगम के लिए गतिविधियाँ आयोजित की जाती है। लहर के प्रारंभिक चरण में राज्य के 31 जिलों के शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े 186 ब्लॉक के 4710 विद्यालयों तथा जयपुर शहर के 25 विद्यालयों को शामिल किया गया। सत्र 2010-11 में यह कार्यक्रम 1432 नए विद्यालयों में भी प्रारंभ किया गया। वर्ष 2011 के अंत तक यह कार्यक्रम राज्य के सभी 33 जिलों सभी 237 ब्लॉक के कुल 10560 विद्यालयों में संचालित किया जा रहा है। लहर के तहत बाल मित्र कक्ष का निर्माण भी किया गया है जिसमें गतिविधि आधारित शिक्षण अधिगम के लिए सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। कक्षा एक व दो के बच्चों में शिक्षा की ललक जगाने के लिए तैयार कराए गए लहर कक्ष की तीन दीवारों पर विद्यार्थियों द्वारा कार्य करने के लिए ब्लैक बोर्ड तथा एक दीवार में आलमारी या दराज तैयार की गई है जिनमें उनके खिलौने, फ्लैश कार्ड आदि सामग्री रखी जाती है। जमीन पर चौकियां बिछा कर उन पर खिलौने, फ्लैश कार्ड आदि को रख कर बालक खेल-खेल में अक्षर व संख्या ज्ञान प्राप्त करते हैं।
Monday, June 27, 2011
शिक्षक शिक्षा सुदृढ़ीकरण और विद्यालय उन्नयन की दिशा में एक और पहल
6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने में शिक्षकों का दायित्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा के अधिकार कानून की राज्य में क्रियान्विति के व्यापक स्तर पर शिक्षिकों की क्षमता संवर्धन और व्यावसायिक संबलन की आवश्यकता है। शिक्षकों की क्षमता संवर्धन के लिए सेवापूर्व तथा सेवारत शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा पाठ्यचर्या में सुधार करने के लिए "आईआईसीआईसी फाउंडेशन फॉर इंक्ल्यूसिव ग्रोथ" तथा राज्य सरकार के मध्य हाल ही में एक एम. ओ. यू. किया गया है जिसके तहत राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIERT) उदयपुर में एक "यूनिट फॉर टीचर एजुकेशन" का गठन किया गया है। इस यूनिट में चार अधिकारी आईसीआईसीआई फाउंडेशन के और चार अधिकारी एसआईईआरटी से नियुक्त किए हैं। इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए अध्यक्ष, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर को बनाया गया है।
टीचर एजुकेशन यूनिट के प्रमुख कार्य-
> सेवापूर्व शिक्षक प्रशिक्षण ( S.T.C. ) कार्यक्रम का नवीन पाठ्यक्रम निर्माण|
> डाईट व SIERT के संकाय सदस्यो (faculty Members) सहित शिक्षक प्रशिक्षकों का क्षमता संवर्धन करना तथा इनके बहुस्तरीय (multi-tier) अकादमिक संबल तंत्र में समन्वय में वृद्धि करना।
> निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-2009 (RTE-2009) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF- 2005) के संदर्भों के परिप्रेक्ष्य में कक्षा 1 से 5 तक की नवीन पाठ्यपुस्तकों का निर्माण।
>चयनित दो जिलों चुरु व बारां के क्रमशः सुजानगढ़ तथा शाहाबाद में RTE के प्रावधानों को आदर्श रूप में पूर्णतः लागू करने के कुल 100 विद्यालयों में शिक्षा सुधार के कार्यक्रम का संचालन।
> कार्यक्रम के अंतर्गत लिए गए दोनों जिलों के चयनित ब्लॉक में शिक्षकों व विद्यार्थियों के संबल के लिए एक ई-लर्निग हब का विकास करना।
> इस कार्यक्रम में 500 मास्टर ट्रेनर्स, 80-100 नोडल प्रधानाध्यापक, 20,000 छात्राध्यापक, 250 मुख्य संदर्भ व्यक्तियों तथा लगभग 2,10,000 सेवारत शिक्षकों के प्रशिक्षण का लक्ष्य है जो संपूर्ण राज्य में लगभग 8 मिलियन विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करेंगे।
इसी संदर्भ में पाठ्यपुस्तक निर्माण संबंधी एक दो दिवसीय कार्यशाला SIERT उदयपुर में दिनांक 27 जून को प्रारंभ हुई जिसकी अध्यक्षता शिक्षा सचिव श्रीमती वीनू गुप्ता ने की। श्रीमती गुप्ता ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज राज्य की सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा में गुणवत्ता सुधार है तथा गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में अंग्रेजी, गणित तथा विज्ञान विषय दुष्कर साबित हुए हैं। आज शिक्षा में आरटीई के रूप में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है जिसमें भी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा की तरह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात पर जोर दिया गया है। विद्यालयों में शिक्षा सुधारनी है तो हमें इसके हर मोर्चे पर सुधार करना होगा जिसमें शिक्षक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण एवं नवीन पाठ्यक्रम व पाठ्यपुस्तक निर्माण अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों में सतत और व्यापक मूल्यांकन को भी एकीकृत करना होगा। राज्य सरकार इस हेतु विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से कार्य कर रही है। इस कार्यशाला में ICICI फाउन्डेशन के अध्यक्ष श्री सुब्रतो चटर्जी, उपाध्यक्ष डॉ सुधांशु जोशी व अन्य अधिकारी, NCERT के डॉ रंजना अरोड़ा, डॉ अमरेन्द्र बहेरा, डॉ मेघनाथन, एकलव्य संस्था के श्री अरविन्द सरधाना, श्री प्रमोद मिथाली, एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के श्री उत्पल चक्रवर्ती के अलावा एसआईईआरटी के सभी संकाय सदस्यों ने भाग लिया तथा राजस्थान के संदर्भ में नवीन पाठ्यपुस्तक निर्माण पर विचार विमर्श किया।
टीचर एजुकेशन यूनिट के प्रमुख कार्य-
> सेवापूर्व शिक्षक प्रशिक्षण ( S.T.C. ) कार्यक्रम का नवीन पाठ्यक्रम निर्माण|
> डाईट व SIERT के संकाय सदस्यो (faculty Members) सहित शिक्षक प्रशिक्षकों का क्षमता संवर्धन करना तथा इनके बहुस्तरीय (multi-tier) अकादमिक संबल तंत्र में समन्वय में वृद्धि करना।
> निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-2009 (RTE-2009) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF- 2005) के संदर्भों के परिप्रेक्ष्य में कक्षा 1 से 5 तक की नवीन पाठ्यपुस्तकों का निर्माण।
>चयनित दो जिलों चुरु व बारां के क्रमशः सुजानगढ़ तथा शाहाबाद में RTE के प्रावधानों को आदर्श रूप में पूर्णतः लागू करने के कुल 100 विद्यालयों में शिक्षा सुधार के कार्यक्रम का संचालन।
> कार्यक्रम के अंतर्गत लिए गए दोनों जिलों के चयनित ब्लॉक में शिक्षकों व विद्यार्थियों के संबल के लिए एक ई-लर्निग हब का विकास करना।
> इस कार्यक्रम में 500 मास्टर ट्रेनर्स, 80-100 नोडल प्रधानाध्यापक, 20,000 छात्राध्यापक, 250 मुख्य संदर्भ व्यक्तियों तथा लगभग 2,10,000 सेवारत शिक्षकों के प्रशिक्षण का लक्ष्य है जो संपूर्ण राज्य में लगभग 8 मिलियन विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करेंगे।
इसी संदर्भ में पाठ्यपुस्तक निर्माण संबंधी एक दो दिवसीय कार्यशाला SIERT उदयपुर में दिनांक 27 जून को प्रारंभ हुई जिसकी अध्यक्षता शिक्षा सचिव श्रीमती वीनू गुप्ता ने की। श्रीमती गुप्ता ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज राज्य की सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा में गुणवत्ता सुधार है तथा गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में अंग्रेजी, गणित तथा विज्ञान विषय दुष्कर साबित हुए हैं। आज शिक्षा में आरटीई के रूप में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है जिसमें भी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा की तरह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात पर जोर दिया गया है। विद्यालयों में शिक्षा सुधारनी है तो हमें इसके हर मोर्चे पर सुधार करना होगा जिसमें शिक्षक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण एवं नवीन पाठ्यक्रम व पाठ्यपुस्तक निर्माण अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों में सतत और व्यापक मूल्यांकन को भी एकीकृत करना होगा। राज्य सरकार इस हेतु विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से कार्य कर रही है। इस कार्यशाला में ICICI फाउन्डेशन के अध्यक्ष श्री सुब्रतो चटर्जी, उपाध्यक्ष डॉ सुधांशु जोशी व अन्य अधिकारी, NCERT के डॉ रंजना अरोड़ा, डॉ अमरेन्द्र बहेरा, डॉ मेघनाथन, एकलव्य संस्था के श्री अरविन्द सरधाना, श्री प्रमोद मिथाली, एससीईआरटी छत्तीसगढ़ के श्री उत्पल चक्रवर्ती के अलावा एसआईईआरटी के सभी संकाय सदस्यों ने भाग लिया तथा राजस्थान के संदर्भ में नवीन पाठ्यपुस्तक निर्माण पर विचार विमर्श किया।
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज-
27 जून 2011
1. प्रदेश में प्रत्येक जिला अस्पताल में वृद्धजन की देखभाल के लिए बनाए गए केन्द्रों के नाम क्या है?
Ans. जेरियोट्रिक केन्द्र
2. अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को रोजगारोन्मुख तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा जयपुर के खोनागोरियान, जोधपुर के बाप, अलवर के तिजारा, नागौर के मकराना तथा श्रीगंगानगर के पदमपुर में कौनसे संस्थान खोले गए?
Ans. आई. टी. आई.
3. जनजाति बालिकाओं के लिए उदयपुर जिले में किस स्थान पर मॉडल पब्लिक स्कूल खोला गया है?
Ans. ढीकली गाँव में
4. सैनिकों की विधवाओं को आवास उपलब्ध कराने के लिए राज्य में कौनसी योजना संचालित है जिसके अंतर्गत जयपुर के प्रतापनगर में 211 आवास बनाए गए हैं?
Ans. वीरांगना विहार योजना
5. दिल्ली राष्ट्र मंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय महिला एथलेटिक्स टीम के प्रशिक्षक को राज्य सरकार द्वारा 2.50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई, इनका नाम क्या है?
Ans. राजेन्द्र शर्मा
6. निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 राजस्थान में कब से लागू हुआ?
Ans. 1 अप्रैल 2010
7. प्राथमिक शिक्षा को गतिविधि आधारित बनाकर उसमें गुणवत्तापूर्ण और अधिक परिणाममूलक बनाने के लिए राज्य में शिक्षा विभाग व सर्व शिक्षा अभियान द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से 33 जिलों के सभी ब्लॉक के 10560 प्राथमिक विद्यालयों में "लहर (LEHAR)" कार्यक्रम चलाया जा रहा है? LEHAR का पूरा नाम क्या है?
Ans. Learning Enhancement Activities in Rajasthan
8. डिस्कस थ्रो की अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी कृष्णा पूनिया के कोच का नाम क्या है?
Ans. वीरेन्द्र पूनिया
9. कथौड़ी जनजाति का निवास स्थल कौनसा जिला है?
Ans. उदयपुर
10. शिक्षा से संबंधित S. M. C. का पूरा नाम क्या है?
Ans. School Management Committe
Ans. जेरियोट्रिक केन्द्र
2. अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को रोजगारोन्मुख तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा जयपुर के खोनागोरियान, जोधपुर के बाप, अलवर के तिजारा, नागौर के मकराना तथा श्रीगंगानगर के पदमपुर में कौनसे संस्थान खोले गए?
Ans. आई. टी. आई.
3. जनजाति बालिकाओं के लिए उदयपुर जिले में किस स्थान पर मॉडल पब्लिक स्कूल खोला गया है?
Ans. ढीकली गाँव में
4. सैनिकों की विधवाओं को आवास उपलब्ध कराने के लिए राज्य में कौनसी योजना संचालित है जिसके अंतर्गत जयपुर के प्रतापनगर में 211 आवास बनाए गए हैं?
Ans. वीरांगना विहार योजना
5. दिल्ली राष्ट्र मंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय महिला एथलेटिक्स टीम के प्रशिक्षक को राज्य सरकार द्वारा 2.50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई, इनका नाम क्या है?
Ans. राजेन्द्र शर्मा
6. निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 राजस्थान में कब से लागू हुआ?
Ans. 1 अप्रैल 2010
7. प्राथमिक शिक्षा को गतिविधि आधारित बनाकर उसमें गुणवत्तापूर्ण और अधिक परिणाममूलक बनाने के लिए राज्य में शिक्षा विभाग व सर्व शिक्षा अभियान द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से 33 जिलों के सभी ब्लॉक के 10560 प्राथमिक विद्यालयों में "लहर (LEHAR)" कार्यक्रम चलाया जा रहा है? LEHAR का पूरा नाम क्या है?
Ans. Learning Enhancement Activities in Rajasthan
8. डिस्कस थ्रो की अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी कृष्णा पूनिया के कोच का नाम क्या है?
Ans. वीरेन्द्र पूनिया
9. कथौड़ी जनजाति का निवास स्थल कौनसा जिला है?
Ans. उदयपुर
10. शिक्षा से संबंधित S. M. C. का पूरा नाम क्या है?
Ans. School Management Committe
Sunday, June 26, 2011
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज-
26 जून 2011
1. बीजक पहाड़ी कहाँ स्थित है?
उत्तरः विराटनगर
2. राजस्थान के किन जिलों से कर्क रेखा गुजरती है?
उत्तरः बाँसवाड़ा और डूंगरपुर
3. कुरजाँ पक्षी का विहार स्थित कहाँ है?
उत्तरः खींचन
4. राजा नागभट्ट प्रथम किस राजवंश के थे?
उत्तरः गुर्जर प्रतिहार
5. मत्स्य संघ का प्रधानमंत्री किसे बनाया गया था?
उत्तरः शोभाराम को
6. हकीम खाँ सूरी किसके सेना नायक थे?
उत्तरः महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध में
7. मालदेव के पश्चात मारवाड का शासक कौन बना?
उत्तरः चंद्रसेन
8. भूरिया बाबा किसके आराध्य देव है?
उत्तरः गोडवाड़ के मीणाओं के
9. "संत भूरी बाई अलख" का कार्य क्षेत्र कहाँ था?
उत्तरः मेवाड़ (नाथद्वारा में)
10. सरोवर गड़सीसर कहाँ है?
उत्तरः जैसलमेर में
उत्तरः विराटनगर
2. राजस्थान के किन जिलों से कर्क रेखा गुजरती है?
उत्तरः बाँसवाड़ा और डूंगरपुर
3. कुरजाँ पक्षी का विहार स्थित कहाँ है?
उत्तरः खींचन
4. राजा नागभट्ट प्रथम किस राजवंश के थे?
उत्तरः गुर्जर प्रतिहार
5. मत्स्य संघ का प्रधानमंत्री किसे बनाया गया था?
उत्तरः शोभाराम को
6. हकीम खाँ सूरी किसके सेना नायक थे?
उत्तरः महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध में
7. मालदेव के पश्चात मारवाड का शासक कौन बना?
उत्तरः चंद्रसेन
8. भूरिया बाबा किसके आराध्य देव है?
उत्तरः गोडवाड़ के मीणाओं के
9. "संत भूरी बाई अलख" का कार्य क्षेत्र कहाँ था?
उत्तरः मेवाड़ (नाथद्वारा में)
10. सरोवर गड़सीसर कहाँ है?
उत्तरः जैसलमेर में
समसामयिक घटनाचक्र-
राजस्थान निःशक्त व्यक्तियों के नियम 2011 को मंत्रिमंडल की स्वीकृति
दिनांक 23 जून को मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की पहल पर राज्य मंत्रिमंडल ने प्रदेश के निःशक्तजनों के हित में एक अभूतपूर्व निर्णय करते हुए ‘राजस्थान निःशक्त व्यक्तियों के नियम- 2011‘ को स्वीकृति दी है।
इस नियम के प्रभाव में आने से प्रदेश में निःशक्तजनों को राजकीय क्षेत्र में नौकरी के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। उन्हें सभी राजकीय विभागों, उपक्रमों, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्रों एवं अनुदानित संस्थाओं में नौकरी के लिए आरक्षण निर्धारित रोस्टर बिन्दुओं के द्वारा उपलब्ध होगा। मंत्रिमंडल के इस निर्णय से भविष्य में भारत सरकार द्वारा सरकारी नियुक्तियों में देय आरक्षण के अनुरूप ही अब प्रदेश में भी निःशक्तजनों को आरक्षण उपलब्ध हो सकेगा।
राज्य में निवासरत निःशक्तजनों हेतु राजकीय विभागों, उपक्रमों, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्रों एवं अनुदानित संस्थाओं में नियोजन के लिए अब तक ‘राजस्थान निःशक्त व्यक्तियों का नियोजन नियम- 2000‘ लागू था। नए नियम को स्वीकृति दिए जाने से अब पुराना नियम निरसित हो जाएगा।
इस निर्णय के बाद अब सभी राजकीय, सहकारी, निजी एवं अनुदानित संस्थाओं में इसी क्रम में निःशक्तजन को नियुक्ति दिया जाना अनिवार्य होगा।
नियम के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान-
> निःशक्तजनों कोपूर्व में निःशक्तता प्रमाण पत्र तीन चिकित्सकों के चिकित्सा बोर्ड द्वारा दिए जाने का प्रावधान था। निःशक्तता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में संशोधन कर एकल निःशक्तता हेतु प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक को निःशक्तता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अधिकृत किया गया एवं बहुनिःशक्तता होने पर मेडिकल बोर्ड को निःशक्तता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है।
> निःशक्तता प्रमाण-पत्र जारी करने या नहीं करने के विरूद्ध निःशक्त व्यक्ति राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत मेडिकल अथोरिटी के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकेगा।
> एक राज्य समन्वय समिति के गठन किए जाने का प्रावधान है जो प्रत्येक छह माह में बैठक कर निःशक्तजनों के हितों से संबंधित विषयों की समीक्षा करेगी।
> इसमें एक राज्य कार्यकारी समिति का भी प्रावधान है, जो प्रत्येक तिमाही बैठक करेगी।
> नियमों में नेत्रहीन व दृष्टिअल्पता, श्रवण बाधित, लोकोमोटर डिसएबल्टी या सेरेब्रल पॉल्सी श्रेणी के निःशक्तों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
> राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा की जाने वाली किसी नियुक्तियों के लिए आयोग के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा नामित सदस्य की अध्यक्षता में गठित समिति की अभिशंषा के बाद ही निःशक्त आरक्षण में छूट देय होगी जबकि राजस्थान लोक सेवा आयोग के क्षेत्राधिकार के बाहर की जाने वाली किसी नियुक्ति के लिए निःशक्तजन आरक्षण में छूट कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अभिशंषा के बाद ही दी जा सकेगी।
> निःशक्तजनों को किसी भी भर्ती परीक्षा की अर्हता में 5 प्रतिशत की छूट किसी एक विषय में और कुल प्राप्तांकों में दिये जाने का प्रावधान किया गया है।
> निःशक्तजनों को अस्थाई नियुक्ति के लिए प्रशिक्षण, परीक्षा और अनुभव की अर्हता से मुक्त रखा गया है। यदि किसी अस्थाई नियुक्ति में प्रशिक्षण आवश्यक हो, वहाँ निःशक्तजनों को प्रशिक्षण दो वर्ष में पूर्ण करना होगा।
> अधिकतम आयु सीमा में सामान्य श्रेणी के निःशक्तों को दस वर्ष, अन्य पिछडा वर्ग एवं विशेष पिछडा वर्ग के निःशक्तों को 13 वर्ष, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के निःशक्तों को 15 वर्ष की छूट प्रदान की गई है।
> निःशक्तजन को रोजगार हेतु प्रतियोगी परीक्षा एवं साक्षात्कार में सम्मिलित होने पर नियमानुसार बस या रेल किराए के पुनर्भरण का प्रावधान किया गया है।
> निःशक्तजनों के कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के पंजीयन के लिए जिले के अतिरिक्त जिला कलक्टर को अधिकृत किया गया है।
> नियोक्ताओं को प्रत्येक तिमाही में नियुक्ति संबंधी सूचना विशेष रोजगार कार्यालय को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
> निःशक्तजनों को उनकी योग्यता एवं क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया।
विकलांग तैराक किरण टांक को मुख्यमंत्री ने दिया 80 हजार का विशेष अनुदान
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता तैराक सुश्री किरण टांक को उच्च अध्ययन हेतु हाल ही में 80 हजार रुपए का विशेष अनुदान स्वीकृत किया। विकलांग खिलाड़ी सुश्री किरण टांक ने अपने खेल कौशल को निखारने के लिए राष्ट्रीय खेल संस्थान (एन.आई.एस.) से डिप्लोमा करने की इच्छा व्यक्त की थी लेकिन गरीबी की वजह से वह शुल्क चुकाने में असमर्थ थी।
इस नियम के प्रभाव में आने से प्रदेश में निःशक्तजनों को राजकीय क्षेत्र में नौकरी के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। उन्हें सभी राजकीय विभागों, उपक्रमों, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्रों एवं अनुदानित संस्थाओं में नौकरी के लिए आरक्षण निर्धारित रोस्टर बिन्दुओं के द्वारा उपलब्ध होगा। मंत्रिमंडल के इस निर्णय से भविष्य में भारत सरकार द्वारा सरकारी नियुक्तियों में देय आरक्षण के अनुरूप ही अब प्रदेश में भी निःशक्तजनों को आरक्षण उपलब्ध हो सकेगा।
राज्य में निवासरत निःशक्तजनों हेतु राजकीय विभागों, उपक्रमों, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्रों एवं अनुदानित संस्थाओं में नियोजन के लिए अब तक ‘राजस्थान निःशक्त व्यक्तियों का नियोजन नियम- 2000‘ लागू था। नए नियम को स्वीकृति दिए जाने से अब पुराना नियम निरसित हो जाएगा।
इस निर्णय के बाद अब सभी राजकीय, सहकारी, निजी एवं अनुदानित संस्थाओं में इसी क्रम में निःशक्तजन को नियुक्ति दिया जाना अनिवार्य होगा।
नियम के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान-
> निःशक्तजनों कोपूर्व में निःशक्तता प्रमाण पत्र तीन चिकित्सकों के चिकित्सा बोर्ड द्वारा दिए जाने का प्रावधान था। निःशक्तता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में संशोधन कर एकल निःशक्तता हेतु प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक को निःशक्तता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अधिकृत किया गया एवं बहुनिःशक्तता होने पर मेडिकल बोर्ड को निःशक्तता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है।
> निःशक्तता प्रमाण-पत्र जारी करने या नहीं करने के विरूद्ध निःशक्त व्यक्ति राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत मेडिकल अथोरिटी के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकेगा।
> एक राज्य समन्वय समिति के गठन किए जाने का प्रावधान है जो प्रत्येक छह माह में बैठक कर निःशक्तजनों के हितों से संबंधित विषयों की समीक्षा करेगी।
> इसमें एक राज्य कार्यकारी समिति का भी प्रावधान है, जो प्रत्येक तिमाही बैठक करेगी।
> नियमों में नेत्रहीन व दृष्टिअल्पता, श्रवण बाधित, लोकोमोटर डिसएबल्टी या सेरेब्रल पॉल्सी श्रेणी के निःशक्तों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
> राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा की जाने वाली किसी नियुक्तियों के लिए आयोग के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा नामित सदस्य की अध्यक्षता में गठित समिति की अभिशंषा के बाद ही निःशक्त आरक्षण में छूट देय होगी जबकि राजस्थान लोक सेवा आयोग के क्षेत्राधिकार के बाहर की जाने वाली किसी नियुक्ति के लिए निःशक्तजन आरक्षण में छूट कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अभिशंषा के बाद ही दी जा सकेगी।
> निःशक्तजनों को किसी भी भर्ती परीक्षा की अर्हता में 5 प्रतिशत की छूट किसी एक विषय में और कुल प्राप्तांकों में दिये जाने का प्रावधान किया गया है।
> निःशक्तजनों को अस्थाई नियुक्ति के लिए प्रशिक्षण, परीक्षा और अनुभव की अर्हता से मुक्त रखा गया है। यदि किसी अस्थाई नियुक्ति में प्रशिक्षण आवश्यक हो, वहाँ निःशक्तजनों को प्रशिक्षण दो वर्ष में पूर्ण करना होगा।
> अधिकतम आयु सीमा में सामान्य श्रेणी के निःशक्तों को दस वर्ष, अन्य पिछडा वर्ग एवं विशेष पिछडा वर्ग के निःशक्तों को 13 वर्ष, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के निःशक्तों को 15 वर्ष की छूट प्रदान की गई है।
> निःशक्तजन को रोजगार हेतु प्रतियोगी परीक्षा एवं साक्षात्कार में सम्मिलित होने पर नियमानुसार बस या रेल किराए के पुनर्भरण का प्रावधान किया गया है।
> निःशक्तजनों के कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के पंजीयन के लिए जिले के अतिरिक्त जिला कलक्टर को अधिकृत किया गया है।
> नियोक्ताओं को प्रत्येक तिमाही में नियुक्ति संबंधी सूचना विशेष रोजगार कार्यालय को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
> निःशक्तजनों को उनकी योग्यता एवं क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया।
विकलांग तैराक किरण टांक को मुख्यमंत्री ने दिया 80 हजार का विशेष अनुदान
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता तैराक सुश्री किरण टांक को उच्च अध्ययन हेतु हाल ही में 80 हजार रुपए का विशेष अनुदान स्वीकृत किया। विकलांग खिलाड़ी सुश्री किरण टांक ने अपने खेल कौशल को निखारने के लिए राष्ट्रीय खेल संस्थान (एन.आई.एस.) से डिप्लोमा करने की इच्छा व्यक्त की थी लेकिन गरीबी की वजह से वह शुल्क चुकाने में असमर्थ थी।
राजस्थान की योजनाएँ-
पन्नाधाय जीवन अमृतयोजना (जनश्री बीमा योजना)
बीपीएल परिवार को बीमा का लाभ देने के लिए 'पन्नाधाय जीवन अमृत योजना' 14 अगस्त, 2006 से राजस्थान में भारतीय जीवन बीमा निगम (L.I.C.) की 'जनश्री बीमा योजना' के रूप में प्रारम्भ की गई।
> यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के बीपीएल सर्वे 2002 एवं शहरी क्षेत्र के बीपीएल सर्वे 2003 में चयनित परिवारों के लिए है। दिनांक 14 अगस्त 07 से आस्था कार्डधारक परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया है।
> इसमें बीमित परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर 30 हजार रुपए तथा दुर्घटना मृत्यु की स्थिति में 75 हजार रुपए देने का प्रावधान है।
योजना में शारीरिक अपंगता होने पर भी सहायता राशि भुगतान करने का प्रावधान है। बीमित सदस्य के कक्षा 9 से 12 के दो बच्चों को 100 रुपए प्रतिमाह की दर से प्रतिवर्ष तिमाही आधार पर छात्रवृत्ति देने का प्रावधान भी इस योजना में है।
> यह योजना नि:शुल्क संचालित है तथा इसमें परिवार के बीमित सदस्य की प्रीमियम राशि 100 रुपए प्रतिवर्ष का राज्य सरकार द्वारा L.I.C. को भुगतान किया जाता है।
> योजना का नोडल विभाग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग है।
> योजना के लागू होने के साथ ही 'राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना' समाप्त हो गई जिसमें बीपीएल परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु पर उसके परिवार को मात्र 10,000 रु. दिए जाते थे।
योजना क्रियान्वयन एजेंसी-
*. ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम सेवक के द्वारा विकास अधिकारी के माध्यम से।
*. शहरी क्षेत्र में नगर पालिका/परिषद्/ निगम के अधिशाषी अधिकारी/ आयुक्त/ मुख्य कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से।
पात्रता-
> सरकार द्वारा बीपीएल एवं आस्था कार्ड धारक परिवारों की जारी सूची में उल्लेखित परिवार का मुखिया, जिसकी आयु 18 वर्ष से 59 वर्ष (दोनों तिथियां सम्मिलित व आयु पिछले जन्मदिन पर) के बीच की हो। परिवार के मुखिया की आयु 60 वर्ष से एक दिन भी अधिक होने की स्थिति में उसके कार्ड में उल्लेखित वरिष्ठतम व्यक्ति पात्र होगा।
> मुखिया का यह भी विकल्प होगा कि वह चाहे तो अपने को बीमित कराए या मुख्य आजीविका कमाने वाले का बीमा कराए। मुखिया द्वारा इस सम्बन्ध विकल्प पत्र देना होता है। विकल्प देने वाला और जिसका बीमा प्रस्तावित किया है दोनों विकल्प बीमा कार्यालय में पहुँचने तक जीवित होने चाहिए।
> बी.पी.एल. सूची/आस्था कार्ड में जो अंकित आयु ही मान्य होगी और यह आयु बी.पी.एल. सूची के प्रकाशन/आस्थाकार्ड जारी की दिनांक को मानी जाएगी। बी.पी.एल. सूची/आस्था कार्ड में आयु अंकित न होने पर मतदाता सूची/ मतदाता पहचान पत्र/ राशन कार्ड में अंकित आयु मान्य होगी।
> मनोनयन- बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी अथवा पति को बीमा क्लेम के लिए मनोनीत माना जाएगी। बीमित व्यक्ति की पत्नी/पति के जीवित नहीं होने पर बीमित के परिवार कार्ड में अंकित सबसे बड़ी सन्तान को मनोनीत माना जाएगा। बीमित व्यक्ति की पत्नी, पति या किसी बच्चे के जीवित नहीं होने की स्थिति में कार्डधारक परिवार की सूची में सबसे बड़े सदस्य का स्वत: नामितीकरण होगा।
हित लाभ-
*. नामित सदस्य को निम्न लाभ का भुगतान L.I.C. द्वारा किया जाएगा।
(अ) सामान्य मृत्यु होने की दशा में 30 हजार रुपए।
(ब) दुर्घटना होने की स्थिति में-
> मृत्यु होने पर 75000 रु.
> स्थायी पूर्ण शारीरिक अपंगता होने पर 75000 रु.
> 2 आंख या 2 हाथ/पैर या एक आंख व एक हाथ/पैर की क्षति होने पर 75000 रु.
> एक आंख या एक हाथ/पैर की क्षति होने पर 37500 रु.
> यहां दुर्घटना के कारण मृत्यु/ स्थायी पूर्ण अपंगता/ आंशिक अपंगता का अर्थ मृत्यु या अपंगता से है, जो कि दुर्घटना होने से 3 माह के मध्य की हो। इसमें कोई जानबूझ कर स्वयं को पहुंचाई गई चोट, आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास अथवा शराब, नशीले पदार्थों का सेवन, दंगे, सिविल कोमोशन, विद्रोह, आक्रमण, युद्ध, शिकार के कारण लगी चोट, पर्वतारोहण आदि में लगी चोट अथवा मृत्यु शामिल नहीं है।
> दावा प्रस्तुत करते समय आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए जाने वाले दस्तावेज-
(i) मृत्यु प्रमाण पत्र- सामान्य एवं दुर्घटना मृत्यु होने पर।
(ii) पोस्टमार्टम रिपोर्ट- दुर्घटना मृत्यु की दशा में।
(iii) प्रथम सूचना रिपोर्ट- दुर्घटना मृत्यु/ स्थायी अपंगता की दशा में।
(iv) पुलिस अंवेषण रिपोर्ट- दुर्घटना मृत्यु/स्थायी अपंगता की दशा में।
(v) अधिकृत सरकारी चिकित्सक द्वारा अपंगता प्रमाणपत्र
(vi) आयु के साक्ष्य में दस्तावेज के संबंधित भाग की फोटोप्रति ग्राम सेवक/ अधिशाषी अधिकारी द्वारा सत्यापित।
(vii) अपंगता की स्थिति में सादा कागज पर प्रार्थना पत्र जिसमें अपंगता का विवरण अधिकृत सरकारी चिकित्सक द्वारा जारी अपंगता प्रमाणपत्र के साथ, बैंक खाता नम्बर तथा बैंक का नाम, पता भरकर ग्रामसेवक/अधिशाषी अधिकारी से प्रमाणित।
बीमित व्यक्ति के बच्चों को छात्रवृत्ति-
> योजना के अन्तर्गत सभी बीमित सदस्यों के बच्चों के लिए शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से छात्रवृत्ति भी देय है।
छात्रवृत्ति हेतु पात्रता :
(अ) बीमित सदस्य के कक्षा 9 से 12 में अध्ययनरत अधिकतम 2 बच्चों को देय है।
(ब) अभिभावक का इस योजना में बीमित होना आवश्यक है।
(स) छात्र के अनुत्तीर्ण होने की दशा में छात्रवृत्ति देय नहीं है।
छात्रवृत्ति का लाभ-
(अ) 100 रु. प्रतिछात्र प्रतिमाह या 300 रु. प्रतिछात्र प्रति तिमाही के आधार पर प्रतिवर्ष 1200 रु. प्रतिछात्र किन्तु अधिकतम 4 वर्षों के लिए देय है।
(ब) छात्रवृत्ति शैक्षणिक सत्र जून से मई तक की अवधि के लिए दी जाती है।
प्रक्रिया-
> छात्रवृत्ति हेतु कोई प्रीमियम देय नहीं है। सरकारी/ निजी विद्यालय के संस्था प्रधान एवं बीपीएल/आस्था कार्डधारक बीमित व्यक्ति के छात्रों के पूर्ण आवेदन पत्रों को पंचायत/ नगरपालिका के माध्यम से L.I.C. को भेजे जाते हैं। राशि चेक द्वारा प्राप्त होती है।
> यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के बीपीएल सर्वे 2002 एवं शहरी क्षेत्र के बीपीएल सर्वे 2003 में चयनित परिवारों के लिए है। दिनांक 14 अगस्त 07 से आस्था कार्डधारक परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया है।
> इसमें बीमित परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर 30 हजार रुपए तथा दुर्घटना मृत्यु की स्थिति में 75 हजार रुपए देने का प्रावधान है।
योजना में शारीरिक अपंगता होने पर भी सहायता राशि भुगतान करने का प्रावधान है। बीमित सदस्य के कक्षा 9 से 12 के दो बच्चों को 100 रुपए प्रतिमाह की दर से प्रतिवर्ष तिमाही आधार पर छात्रवृत्ति देने का प्रावधान भी इस योजना में है।
> यह योजना नि:शुल्क संचालित है तथा इसमें परिवार के बीमित सदस्य की प्रीमियम राशि 100 रुपए प्रतिवर्ष का राज्य सरकार द्वारा L.I.C. को भुगतान किया जाता है।
> योजना का नोडल विभाग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग है।
> योजना के लागू होने के साथ ही 'राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना' समाप्त हो गई जिसमें बीपीएल परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु पर उसके परिवार को मात्र 10,000 रु. दिए जाते थे।
योजना क्रियान्वयन एजेंसी-
*. ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम सेवक के द्वारा विकास अधिकारी के माध्यम से।
*. शहरी क्षेत्र में नगर पालिका/परिषद्/ निगम के अधिशाषी अधिकारी/ आयुक्त/ मुख्य कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से।
पात्रता-
> सरकार द्वारा बीपीएल एवं आस्था कार्ड धारक परिवारों की जारी सूची में उल्लेखित परिवार का मुखिया, जिसकी आयु 18 वर्ष से 59 वर्ष (दोनों तिथियां सम्मिलित व आयु पिछले जन्मदिन पर) के बीच की हो। परिवार के मुखिया की आयु 60 वर्ष से एक दिन भी अधिक होने की स्थिति में उसके कार्ड में उल्लेखित वरिष्ठतम व्यक्ति पात्र होगा।
> मुखिया का यह भी विकल्प होगा कि वह चाहे तो अपने को बीमित कराए या मुख्य आजीविका कमाने वाले का बीमा कराए। मुखिया द्वारा इस सम्बन्ध विकल्प पत्र देना होता है। विकल्प देने वाला और जिसका बीमा प्रस्तावित किया है दोनों विकल्प बीमा कार्यालय में पहुँचने तक जीवित होने चाहिए।
> बी.पी.एल. सूची/आस्था कार्ड में जो अंकित आयु ही मान्य होगी और यह आयु बी.पी.एल. सूची के प्रकाशन/आस्थाकार्ड जारी की दिनांक को मानी जाएगी। बी.पी.एल. सूची/आस्था कार्ड में आयु अंकित न होने पर मतदाता सूची/ मतदाता पहचान पत्र/ राशन कार्ड में अंकित आयु मान्य होगी।
> मनोनयन- बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी अथवा पति को बीमा क्लेम के लिए मनोनीत माना जाएगी। बीमित व्यक्ति की पत्नी/पति के जीवित नहीं होने पर बीमित के परिवार कार्ड में अंकित सबसे बड़ी सन्तान को मनोनीत माना जाएगा। बीमित व्यक्ति की पत्नी, पति या किसी बच्चे के जीवित नहीं होने की स्थिति में कार्डधारक परिवार की सूची में सबसे बड़े सदस्य का स्वत: नामितीकरण होगा।
हित लाभ-
*. नामित सदस्य को निम्न लाभ का भुगतान L.I.C. द्वारा किया जाएगा।
(अ) सामान्य मृत्यु होने की दशा में 30 हजार रुपए।
(ब) दुर्घटना होने की स्थिति में-
> मृत्यु होने पर 75000 रु.
> स्थायी पूर्ण शारीरिक अपंगता होने पर 75000 रु.
> 2 आंख या 2 हाथ/पैर या एक आंख व एक हाथ/पैर की क्षति होने पर 75000 रु.
> एक आंख या एक हाथ/पैर की क्षति होने पर 37500 रु.
> यहां दुर्घटना के कारण मृत्यु/ स्थायी पूर्ण अपंगता/ आंशिक अपंगता का अर्थ मृत्यु या अपंगता से है, जो कि दुर्घटना होने से 3 माह के मध्य की हो। इसमें कोई जानबूझ कर स्वयं को पहुंचाई गई चोट, आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास अथवा शराब, नशीले पदार्थों का सेवन, दंगे, सिविल कोमोशन, विद्रोह, आक्रमण, युद्ध, शिकार के कारण लगी चोट, पर्वतारोहण आदि में लगी चोट अथवा मृत्यु शामिल नहीं है।
> दावा प्रस्तुत करते समय आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए जाने वाले दस्तावेज-
(i) मृत्यु प्रमाण पत्र- सामान्य एवं दुर्घटना मृत्यु होने पर।
(ii) पोस्टमार्टम रिपोर्ट- दुर्घटना मृत्यु की दशा में।
(iii) प्रथम सूचना रिपोर्ट- दुर्घटना मृत्यु/ स्थायी अपंगता की दशा में।
(iv) पुलिस अंवेषण रिपोर्ट- दुर्घटना मृत्यु/स्थायी अपंगता की दशा में।
(v) अधिकृत सरकारी चिकित्सक द्वारा अपंगता प्रमाणपत्र
(vi) आयु के साक्ष्य में दस्तावेज के संबंधित भाग की फोटोप्रति ग्राम सेवक/ अधिशाषी अधिकारी द्वारा सत्यापित।
(vii) अपंगता की स्थिति में सादा कागज पर प्रार्थना पत्र जिसमें अपंगता का विवरण अधिकृत सरकारी चिकित्सक द्वारा जारी अपंगता प्रमाणपत्र के साथ, बैंक खाता नम्बर तथा बैंक का नाम, पता भरकर ग्रामसेवक/अधिशाषी अधिकारी से प्रमाणित।
बीमित व्यक्ति के बच्चों को छात्रवृत्ति-
> योजना के अन्तर्गत सभी बीमित सदस्यों के बच्चों के लिए शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से छात्रवृत्ति भी देय है।
छात्रवृत्ति हेतु पात्रता :
(अ) बीमित सदस्य के कक्षा 9 से 12 में अध्ययनरत अधिकतम 2 बच्चों को देय है।
(ब) अभिभावक का इस योजना में बीमित होना आवश्यक है।
(स) छात्र के अनुत्तीर्ण होने की दशा में छात्रवृत्ति देय नहीं है।
छात्रवृत्ति का लाभ-
(अ) 100 रु. प्रतिछात्र प्रतिमाह या 300 रु. प्रतिछात्र प्रति तिमाही के आधार पर प्रतिवर्ष 1200 रु. प्रतिछात्र किन्तु अधिकतम 4 वर्षों के लिए देय है।
(ब) छात्रवृत्ति शैक्षणिक सत्र जून से मई तक की अवधि के लिए दी जाती है।
प्रक्रिया-
> छात्रवृत्ति हेतु कोई प्रीमियम देय नहीं है। सरकारी/ निजी विद्यालय के संस्था प्रधान एवं बीपीएल/आस्था कार्डधारक बीमित व्यक्ति के छात्रों के पूर्ण आवेदन पत्रों को पंचायत/ नगरपालिका के माध्यम से L.I.C. को भेजे जाते हैं। राशि चेक द्वारा प्राप्त होती है।
Saturday, June 25, 2011
बरसात की क्विज
1. मानसून शब्द किस अरेबिक शब्द से बना है?
उत्तरः मौसिम
2. भारत में मानसून कितनी बार आता है?
उत्तरः 2 बार
3. भारत में आने वाले मानसूनों के क्या नाम है?
उत्तरः दक्षिण पश्चिम मानसून और उत्तर पूर्वी मानसून
4. भारत में सर्वाधिक वर्षा कहाँ होती है?
उत्तरः मानसिराम में (1141 सेमी)
5. भारत के किस राज्य में वर्ष में सर्वाधिक वर्षा होती है?
उत्तरः मेघालय में
6. कौनसी भौतिक घटना वर्षा की बूँदों के गोल होने का कारण है?
उत्तरः पृष्ठ तनाव
7. दक्षिण पश्चिम मानसून का प्रभाव भारत में कब तक रहता है?
उत्तरः जून से सितंबर तक
8. उत्तर पूर्वी मानसून का भारत में प्रभाव कब तक रहता है?
उत्तरः नवंबर से जनवरी
9. भारत में 70-80 प्रतिशत वर्षा किस मानसून से प्राप्त होती है?
उत्तरः दक्षिण पश्चिम मानसून से
10. पुस्तक " द मानसून " के लेखक कौन है?
उत्तरः पी. के. दास
11. बादल वायुमंडल के किस भाग में बनते हैं?
उत्तर: ट्रॉपोस्फियर में
12. समान वर्षा को प्रदर्शित करने वाली काल्पनिक रेखाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर: आईसोहाईट
13. वर्षा कितने प्रकार की होती है?
उत्तर: 3 (संवहनीय, चक्रवाती, पर्वतीय)
14. बादलों की प्रकृति, गति व वर्षा का पता उपग्रह से विशेष प्रकार की फोटोग्राफी द्वारा लगाया जाता है, इस फोटोग्राफी का नाम क्या है?
उत्तर: अवरक्त या इंफ्रारेड फोटोग्राफी
15. बादल मापने की इकाई का नाम क्या है?
उत्तर: आक्टा
उत्तरः मौसिम
2. भारत में मानसून कितनी बार आता है?
उत्तरः 2 बार
3. भारत में आने वाले मानसूनों के क्या नाम है?
उत्तरः दक्षिण पश्चिम मानसून और उत्तर पूर्वी मानसून
4. भारत में सर्वाधिक वर्षा कहाँ होती है?
उत्तरः मानसिराम में (1141 सेमी)
5. भारत के किस राज्य में वर्ष में सर्वाधिक वर्षा होती है?
उत्तरः मेघालय में
6. कौनसी भौतिक घटना वर्षा की बूँदों के गोल होने का कारण है?
उत्तरः पृष्ठ तनाव
7. दक्षिण पश्चिम मानसून का प्रभाव भारत में कब तक रहता है?
उत्तरः जून से सितंबर तक
8. उत्तर पूर्वी मानसून का भारत में प्रभाव कब तक रहता है?
उत्तरः नवंबर से जनवरी
9. भारत में 70-80 प्रतिशत वर्षा किस मानसून से प्राप्त होती है?
उत्तरः दक्षिण पश्चिम मानसून से
10. पुस्तक " द मानसून " के लेखक कौन है?
उत्तरः पी. के. दास
11. बादल वायुमंडल के किस भाग में बनते हैं?
उत्तर: ट्रॉपोस्फियर में
12. समान वर्षा को प्रदर्शित करने वाली काल्पनिक रेखाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर: आईसोहाईट
13. वर्षा कितने प्रकार की होती है?
उत्तर: 3 (संवहनीय, चक्रवाती, पर्वतीय)
14. बादलों की प्रकृति, गति व वर्षा का पता उपग्रह से विशेष प्रकार की फोटोग्राफी द्वारा लगाया जाता है, इस फोटोग्राफी का नाम क्या है?
उत्तर: अवरक्त या इंफ्रारेड फोटोग्राफी
15. बादल मापने की इकाई का नाम क्या है?
उत्तर: आक्टा
राजस्थान की योजनाएँ-
अल्पसंख्यकों के लिए अनुप्रति योजना
अल्पसंख्यक समुदाय की नई पीढ़ी का भविष्य संवारने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है। इसमें राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए लागू की गई अनुप्रति योजना में अल्पसंख्यक वर्ग (मुस्लिम,सिक्ख, ईसाई, पारसी व बौद्ध) के होनहार युवाओं को प्रोत्साहित और लाभान्वित किया जा रहा है। इस योजनान्तर्गत राजस्थान मूल के अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भारतीय सिविल सेवा परीक्षा एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा ( सीधी भर्ती ) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले तथा विशेष व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों को प्रोत्साहन राशि दिए जाने के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न प्रावधान किए हैं।
1. भारतीय सिविल सेवा परीक्षा-
> इस योजना के अन्तर्गत संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भारतीय सिविल सेवा परीक्षा के विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अल्पसंख्यक समुदाय वर्ग के अभ्यर्थियों को विभिन्न प्रकार की प्रोत्साहन राशि का लाभ निम्नलिखित है-
*. प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 65 हजार रुपए
*. मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30 हजार रुपए
*. साक्षात्कार में उत्तीर्ण (अंतिम रूप से चयन) होने पर 5 हजार रुपए।
2. राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (सीधी भर्ती) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-
> योजना के तहत राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (सीधी भर्ती) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के अभ्यर्थियों को निम्नानुसार राशि देय है-
*. प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 25 हजार रुपए
*. मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 20 हजार रुपए
*. साक्षात्कार में उत्तीर्ण (अंतिम रूप से चयन ) होने पर 5 हजार रुपए की।
*. अभ्यर्थियों को इन परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने व प्रथम एवं द्वितीय बार सफलता अर्जित करने पर उल्लेखित राशि शत-प्रतिशत देय होगी।
तीसरी बार पचास प्रतिशत राशि ही देय होगी।
*. जो अभ्यर्थी पहले से ही राजकीय सेवा में है, उसे ये परिलाभ देय नहीं होंगे।
3. आई.आई.टी. की प्रवेश-
*. आई.आई.टी. की प्रवेश परीक्षा में सफल होने पर तथा संस्थान में प्रवेश लेने के उपरान्त अभ्यर्थी को 50 हजार रुपए देय है।
4. आई. आई. एम. में प्रवेश-
*. कैट में उतीर्ण होने व प्रवेश लेने पर 50 हजार रुपए देय है।
5. राजकीय इंजीनियर कॉलेज एवं मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश-
*. 10+2 स्कीम में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त होने तथा राजकीय इंजीनियर कॉलेज एवं मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रेरित करने के लिए 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
> यह अनुदान की राशि उन सफल अभ्यर्थियों को स्वीकृत की जाएगी जिनके माता-पिता व अभिभावकों की वार्षिक आय (अभ्यर्थी की आय को सम्मिलित करते हुए ) दो लाख रुपए से अधिक न हो।
> अल्पसंख्यक वर्ग के अभ्यर्थी को योजनान्तर्गत इसके लिये आय प्रमाण-पत्र संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा जारी किया गया हो, जो छह माह से अधिक पुराना न हो, अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
1. भारतीय सिविल सेवा परीक्षा-
> इस योजना के अन्तर्गत संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भारतीय सिविल सेवा परीक्षा के विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अल्पसंख्यक समुदाय वर्ग के अभ्यर्थियों को विभिन्न प्रकार की प्रोत्साहन राशि का लाभ निम्नलिखित है-
*. प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 65 हजार रुपए
*. मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30 हजार रुपए
*. साक्षात्कार में उत्तीर्ण (अंतिम रूप से चयन) होने पर 5 हजार रुपए।
2. राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (सीधी भर्ती) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-
> योजना के तहत राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (सीधी भर्ती) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के अभ्यर्थियों को निम्नानुसार राशि देय है-
*. प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 25 हजार रुपए
*. मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 20 हजार रुपए
*. साक्षात्कार में उत्तीर्ण (अंतिम रूप से चयन ) होने पर 5 हजार रुपए की।
*. अभ्यर्थियों को इन परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने व प्रथम एवं द्वितीय बार सफलता अर्जित करने पर उल्लेखित राशि शत-प्रतिशत देय होगी।
तीसरी बार पचास प्रतिशत राशि ही देय होगी।
*. जो अभ्यर्थी पहले से ही राजकीय सेवा में है, उसे ये परिलाभ देय नहीं होंगे।
3. आई.आई.टी. की प्रवेश-
*. आई.आई.टी. की प्रवेश परीक्षा में सफल होने पर तथा संस्थान में प्रवेश लेने के उपरान्त अभ्यर्थी को 50 हजार रुपए देय है।
4. आई. आई. एम. में प्रवेश-
*. कैट में उतीर्ण होने व प्रवेश लेने पर 50 हजार रुपए देय है।
5. राजकीय इंजीनियर कॉलेज एवं मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश-
*. 10+2 स्कीम में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त होने तथा राजकीय इंजीनियर कॉलेज एवं मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रेरित करने के लिए 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
> यह अनुदान की राशि उन सफल अभ्यर्थियों को स्वीकृत की जाएगी जिनके माता-पिता व अभिभावकों की वार्षिक आय (अभ्यर्थी की आय को सम्मिलित करते हुए ) दो लाख रुपए से अधिक न हो।
> अल्पसंख्यक वर्ग के अभ्यर्थी को योजनान्तर्गत इसके लिये आय प्रमाण-पत्र संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा जारी किया गया हो, जो छह माह से अधिक पुराना न हो, अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
विज्ञान क्विज-
25.6.2011
1. भारी नाभिक टूट कर दो या अधिक हल्के नाभिकों में विभक्त हो जाता है, यह घटना क्या कहलाती है?
उत्तर- नाभिकीय विखंडन
2. नाभिकीय भट्टियों में मंदक के रूप में क्या प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर- भारी पानी या ग्रेफाइट
3. बोरोन या केडमियम की छड़ों का नाभिकीय भट्टी में क्या उपयोग है?
उत्तर- नियंत्रक के रूप में
4. रदरफोर्ड ने 1911 में एल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग की सहायता से किसकी खोज की?
उत्तर- परमाणु के नाभिक की
5. न्यूट्रॉन की खोज किस वैज्ञानिक ने की?
उत्तर- जेम्स चेडविक ने (1932 में)
6. सूर्य की ऊर्जा का स्रोत क्या है?
उत्तर- नाभिकीय संलयन (चार हाईड्रॉजन नाभिक संयुक्त हो कर हीलियम नाभिक बनाना)
7. प्रथम नाभिकीय भट्टी किस वैज्ञानिक ने बनाई?
उत्तर- एनरिको फर्मी
8. रक्त कैंसर के उपचार में कौनसा रेडियोएक्टिव समस्थानिक प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर- स्वर्ण - 198
9. गले की जाँच करने में कौनसा रेडियोएक्टिव समस्थानिक प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर- आयोडीन- 131
10. एक्स किरणों की खोज किसने की?
उत्तर- डब्ल्यू के रोन्जन ने
उत्तर- नाभिकीय विखंडन
2. नाभिकीय भट्टियों में मंदक के रूप में क्या प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर- भारी पानी या ग्रेफाइट
3. बोरोन या केडमियम की छड़ों का नाभिकीय भट्टी में क्या उपयोग है?
उत्तर- नियंत्रक के रूप में
4. रदरफोर्ड ने 1911 में एल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग की सहायता से किसकी खोज की?
उत्तर- परमाणु के नाभिक की
5. न्यूट्रॉन की खोज किस वैज्ञानिक ने की?
उत्तर- जेम्स चेडविक ने (1932 में)
6. सूर्य की ऊर्जा का स्रोत क्या है?
उत्तर- नाभिकीय संलयन (चार हाईड्रॉजन नाभिक संयुक्त हो कर हीलियम नाभिक बनाना)
7. प्रथम नाभिकीय भट्टी किस वैज्ञानिक ने बनाई?
उत्तर- एनरिको फर्मी
8. रक्त कैंसर के उपचार में कौनसा रेडियोएक्टिव समस्थानिक प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर- स्वर्ण - 198
9. गले की जाँच करने में कौनसा रेडियोएक्टिव समस्थानिक प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर- आयोडीन- 131
10. एक्स किरणों की खोज किसने की?
उत्तर- डब्ल्यू के रोन्जन ने
Friday, June 24, 2011
विज्ञान क्विज-
24 जून 2011
1. गुरुत्वाकर्षण का नियम किस वैज्ञानिक द्वारा प्रतिपादित किया गया?
उत्तर- सर आईजक न्यूटन
2. सबसे छोटे पुष्पी पादप का नाम क्या है?
उत्तर- वुल्फिया
3. बरसात के दिनों की गीली या नम वायु गर्मी के दिनों की वायु से हल्की होती है या भारी?
उत्तर- हल्की, क्योंकि जलवाष्प का घनत्व हवा से कम होता है।
4. ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक कितना होता है?
उत्तर- 8
5. प्रोटीन किन मूलभूत इकाइयों से निर्मित होता है?
उत्तर- अमीनो अम्ल
6. हाइड्रोजन के सबसे भारी समस्थानिक का नाम क्या है?
उत्तर- ट्रिटीयम
7. चावल का वानस्पतिक नाम क्या है?
उत्तर- ओराईजा सटाईवा
8. इलेक्ट्रॉस्कोप यंत्र से किसका पता लगाया जाता है?
उत्तर- वस्तुओं पर आवेश की उपस्थिति का
9. किस उपकरण से विद्युत धारा का मापन किया जाता है?
उत्तर- अमीटर से
10. कीटों का भक्षण करने वाले पादप को क्या कहते हैं?
उत्तर- कीटाहारी (Insectivorous)
उत्तर- सर आईजक न्यूटन
2. सबसे छोटे पुष्पी पादप का नाम क्या है?
उत्तर- वुल्फिया
3. बरसात के दिनों की गीली या नम वायु गर्मी के दिनों की वायु से हल्की होती है या भारी?
उत्तर- हल्की, क्योंकि जलवाष्प का घनत्व हवा से कम होता है।
4. ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक कितना होता है?
उत्तर- 8
5. प्रोटीन किन मूलभूत इकाइयों से निर्मित होता है?
उत्तर- अमीनो अम्ल
6. हाइड्रोजन के सबसे भारी समस्थानिक का नाम क्या है?
उत्तर- ट्रिटीयम
7. चावल का वानस्पतिक नाम क्या है?
उत्तर- ओराईजा सटाईवा
8. इलेक्ट्रॉस्कोप यंत्र से किसका पता लगाया जाता है?
उत्तर- वस्तुओं पर आवेश की उपस्थिति का
9. किस उपकरण से विद्युत धारा का मापन किया जाता है?
उत्तर- अमीटर से
10. कीटों का भक्षण करने वाले पादप को क्या कहते हैं?
उत्तर- कीटाहारी (Insectivorous)
Thursday, June 23, 2011
राजस्थान की योजनाएँ-
मुख्यमंत्री बीपीएल जीवन रक्षा कोष योजना
बी.पी.एल. परिवारों को निःशुल्क चिकित्सा जाँच एवं उपचार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार के आदेश दिनांक 29 जनवरी 2009 द्वारा "मुख्यमंत्री बी.पी.एल. जीवन रक्षा कोष" योजना लागू की गई।
इस योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों सहित निम्नलिखित को शामिल किया गया है-
> एचआईवी पीड़ित
> वृद्धावस्था पेंशनर
> विधवा
>विकलांग
> सहरिया कार्डधारी
> आस्था कार्डधारी
> अंत्योदय अन्न योजना एवं अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी
इस योजना के आउटडोर एवं इनडोर रोगियों को राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध चिकित्सालयों, जिला/सैटेलाइट अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर में रोग के निदान एवं उपचार की समस्त सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना में खर्च की कोई सीमा नहीं रखी गई है।
इस योजना में समस्त बीपीएल परिवारों के रोगी निशुल्क उपचार के पात्र होते हैं। इस योजना में लाभ पाने के लिए रोगी को सभी स्तर के चिकित्सा संस्थानों में बी.पी.एल. कार्ड अथवा नरेगा कार्ड प्रस्तुत करना होता है।
उक्त प्रमाण पत्र भर्ती होने के समय उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में ऑनलाईन बी.पी.एल. सूची से मिलान कर तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तथा 24 घण्टे में रोगी के सहायक को प्रमाण पत्र अथवा अन्य पहचान पत्र प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया जाता है।
इसमें सामान्य रोगों से ग्रस्त रोगियों का उपचार अथवा निदान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में किया जाता है लेकिन गंभीर बीमारियों का उपचार जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज में संबद्ध चिकित्सालयों में किया जाता है।
यदि इन अस्पतालों में उपचार एवं निदान की सुविधा नहीं होने पर रोगी को एम्स, नई दिल्ली अथवा स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चण्डीगढ़ भेजा जा सकता है।
निशुल्क चिकित्सा के लिए राज्य सरकार द्वारा पुनर्भरण के आधार पर मेडिकल रिलीफ समितियां औषधियाँ अपने स्तर पर क्रय करती है तथा आवश्यकता होने पर कृत्रिम अंग तथा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
इस योजना में 1 जनवरी 2009 से 31 दिसंबर 2010 तक कुल 56.80 लाख रोगियों को 54.69 करोड़ रुपए के व्यय से निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराई गई।
इस योजना की समस्त जानकारी, सूची व लेखा जोखा राज्य सरकार द्वारा एक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर द्वारा उपलब्ध कराई गई है।
इस योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों सहित निम्नलिखित को शामिल किया गया है-
> एचआईवी पीड़ित
> वृद्धावस्था पेंशनर
> विधवा
>विकलांग
> सहरिया कार्डधारी
> आस्था कार्डधारी
> अंत्योदय अन्न योजना एवं अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी
इस योजना के आउटडोर एवं इनडोर रोगियों को राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध चिकित्सालयों, जिला/सैटेलाइट अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर में रोग के निदान एवं उपचार की समस्त सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना में खर्च की कोई सीमा नहीं रखी गई है।
इस योजना में समस्त बीपीएल परिवारों के रोगी निशुल्क उपचार के पात्र होते हैं। इस योजना में लाभ पाने के लिए रोगी को सभी स्तर के चिकित्सा संस्थानों में बी.पी.एल. कार्ड अथवा नरेगा कार्ड प्रस्तुत करना होता है।
उक्त प्रमाण पत्र भर्ती होने के समय उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में ऑनलाईन बी.पी.एल. सूची से मिलान कर तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तथा 24 घण्टे में रोगी के सहायक को प्रमाण पत्र अथवा अन्य पहचान पत्र प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया जाता है।
इसमें सामान्य रोगों से ग्रस्त रोगियों का उपचार अथवा निदान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में किया जाता है लेकिन गंभीर बीमारियों का उपचार जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज में संबद्ध चिकित्सालयों में किया जाता है।
यदि इन अस्पतालों में उपचार एवं निदान की सुविधा नहीं होने पर रोगी को एम्स, नई दिल्ली अथवा स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चण्डीगढ़ भेजा जा सकता है।
निशुल्क चिकित्सा के लिए राज्य सरकार द्वारा पुनर्भरण के आधार पर मेडिकल रिलीफ समितियां औषधियाँ अपने स्तर पर क्रय करती है तथा आवश्यकता होने पर कृत्रिम अंग तथा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
इस योजना में 1 जनवरी 2009 से 31 दिसंबर 2010 तक कुल 56.80 लाख रोगियों को 54.69 करोड़ रुपए के व्यय से निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराई गई।
इस योजना की समस्त जानकारी, सूची व लेखा जोखा राज्य सरकार द्वारा एक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर द्वारा उपलब्ध कराई गई है।
विज्ञान क्विज-
23 जून 2011
1. कौन कौनसे विटामिन वसा में घुलनशील है?
Ans. विटामिन A, D, E और K
2. कौन कौनसे विटामिन जल में घुलनशील है?
Ans. विटामिन B ( B1 B2 B6 B12 ) तथा C.
3. विटामिन C का रासायनिक नाम क्या है?
Ans. एस्कॉर्बिक अम्ल
4. किस विटामिन का रासायनिक नाम टॉकोफेरोल्स है?
Ans. विटामिन E.
5. किस विटामिन का रासायनिक नाम पीरिडॉक्सिन है?
Ans. विटामिन B6
6. किस विटामिन की कमी से रक्त का थक्का जमने में अधिक समय लगता है?
Ans. विटामिन K
7. रेटिनॉल किस विटामिन के रूप में जाना जाता है?
Ans. विटामिन A
8. विटामिन- B12 का रासायनिक नाम क्या है?
Ans. साइनोकोबालमिन
9. कौनसा विटामिन स्कर्वी का विशिष्ट उपचार है?
Ans. विटामिन C
10. किस विटामिन का रासायनिक नाम राईबोफ्लॉविन है ?
Ans. विटामिन B
Ans. विटामिन A, D, E और K
2. कौन कौनसे विटामिन जल में घुलनशील है?
Ans. विटामिन B ( B1 B2 B6 B12 ) तथा C.
3. विटामिन C का रासायनिक नाम क्या है?
Ans. एस्कॉर्बिक अम्ल
4. किस विटामिन का रासायनिक नाम टॉकोफेरोल्स है?
Ans. विटामिन E.
5. किस विटामिन का रासायनिक नाम पीरिडॉक्सिन है?
Ans. विटामिन B6
6. किस विटामिन की कमी से रक्त का थक्का जमने में अधिक समय लगता है?
Ans. विटामिन K
7. रेटिनॉल किस विटामिन के रूप में जाना जाता है?
Ans. विटामिन A
8. विटामिन- B12 का रासायनिक नाम क्या है?
Ans. साइनोकोबालमिन
9. कौनसा विटामिन स्कर्वी का विशिष्ट उपचार है?
Ans. विटामिन C
10. किस विटामिन का रासायनिक नाम राईबोफ्लॉविन है ?
Ans. विटामिन B
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज-
23 जून 2011
1. राजस्थान के प्रसिद्ध साहित्यकार नंद भारद्वाज को उनके " साम्ही खुलतौ मारग " उपन्यास पर 2004 में कौनसा प्रसिद्ध पुरस्कार प्राप्त हुआ था?
उत्तर- केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार
2. स्वयं सेवी संगठन 'दूसरा दशक' के अध्यक्ष तथा भारत के पूर्व शिक्षा सचिव अनिल बोर्दिया को ग्रामीण सेवा कार्य के लिए 2010 में किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उत्तर- महात्मा गांधी यूनेस्को मैडल से
3. किस योजना के तहत प्रत्येक बाल श्रमिक को चिन्हित कर उन्हें भी स्कूल से जोड़ा जाने का प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है?
उत्तर- ''नन्हे हाथ कलम के साथ'' योजना
4. सारंगी वादन के साथ माँड गायकी के भी उस्ताद माने जाने वाले जोधपुर में जन्मे किस कलाकार को 2010 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उत्तर- उस्ताद सुल्तान खां
5. राजस्थान के मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति वर्ष 2010 में किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उत्तर- पद्म श्री
6. राजस्थान के जिस कलाविद् व इतिहासकार
को वर्ष 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया, उनका नाम क्या है?
उत्तर- मुकुंद लाठ
7. राजस्थान के किस शिक्षाविद् को वर्ष 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया?
उत्तर- अनिल बोर्दिया
8. राजस्थान के पुरातात्विक महत्व के लिए प्रसिद्ध व ऐतिहासिक हाड़ा रानी का महल कहाँ स्थित है?
उत्तर- उदयपुर के जिले के सलूंबर नगर में
9. महाराणा प्रताप की संघर्ष स्थली " मायरा की गुफा " उदयपुर जिले के किस गाँव में स्थित है?
उत्तर- मोड़ी, तहसील-गोगुंदा में
10. भारत सरकार के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के उपक्रम DOEACC सोसायटी की यूनिट के रूप में एक उच्च स्तरीय "रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ई-लर्निग एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (RIELIT) " राजस्थान में कहाँ स्थापित किया जा रहा है?
उत्तर- गाँव- कोहदा, तहसील- केकड़ी, जिला- अजमेर
उत्तर- केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार
2. स्वयं सेवी संगठन 'दूसरा दशक' के अध्यक्ष तथा भारत के पूर्व शिक्षा सचिव अनिल बोर्दिया को ग्रामीण सेवा कार्य के लिए 2010 में किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उत्तर- महात्मा गांधी यूनेस्को मैडल से
3. किस योजना के तहत प्रत्येक बाल श्रमिक को चिन्हित कर उन्हें भी स्कूल से जोड़ा जाने का प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है?
उत्तर- ''नन्हे हाथ कलम के साथ'' योजना
4. सारंगी वादन के साथ माँड गायकी के भी उस्ताद माने जाने वाले जोधपुर में जन्मे किस कलाकार को 2010 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उत्तर- उस्ताद सुल्तान खां
5. राजस्थान के मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति वर्ष 2010 में किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उत्तर- पद्म श्री
6. राजस्थान के जिस कलाविद् व इतिहासकार
को वर्ष 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया, उनका नाम क्या है?
उत्तर- मुकुंद लाठ
7. राजस्थान के किस शिक्षाविद् को वर्ष 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया?
उत्तर- अनिल बोर्दिया
8. राजस्थान के पुरातात्विक महत्व के लिए प्रसिद्ध व ऐतिहासिक हाड़ा रानी का महल कहाँ स्थित है?
उत्तर- उदयपुर के जिले के सलूंबर नगर में
9. महाराणा प्रताप की संघर्ष स्थली " मायरा की गुफा " उदयपुर जिले के किस गाँव में स्थित है?
उत्तर- मोड़ी, तहसील-गोगुंदा में
10. भारत सरकार के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के उपक्रम DOEACC सोसायटी की यूनिट के रूप में एक उच्च स्तरीय "रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ई-लर्निग एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (RIELIT) " राजस्थान में कहाँ स्थापित किया जा रहा है?
उत्तर- गाँव- कोहदा, तहसील- केकड़ी, जिला- अजमेर
Wednesday, June 22, 2011
समसामयिक घटनाचक्र-
31 जुलाई को होगी राजस्थान की टेट (TET) परीक्षा
राजस्थान अध्यापक प्रवेश परीक्षा टेट आगामी 31 जुलाई को दो पारियों में आयोजित की जाएगी।
टेट परीक्षा की नोडल एजेंसी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सुभाष गर्ग के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्डपीठ के आदेशों के पश्चात राज्य सरकार की सहमति से अध्यापक पात्रता परीक्षा की तिथि 31 जुलाई घोषित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 22 जून से 30 जून तक आवेदन पत्र का ऑन लाइन पंजीयन करवा कर बैंक चालान जमा करा सकते हैं।
आवेदन पत्र एवं संबंधित दस्तावेज एक जुलाई तक संग्रहण केन्द्र पर जमा होंगे एवं वेब साइट से प्रवेश पत्र डाउन लोड कार्य 15 जुलाई से होगा। दो पारियों में आयोजित इस परीक्षा के लिए न्यायालय आदेशों के अनुरूप वाणिज्य संकाय के छात्र भी आवेदन कर सकेगे। ऎसे अभ्यर्थियों के लिए स्नातक स्तर पर न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक होने आवश्यक है। इस परीक्षा में जम्मू कश्मीर के अभ्यार्थियों पर भी न्यूनतम 45 प्रतिशत प्राप्तांक का बंधन अनिवार्य होगा एवं आरक्षित वर्ग के परीक्षार्थी न्यूनतम 40 प्रतिशत प्राप्तांक पर ही परीक्षा दे सकेंगे।
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति माथुर का निधन-
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति नवीन माथुर का दिनांक 21 जून को ह्दयाघात से निधन हो गया। माथुर को 20 जून की रात तकलीफ होने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 21 जून सुबह उनका निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। उन्होंने करीब डेढ वर्ष पूर्व ही इस विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार ग्रहण किया था।
अजमेर जेल में बंद पाक वैज्ञानिक चिश्ती की रिहाई का मामला टला
हत्या के आरोप में अजमेर जेल में बंद पाकिस्तान के माइक्रोबायोलॉजिस्ट मोहम्मद खलील चिश्ती की सजा माफ करने की दया याचिका का मामला राज्यपाल शिवराज पाटिल के पास भेजा गया था जिस पर फैसला फिलहाल टल गया है। उन्होंने इस मामले पर चर्चा के लिए राज्य के गृह विभाग के प्रमुख अफसरों को इस मामले पर चर्चा के लिए 21 जून को बुलवाया तथा गृह विभाग से इस मामले पर कुछ और बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा। इस याचिका पर निर्णय अब गृह विभाग की रिपोर्ट आने पर होगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 जून को ही चिश्ती की मानवीय आधार पर सजा माफ करने के लिए राज्यपाल को सिफारिश की थी। 80 वर्षीय चिश्ती को 19 साल पूर्व अजमेर अपने भाई से मिलने आए थे और इस दौरान उनके भाई का उसके पड़ोसी से झगड़ा हो गया जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। चिश्ती का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था। 19 वर्ष पुराने हत्या के इस मामले में पिछले वर्ष उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अभी वे अजमेर जेल में बंद हैं।
टेट परीक्षा की नोडल एजेंसी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सुभाष गर्ग के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्डपीठ के आदेशों के पश्चात राज्य सरकार की सहमति से अध्यापक पात्रता परीक्षा की तिथि 31 जुलाई घोषित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 22 जून से 30 जून तक आवेदन पत्र का ऑन लाइन पंजीयन करवा कर बैंक चालान जमा करा सकते हैं।
आवेदन पत्र एवं संबंधित दस्तावेज एक जुलाई तक संग्रहण केन्द्र पर जमा होंगे एवं वेब साइट से प्रवेश पत्र डाउन लोड कार्य 15 जुलाई से होगा। दो पारियों में आयोजित इस परीक्षा के लिए न्यायालय आदेशों के अनुरूप वाणिज्य संकाय के छात्र भी आवेदन कर सकेगे। ऎसे अभ्यर्थियों के लिए स्नातक स्तर पर न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक होने आवश्यक है। इस परीक्षा में जम्मू कश्मीर के अभ्यार्थियों पर भी न्यूनतम 45 प्रतिशत प्राप्तांक का बंधन अनिवार्य होगा एवं आरक्षित वर्ग के परीक्षार्थी न्यूनतम 40 प्रतिशत प्राप्तांक पर ही परीक्षा दे सकेंगे।
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति माथुर का निधन-
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति नवीन माथुर का दिनांक 21 जून को ह्दयाघात से निधन हो गया। माथुर को 20 जून की रात तकलीफ होने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 21 जून सुबह उनका निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। उन्होंने करीब डेढ वर्ष पूर्व ही इस विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार ग्रहण किया था।
अजमेर जेल में बंद पाक वैज्ञानिक चिश्ती की रिहाई का मामला टला
हत्या के आरोप में अजमेर जेल में बंद पाकिस्तान के माइक्रोबायोलॉजिस्ट मोहम्मद खलील चिश्ती की सजा माफ करने की दया याचिका का मामला राज्यपाल शिवराज पाटिल के पास भेजा गया था जिस पर फैसला फिलहाल टल गया है। उन्होंने इस मामले पर चर्चा के लिए राज्य के गृह विभाग के प्रमुख अफसरों को इस मामले पर चर्चा के लिए 21 जून को बुलवाया तथा गृह विभाग से इस मामले पर कुछ और बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा। इस याचिका पर निर्णय अब गृह विभाग की रिपोर्ट आने पर होगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 जून को ही चिश्ती की मानवीय आधार पर सजा माफ करने के लिए राज्यपाल को सिफारिश की थी। 80 वर्षीय चिश्ती को 19 साल पूर्व अजमेर अपने भाई से मिलने आए थे और इस दौरान उनके भाई का उसके पड़ोसी से झगड़ा हो गया जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। चिश्ती का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था। 19 वर्ष पुराने हत्या के इस मामले में पिछले वर्ष उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अभी वे अजमेर जेल में बंद हैं।
राजस्थान की योजनाएँ-
महिलाओं को कम्प्यूटर बेसिक कोर्स प्रशिक्षण की नई योजना
राजस्थान सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने घरेलू व कामकाजी दोनों ही वर्गों की महिलाओं को राज्य सरकार की ओर से कंप्यूटर का बेसिक प्रशिक्षण दिलवाने की नई योजना प्रारंभ की है जिसमें प्रशिक्षण का पूरा व्यय राज्य सरकार उठाएगी। इस योजना में अलग अलग शैक्षिक योग्यता के आधार पर महिलाओं को कम्प्यूटर के दो पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा जिनके नाम क्रमशः R.S.C.I.T. (राजस्थान स्टेट सर्टिफिकेट कोर्स इन इंफोर्मेशन टेक्नोलोजी) एवं डिजिटल सहेली हैं। आरएससीआईटी के 3 महीने के पाठ्यक्रम में 16 से 45 वर्ष तक की दसवीं पास महिलाएं प्रवेश ले सकेंगी जबकि एक महीने के डिजिटल सहेली पाठयक्रम में 11 से 50 वर्ग तक की पांचवी पास महिलाएँ प्रवेश ले सकेगी। महिलाएँ दोनों पाठ्यक्रमों में से किसी एक में ही आवेदन कर सकेंगी।
यह प्रशिक्षण RKCL (राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के स्थानीय केन्द्र में दिया जाएगा। प्रशिक्षण हेतु महिलाएँ अपनी इच्छा अनुसार आरकेसीएल सेंटर का चयन कर सकेगी। आवेदन पत्र में उसे इसके लिए दो विकल्प भरकर देने होंगे। राज्य सरकार द्वारा फिलहाल आरएससीआईटी में 20 हजार तथा डिजिटल सहेली में 48 हजार महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें प्रति सेंटर लगभग 15 महिलाओं का लक्ष्य तय किया गया है। सभी महिलाओं को पाठ्यक्रम पूरा होने पर प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। प्रशिक्षण की इच्छुक निर्धारित योग्यताधारी आशार्थी महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट, आरकेसीएल की वेबसाइट अथवा स्थानीय आरकेसीएल केन्द्र से आवेदन पत्र भरकर महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी या उपनिदेशक कार्यालय या आरकेसीएल केन्द्र पर 15 जुलाई तक जमा करा सकेगी। इसके बाद सभी आवेदन पत्र उपनिदेशक कार्यालय में एकत्रित किए जाएंगे। जिला स्तर पर उपनिदेशक, कार्यक्रम अधिकारी, आरकेसीएल जिला प्रभारी की देखरेख में आवेदन पत्रों की जांच की जाएगी तथा जिलेवार लक्ष्यों के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। लक्ष्य की तुलना में अधिक आवेदन होने पर स्वयं सहायता समूह, किशोरी मंडल की सदस्य, ग्रामीण प्रशिक्षणार्थी तथा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला स्तरीय चयन सूची का प्रकाशन 25 जुलाई को किया जाएगा।
यह प्रशिक्षण RKCL (राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के स्थानीय केन्द्र में दिया जाएगा। प्रशिक्षण हेतु महिलाएँ अपनी इच्छा अनुसार आरकेसीएल सेंटर का चयन कर सकेगी। आवेदन पत्र में उसे इसके लिए दो विकल्प भरकर देने होंगे। राज्य सरकार द्वारा फिलहाल आरएससीआईटी में 20 हजार तथा डिजिटल सहेली में 48 हजार महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें प्रति सेंटर लगभग 15 महिलाओं का लक्ष्य तय किया गया है। सभी महिलाओं को पाठ्यक्रम पूरा होने पर प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। प्रशिक्षण की इच्छुक निर्धारित योग्यताधारी आशार्थी महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट, आरकेसीएल की वेबसाइट अथवा स्थानीय आरकेसीएल केन्द्र से आवेदन पत्र भरकर महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी या उपनिदेशक कार्यालय या आरकेसीएल केन्द्र पर 15 जुलाई तक जमा करा सकेगी। इसके बाद सभी आवेदन पत्र उपनिदेशक कार्यालय में एकत्रित किए जाएंगे। जिला स्तर पर उपनिदेशक, कार्यक्रम अधिकारी, आरकेसीएल जिला प्रभारी की देखरेख में आवेदन पत्रों की जांच की जाएगी तथा जिलेवार लक्ष्यों के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। लक्ष्य की तुलना में अधिक आवेदन होने पर स्वयं सहायता समूह, किशोरी मंडल की सदस्य, ग्रामीण प्रशिक्षणार्थी तथा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला स्तरीय चयन सूची का प्रकाशन 25 जुलाई को किया जाएगा।
विज्ञान क्विज-
22 जून 2011
1. परम शून्य ताप पर किसी धातु की चालकता अनंत तथा प्रतिरोधकता शून्य होने की घटना को क्या कहते हैं?
उत्तर: अतिचालकता
2. किस प्रकाशीय घटना के कारण इंद्र धनुष बनता है?
उत्तर: वर्ण विक्षेपण
3. पक्षियों को बहुत ऊँचाई पर उड़ते समय साँस की परेशानी क्यों महसूस नहीं होती?
उत्तर: उनमें अतिरिक्त वायु-कोष होते हैं।
4. पशुओं में 'मिल्क फीवर' बीमारी किसकी कमी के कारण होती है?
उत्तर: कैल्शियम की
5. मानव शरीर के किस अंग द्वारा यूरिया को रक्त को फ़िल्टर किया जाता है?
उत्तर: वृक्क द्वारा
6. किस ताप पर फारेनहाईट और सेल्सियस दोनों पैमाने के मान समान होते हैं?
उत्तर: - 40 डिग्री
7. वोल्टमीटर को परिपथ के किस क्रम में लगाते हैं?
उत्तर: समांतर क्रम में
8. हमारे पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का स्त्रोत क्या है?
उत्तर: सूर्य
9. Neno Technology किस आकार की रचना का प्रयोग करती है?
उत्तर: 10^-9 मीटर
10. भारत सरकार की योजना 'आशा' का सम्बन्ध किस क्षेत्र से है?
उत्तर: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से
उत्तर: अतिचालकता
2. किस प्रकाशीय घटना के कारण इंद्र धनुष बनता है?
उत्तर: वर्ण विक्षेपण
3. पक्षियों को बहुत ऊँचाई पर उड़ते समय साँस की परेशानी क्यों महसूस नहीं होती?
उत्तर: उनमें अतिरिक्त वायु-कोष होते हैं।
4. पशुओं में 'मिल्क फीवर' बीमारी किसकी कमी के कारण होती है?
उत्तर: कैल्शियम की
5. मानव शरीर के किस अंग द्वारा यूरिया को रक्त को फ़िल्टर किया जाता है?
उत्तर: वृक्क द्वारा
6. किस ताप पर फारेनहाईट और सेल्सियस दोनों पैमाने के मान समान होते हैं?
उत्तर: - 40 डिग्री
7. वोल्टमीटर को परिपथ के किस क्रम में लगाते हैं?
उत्तर: समांतर क्रम में
8. हमारे पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का स्त्रोत क्या है?
उत्तर: सूर्य
9. Neno Technology किस आकार की रचना का प्रयोग करती है?
उत्तर: 10^-9 मीटर
10. भारत सरकार की योजना 'आशा' का सम्बन्ध किस क्षेत्र से है?
उत्तर: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज-
22 जून 2011
1. राजस्थान में मुख्यमंत्री सड़क योजना कब लागू की गई?
उत्तर- 7 अक्टूबर 2005 को
2. शहरी विकास से संबंधित JNNURM परियोजना का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- Jawahar lal Nehru National Urban Rennovation Mission
3. राजस्थान में मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MRDP) किन जिलों में संचालित किया गया?
उत्तर- राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर व पाली
4. राज्य में महिला विकास कार्यक्रम कब शुरू किया गया?
उत्तर- 1984 में
5. राजस्थान में बालिकाओं के विकास के लिए किशोर बालिका योजना किस वर्ष में लागू की गई?
उत्तर- 1997-98
6. राजस्थान में स्कूल नहीं जाने वाली बालिकाओं के विकास के लिए कौनसी योजना लागू की गई?
उत्तर- किशोरी शक्ति योजना
7. किस योजना में किसी परिवार में दो या अधिक विकलांग होने पर राज्य सरकार द्वारा उसे बीपीएल परिवार की सुविधाएँ दिए जाने का प्रावधान है?
उत्तर- आस्था योजना में
8. राजस्थान में कॅरियर डे परियोजना के तहत माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रतिवर्ष किस दिन कॅरियर डे मनाया जाने का प्रावधान है?
उत्तर- राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को
9. शिक्षा विभाग की कॅरियर डे योजना की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी कौनसा संस्थान है?
उत्तर- राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईआरटी) उदयपुर को
10. राजस्थान में अनिमिया नियंत्रण कार्यक्रम किसके सहयोग से संचालित है?
उत्तर- यूनिसेफ के
उत्तर- 7 अक्टूबर 2005 को
2. शहरी विकास से संबंधित JNNURM परियोजना का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- Jawahar lal Nehru National Urban Rennovation Mission
3. राजस्थान में मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MRDP) किन जिलों में संचालित किया गया?
उत्तर- राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर व पाली
4. राज्य में महिला विकास कार्यक्रम कब शुरू किया गया?
उत्तर- 1984 में
5. राजस्थान में बालिकाओं के विकास के लिए किशोर बालिका योजना किस वर्ष में लागू की गई?
उत्तर- 1997-98
6. राजस्थान में स्कूल नहीं जाने वाली बालिकाओं के विकास के लिए कौनसी योजना लागू की गई?
उत्तर- किशोरी शक्ति योजना
7. किस योजना में किसी परिवार में दो या अधिक विकलांग होने पर राज्य सरकार द्वारा उसे बीपीएल परिवार की सुविधाएँ दिए जाने का प्रावधान है?
उत्तर- आस्था योजना में
8. राजस्थान में कॅरियर डे परियोजना के तहत माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रतिवर्ष किस दिन कॅरियर डे मनाया जाने का प्रावधान है?
उत्तर- राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को
9. शिक्षा विभाग की कॅरियर डे योजना की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी कौनसा संस्थान है?
उत्तर- राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईआरटी) उदयपुर को
10. राजस्थान में अनिमिया नियंत्रण कार्यक्रम किसके सहयोग से संचालित है?
उत्तर- यूनिसेफ के
Tuesday, June 21, 2011
राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड
राज्य के अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के आर्थिक विकास हेतु राजस्थान सरकार ने 19 अप्रैल 2000 को एक राज्यादेश द्वारा इस निगम की स्थापना की। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए इस निगम के पक्ष में 10 करोड़ रुपए की राज्य गारन्टी प्रदान की। राजस्थान सहकारी संस्था अधिनियम, 1965 के अन्तर्गत 29 मई, 2000 को इस निगम पंजीकरण करवाया गया। राज्य सरकार ने 22 जून 2000 को इसके संचालन के लिए निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को इसका प्रबन्ध निदेशक घोषित किया।
योजनाओं का विवरण
> राष्ट्रीय निगम आय-जनित सभी आर्थिक गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करता है, जिसके तहत क्रमशः सामान्य ऋण योजना, न्यू स्वर्णिमा योजना, मार्जिन मनी योजना, माईक्रो वित्त ऋण, शिक्षा ऋण योजना आदि को कृषि, लघु व्यवसाय, परिवहन सेवाएँ आदि वर्गों में विभाजित किया गया है।
> 50,000 रुपए से अधिक की परियोजनाएं राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास सहकारी निगम स्तर से संचालित की जाती है तथा सम्बन्धित राष्ट्रीय वित्त एवं विकास निगम, नई दिल्ली से अनुमोदित होती हैं।
> राष्ट्रीय निगम, नई दिल्ली को स्वीकृति हेतु प्रेषित की जाने वाली परियोजनाओं के प्रस्तावों में कृषि, व्यापार, यातायात एवं लघु उद्योग सेवाओं की गतिविधियों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाता है।
किए जा सकने वाले व्यवसाय
1. एस.टी.डी./पी.सी.ओ.
2. चॉक निर्माण
3. मसाला उद्योग
4 कारपेन्टरी शॉप
5 इलेक्ट्रिक मोटर
6 डेयरी भैंस
7 चाय-पान की दुकान
8 ऑटो टायर रिपेयर शॉप
9 लुहारी कार्य
10 ऑटो पार्ट
11 बुक बाईन्डिंग
12 टाईपिंग सेन्टर
13 सुनारी कार्य
14 टेलरिंग शॉप
15 टेलरिंग मैटेरियल
16 स्टील फैब्रीकेशन
17 हेयर कटिंग सैलून/ब्यूटी पार्लर
18 गाय डेयरी
19 गोल्ड प्लेटिंग ऑन मेटल प्लान्ट
20 बैण्डबाजे की दुकान
21 फोटोग्राफी
22 एलोपैथी क्लिनिक
23 ऑटो रिक्शा
सुनारी कार्य
24 कृत्रिम आभूषण शॉप
चांदी-सोने की प्लेटिंग का कार्य
25 फल-फूल, सब्जी की दुकान
26 बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान
27 खाद, बीज, दवा, कृषि उपकरण शॉप
28 ढाबा/ रेस्टोरेन्ट
29 टैन्ट हाउस
30 बर्तन की दुकान
31 ड्राईक्लीन/ वॉशिंग शॉप
32 साईकिल बिक्री, मरम्मत, किराये देना
33 बेकरी
34 बिजली के सामान की दुकान
35 स्टेशनरी, पेन किताब की दुकान
36 छापा खाना
37 कपड़ों की रंगाई एवं प्रिन्टिंग
38 जूते, चप्पल बनाना एवं बिक्री
39 ट्रेक्टर मय ट्रॉली
40 जीप टैक्सी
41 कार टैक्सी
42 मिनी बस
43 मिनी ट्रक
44 इन्जीनियरिंग वर्कशॉप
45 कम्प्यूटर इन्स्टीट्यूट
46 कृषि उपकरण
47 कुआं गहरा करवाना
48 डीजल पम्प
49 आटा चक्की
50 मनीहारी सामान की दुकान
51 जूते चप्पल की दुकान
52 मिठाई की दुकान
53 हैण्डीक्राफ्ट
54 कपड़ा व्यवसाय
55 रेडीमेड गारमेन्ट्स
56 जनरल स्टोर
57 मेडिकल स्टोर
58 पत्तल दोने
59 कशीदाकारी
60 फोटोकॉपीयर यूनिट
61 पेन्टिंग की दुकान
62 फूल झाड़ू
63 प्लेइंग टैम्पू
64 नमकीन व्यवसाय
65 मिक्सर मशीन
66 म्यूजिक/ साउण्ड सिस्टम
67 ऑटो सर्विस सेन्टर
68 बैटरी निर्माण
69 मसाला उद्योग
70 लेथ मशीन
71 कुट्टी /खाखला
72 साबुन व्यवसाय
73 किराना दुकान
74 कम्प्यूटर जॉब वर्क
75 तेल मिल
परियोजना की लागत एवं स्वीकृत की जाने वाली राशि तथा अन्य शर्ते निगम के जिला कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।
उक्त योजनाओं के अतिरिक्त अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड के जिला परियोजना प्रबन्धक अन्य योजनाओं को सम्मिलित करने हेतु प्रस्ताव भेज सकेंगे। प्रार्थी अपनी इच्छा अनुसार औचित्यपूर्ण आयजनित व्यवसाय का चयन करने को स्वतन्त्र है।
ऋण प्राप्त करने की पात्रता-
1. राजस्थान का मूल निवासी हो।
2. सरकार द्वारा जारी आदेशों में घोषित अन्य पिछड़ा वर्ग का हो।
3. प्रार्थी की समस्त स्रोतों से अधिकतम वार्षिक आय गरीबी की रेखा से नीचे की आय से दुगुनी आय हो।
4. प्रार्थी पर किसी बैंक, सहकारी संस्था, निगम या राज्य सरकार का अवधिपार ऋण बकाया नहीं हो।
5. जिस कार्य के लिए ऋण लिया जा रहा है, उसके लिए प्रशिक्षण या अनुभव प्राप्त हो।
योजना के अन्य विशेष तथ्य-
> ऋण के लिए पात्र अभ्यर्थी को जिला परियोजना प्रबन्धक, राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड (अनुजा) के कार्यालय द्वारा सशुल्क जारी निर्धारित आवेदन पत्र दो प्रतियों में भरना होता है।
> ऋण आवेदन पत्र के साथ जाति, आय व मूल निवास प्रमाण पत्र, शपथ पत्र एवं जमानतनामा आवश्यक है। बी.पी.एल. सर्वे की चयनित सूची में नाम अंकित होने की स्थिति में आय एवं मूल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।
> इनकी जाँच उपरांत जिला कलक्टर स्तर पर गठित स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा उचित लगने पर ऋण स्वीकृत किए जाते हैं।
> प्रार्थी द्वारा पूर्व में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम अथवा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं के अन्तर्गत ऋण नहीं लिया होना चाहिए।
> जिस योजना के लिए ऋण लेना चाहता है, उसका पर्याप्त अनुभव हो, उदाहरण के लिए यदि नाई जाति का लड़का हेयर कटिंग सैलून के लिए ऋण लेना चाहता है तो उसकी जाति के आधार पर ही अनुभव को पर्याप्त माना जाता है लेकिन यदि वह अन्य कार्य हेतु ऋण चाहता है तो उसे उस कार्य का पर्याप्त अनुभव प्रमाणित करना होता है।
> प्रार्थी को निम्न अनुसार जमानत की व्यवस्था करनी होगी-
(अ) 50000 तक के ऋण के लिए एक सरकारी या बैंक अधिकारी या कर्मचारी।
(ब) 50000 से अधिक ऋण के लिए 2 सरकारी या बैंक अधिकारी या कर्मचारी।
> ऋण स्वीकृति पश्चात् प्रार्थी को नियमानुसार सामान क्रय करने के कोटेशन अनुजा निगम के जिला कार्यालय को जमा कराने होते हैँ एवं जिला कार्यालय द्वारा सप्लायर फर्मोँ को सीधे ही राशि का चैक जारी किए जाते हैँ।
> लाभार्थियों में 30 प्रतिशत महिलाओं को लाभान्वित किया जा सकता है। रक्षा सेनानियों की विधवाओं को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के प्रयास किए जाते हैँ।
योजनाओं का विवरण
> राष्ट्रीय निगम आय-जनित सभी आर्थिक गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करता है, जिसके तहत क्रमशः सामान्य ऋण योजना, न्यू स्वर्णिमा योजना, मार्जिन मनी योजना, माईक्रो वित्त ऋण, शिक्षा ऋण योजना आदि को कृषि, लघु व्यवसाय, परिवहन सेवाएँ आदि वर्गों में विभाजित किया गया है।
> 50,000 रुपए से अधिक की परियोजनाएं राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास सहकारी निगम स्तर से संचालित की जाती है तथा सम्बन्धित राष्ट्रीय वित्त एवं विकास निगम, नई दिल्ली से अनुमोदित होती हैं।
> राष्ट्रीय निगम, नई दिल्ली को स्वीकृति हेतु प्रेषित की जाने वाली परियोजनाओं के प्रस्तावों में कृषि, व्यापार, यातायात एवं लघु उद्योग सेवाओं की गतिविधियों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाता है।
किए जा सकने वाले व्यवसाय
1. एस.टी.डी./पी.सी.ओ.
2. चॉक निर्माण
3. मसाला उद्योग
4 कारपेन्टरी शॉप
5 इलेक्ट्रिक मोटर
6 डेयरी भैंस
7 चाय-पान की दुकान
8 ऑटो टायर रिपेयर शॉप
9 लुहारी कार्य
10 ऑटो पार्ट
11 बुक बाईन्डिंग
12 टाईपिंग सेन्टर
13 सुनारी कार्य
14 टेलरिंग शॉप
15 टेलरिंग मैटेरियल
16 स्टील फैब्रीकेशन
17 हेयर कटिंग सैलून/ब्यूटी पार्लर
18 गाय डेयरी
19 गोल्ड प्लेटिंग ऑन मेटल प्लान्ट
20 बैण्डबाजे की दुकान
21 फोटोग्राफी
22 एलोपैथी क्लिनिक
23 ऑटो रिक्शा
सुनारी कार्य
24 कृत्रिम आभूषण शॉप
चांदी-सोने की प्लेटिंग का कार्य
25 फल-फूल, सब्जी की दुकान
26 बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान
27 खाद, बीज, दवा, कृषि उपकरण शॉप
28 ढाबा/ रेस्टोरेन्ट
29 टैन्ट हाउस
30 बर्तन की दुकान
31 ड्राईक्लीन/ वॉशिंग शॉप
32 साईकिल बिक्री, मरम्मत, किराये देना
33 बेकरी
34 बिजली के सामान की दुकान
35 स्टेशनरी, पेन किताब की दुकान
36 छापा खाना
37 कपड़ों की रंगाई एवं प्रिन्टिंग
38 जूते, चप्पल बनाना एवं बिक्री
39 ट्रेक्टर मय ट्रॉली
40 जीप टैक्सी
41 कार टैक्सी
42 मिनी बस
43 मिनी ट्रक
44 इन्जीनियरिंग वर्कशॉप
45 कम्प्यूटर इन्स्टीट्यूट
46 कृषि उपकरण
47 कुआं गहरा करवाना
48 डीजल पम्प
49 आटा चक्की
50 मनीहारी सामान की दुकान
51 जूते चप्पल की दुकान
52 मिठाई की दुकान
53 हैण्डीक्राफ्ट
54 कपड़ा व्यवसाय
55 रेडीमेड गारमेन्ट्स
56 जनरल स्टोर
57 मेडिकल स्टोर
58 पत्तल दोने
59 कशीदाकारी
60 फोटोकॉपीयर यूनिट
61 पेन्टिंग की दुकान
62 फूल झाड़ू
63 प्लेइंग टैम्पू
64 नमकीन व्यवसाय
65 मिक्सर मशीन
66 म्यूजिक/ साउण्ड सिस्टम
67 ऑटो सर्विस सेन्टर
68 बैटरी निर्माण
69 मसाला उद्योग
70 लेथ मशीन
71 कुट्टी /खाखला
72 साबुन व्यवसाय
73 किराना दुकान
74 कम्प्यूटर जॉब वर्क
75 तेल मिल
परियोजना की लागत एवं स्वीकृत की जाने वाली राशि तथा अन्य शर्ते निगम के जिला कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।
उक्त योजनाओं के अतिरिक्त अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड के जिला परियोजना प्रबन्धक अन्य योजनाओं को सम्मिलित करने हेतु प्रस्ताव भेज सकेंगे। प्रार्थी अपनी इच्छा अनुसार औचित्यपूर्ण आयजनित व्यवसाय का चयन करने को स्वतन्त्र है।
ऋण प्राप्त करने की पात्रता-
1. राजस्थान का मूल निवासी हो।
2. सरकार द्वारा जारी आदेशों में घोषित अन्य पिछड़ा वर्ग का हो।
3. प्रार्थी की समस्त स्रोतों से अधिकतम वार्षिक आय गरीबी की रेखा से नीचे की आय से दुगुनी आय हो।
4. प्रार्थी पर किसी बैंक, सहकारी संस्था, निगम या राज्य सरकार का अवधिपार ऋण बकाया नहीं हो।
5. जिस कार्य के लिए ऋण लिया जा रहा है, उसके लिए प्रशिक्षण या अनुभव प्राप्त हो।
योजना के अन्य विशेष तथ्य-
> ऋण के लिए पात्र अभ्यर्थी को जिला परियोजना प्रबन्धक, राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड (अनुजा) के कार्यालय द्वारा सशुल्क जारी निर्धारित आवेदन पत्र दो प्रतियों में भरना होता है।
> ऋण आवेदन पत्र के साथ जाति, आय व मूल निवास प्रमाण पत्र, शपथ पत्र एवं जमानतनामा आवश्यक है। बी.पी.एल. सर्वे की चयनित सूची में नाम अंकित होने की स्थिति में आय एवं मूल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।
> इनकी जाँच उपरांत जिला कलक्टर स्तर पर गठित स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा उचित लगने पर ऋण स्वीकृत किए जाते हैं।
> प्रार्थी द्वारा पूर्व में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम अथवा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं के अन्तर्गत ऋण नहीं लिया होना चाहिए।
> जिस योजना के लिए ऋण लेना चाहता है, उसका पर्याप्त अनुभव हो, उदाहरण के लिए यदि नाई जाति का लड़का हेयर कटिंग सैलून के लिए ऋण लेना चाहता है तो उसकी जाति के आधार पर ही अनुभव को पर्याप्त माना जाता है लेकिन यदि वह अन्य कार्य हेतु ऋण चाहता है तो उसे उस कार्य का पर्याप्त अनुभव प्रमाणित करना होता है।
> प्रार्थी को निम्न अनुसार जमानत की व्यवस्था करनी होगी-
(अ) 50000 तक के ऋण के लिए एक सरकारी या बैंक अधिकारी या कर्मचारी।
(ब) 50000 से अधिक ऋण के लिए 2 सरकारी या बैंक अधिकारी या कर्मचारी।
> ऋण स्वीकृति पश्चात् प्रार्थी को नियमानुसार सामान क्रय करने के कोटेशन अनुजा निगम के जिला कार्यालय को जमा कराने होते हैँ एवं जिला कार्यालय द्वारा सप्लायर फर्मोँ को सीधे ही राशि का चैक जारी किए जाते हैँ।
> लाभार्थियों में 30 प्रतिशत महिलाओं को लाभान्वित किया जा सकता है। रक्षा सेनानियों की विधवाओं को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के प्रयास किए जाते हैँ।
राजस्थान में गाड़िया लौहारों के कल्याण की कुछ योजनाएँ
महाराणा प्रताप आवास योजना (गाड़िया लौहारों को भवन निर्माण हेतु अनुदान सहायता)-
यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित की जा रही है जिसमें गाड़िया लौहारों को स्थायी रूप से बसाने हेतु राज्य सरकार द्वारा भूखण्ड रियायती दर पर / नि:शुल्क आवंटित किया जाता है तथा मकान निर्माण के लिए अनुदान भी दिया जाता है।
> ''गाड़िया लौहार'' से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसके पास में स्वयं का मकान नहीं है तथा वह एवं उसका परिवार बैलगाड़ी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते हुए किसी स्थान विशेष पर अस्थाई रूप से निवास कर लौहारगिरी का व्यवसाय करता है।
> इस योजना में गाड़िया लौहारों को ग्रामीण क्षेत्र में 150 वर्ग गज भूमि ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा रियायती दर पर उपलब्ध करवाई जाती है एवं शहरी क्षेत्र में 50 वर्ग गज भूमि नगरीय विकास विभाग द्वारा नि:शुल्क आवंटित किए जाने का प्रावधान है।
> समाज कल्याण विभाग द्वारा गाड़िया लौहारों को मकान निर्माण हेतु अनुदान सहायता राशि नियम, 1997 को वर्ष 1999-2000 में संशोधित करते हुए इस योजनान्तर्गत अनुदान सहायता राशि को बढ़ाकर इन्दिरा आवास योजना के अनुरूप 17,500 रुपए किया गया। इस राशि को दिनांक 24.7.2007 द्वारा बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति मकान कर दिया गया।
तदुपरान्त दिनांक 13.8.09 द्वारा उक्त सहायता राशि बढ़ाकर 35,000 रुपए प्रति मकान कर दिया गया। यह वृद्धि वर्ष 2009-10 से स्वीकृत किए जाने वाले नए भवन निर्माण प्रकरणों पर ही लागू है।
> संशोधित आदेश दिनांक 20.1.2011 के अनुसार यह राशि तीन किश्तों में देय है। प्रथम किश्त 10,000 रुपए, द्वितीय किश्त 15,000 रुपए एवं तृतीय किश्त 10,000 रुपए दी जाती है।
> वर्ष 2006 में विभाग की अधिसूचना दिनांक 30.10.06 द्वारा इस योजना का नाम '' महाराणा प्रताप आवास योजना '' किया गया।
> सहायता राशि प्राप्त करने के लिये निर्धारित आवेदन-पत्र समाज कल्याण अधिकारी/ सहायक निदेशक / उपनिदेशक को प्रस्तुत करना होता है।
गाड़िया लौहारों को कच्चा माल खरीदने के लिये अनुदान योजना- वर्ष 1991
राज्य सरकार ने गाड़िया लौहारों के आर्थिक विकास हेतु यह योजना वर्ष 1991 से संचालित की गई। इसके तहत उनके व्यवसाय में सहायता प्रदान करने हेतु कच्चा माल क्रय करने के लिए प्रति व्यक्ति 500 रुपए अनुदान स्वीकृत किए जाने का प्रावधान था, जिसे दिनांक 1.10.2007 द्वारा बढ़ाकर 1000 रुपए तथा दिनांक 4.5.2011 द्वारा बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दिया गया।
> यह योजना गाड़िया लौहारों को कच्चा माल खरीदने के लिये अनुदान योजना- वर्ष 1991 कहलाती है।
> यह योजना ''समाज कल्याण विभाग'' द्वारा संचालित है। आवेदन निर्धारित प्रपत्र में सम्बन्धित जिले के समाज कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत करना होता है।
> इसमें आवेदनकर्ता गाड़िया लोहार जाति से होना चाहिए।
यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित की जा रही है जिसमें गाड़िया लौहारों को स्थायी रूप से बसाने हेतु राज्य सरकार द्वारा भूखण्ड रियायती दर पर / नि:शुल्क आवंटित किया जाता है तथा मकान निर्माण के लिए अनुदान भी दिया जाता है।
> ''गाड़िया लौहार'' से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसके पास में स्वयं का मकान नहीं है तथा वह एवं उसका परिवार बैलगाड़ी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते हुए किसी स्थान विशेष पर अस्थाई रूप से निवास कर लौहारगिरी का व्यवसाय करता है।
> इस योजना में गाड़िया लौहारों को ग्रामीण क्षेत्र में 150 वर्ग गज भूमि ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा रियायती दर पर उपलब्ध करवाई जाती है एवं शहरी क्षेत्र में 50 वर्ग गज भूमि नगरीय विकास विभाग द्वारा नि:शुल्क आवंटित किए जाने का प्रावधान है।
> समाज कल्याण विभाग द्वारा गाड़िया लौहारों को मकान निर्माण हेतु अनुदान सहायता राशि नियम, 1997 को वर्ष 1999-2000 में संशोधित करते हुए इस योजनान्तर्गत अनुदान सहायता राशि को बढ़ाकर इन्दिरा आवास योजना के अनुरूप 17,500 रुपए किया गया। इस राशि को दिनांक 24.7.2007 द्वारा बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति मकान कर दिया गया।
तदुपरान्त दिनांक 13.8.09 द्वारा उक्त सहायता राशि बढ़ाकर 35,000 रुपए प्रति मकान कर दिया गया। यह वृद्धि वर्ष 2009-10 से स्वीकृत किए जाने वाले नए भवन निर्माण प्रकरणों पर ही लागू है।
> संशोधित आदेश दिनांक 20.1.2011 के अनुसार यह राशि तीन किश्तों में देय है। प्रथम किश्त 10,000 रुपए, द्वितीय किश्त 15,000 रुपए एवं तृतीय किश्त 10,000 रुपए दी जाती है।
> वर्ष 2006 में विभाग की अधिसूचना दिनांक 30.10.06 द्वारा इस योजना का नाम '' महाराणा प्रताप आवास योजना '' किया गया।
> सहायता राशि प्राप्त करने के लिये निर्धारित आवेदन-पत्र समाज कल्याण अधिकारी/ सहायक निदेशक / उपनिदेशक को प्रस्तुत करना होता है।
गाड़िया लौहारों को कच्चा माल खरीदने के लिये अनुदान योजना- वर्ष 1991
राज्य सरकार ने गाड़िया लौहारों के आर्थिक विकास हेतु यह योजना वर्ष 1991 से संचालित की गई। इसके तहत उनके व्यवसाय में सहायता प्रदान करने हेतु कच्चा माल क्रय करने के लिए प्रति व्यक्ति 500 रुपए अनुदान स्वीकृत किए जाने का प्रावधान था, जिसे दिनांक 1.10.2007 द्वारा बढ़ाकर 1000 रुपए तथा दिनांक 4.5.2011 द्वारा बढ़ाकर 2,500 रुपए कर दिया गया।
> यह योजना गाड़िया लौहारों को कच्चा माल खरीदने के लिये अनुदान योजना- वर्ष 1991 कहलाती है।
> यह योजना ''समाज कल्याण विभाग'' द्वारा संचालित है। आवेदन निर्धारित प्रपत्र में सम्बन्धित जिले के समाज कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत करना होता है।
> इसमें आवेदनकर्ता गाड़िया लोहार जाति से होना चाहिए।
राजस्थान की योजनाएँ-
मुख्यमंत्री सहायता कोष
दुर्घटना में घायल/मृतक आश्रित हेतु सहायता-
आकस्मिक दुर्घटना में घायल होने वालों तथा प्राकृतिक आपदा/आकस्मिक दुर्घटना में मृतकों के आश्रितों को इस कोष से तात्कालिक सहायता स्वीकृत की जाती है। मृतक के आश्रितों को 20,000/- तक तथा गम्भीर रूप से घायल व्यक्ति को 5000/- एवं साधारण रूप से घायल व्यक्ति को 2500/- तक की सहायता स्वीकृत की जाती है। सहायता सम्बन्धित जिला कलेक्टर द्वारा स्वीकृत की जाती है। सहायता स्वीकृति हेतु सम्बन्धित जिला कलेक्टर के कार्यालय में साधारण प्रार्थना पत्र, चोट प्रतिवेदन/पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआई.आर. की प्रति प्रस्तुत करना होता है।
गंभीर रोग के उपचार हेतु सहायता-
राजस्थान में स्थित किसी भी राजकीय चिकित्सालय, औषधालय अथवा मुख्यमंत्री सहायता कोष से अधिकृत सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सालयों में इलाज हेतु आर्थिक सहायता दी जाती है।
> इस योजना में वे परिवार आते हैं जिनकी वार्षिक आय 60000/- या इससे कम हैं।
> ह्रदय रोग, गुर्दा रोग, केंसर रोग इत्यादि गम्भीर रोग के लम्बे समय तक चलने वाले उपचार के लिए एकमुश्त सहायता स्वीकृत की जाती है।
> उपचार से पूर्व आवेदन प्रस्तुत करना आवश्यक है।
प्रार्थना पत्र के साथ निम्नलिखित प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है-
(i) गम्भीर रोग से पीड़ितों के चिकित्सा हेतु सहायता के लिए सादा कागज पर प्रार्थना पत्र।
प्रार्थना पत्र निम्नलिखित पते पर भेजना होता है-
मुख्यमंत्री सहायता कोष कमरा नं. 22-पी, मुख्य भवन, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान
(ii) तहसीलदार द्वरा जारी किया गया आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 60000/- या इससे कम होने का प्रमाण पत्र (मूल अथवा सत्यापित प्रति)
(iii) अनुमानित चिकित्सा व्यय का चिकित्सक द्वारा प्रमाणित विवरण, जिस पर उपचार अवधि, ऑपरेशन दिनांक आदि अंकित हो तथा संबंधित चिकित्सालय की स्पष्ट मोहर अंकित हो।
(iv) परिवार की वार्षिक आय का 10/- नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर नोटरी पब्लिक से प्रमाणित शपथ पत्र।
(v) राशन कार्ड की फोटो प्रति।
सामान्य सहायता-
सामान्य सहायता मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न संस्था/व्यक्तियों को स्वीकृत की जाती है।
आकस्मिक दुर्घटना में घायल होने वालों तथा प्राकृतिक आपदा/आकस्मिक दुर्घटना में मृतकों के आश्रितों को इस कोष से तात्कालिक सहायता स्वीकृत की जाती है। मृतक के आश्रितों को 20,000/- तक तथा गम्भीर रूप से घायल व्यक्ति को 5000/- एवं साधारण रूप से घायल व्यक्ति को 2500/- तक की सहायता स्वीकृत की जाती है। सहायता सम्बन्धित जिला कलेक्टर द्वारा स्वीकृत की जाती है। सहायता स्वीकृति हेतु सम्बन्धित जिला कलेक्टर के कार्यालय में साधारण प्रार्थना पत्र, चोट प्रतिवेदन/पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआई.आर. की प्रति प्रस्तुत करना होता है।
गंभीर रोग के उपचार हेतु सहायता-
राजस्थान में स्थित किसी भी राजकीय चिकित्सालय, औषधालय अथवा मुख्यमंत्री सहायता कोष से अधिकृत सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सालयों में इलाज हेतु आर्थिक सहायता दी जाती है।
> इस योजना में वे परिवार आते हैं जिनकी वार्षिक आय 60000/- या इससे कम हैं।
> ह्रदय रोग, गुर्दा रोग, केंसर रोग इत्यादि गम्भीर रोग के लम्बे समय तक चलने वाले उपचार के लिए एकमुश्त सहायता स्वीकृत की जाती है।
> उपचार से पूर्व आवेदन प्रस्तुत करना आवश्यक है।
प्रार्थना पत्र के साथ निम्नलिखित प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है-
(i) गम्भीर रोग से पीड़ितों के चिकित्सा हेतु सहायता के लिए सादा कागज पर प्रार्थना पत्र।
प्रार्थना पत्र निम्नलिखित पते पर भेजना होता है-
मुख्यमंत्री सहायता कोष कमरा नं. 22-पी, मुख्य भवन, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान
(ii) तहसीलदार द्वरा जारी किया गया आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 60000/- या इससे कम होने का प्रमाण पत्र (मूल अथवा सत्यापित प्रति)
(iii) अनुमानित चिकित्सा व्यय का चिकित्सक द्वारा प्रमाणित विवरण, जिस पर उपचार अवधि, ऑपरेशन दिनांक आदि अंकित हो तथा संबंधित चिकित्सालय की स्पष्ट मोहर अंकित हो।
(iv) परिवार की वार्षिक आय का 10/- नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर नोटरी पब्लिक से प्रमाणित शपथ पत्र।
(v) राशन कार्ड की फोटो प्रति।
सामान्य सहायता-
सामान्य सहायता मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न संस्था/व्यक्तियों को स्वीकृत की जाती है।
विज्ञान क्विज- 21 जून 2011
1. गति का दूसरा नियम किस भौतिक राशि के संरक्षण से संबंधित है?
उत्तर: संवेग
2. प्रतिबाधा (Impedance) का व्युत्क्रम क्या कहलाता है?
उत्तर: प्रवेश्यता (Admittance)
3. पीलिया रोग किस अंग से संबंधित है?
उत्तर: यकृत (Liver) से
4. "द्रव सभी दिशाओं में समान दाब लगाता है"- यह कथन किस नियम से सम्बंधित है?
उत्तर: पास्कल के सिद्धांत से
5. किस तापमान पैमाने पर मानव शरीर का सामान्य ताप 37 डिग्री होता है?
उत्तर: सेल्सियस पैमाने पर
6. रक्तदाब का नियंत्रण कौनसी ग्रंथि करती है ?
उत्तर: अधिवृक्क (Adrenal)
7. कौनसी धातु क्लोरोफिल का घटक है?
उत्तर: मैग्नीशियम
8. विटामिन बी की कमी से कौनसा रोग होता है?
उत्तर: बेरी-बेरी
9. शुष्क बर्फ किसे कहते हैं?
उत्तर: ठोस कार्बन डाईऑक्साइड को
10. एल.पी.जी. गैस की प्रमुख अवयव गैस क्या है?
उत्तर: ब्यूटेन और प्रोपेन
11. न्यूटन प्रति वर्ग मीटर किस भौतिक राशि का मात्रक है?
उत्तर: दाब का
12. सार्वत्रिक दाता रक्त वर्ग कौनसा है?
उत्तर: रक्त वर्ग O
13. एक किलोवाट शक्ति कितने वाट के बराबर होती है?
उत्तर: 1000 वाट
14. ओम के नियम के अनुसार चालक के सिरो पर उत्पन्न विभवान्तर किसके समानुपाती होता है?
उत्तर: विद्युत धारा के
15. वे ध्वनि तरंग जिनकी आवृति 20 किलो हर्टज से अधिक हो, क्या कहलाती है?
उत्तर: पराश्रव्य ध्वनि
उत्तर: संवेग
2. प्रतिबाधा (Impedance) का व्युत्क्रम क्या कहलाता है?
उत्तर: प्रवेश्यता (Admittance)
3. पीलिया रोग किस अंग से संबंधित है?
उत्तर: यकृत (Liver) से
4. "द्रव सभी दिशाओं में समान दाब लगाता है"- यह कथन किस नियम से सम्बंधित है?
उत्तर: पास्कल के सिद्धांत से
5. किस तापमान पैमाने पर मानव शरीर का सामान्य ताप 37 डिग्री होता है?
उत्तर: सेल्सियस पैमाने पर
6. रक्तदाब का नियंत्रण कौनसी ग्रंथि करती है ?
उत्तर: अधिवृक्क (Adrenal)
7. कौनसी धातु क्लोरोफिल का घटक है?
उत्तर: मैग्नीशियम
8. विटामिन बी की कमी से कौनसा रोग होता है?
उत्तर: बेरी-बेरी
9. शुष्क बर्फ किसे कहते हैं?
उत्तर: ठोस कार्बन डाईऑक्साइड को
10. एल.पी.जी. गैस की प्रमुख अवयव गैस क्या है?
उत्तर: ब्यूटेन और प्रोपेन
11. न्यूटन प्रति वर्ग मीटर किस भौतिक राशि का मात्रक है?
उत्तर: दाब का
12. सार्वत्रिक दाता रक्त वर्ग कौनसा है?
उत्तर: रक्त वर्ग O
13. एक किलोवाट शक्ति कितने वाट के बराबर होती है?
उत्तर: 1000 वाट
14. ओम के नियम के अनुसार चालक के सिरो पर उत्पन्न विभवान्तर किसके समानुपाती होता है?
उत्तर: विद्युत धारा के
15. वे ध्वनि तरंग जिनकी आवृति 20 किलो हर्टज से अधिक हो, क्या कहलाती है?
उत्तर: पराश्रव्य ध्वनि
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज-
21 जून 2011
1. राजस्थान में चौहान राजवंश का प्रारंभिक केंद्र था?
उत्तर: सपादलक्ष
2. यूनानी देवता अपोलो की चित्रांकित मुद्रा किस स्थल से प्राप्त हुई?
उत्तर: आहड़ से
3. बैराठ या विराटनगर किसकी राजधानी थी?
उत्तर: मत्स्य की
4. उदयपुर के आसपास का पहाड़ी क्षेत्र क्या कहलाता है?
उत्तर: गिरवा
5. प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा के मध्य 56 ग्रामों का मैदानी क्षेत्र क्या कहलाता है?
उत्तर: छप्पन का मैदान
6. चित्तौड़ विजय के बाद अल्लाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ का गवर्नर किसे नियुक्त किया?
उत्तर: खिज्र खाँ को
7. विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक जम्भोजी का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: पीपासर में
8. सन् 1875 में मेयो कॉलेज की स्थापना कहाँ की गई थी?
उत्तर: अजमेर में
9. विभीषण का मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर: कैथून ( कोटा ) में
10. हाड़ौती का खजुराहो किस मंदिर को कहा जाता है?
उत्तर: भंडदेवरा ( रामगढ़ ) शिवमंदिर जिला बारां को
उत्तर: सपादलक्ष
2. यूनानी देवता अपोलो की चित्रांकित मुद्रा किस स्थल से प्राप्त हुई?
उत्तर: आहड़ से
3. बैराठ या विराटनगर किसकी राजधानी थी?
उत्तर: मत्स्य की
4. उदयपुर के आसपास का पहाड़ी क्षेत्र क्या कहलाता है?
उत्तर: गिरवा
5. प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा के मध्य 56 ग्रामों का मैदानी क्षेत्र क्या कहलाता है?
उत्तर: छप्पन का मैदान
6. चित्तौड़ विजय के बाद अल्लाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ का गवर्नर किसे नियुक्त किया?
उत्तर: खिज्र खाँ को
7. विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक जम्भोजी का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: पीपासर में
8. सन् 1875 में मेयो कॉलेज की स्थापना कहाँ की गई थी?
उत्तर: अजमेर में
9. विभीषण का मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर: कैथून ( कोटा ) में
10. हाड़ौती का खजुराहो किस मंदिर को कहा जाता है?
उत्तर: भंडदेवरा ( रामगढ़ ) शिवमंदिर जिला बारां को
Monday, June 20, 2011
राजस्थान की योजनाएँ-
विधवा विवाह उपहार योजना-
राज्य सरकार ने वर्ष 2007-08 में विधवा महिलाओं की वैधव्य अवस्था को समाप्त करने की दृष्टि से इस योजना को प्रारम्भ किया गया है।
योजनान्तर्गत, वर्तमान पेन्शन नियमों में हकदार विधवा महिला यदि विवाह करती है तो उसे विवाह के अवसर पर राज्य सरकार की ओर से उपहार स्वरूप 15000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। इस हेतु आवेदिका को निर्धारित प्रार्थना पत्र भरकर विवाह के एक माह बाद तक सम्बन्धित जिले के जिला अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को प्रस्तुत करना होता है।
योजनान्तर्गत, वर्तमान पेन्शन नियमों में हकदार विधवा महिला यदि विवाह करती है तो उसे विवाह के अवसर पर राज्य सरकार की ओर से उपहार स्वरूप 15000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। इस हेतु आवेदिका को निर्धारित प्रार्थना पत्र भरकर विवाह के एक माह बाद तक सम्बन्धित जिले के जिला अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को प्रस्तुत करना होता है।
Sunday, June 19, 2011
राजस्थान की योजनाएँ-
सम्बल ग्राम विकास योजना
राज्य में यह योजना अनुसूचित जाति के अधिक रहवास वाले गाँवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास करने के लिए संचालित है।
क्या है संबल गाँव-
भारतीय योजना आयोग के कार्यालय ज्ञापन 18 अगस्त, 2009 द्वारा जारी संशोधन अनुसार सम्बल योजनान्तर्गत "सम्बल ग्रामों" से तात्पर्य उन ग्रामों से है जहॉं अनुसूचित जाति की जनसंख्या कुल जनसंख्या के अनुपात में 40 प्रतिशत से अधिक है। राज्य में वर्ष 2001 की जनगणना अनुसार वर्तमान में सम्बल ग्रामों की संख्या 4110 है। इससे पूर्व जिन ग्रामों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 50 प्रतिशत अथवा अधिक हो उन्हें सम्बल ग्राम कहा जाता था, जिनकी राज्य में कुल संख्या 2463 थी।
सम्बल योजनान्तर्गत आधारभूत सुविधाओं के विकास एवं विस्तार हेतु करवाए जाने वाले निर्माण कार्य निम्न निर्देश के अनुसार होते हैं-
1. विभाग द्वारा जिले के चयनित सम्बल ग्रामों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, विस्तार या निर्माण पर 5 लाख रुपए तक की लागत के कार्य स्वीकृत किए जाते हैं।
2. योजनान्तर्गत कुल आवंटित राशि में से 75 प्रतिशत राशि चयनित आदर्श सम्बल ग्रामों के विकास कार्यों हेतु जिला कलक्टर स्तर पर स्वीकृत की जाती है एवं शेष राशि अन्य सम्बल ग्रामों में ग्रामवासियों की आवश्यकतानुसार आरक्षित राशि में से निदेशालय एवं राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम के स्तर पर जारी की जाती है।
3. विभाग द्वारा ऐसे कार्यों हेतु राशि आवंटित की जाती है, जो कार्य अन्य विभाग द्वारा उस ग्राम में सामान्यत: सम्पादित नहीं किए गए हों। प्राथमिकता का निर्धारण गॉंव की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाता है निम्नलिखित कार्य स्वीकृत किए जा सकते हैं-
अ) पक्की सड़क
ब) पानी की जी.एल.आर., पाईप लाईन
स) बिजली की लाईन, खम्भे
द) विद्यालय भवन निर्माण
य) अन्य निदेशालय की अनुमति से अन्य कार्य
4. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा आवंटित राशि जिला परिषद् को हस्तान्तरित की जाती है तथा वांछित स्वीकृतियां जारी कराकर अधिकतम एक वर्ष में ही निर्धारित कार्य पूर्ण करवाया जाता है। क्रियान्वयन व पर्यवेक्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा किया जाता है।
5. ग्राम का चयन जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाता है। समिति में निम्न सदस्य होते हैं-
अ) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद् सदस्य
ब) परियोजना प्रबन्धक, राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लि. सदस्य
स) उप निदेशक/ सहायक निदेशक/ जिला परिवीक्षा एवं समाज कल्याण अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सदस्य सचिव।
6. समिति गॉंव का चयन प्राथमिकताओं के आधार पर करती है कि उन सम्बल ग्रामों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या का आकार एवं उसका प्रतिशत व अभी तक विकास कार्य की स्थिति आदि कैसी है।
7. चयनित सम्बल ग्रामों में प्रतिवर्ष एक या दो कार्य ही स्वीकृत किए जाते हैं।
8. आधारभूत सुविधाओं का विकास एवं विस्तार भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। कार्यकारी एजेन्सी का निर्धारण जिला कलक्टर स्तर पर किया जाता है।
9. विभागों से कराए जाने वाले कार्यों हेतु प्रशासनिक विभाग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ही होता है।
10. योजना के सम्बन्ध मेँ आवश्यक तालमेल का कार्य जिले में पदस्थापित समाज कल्याण अधिकारी द्वारा किया जाता है।
11. निर्माण कार्यों हेतु प्रस्तावित भूमि का ग्राम पंचायत द्वारा नियमानुसार नि:शुल्क पट्टा जारी किया जाता है।
क्या है संबल गाँव-
भारतीय योजना आयोग के कार्यालय ज्ञापन 18 अगस्त, 2009 द्वारा जारी संशोधन अनुसार सम्बल योजनान्तर्गत "सम्बल ग्रामों" से तात्पर्य उन ग्रामों से है जहॉं अनुसूचित जाति की जनसंख्या कुल जनसंख्या के अनुपात में 40 प्रतिशत से अधिक है। राज्य में वर्ष 2001 की जनगणना अनुसार वर्तमान में सम्बल ग्रामों की संख्या 4110 है। इससे पूर्व जिन ग्रामों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 50 प्रतिशत अथवा अधिक हो उन्हें सम्बल ग्राम कहा जाता था, जिनकी राज्य में कुल संख्या 2463 थी।
सम्बल योजनान्तर्गत आधारभूत सुविधाओं के विकास एवं विस्तार हेतु करवाए जाने वाले निर्माण कार्य निम्न निर्देश के अनुसार होते हैं-
1. विभाग द्वारा जिले के चयनित सम्बल ग्रामों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, विस्तार या निर्माण पर 5 लाख रुपए तक की लागत के कार्य स्वीकृत किए जाते हैं।
2. योजनान्तर्गत कुल आवंटित राशि में से 75 प्रतिशत राशि चयनित आदर्श सम्बल ग्रामों के विकास कार्यों हेतु जिला कलक्टर स्तर पर स्वीकृत की जाती है एवं शेष राशि अन्य सम्बल ग्रामों में ग्रामवासियों की आवश्यकतानुसार आरक्षित राशि में से निदेशालय एवं राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम के स्तर पर जारी की जाती है।
3. विभाग द्वारा ऐसे कार्यों हेतु राशि आवंटित की जाती है, जो कार्य अन्य विभाग द्वारा उस ग्राम में सामान्यत: सम्पादित नहीं किए गए हों। प्राथमिकता का निर्धारण गॉंव की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाता है निम्नलिखित कार्य स्वीकृत किए जा सकते हैं-
अ) पक्की सड़क
ब) पानी की जी.एल.आर., पाईप लाईन
स) बिजली की लाईन, खम्भे
द) विद्यालय भवन निर्माण
य) अन्य निदेशालय की अनुमति से अन्य कार्य
4. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा आवंटित राशि जिला परिषद् को हस्तान्तरित की जाती है तथा वांछित स्वीकृतियां जारी कराकर अधिकतम एक वर्ष में ही निर्धारित कार्य पूर्ण करवाया जाता है। क्रियान्वयन व पर्यवेक्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा किया जाता है।
5. ग्राम का चयन जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाता है। समिति में निम्न सदस्य होते हैं-
अ) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद् सदस्य
ब) परियोजना प्रबन्धक, राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लि. सदस्य
स) उप निदेशक/ सहायक निदेशक/ जिला परिवीक्षा एवं समाज कल्याण अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सदस्य सचिव।
6. समिति गॉंव का चयन प्राथमिकताओं के आधार पर करती है कि उन सम्बल ग्रामों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या का आकार एवं उसका प्रतिशत व अभी तक विकास कार्य की स्थिति आदि कैसी है।
7. चयनित सम्बल ग्रामों में प्रतिवर्ष एक या दो कार्य ही स्वीकृत किए जाते हैं।
8. आधारभूत सुविधाओं का विकास एवं विस्तार भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। कार्यकारी एजेन्सी का निर्धारण जिला कलक्टर स्तर पर किया जाता है।
9. विभागों से कराए जाने वाले कार्यों हेतु प्रशासनिक विभाग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ही होता है।
10. योजना के सम्बन्ध मेँ आवश्यक तालमेल का कार्य जिले में पदस्थापित समाज कल्याण अधिकारी द्वारा किया जाता है।
11. निर्माण कार्यों हेतु प्रस्तावित भूमि का ग्राम पंचायत द्वारा नियमानुसार नि:शुल्क पट्टा जारी किया जाता है।
राजस्थान के विश्वविद्यालय-
JAGADGURU RAMANANDACHARYA RAJASTHAN SANSKRIT UNIVERSITY
जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय
एक विहङ्गम दृष्टि-
अनादिकाल से भारत देश ज्ञानोपासना का केन्द्र रहा है। यह शाब्दी साधना ऋषियों के अनहद में मुखरित होती हुई साक्षात् श्रुति-स्वरूप में इस धरा पर अवतीर्ण हुई। यह विश्वविदित तथ्य है कि ऋग्वेद मानव के पुस्तकालय की सर्वप्रथम् पुस्तक है। ऋचाओं की अर्चना, सामगानों की झंकृति, यजुर्मन्त्रों के यजन तथा आथर्वणों के शान्ति-कर्मों से भारतीय प्रज्ञा पल्लवित और पुष्पित हुई । वेदों की श्रुति-परम्परा ने अपनेज्ञान का प्रसार करते हुए उपनिषद्, अष्टादश पुराण, शिक्षा-कल्प-निरुक्त-व्याकरण-ज्योतिष-छन्द, योगतन्त्र, षडदर्शन, रामायण, महाभारत, ललित काव्य, नीतिकाव्य आदि का अमूल्य वाङ्मय सर्वजनहिताय, सर्वजनसुखाय विश्व को दिया। श्रमण परम्परा का बहुमूल्य वाङ्गमय भी संस्कृत में निहित है। इस बहुआयामी साहित्य के विकास के फलस्वरूप भारतीयों की प्रसिद्धि अग्रजन्मा के रूप में हुई तथा वेदों का ज्ञान भारतीय मनीषा का पर्याय बन गया। इस प्रकार भारतीय संस्कृति की संवाहिका होने का गौरव संस्कृत भाषा को जाता है।
संस्कृत के इस विशाल वाङ्मय की कालजयिता का यही रहस्य है कि सहस्त्राब्दियों से गुरुकुलों और ऋषिकुलों आदि में इसका अध्यापन होता रहा। इस गुरुशिष्य-परम्परा को सुनियोजित रूप देते हुए संस्कृत के अनेक अध्ययन केन्द्र देश भर में चलते रहे। उसी परम्परा में ही 20 वीं सदी में अनेक संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित हुए। उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा, केरल, आंध्रप्रदेश आदि में संस्कृत विश्वविद्यालय विगत कई वर्षों से चल रहे थे। इसी क्रम में राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु वर्षों से चल रहा प्रयास वर्ष 2001 में सफल हुआ ।
सम्पूर्ण संस्कृत वाङ्मय के साङ्गोपाङ्ग अध्ययन और अध्यापन का संचालन करने, सतत विशेषज्ञीय अनुसंधान और उससे आनुषंगिक अन्य विषयों की व्यवस्था करने तथा संस्कृत वाङ्मय में निहित ज्ञान-विज्ञान की अनुसंधान पर आधारित सरल वैज्ञानिक पद्धति से व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत करने के साथ ही अन्य महत्त्वपूर्ण अनुसंधानों के परिणामों और उपलब्धियों को प्रकाश में लाने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम 1998 दिनांक 2-9-1998 से लागू किया गया।
6 फरवरी, 2001 को राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय ने मूर्त्त रूप लिया जिसके प्रथम कुलपति पद्मश्री डॉ. मण्डन मिश्र नियुक्त किए गए।
उपशासन सचिव, शिक्षा (ग्रुप- 6) द्वारा जारी आदेश के अनुसार 27-06-2005 से विश्वविद्यालय का नाम जगद्गुरू रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर कर दिया गया है। यह विश्वविद्यालय ग्राम-मदाऊ, पोस्ट – भांकरोटा, जिला – जयपुर में स्थित है।
विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम-
1. शास्त्री प्रथम वर्ष
2. शास्त्री द्वितीय वर्ष
3. शास्त्री तृतीय वर्ष
4. आचार्य प्रथम एवं द्वितीय वर्ष
5. शिक्षा शास्त्री
6. विद्यावारिधि ( Ph.D. )
सम्पर्क-
http://www.jrrsanskrituniversity.ac.in/
एक विहङ्गम दृष्टि-
अनादिकाल से भारत देश ज्ञानोपासना का केन्द्र रहा है। यह शाब्दी साधना ऋषियों के अनहद में मुखरित होती हुई साक्षात् श्रुति-स्वरूप में इस धरा पर अवतीर्ण हुई। यह विश्वविदित तथ्य है कि ऋग्वेद मानव के पुस्तकालय की सर्वप्रथम् पुस्तक है। ऋचाओं की अर्चना, सामगानों की झंकृति, यजुर्मन्त्रों के यजन तथा आथर्वणों के शान्ति-कर्मों से भारतीय प्रज्ञा पल्लवित और पुष्पित हुई । वेदों की श्रुति-परम्परा ने अपनेज्ञान का प्रसार करते हुए उपनिषद्, अष्टादश पुराण, शिक्षा-कल्प-निरुक्त-व्याकरण-ज्योतिष-छन्द, योगतन्त्र, षडदर्शन, रामायण, महाभारत, ललित काव्य, नीतिकाव्य आदि का अमूल्य वाङ्मय सर्वजनहिताय, सर्वजनसुखाय विश्व को दिया। श्रमण परम्परा का बहुमूल्य वाङ्गमय भी संस्कृत में निहित है। इस बहुआयामी साहित्य के विकास के फलस्वरूप भारतीयों की प्रसिद्धि अग्रजन्मा के रूप में हुई तथा वेदों का ज्ञान भारतीय मनीषा का पर्याय बन गया। इस प्रकार भारतीय संस्कृति की संवाहिका होने का गौरव संस्कृत भाषा को जाता है।
संस्कृत के इस विशाल वाङ्मय की कालजयिता का यही रहस्य है कि सहस्त्राब्दियों से गुरुकुलों और ऋषिकुलों आदि में इसका अध्यापन होता रहा। इस गुरुशिष्य-परम्परा को सुनियोजित रूप देते हुए संस्कृत के अनेक अध्ययन केन्द्र देश भर में चलते रहे। उसी परम्परा में ही 20 वीं सदी में अनेक संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित हुए। उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा, केरल, आंध्रप्रदेश आदि में संस्कृत विश्वविद्यालय विगत कई वर्षों से चल रहे थे। इसी क्रम में राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु वर्षों से चल रहा प्रयास वर्ष 2001 में सफल हुआ ।
सम्पूर्ण संस्कृत वाङ्मय के साङ्गोपाङ्ग अध्ययन और अध्यापन का संचालन करने, सतत विशेषज्ञीय अनुसंधान और उससे आनुषंगिक अन्य विषयों की व्यवस्था करने तथा संस्कृत वाङ्मय में निहित ज्ञान-विज्ञान की अनुसंधान पर आधारित सरल वैज्ञानिक पद्धति से व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत करने के साथ ही अन्य महत्त्वपूर्ण अनुसंधानों के परिणामों और उपलब्धियों को प्रकाश में लाने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम 1998 दिनांक 2-9-1998 से लागू किया गया।
6 फरवरी, 2001 को राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय ने मूर्त्त रूप लिया जिसके प्रथम कुलपति पद्मश्री डॉ. मण्डन मिश्र नियुक्त किए गए।
उपशासन सचिव, शिक्षा (ग्रुप- 6) द्वारा जारी आदेश के अनुसार 27-06-2005 से विश्वविद्यालय का नाम जगद्गुरू रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर कर दिया गया है। यह विश्वविद्यालय ग्राम-मदाऊ, पोस्ट – भांकरोटा, जिला – जयपुर में स्थित है।
विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम-
1. शास्त्री प्रथम वर्ष
2. शास्त्री द्वितीय वर्ष
3. शास्त्री तृतीय वर्ष
4. आचार्य प्रथम एवं द्वितीय वर्ष
5. शिक्षा शास्त्री
6. विद्यावारिधि ( Ph.D. )
सम्पर्क-
http://www.jrrsanskrituniversity.ac.in/
BOOK BANK SCHEME FOR SC & ST STUDENT:-
In order to mitigate the difficulty of non-availability of books for technical courses like Medical, Engineering, Agriculture, Veterinary, Polytechnic etc. to the students belonging to Scheduled Castes and Scheduled Tribes the Book Bank Scheme has been started in the year 1992-93 on matching basis. Under the scheme Book Banks have been established in such 82 colleges. These banks provide one set of textbooks for the session, free of cost, among two scheduled caste/schedule tribe students at graduation level and one set to one student basis at post-graduation level. The set of textbooks can be used for three years.
Saturday, June 18, 2011
इंस्पायर अवार्ड योजना
Creative Teachers सृजनशील शिक्षक: इंस्पायर अवार्ड योजना: "INSPIRE यानि 'INNOVATION IN SCIENCE PURSUIT FOR INSPIRED RESEARCH केंद्रीय विज्ञानं और प्रोद्योगिकी विभाग,भारत सरकार द्वारा प्रतिभाओ..."
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान -परिचय
Creative Teachers
सृजनशील शिक्षक: राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान -परिचय: "भारत सरकार व मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा संबंधी सुधार व गति देने हेतु केन्द्रीय शिक्षा परामर्श मण्डल(सीएबीई) द्वारा 200..."
सृजनशील शिक्षक: राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान -परिचय: "भारत सरकार व मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा संबंधी सुधार व गति देने हेतु केन्द्रीय शिक्षा परामर्श मण्डल(सीएबीई) द्वारा 200..."
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान-राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में
Creative Teachers सृजनशील शिक्षक: राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान-राजस्थान के परिपे...: "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 का एक मुख्य बिन्दु माध्यमिक स्तर की शिक्षा में बालिकाओं व समाज के पिछड़े वर्गों की सहभागिता बढ़ाना । इसी उद्द..."
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज-
18.6.2011
1. राजस्थान में सूचना प्रौद्योगिकी नीति कब लागू की गई?
उत्तर- 2007-08 में
2. कम्प्यूटर से संबंधित "करिश्मा" नामक परियोजना का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- कम्प्यूटराईजेशन ऑटोमेशन रिफाइनमेंट ऑफ इंटीग्रेटेड सिस्टम ऑफ मैनेजमेंट एंड अकाउंट्स
3. राजस्थान नगरीय अधो:संरचना विकास परियोजना (RUIDP) जयपुर अजमेर बीकानेर जोधपुर कोटा और उदयपुर में विकास कार्यों से संबंधित है । यह किस बैंक के ऋण से संचालित की गई?
उत्तर- एशियाई विकास बैंक
4. राष्ट्रीय शहरी सूचना प्रणाली के अंतर्गत चयनित शहरों में सरकार द्वारा 'जी- मेपिंग' कराई गई, इसमें 'जी- मेपिंग' का क्या अर्थ है?
उत्तर- ज्योग्राफिक मेपिंग
5. राजस्थान राज्य किशोर एवं युवा नीति किस वर्ष में लागू की गई?
उत्तर- 2008-09
6. विश्वास योजना किसके लिए संचालित है?
उत्तर- विकलांगों के लिए
7. सहयोग योजना में बीपीएल परिवार की स्नातक कन्या के विवाह पर राज्य सरकार द्वारा कितनी राशि अनुग्रह के रूप में दी जाती है?
उत्तर- बीस हजार
8. राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन है?
उत्तर- डॉ. बी. डी. कल्ला
9. शिक्षा से संबंधित HEART का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- Higher Education Academy for Rearch & Training
10. राजस्थान राज्य टंगस्टन विकास निगम का 1991 में हस्तांतरण किस उपक्रम को किया गया?
उत्तर- हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को
उत्तर- 2007-08 में
2. कम्प्यूटर से संबंधित "करिश्मा" नामक परियोजना का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- कम्प्यूटराईजेशन ऑटोमेशन रिफाइनमेंट ऑफ इंटीग्रेटेड सिस्टम ऑफ मैनेजमेंट एंड अकाउंट्स
3. राजस्थान नगरीय अधो:संरचना विकास परियोजना (RUIDP) जयपुर अजमेर बीकानेर जोधपुर कोटा और उदयपुर में विकास कार्यों से संबंधित है । यह किस बैंक के ऋण से संचालित की गई?
उत्तर- एशियाई विकास बैंक
4. राष्ट्रीय शहरी सूचना प्रणाली के अंतर्गत चयनित शहरों में सरकार द्वारा 'जी- मेपिंग' कराई गई, इसमें 'जी- मेपिंग' का क्या अर्थ है?
उत्तर- ज्योग्राफिक मेपिंग
5. राजस्थान राज्य किशोर एवं युवा नीति किस वर्ष में लागू की गई?
उत्तर- 2008-09
6. विश्वास योजना किसके लिए संचालित है?
उत्तर- विकलांगों के लिए
7. सहयोग योजना में बीपीएल परिवार की स्नातक कन्या के विवाह पर राज्य सरकार द्वारा कितनी राशि अनुग्रह के रूप में दी जाती है?
उत्तर- बीस हजार
8. राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन है?
उत्तर- डॉ. बी. डी. कल्ला
9. शिक्षा से संबंधित HEART का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- Higher Education Academy for Rearch & Training
10. राजस्थान राज्य टंगस्टन विकास निगम का 1991 में हस्तांतरण किस उपक्रम को किया गया?
उत्तर- हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को
Friday, June 17, 2011
राजस्थान की योजनाएँ-
सहयोग योजना-
राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित यह योजना गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बीपीएल) अनुसूचित जाति के परिवारों की प्रथम 2 कन्या सन्तानों के विवाह के अवसर पर अनुग्रह राशि के रूप में 5,000 रुपए की सहायता प्रदान करने का प्रावधान कर प्रारंभ की गई थी।
सहयोग योजना (विस्तार)-
बजट घोषणा वर्ष 2008-09 की अनुपालना में योजना का विस्तार कर इस योजना को समस्त वर्गों के बी.पी.एल. परिवारों हेतु संचालित किया जा रहा है। समस्त वर्गों के बी.पी.एल. परिवारों की 21 वर्ष एवं अधिक आयु की कन्या के विवाह पर योजनान्तर्गत 10,000 रुपए की सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया। अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों की 18 से 21 वर्ष तक की आयु के कन्या के विवाह पर पूर्व की भॉंति राशि रुपए 5000 प्रदान करना यथावत रखा गया।
किंतु राज्य सरकार द्वारा दिनांक 7 अक्टूबर 2009 एक अधिसूचना जारी इसमें संशोधन कर सभी वर्गों के बी.पी.एल. परिवारों की 18 वर्ष या इससे अधिक आयु की कन्याओं के विवाह पर 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान करने का प्रावधान किया गया।
इस योजना में अब शिक्षा के अधिक स्तर को प्रोत्साहन देने के लिए संशोधन किया है जिसके तहत बीपीएल परिवार की जो कन्या कक्षा 10 वीं उत्तीर्ण है उसके विवाह पर दिए जाने वाले दस हजार रुपयों के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के रूप में 5 हजार रुपए अतिरिक्त दिए जाते है, जबकि स्नातक तक शिक्षा ग्रहण करने वाली बेटियों के लिए सहायता राशि के रूप में 10 हजार रुपए तथा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के रूप में अलग से 10 हजार रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
इस योजना के अन्तर्गत विवाह के एक माह पूर्व तथा 6 माह पश्चात तक आवेदन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ परिवार के बीपीएल होने का प्रमाण पत्र जिसमें राशन कार्ड, मेडिकल कार्ड या बीपीएल सूची की छाया प्रति लगाई जा सकती है। कन्या की आयु का प्रमाण पत्र, उसकी शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र तथा सक्षम अधिकारी द्वारा जारी विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति लगाई जानी अनिवार्य है।
यह अनुदान प्राप्त करने हेतु निर्धारित आवेदन पत्र भरकर संबंधित जिले के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को प्रस्तुत करना होता है, जो निर्धारित प्रक्रिया अनुसार आवेदन स्वीकृत कर भुगतान की व्यवस्था करते हैं।
सहयोग योजना (विस्तार)-
बजट घोषणा वर्ष 2008-09 की अनुपालना में योजना का विस्तार कर इस योजना को समस्त वर्गों के बी.पी.एल. परिवारों हेतु संचालित किया जा रहा है। समस्त वर्गों के बी.पी.एल. परिवारों की 21 वर्ष एवं अधिक आयु की कन्या के विवाह पर योजनान्तर्गत 10,000 रुपए की सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया। अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों की 18 से 21 वर्ष तक की आयु के कन्या के विवाह पर पूर्व की भॉंति राशि रुपए 5000 प्रदान करना यथावत रखा गया।
किंतु राज्य सरकार द्वारा दिनांक 7 अक्टूबर 2009 एक अधिसूचना जारी इसमें संशोधन कर सभी वर्गों के बी.पी.एल. परिवारों की 18 वर्ष या इससे अधिक आयु की कन्याओं के विवाह पर 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान करने का प्रावधान किया गया।
इस योजना में अब शिक्षा के अधिक स्तर को प्रोत्साहन देने के लिए संशोधन किया है जिसके तहत बीपीएल परिवार की जो कन्या कक्षा 10 वीं उत्तीर्ण है उसके विवाह पर दिए जाने वाले दस हजार रुपयों के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के रूप में 5 हजार रुपए अतिरिक्त दिए जाते है, जबकि स्नातक तक शिक्षा ग्रहण करने वाली बेटियों के लिए सहायता राशि के रूप में 10 हजार रुपए तथा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के रूप में अलग से 10 हजार रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
इस योजना के अन्तर्गत विवाह के एक माह पूर्व तथा 6 माह पश्चात तक आवेदन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ परिवार के बीपीएल होने का प्रमाण पत्र जिसमें राशन कार्ड, मेडिकल कार्ड या बीपीएल सूची की छाया प्रति लगाई जा सकती है। कन्या की आयु का प्रमाण पत्र, उसकी शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र तथा सक्षम अधिकारी द्वारा जारी विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति लगाई जानी अनिवार्य है।
यह अनुदान प्राप्त करने हेतु निर्धारित आवेदन पत्र भरकर संबंधित जिले के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को प्रस्तुत करना होता है, जो निर्धारित प्रक्रिया अनुसार आवेदन स्वीकृत कर भुगतान की व्यवस्था करते हैं।
राजस्थान की योजनाएँ-
सम्प्रेक्षण गृह एवं किशोर गृह तथा विशेष गृह-
किशोर न्याय अधिनियम, 2000 एवं संशोधित अधिनियम, 2006 के अन्तर्गत बच्चों को निम्नानुसार दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाकर पृथक-पृथक गृहों की व्यवस्था की गई है :-
1. देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालक -
किशोर न्याय अधिनियम की धारा 2(घ) में देखरेख व संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की दी गई परिभाषा में निम्न बच्चों को चिन्हीकृत किया गया हैं, जिनके प्रकरणों की सुनवाई व निपटान सम्बन्धित कार्य 'बाल कल्याण समिति' द्वारा किया जाता है-
1. जो बालक किसी घर या निश्चित निवास स्थान और जीवन निर्वाह के बिना पाया जाता है।
1(a) जो भिक्षावृति करता पाया गया है या स्ट्रीट चिल्ड्रन हो या कार्यशील बालक (बाल श्रमिक) हो।
2. जो एक व्यक्ति (चाहे बालक का संरक्षक हो या न हो) के साथ रहता है और ऐसे व्यक्ति ने-
(i) बालक को जान से मारने या क्षति पहुंचाने की धमकी दी है और धमकी के दिए जाने की एक युक्तियुक्त सम्भाव्यता है या
(ii) किसी दूसरे बालक या बालकों को जान से मार डाला है या गाली दी है या उसका या उनकी उपेक्षा की है और उस व्यक्ति द्वारा प्रश्नगत बालक को जान से मार डाले जाने, गाली दिए जाने की युक्तियुक्त सम्भाव्यता है।
3. जिसको मानसिक और शारीरिक रूप से धमकी दी जाती है या बीमार सहायता करने या देख-रेख करने वाले किसी को भी न रखने वाले टर्मिनल रोग या असाध्य रोग से ग्रस्त होने वाला बालक।
4. जिसके एक माता-पिता या संरक्षक है और ऐसे माता-पिता या संरक्षक बालक पर नियन्त्रण रख पाने के लिए अनुपयुक्त है या असमर्थ बना दिया गया है।
5. जिसके माता-पिता नहीं है और कोई एक देख-रेख करना चाह रहा है या जिसके माता-पिता ने उसका त्याग कर दिया है या समर्पित कर दिया है या जो खो गया है या भाग गया है और जिसके माता-पिता को युक्तियुक्त जाँच के पश्चात् नहीं पाया जाता है।
6. जिसका लैंगिक दुरूपयोग या अवैधानिक कृत्यों प्रयोजनार्थ गम्भीर तौर पर दुरूपयोग किए जाने, सताए जाने या शोषण किये जाने की सम्भावना है या की जा रही है।
7. जिसको भेद्य (Vulnerable) पाया जाता है और औषधि दुरूपयोग या दुर्व्यापार करने में उत्प्रेरित किए जाने की सम्भावना है।
8. जिसे अन्त:करण के विरूद्ध लाभ के लिए गाली दिया जा रहा है या गाली दिए जाने की सम्भावना है।
9. जो किसी सशस्त्र संघर्ष, सिविल उपद्रव या प्राकृतिक आपदा का शिकार है।
2. विधि से संघर्षरत किशोर - वे बच्चे, जिन्होंने संविधान सम्मत तरीके से स्थापित विधि का जाने-अनजाने उल्लंघन किया हो। इनके प्रकरणों में सुनवाई व निपटान सम्बन्धित किशोर न्याय बोर्ड द्वारा किया जाता है।
किशोर न्याय अधिनियम के अन्तर्गत बच्चों की श्रेणी अनुसार प्रकरणों की सुनवाई व निपटान तक पृथक-पृथक गृहों का प्रावधान किया गया है, जो निम्नानुसार है-
1. सम्प्रेक्षण गृह -
अधिनियम की धारा 8 के अन्तर्गत विधि के साथ संघर्षरत बालक - बालिकाओं हेतु सम्प्रेक्षण गृह का प्रावधान है। इन गृहों में विधि से संघर्षरत बालक - बालिकाओं को किशोर न्याय बोर्ड के आदेशों से उनकी जांच लम्बित रहने या जमानत होने या अंतिम निपटान तक रखा जाता है। इन गृहों में विधि से संघर्षरत बालक-बालिकाओं हेतु सभी सुविधाएं यथा भोजन, वस्त्र, चिकित्सा, शिक्षा आदि की नि:शुल्क व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाती है।
2. बाल गृह -
अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत राज्य में देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक - बालिकाओं हेतु बालगृह की स्थापना व पंजीयन का प्रावधान है। इन गृहों में देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक - बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के आदेश से 18 वर्ष तक की आयु होने तक रखने का प्रावधान है। इन संस्थाओं में बालक - बालिकाओं के विकास एवं पुनर्वास की पूर्ण व्यवस्था के साथ-साथ भोजन, वस्त्र, शिक्षा, प्रशिक्षण की नि:शुल्क व्यवस्था की जाती है।
3. विशेष गृह - किशोर न्याय अधिनियम की धारा 9 में किशोर न्याय बोर्ड से सजा प्राप्त विधि के साथ संघर्षरत बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक रखने के लिए विशेष गृहों का प्रावधान किया गया है।
4. राजकीय विमन्दित महिला व बाल गृह-
अधिनियम की धारा 48 के अन्तर्गत विमन्दित बालक - बालिका के समुचित संरक्षण, देखभाल व उपचार हेतु राजकीय विमन्दित महिला व बाल गृह, सेठी कॉलोनी, जयपुर को मान्यता प्राप्त संस्थान प्रमाणित किया हुआ है।
5. एड्स पीड़ित बालकों के लिए संस्था-
अधिनियम की धारा 48 के अन्तर्गत एड्स/ एच.आई.वी. से ग्रसित बच्चों के लिए अजमेर जिले में ''स्नेह संसार संस्था'', ग्राम हाथीखेड़ा, अजमेर एवं जालौर जिले में ''वात्सल्य चाइल्ड केयर होम'', ग्राम लेटा, जिला जालौर को मान्यता प्राप्त संस्थान प्रमाणित किया हुआ है।
महिलाओं के पुनर्वास के लिए महिला सदन
महिला सदन का मुख्य उद्देश्य-
> अनैतिक एवं सामाजिक रूप से उत्पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना एवं उनमें नए जीवन का संचार करना।
कार्य-
राज्य सरकार द्वारा जयपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, जोधपुर एवं उदयपुर में नारी निकेतनों के भवनों का निर्माण कराया गया है।
> इस सदन में महिलाओं को प्रवेश देकर उन्हें निःशुल्क आवास, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा एवं शिक्षण-प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
> पुनर्वास व्यवस्था के अन्तर्गत जिन आवासनियों के विरुद्ध विभिन्न न्यायालयों में प्रकरण दर्ज हैं, उनको सम्बन्धित राज्यों एवं जिलों के न्यायालयों में अपना पक्ष रखने हेतु भेजा जाता है तथा न्यायालय के निर्णय अनुसार आवासनियों को उनके अभिभावक व संरक्षकों को सौंप दिया जाता है।
> महिला सदन में रहने वाली महिलाओं को विवाह द्वारा भी पुनर्वासित किया जाता है।
1. देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालक -
किशोर न्याय अधिनियम की धारा 2(घ) में देखरेख व संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की दी गई परिभाषा में निम्न बच्चों को चिन्हीकृत किया गया हैं, जिनके प्रकरणों की सुनवाई व निपटान सम्बन्धित कार्य 'बाल कल्याण समिति' द्वारा किया जाता है-
1. जो बालक किसी घर या निश्चित निवास स्थान और जीवन निर्वाह के बिना पाया जाता है।
1(a) जो भिक्षावृति करता पाया गया है या स्ट्रीट चिल्ड्रन हो या कार्यशील बालक (बाल श्रमिक) हो।
2. जो एक व्यक्ति (चाहे बालक का संरक्षक हो या न हो) के साथ रहता है और ऐसे व्यक्ति ने-
(i) बालक को जान से मारने या क्षति पहुंचाने की धमकी दी है और धमकी के दिए जाने की एक युक्तियुक्त सम्भाव्यता है या
(ii) किसी दूसरे बालक या बालकों को जान से मार डाला है या गाली दी है या उसका या उनकी उपेक्षा की है और उस व्यक्ति द्वारा प्रश्नगत बालक को जान से मार डाले जाने, गाली दिए जाने की युक्तियुक्त सम्भाव्यता है।
3. जिसको मानसिक और शारीरिक रूप से धमकी दी जाती है या बीमार सहायता करने या देख-रेख करने वाले किसी को भी न रखने वाले टर्मिनल रोग या असाध्य रोग से ग्रस्त होने वाला बालक।
4. जिसके एक माता-पिता या संरक्षक है और ऐसे माता-पिता या संरक्षक बालक पर नियन्त्रण रख पाने के लिए अनुपयुक्त है या असमर्थ बना दिया गया है।
5. जिसके माता-पिता नहीं है और कोई एक देख-रेख करना चाह रहा है या जिसके माता-पिता ने उसका त्याग कर दिया है या समर्पित कर दिया है या जो खो गया है या भाग गया है और जिसके माता-पिता को युक्तियुक्त जाँच के पश्चात् नहीं पाया जाता है।
6. जिसका लैंगिक दुरूपयोग या अवैधानिक कृत्यों प्रयोजनार्थ गम्भीर तौर पर दुरूपयोग किए जाने, सताए जाने या शोषण किये जाने की सम्भावना है या की जा रही है।
7. जिसको भेद्य (Vulnerable) पाया जाता है और औषधि दुरूपयोग या दुर्व्यापार करने में उत्प्रेरित किए जाने की सम्भावना है।
8. जिसे अन्त:करण के विरूद्ध लाभ के लिए गाली दिया जा रहा है या गाली दिए जाने की सम्भावना है।
9. जो किसी सशस्त्र संघर्ष, सिविल उपद्रव या प्राकृतिक आपदा का शिकार है।
2. विधि से संघर्षरत किशोर - वे बच्चे, जिन्होंने संविधान सम्मत तरीके से स्थापित विधि का जाने-अनजाने उल्लंघन किया हो। इनके प्रकरणों में सुनवाई व निपटान सम्बन्धित किशोर न्याय बोर्ड द्वारा किया जाता है।
किशोर न्याय अधिनियम के अन्तर्गत बच्चों की श्रेणी अनुसार प्रकरणों की सुनवाई व निपटान तक पृथक-पृथक गृहों का प्रावधान किया गया है, जो निम्नानुसार है-
1. सम्प्रेक्षण गृह -
अधिनियम की धारा 8 के अन्तर्गत विधि के साथ संघर्षरत बालक - बालिकाओं हेतु सम्प्रेक्षण गृह का प्रावधान है। इन गृहों में विधि से संघर्षरत बालक - बालिकाओं को किशोर न्याय बोर्ड के आदेशों से उनकी जांच लम्बित रहने या जमानत होने या अंतिम निपटान तक रखा जाता है। इन गृहों में विधि से संघर्षरत बालक-बालिकाओं हेतु सभी सुविधाएं यथा भोजन, वस्त्र, चिकित्सा, शिक्षा आदि की नि:शुल्क व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाती है।
2. बाल गृह -
अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत राज्य में देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक - बालिकाओं हेतु बालगृह की स्थापना व पंजीयन का प्रावधान है। इन गृहों में देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक - बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के आदेश से 18 वर्ष तक की आयु होने तक रखने का प्रावधान है। इन संस्थाओं में बालक - बालिकाओं के विकास एवं पुनर्वास की पूर्ण व्यवस्था के साथ-साथ भोजन, वस्त्र, शिक्षा, प्रशिक्षण की नि:शुल्क व्यवस्था की जाती है।
3. विशेष गृह - किशोर न्याय अधिनियम की धारा 9 में किशोर न्याय बोर्ड से सजा प्राप्त विधि के साथ संघर्षरत बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक रखने के लिए विशेष गृहों का प्रावधान किया गया है।
4. राजकीय विमन्दित महिला व बाल गृह-
अधिनियम की धारा 48 के अन्तर्गत विमन्दित बालक - बालिका के समुचित संरक्षण, देखभाल व उपचार हेतु राजकीय विमन्दित महिला व बाल गृह, सेठी कॉलोनी, जयपुर को मान्यता प्राप्त संस्थान प्रमाणित किया हुआ है।
5. एड्स पीड़ित बालकों के लिए संस्था-
अधिनियम की धारा 48 के अन्तर्गत एड्स/ एच.आई.वी. से ग्रसित बच्चों के लिए अजमेर जिले में ''स्नेह संसार संस्था'', ग्राम हाथीखेड़ा, अजमेर एवं जालौर जिले में ''वात्सल्य चाइल्ड केयर होम'', ग्राम लेटा, जिला जालौर को मान्यता प्राप्त संस्थान प्रमाणित किया हुआ है।
महिलाओं के पुनर्वास के लिए महिला सदन
महिला सदन का मुख्य उद्देश्य-
> अनैतिक एवं सामाजिक रूप से उत्पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना एवं उनमें नए जीवन का संचार करना।
कार्य-
राज्य सरकार द्वारा जयपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, जोधपुर एवं उदयपुर में नारी निकेतनों के भवनों का निर्माण कराया गया है।
> इस सदन में महिलाओं को प्रवेश देकर उन्हें निःशुल्क आवास, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा एवं शिक्षण-प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
> पुनर्वास व्यवस्था के अन्तर्गत जिन आवासनियों के विरुद्ध विभिन्न न्यायालयों में प्रकरण दर्ज हैं, उनको सम्बन्धित राज्यों एवं जिलों के न्यायालयों में अपना पक्ष रखने हेतु भेजा जाता है तथा न्यायालय के निर्णय अनुसार आवासनियों को उनके अभिभावक व संरक्षकों को सौंप दिया जाता है।
> महिला सदन में रहने वाली महिलाओं को विवाह द्वारा भी पुनर्वासित किया जाता है।
Thursday, June 16, 2011
राज्य में दत्तक ग्रहण कार्यक्रम-
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 (2006 में संशोधित) के अध्याय 4 में दत्तक ग्रहण, देखरेख संवर्द्धन, प्रायोजन व देखरेख संगठन के माध्यम से बच्चों के पुनरूद्धार और सामाजिक पुनःएकीकरण सुनिश्चित किया गया है। इस क्रम में परित्यक्त/ अनाथ/ अभ्यर्पित शिशुओं/बच्चों को योग्य परिवार में पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से अधिनियम में दत्तक ग्रहण के लिए प्रावधान किए गए हैं। अधिनियम की धारा 41 में दत्तक ग्रहण के क्रियान्वयन हेतु निम्नानुसार दो अभिकरणों को सम्बद्ध करते हुए उनका दायित्व निर्धारण किया गया है :-
1. बाल कल्याण समिति -
अधिनियम में देखभाल व संरक्षण की आवश्यकताओं वाले बच्चों के प्रकरणों की सुनवाई व निपटान हेतु बाल कल्याण समिति का प्रावधान किया गया है, जिसमें एक अध्यक्ष व चार सदस्यों के पद पर अराजकीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मनोनयन किया जाता है। बच्चों के दत्तक ग्रहण के लिए अधिनियम में बाल कल्याण समिति को दायित्व सौंपा गया है कि वह दत्तक ग्रहण में जाने योग्य बच्चों को अधिसूचित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार आवश्यक जांच/कार्यवाही पूर्ण कर "दत्तक ग्रहण के लिए विधिक रूप से स्वतंत्र " (Legally Free for Adoption) घोषित करें, ताकि दत्तक ग्रहण स्थापन एजेंसी सक्षम न्यायालय के आदेशों से बच्चों को योग्य परिवार में दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्स्थापित कर सकें।
2. दत्तक ग्रहण स्थापन एजेंसी -
परित्यक्त/ अनाथ/ अभ्यर्पित बच्चों के पालन-पोषण, चिकित्सा, देखभाल व दत्तक ग्रहण के माध्यम से परिवार में पुनर्स्थापना के उद्देश्य से अधिनियम की में दत्तक ग्रहण स्थापन एजेंसी का प्रावधान किया गया है, जहॉं इन बच्चों को रखने, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा एवं मनोरंजन की निःशुल्क व्यवस्था की जाती है। इन संस्थाओं में आने वाले बच्चों को अधिनियम के अन्तर्गत दत्तक ग्रहण हेतु केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा), नई दिल्ली (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्त निकाय) द्वारा प्रसारित दिशा-निर्देशों के अनुसार दत्तक ग्रहण के माध्यम से योग्य परिवार में पुनर्स्थापित किया जाता है।
राजकीय शिशु गृह, जयपुर -
अनाथ, परित्यक्त, समर्पित बच्चों, अविवाहित माताओं के बच्चों तथा निराश्रित छोटे बच्चों की देखरेख के लिये राज्य में वर्तमान में राजकीय शिशुगृह जयपुर में संचालित हैं। इस शिशु गृह में आने वाले शिशुओं को विशेष हिफाजत के साथ सावधानी बरती जाकर उनके पालन-पोषण, शिक्षा आदि की व्यवस्था की जाती है।
1. बाल कल्याण समिति -
अधिनियम में देखभाल व संरक्षण की आवश्यकताओं वाले बच्चों के प्रकरणों की सुनवाई व निपटान हेतु बाल कल्याण समिति का प्रावधान किया गया है, जिसमें एक अध्यक्ष व चार सदस्यों के पद पर अराजकीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मनोनयन किया जाता है। बच्चों के दत्तक ग्रहण के लिए अधिनियम में बाल कल्याण समिति को दायित्व सौंपा गया है कि वह दत्तक ग्रहण में जाने योग्य बच्चों को अधिसूचित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार आवश्यक जांच/कार्यवाही पूर्ण कर "दत्तक ग्रहण के लिए विधिक रूप से स्वतंत्र " (Legally Free for Adoption) घोषित करें, ताकि दत्तक ग्रहण स्थापन एजेंसी सक्षम न्यायालय के आदेशों से बच्चों को योग्य परिवार में दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्स्थापित कर सकें।
2. दत्तक ग्रहण स्थापन एजेंसी -
परित्यक्त/ अनाथ/ अभ्यर्पित बच्चों के पालन-पोषण, चिकित्सा, देखभाल व दत्तक ग्रहण के माध्यम से परिवार में पुनर्स्थापना के उद्देश्य से अधिनियम की में दत्तक ग्रहण स्थापन एजेंसी का प्रावधान किया गया है, जहॉं इन बच्चों को रखने, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा एवं मनोरंजन की निःशुल्क व्यवस्था की जाती है। इन संस्थाओं में आने वाले बच्चों को अधिनियम के अन्तर्गत दत्तक ग्रहण हेतु केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा), नई दिल्ली (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्त निकाय) द्वारा प्रसारित दिशा-निर्देशों के अनुसार दत्तक ग्रहण के माध्यम से योग्य परिवार में पुनर्स्थापित किया जाता है।
राजकीय शिशु गृह, जयपुर -
अनाथ, परित्यक्त, समर्पित बच्चों, अविवाहित माताओं के बच्चों तथा निराश्रित छोटे बच्चों की देखरेख के लिये राज्य में वर्तमान में राजकीय शिशुगृह जयपुर में संचालित हैं। इस शिशु गृह में आने वाले शिशुओं को विशेष हिफाजत के साथ सावधानी बरती जाकर उनके पालन-पोषण, शिक्षा आदि की व्यवस्था की जाती है।
Wednesday, June 15, 2011
राजस्थान सामान्य ज्ञान-
राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र
पश्चिम क्षेत्र सीनियर पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में राजस्थान चैम्पियन
महाराष्ट्र के नागपुर में दिनांक 12 जून को सम्पन्न हुई पश्चिम क्षेत्र राष्ट्रीय सीनियर पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में राजस्थान टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरूष वर्ग में 2 स्वर्ण, 1 रजत व 2 कांस्य पदक जीते जबकि महिला वर्ग में 1 स्वर्ण व एक कांस्य पदक जीतकर टीम चैम्पियनशिप पर कब्जा जमाया। महाराष्ट्र टीम उप-विजेता रही। राजस्थान के पदक विजेता इस प्रकार हैं-
स्वर्ण पदक-
1. 66 किलोग्राम भारवर्ग- समीर खान
2. 74 किलोग्राम भारवर्ग- पुलिस के भूपेन्द्र व्यास
3. 72 किलोग्राम भारवर्ग महिला- इंदिरा भण्डारी
रजत पदक-
105 किलोग्राम भारवर्ग- शिवनारायण व्यास
कांस्य पदक-
1. 93 किलो भार- मनोहरसिंह
2. 105 किलो भार- प्रेमरतन पुरोहित
3. 47 किलोग्राम भार महिला वर्ग- रक्षा व्यास
राष्ट्रीय सब-जूनियर पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता-
105 किलोग्राम भार वर्ग में शिवनारायण व्यास स्वर्ण पदक जीत कर राष्ट्रीय चैम्पियन बने।
किशनगढ़ में बनेगा मार्बल हैंडीक्राफ्ट मार्केट
मार्बल हैंडीक्राफ्ट मार्केट स्थापित कर श्रमिकों के विकास करने के लिए राज्य सरकार ने किशनगढ़ में मार्बल हैंडीक्राफ्ट क्लस्टर बनाने की योजना तैयार कर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी है।
किशनगढ़ का मार्बल हैंडीक्राफ्ट देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ करीब 60 से अधिक मार्बल हैंडीक्राफ्ट निर्माण इकाइयाँ हैं जिनमें लगभग 500 श्रमिक काम करते हैं। यहां के मार्बल से बनी मूर्तियां, शिलालेख, खिलौने, फर्नीचर, शोपीस सहित अन्य उत्पादों की अत्यधिक मांग रहती है, किंतु मार्बल पर महीन नक्काशी कर उत्कृष्ट व आकर्षक कलाकृतियां उकेरने वाले श्रमिकों को इनके उत्पादों की सही कीमत नहीं मिल पाती है।
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए सरकार देगी 20 हजार रुपए
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वर्ष 2011-12 की बजट घोषणा के अनुसार कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को सरकार अब 20 हजार की आर्थिक सहायता देगी। यह सहायता राजस्थान के उन मूल निवासियों को ही मिलेगी, जो स्थाई रूप से यहीं निवास कर रहे हैं। कैलाश मान सरोवर यात्रा करने वाले श्रद्धालु इस आर्थिक सहायता के लिए अपने क्षेत्र के उपखंड अधिकारी एवं देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त से संपर्क कर सकते हैं। इस संबंध में देवस्थान विभाग के आयुक्त ने सभी जिला कलेक्टर को निर्देश जारी किए हैं।
सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रहा राजस्थान चौथे स्थान पर-
बंगलुरू में दिनांक 14 जून को संपन्न हुई सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में राजस्थान कुल तीन स्वर्ण, तीन रजत तथा दो कांस्य पदक जीत कर चौथे स्थान पर रहा जबकि केरल पुरूष वर्ग में चार स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य तथा महिला वर्ग में नौ स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक जीत कर ओवरआल चैंपियन बना। राजस्थान की ओर से सबसे पहले 11 जून को मंजूबाला और खेताराम के क्रमश: हैमर थ्रो और 10000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किए जबकि पुरुष डिस्कस थ्रो में विकास पूनिया ने एक कांस्य पदक जीता। दिनांक 11 जून से प्रारंभ होकर 14 जून तक चली इस सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार आगाज करने वाले राजस्थान ने टूर्नामेंट के दूसरे दिन भी अपनी धाक कायम रखते हुए एक स्वर्ण, दो रजत व एक कांस्य पदक जीता। इस दिन हाल ही में चीन में हुई एशियन ग्रांप्री में रजत पदक की हैट्रिक जमाने वाले जोधपुर के घमंडाराम ने 1500 मीटर ट्रैक पर स्वर्णिम दौड़ लगाई। उन्होंने इस दौड़ में 3 मिनट 48.12 सैकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता। घमंडा ने फरवरी में झारखंड में हुए नेशनल गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली कृष्णा पूनिया अपने पहले अवसर के बाद मुकाबले से हट गईं, हालांकि पहले अवसर पर ही उन्होंने 55.45 मीटर डिस्कस फेंक दिया और रजत पदक जीता।
भरतपुर के राहुल कुमार ने डेकाथलॉन स्पर्धा में कुल 6875 अंक हासिल करके रजत जीता। कुछ दिनों पूर्व की चोट से उबर रही कृष्णा पूनिया से भी स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा। डिस्कस थ्रो की इस स्पर्धा में चूरू की प्रवीण कुमारी (49.21) ने कांस्य पदक जीता।
अंतिम दिन 14 जून को घमंडाराम इस राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 800 मी. की दौड़ में रजत पदक ही जीत सके।
राजस्थान की उपलब्धि पर एक नजर-
स्वर्ण पदक-
1. मंजूबाला - हैमर थ्रो
2. खेताराम - दस हजार मी. दौड़
3. घमंडाराम - 1500 मी. दौड़
रजत पदक-
1. घमंडाराम - 800 मी. दौड़
2. राहुल कुमार - डेकाथलॉन
3. कृष्णा पूनिया - डिस्कस थ्रो
काँस्य पदक -
1. विकास पूनिया - डिस्कस थ्रो
2. प्रवीण कुमारी - डिस्कस थ्रो
महाराष्ट्र के नागपुर में दिनांक 12 जून को सम्पन्न हुई पश्चिम क्षेत्र राष्ट्रीय सीनियर पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में राजस्थान टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरूष वर्ग में 2 स्वर्ण, 1 रजत व 2 कांस्य पदक जीते जबकि महिला वर्ग में 1 स्वर्ण व एक कांस्य पदक जीतकर टीम चैम्पियनशिप पर कब्जा जमाया। महाराष्ट्र टीम उप-विजेता रही। राजस्थान के पदक विजेता इस प्रकार हैं-
स्वर्ण पदक-
1. 66 किलोग्राम भारवर्ग- समीर खान
2. 74 किलोग्राम भारवर्ग- पुलिस के भूपेन्द्र व्यास
3. 72 किलोग्राम भारवर्ग महिला- इंदिरा भण्डारी
रजत पदक-
105 किलोग्राम भारवर्ग- शिवनारायण व्यास
कांस्य पदक-
1. 93 किलो भार- मनोहरसिंह
2. 105 किलो भार- प्रेमरतन पुरोहित
3. 47 किलोग्राम भार महिला वर्ग- रक्षा व्यास
राष्ट्रीय सब-जूनियर पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता-
105 किलोग्राम भार वर्ग में शिवनारायण व्यास स्वर्ण पदक जीत कर राष्ट्रीय चैम्पियन बने।
किशनगढ़ में बनेगा मार्बल हैंडीक्राफ्ट मार्केट
मार्बल हैंडीक्राफ्ट मार्केट स्थापित कर श्रमिकों के विकास करने के लिए राज्य सरकार ने किशनगढ़ में मार्बल हैंडीक्राफ्ट क्लस्टर बनाने की योजना तैयार कर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी है।
किशनगढ़ का मार्बल हैंडीक्राफ्ट देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ करीब 60 से अधिक मार्बल हैंडीक्राफ्ट निर्माण इकाइयाँ हैं जिनमें लगभग 500 श्रमिक काम करते हैं। यहां के मार्बल से बनी मूर्तियां, शिलालेख, खिलौने, फर्नीचर, शोपीस सहित अन्य उत्पादों की अत्यधिक मांग रहती है, किंतु मार्बल पर महीन नक्काशी कर उत्कृष्ट व आकर्षक कलाकृतियां उकेरने वाले श्रमिकों को इनके उत्पादों की सही कीमत नहीं मिल पाती है।
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए सरकार देगी 20 हजार रुपए
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वर्ष 2011-12 की बजट घोषणा के अनुसार कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को सरकार अब 20 हजार की आर्थिक सहायता देगी। यह सहायता राजस्थान के उन मूल निवासियों को ही मिलेगी, जो स्थाई रूप से यहीं निवास कर रहे हैं। कैलाश मान सरोवर यात्रा करने वाले श्रद्धालु इस आर्थिक सहायता के लिए अपने क्षेत्र के उपखंड अधिकारी एवं देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त से संपर्क कर सकते हैं। इस संबंध में देवस्थान विभाग के आयुक्त ने सभी जिला कलेक्टर को निर्देश जारी किए हैं।
सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रहा राजस्थान चौथे स्थान पर-
बंगलुरू में दिनांक 14 जून को संपन्न हुई सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में राजस्थान कुल तीन स्वर्ण, तीन रजत तथा दो कांस्य पदक जीत कर चौथे स्थान पर रहा जबकि केरल पुरूष वर्ग में चार स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य तथा महिला वर्ग में नौ स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक जीत कर ओवरआल चैंपियन बना। राजस्थान की ओर से सबसे पहले 11 जून को मंजूबाला और खेताराम के क्रमश: हैमर थ्रो और 10000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किए जबकि पुरुष डिस्कस थ्रो में विकास पूनिया ने एक कांस्य पदक जीता। दिनांक 11 जून से प्रारंभ होकर 14 जून तक चली इस सीनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार आगाज करने वाले राजस्थान ने टूर्नामेंट के दूसरे दिन भी अपनी धाक कायम रखते हुए एक स्वर्ण, दो रजत व एक कांस्य पदक जीता। इस दिन हाल ही में चीन में हुई एशियन ग्रांप्री में रजत पदक की हैट्रिक जमाने वाले जोधपुर के घमंडाराम ने 1500 मीटर ट्रैक पर स्वर्णिम दौड़ लगाई। उन्होंने इस दौड़ में 3 मिनट 48.12 सैकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता। घमंडा ने फरवरी में झारखंड में हुए नेशनल गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली कृष्णा पूनिया अपने पहले अवसर के बाद मुकाबले से हट गईं, हालांकि पहले अवसर पर ही उन्होंने 55.45 मीटर डिस्कस फेंक दिया और रजत पदक जीता।
भरतपुर के राहुल कुमार ने डेकाथलॉन स्पर्धा में कुल 6875 अंक हासिल करके रजत जीता। कुछ दिनों पूर्व की चोट से उबर रही कृष्णा पूनिया से भी स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा। डिस्कस थ्रो की इस स्पर्धा में चूरू की प्रवीण कुमारी (49.21) ने कांस्य पदक जीता।
अंतिम दिन 14 जून को घमंडाराम इस राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 800 मी. की दौड़ में रजत पदक ही जीत सके।
राजस्थान की उपलब्धि पर एक नजर-
स्वर्ण पदक-
1. मंजूबाला - हैमर थ्रो
2. खेताराम - दस हजार मी. दौड़
3. घमंडाराम - 1500 मी. दौड़
रजत पदक-
1. घमंडाराम - 800 मी. दौड़
2. राहुल कुमार - डेकाथलॉन
3. कृष्णा पूनिया - डिस्कस थ्रो
काँस्य पदक -
1. विकास पूनिया - डिस्कस थ्रो
2. प्रवीण कुमारी - डिस्कस थ्रो
Tuesday, June 14, 2011
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज-
13 जून, 2011
1. 'देवताओं की साल' नामक देवल कहाँ स्थित है?
उत्तर- मंडोर (जोधपुर) में
2. जैसलमेर की प्राचीन राजधानी का नाम क्या था?
उत्तर- लोद्रवा
3. 'राजस्थान राज्य प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान' कहाँ स्थित है?
उत्तर- जोधपुर में
4. राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी कहाँ है?
उत्तर- भरतपुर में
5. दादू संप्रदाय का अधिकांश साहित्य किस बोली में लिपिबद्ध है?
उत्तर- ढूँढाड़ी में
6. कंदोरा, तगड़ी और कणकती कहाँ पहने जाने वाले आभूषण है?
उत्तर- कमर में
7. जम्भो जी द्वारा प्रतिपादित विश्नोई सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ कौनसा है?
उत्तर- जम सागर
8. अंगरखी को ग्रामीण भाषा में किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर- बुखतरी या बुगतरी
9. राजस्थान में पंचायत समितियों की संख्या कितनी है?
उत्तर- 237
10. इंस्ट्रृमेंटेशन लिमिटेड कारखाना राजस्थान में कहाँ स्थित है?
उत्तर- कोटा में
उत्तर- मंडोर (जोधपुर) में
2. जैसलमेर की प्राचीन राजधानी का नाम क्या था?
उत्तर- लोद्रवा
3. 'राजस्थान राज्य प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान' कहाँ स्थित है?
उत्तर- जोधपुर में
4. राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी कहाँ है?
उत्तर- भरतपुर में
5. दादू संप्रदाय का अधिकांश साहित्य किस बोली में लिपिबद्ध है?
उत्तर- ढूँढाड़ी में
6. कंदोरा, तगड़ी और कणकती कहाँ पहने जाने वाले आभूषण है?
उत्तर- कमर में
7. जम्भो जी द्वारा प्रतिपादित विश्नोई सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ कौनसा है?
उत्तर- जम सागर
8. अंगरखी को ग्रामीण भाषा में किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर- बुखतरी या बुगतरी
9. राजस्थान में पंचायत समितियों की संख्या कितनी है?
उत्तर- 237
10. इंस्ट्रृमेंटेशन लिमिटेड कारखाना राजस्थान में कहाँ स्थित है?
उत्तर- कोटा में
Monday, June 13, 2011
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर
(Board of Secondary Education Rajasthan-BSER)-
इतिहास-
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान दिनांक 4 दिसम्बर 1957 को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1957 के तहत जयपुर में स्थापित किया गया जिसे 1961 में अजमेर स्थानांतरित किया गया। सन् 1973 से यह जयपुर रोड़ स्थित अपनी वर्तमान बहुमंजिला इमारत में कार्यरत है। अपनी स्थापना से अब तक पाँच दशकों से यह देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान के छः हजार से अधिक विद्यालयों के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कक्षाओं के लाखों विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाओं को संपादित करवा रहा है। बोर्ड द्वारा राज्य में एक सुदृढ़ परीक्षा तंत्र बनाने एवं परीक्षा सुधार करने के साथ साथ दूरदर्शिता का परिचय देते हुए माध्यमिक शिक्षा के विकास के लिए कई नवाचार भी किए गए हैं।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रमुख कार्य-
> माध्यमिक, प्रवेशिका, उच्च माध्यमिक तथा उपाध्याय स्तर की परीक्षाओं का आयोजन कर प्रमाण पत्र प्रदान करना।
> राज्य में कक्षा 9 से 12 के लिए पाठ्यक्रम तथा पाठ्यपुस्तकों का निर्माण व प्रकाशन।
> बोर्ड शिक्षण पत्रिका का प्रकाशन।
> शिक्षकों के अकादमिक उन्नयन हेतु कार्यक्रमों का आयोजन।
> प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु पुरस्कार, पदक एवं छात्रवृत्ति प्रदान करना तथा व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन।
> उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यालयों को शील्ड।
> विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभा को सँवारने और प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन।
> विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन।
बोर्ड का संगठन-
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1957 (Rajasthan Secondary Education Act 1957) के तहत बोर्ड की संरचना निम्नांकित है-
> अध्यक्ष- 1
> उपाध्यक्ष सहित पदेन सदस्य- 7
> निर्वाचित सदस्य- 7
> राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य- 17
> विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत सदस्य- 2
> सहवरण सदस्य- 2
*. बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति राजस्थान सरकार द्वारा की जाती है। बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष श्री सुभाष गर्ग है।
*. आयुक्त/निदेशक, माध्यमिक शिक्षा इसके उपाध्यक्ष तथा पदेन सदस्य होते हैं। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा आयुक्त श्री भास्कर ए. सावंत है।
*. बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष होता है।
*. बोर्ड के सचिव की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। बोर्ड के वर्तमान सचिव आरएएस अधिकारी श्री मिरजूराम शर्मा है।
*. बोर्ड का समस्त कार्य बोर्ड के नियमों के अनुसार इसके कर्मचारियों तथा अधिकारियों द्वारा संपादित किया जाता है।
सम्पर्क सूत्र-
परीक्षा परिणाम और अन्य विस्तृत जानकारी के लिए बोर्ड की वेबसाइट निम्न प्रकार से है-
http://rajeduboard.nic.in/
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान दिनांक 4 दिसम्बर 1957 को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1957 के तहत जयपुर में स्थापित किया गया जिसे 1961 में अजमेर स्थानांतरित किया गया। सन् 1973 से यह जयपुर रोड़ स्थित अपनी वर्तमान बहुमंजिला इमारत में कार्यरत है। अपनी स्थापना से अब तक पाँच दशकों से यह देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान के छः हजार से अधिक विद्यालयों के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कक्षाओं के लाखों विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाओं को संपादित करवा रहा है। बोर्ड द्वारा राज्य में एक सुदृढ़ परीक्षा तंत्र बनाने एवं परीक्षा सुधार करने के साथ साथ दूरदर्शिता का परिचय देते हुए माध्यमिक शिक्षा के विकास के लिए कई नवाचार भी किए गए हैं।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रमुख कार्य-
> माध्यमिक, प्रवेशिका, उच्च माध्यमिक तथा उपाध्याय स्तर की परीक्षाओं का आयोजन कर प्रमाण पत्र प्रदान करना।
> राज्य में कक्षा 9 से 12 के लिए पाठ्यक्रम तथा पाठ्यपुस्तकों का निर्माण व प्रकाशन।
> बोर्ड शिक्षण पत्रिका का प्रकाशन।
> शिक्षकों के अकादमिक उन्नयन हेतु कार्यक्रमों का आयोजन।
> प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु पुरस्कार, पदक एवं छात्रवृत्ति प्रदान करना तथा व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन।
> उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यालयों को शील्ड।
> विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभा को सँवारने और प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन।
> विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन।
बोर्ड का संगठन-
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1957 (Rajasthan Secondary Education Act 1957) के तहत बोर्ड की संरचना निम्नांकित है-
> अध्यक्ष- 1
> उपाध्यक्ष सहित पदेन सदस्य- 7
> निर्वाचित सदस्य- 7
> राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य- 17
> विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत सदस्य- 2
> सहवरण सदस्य- 2
*. बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति राजस्थान सरकार द्वारा की जाती है। बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष श्री सुभाष गर्ग है।
*. आयुक्त/निदेशक, माध्यमिक शिक्षा इसके उपाध्यक्ष तथा पदेन सदस्य होते हैं। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा आयुक्त श्री भास्कर ए. सावंत है।
*. बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष होता है।
*. बोर्ड के सचिव की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। बोर्ड के वर्तमान सचिव आरएएस अधिकारी श्री मिरजूराम शर्मा है।
*. बोर्ड का समस्त कार्य बोर्ड के नियमों के अनुसार इसके कर्मचारियों तथा अधिकारियों द्वारा संपादित किया जाता है।
सम्पर्क सूत्र-
परीक्षा परिणाम और अन्य विस्तृत जानकारी के लिए बोर्ड की वेबसाइट निम्न प्रकार से है-
http://rajeduboard.nic.in/
लोक देवता मेहाजी माँगलिया
मेहाजी मांगलिया राजस्थान के पंच पीर में से एक थे। मेहाजी सांखला {पंवार क्षत्रिय} थे। वे जन्म से ही अपने ननिहाल में रहते थे और इनका पालन-पोषण वहाँ ही हुआ था। इनके ननिहाल पक्ष की गौत्र माँगलिया थी। इसी कारण वे मेहा जी मांगलिया के नाम से मशहूर हो गए। वे मारवाड़ के राव चूंडा के समकालीन थे। मेहाजी अत्यंत ही दूरदर्शी थे। उनके पिताजी का नाम गोपालराज सांखला था। गोपालराज की अपने भाई ऊदा से बनता नहीं थी। उन दोनों के बीच में झगड़ा हो गया जिसमें गोपालराज ऊदा के हाथों मारे गए। उस समय गोपालराज की पत्नी गर्भवती थी। इस कठिन समय में एक चारण बीठू ने उनकी सहायता की तथा उन्हें सकुशल उनके पीहर पहुँचा दिया। वहाँ मेहा (मेहराज) का जन्म हुआ। नाना के घर में मेहा बड़ा हुए और आगे जा कर नाना के उत्तराधिकारी बने।
मेहा जब चौदह वर्ष के थे तब उन्होंने अपने साथियों को संगठित करके एक शक्तिशाली दल का गठन किया तथा अवसर मिलते ही उन्होंने अपने पिता के हत्यारे ऊदा के जांगल प्रदेश पर आक्रमण कर उसका वध कर दिया एवं अत्याचारी को समाप्त करने के अपने क्षत्रिय धर्म का पालन किया।
इसके पश्चात मेहा पहिलाप गाँव में बस गए। वे चारों तरफ उज्जवल क्षत्रिय के नाम से प्रसिद्ध हो गए। राजपूती धर्म का पालन कर उनको यह यश किशोर अवस्था में ही प्राप्त हो गया। अपने नए स्थान पहिलाप का विकास करने के उन्होंने उस क्षेत्र में तीन तालाब खुदवाए जिनमें से एक तालाब उनके नाम से प्रसिद्ध हुआ तथा दो अन्य के नाम लूंआसर एवं हरभूसर पड़े। एक दिन पहिलाप गाँव भी छोड़ दिया। उस समय राव चूंडा ने मुसलमानों से युद्ध कर नागौर पर कब्जा कर लिया था। मेहा ने राव चूंडा से भेंट की और नागौर के तहत आए भूंडेल में अपना स्थान बनाया। राव चूंडा का जोइयां से जब युद्ध हुआ तब चूंडा की ओर से मेहा का पुत्र आल्हणसी बहुत ही वीरता से लड़ा तथा उस युद्ध में खेत रहा। अपने बेटे के वियोग से मेहाजी अत्यंत दुःखी हुए, परंतु साथ ही उनको अपने पुत्र के क्षत्रिय धर्म निभाने के कारण अपार हर्ष भी था। फिर भी बेटे के वध का बदला लेने के लिए वे सदैव चिंता में रहते थे। एक मौके पर राव अड़कमल चूंडावत ने मेहा को आल्हणसी का बदला नहीं लेने का ताना मारा। उस ताने का नतीजा यह निकला कि उन्होंने इसका बदला ले लिया। मेहा को मारने के लिए कई बार दुश्मनों ने प्रयास किया, परंतु मेहा अपनी बुद्धि और चातुर्य के कारण सदैव बच निकले।
मेहा दूरदर्शी थे। वे भारी से भारी विपदा को पहले से भाँप लिया करते थे। ऐसा माना जाता है कि वे शुकन-शास्त्र के अच्छे ज्ञाता थे एवं शकुन के बल के कारण ही वे सचेत हो जाते थे। मेहा का संपूर्ण जीवन धर्म की रक्षा करने में ही बीता। आखिर में जैसलमेर के राव राणगदेव भाटी से युद्ध करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। वीरों की अंतिम सेज रणभूमि ही होती है और मेहा ने भी इस कहावत को चरितार्थ किया।
क्षत्रिय धर्म का पालन करना, आगा-पीछा सोचकर कदम उठाना, भविष्य के संबंध में शांत चित्त से विचार करना, दृष्ट से बदला लेना, लोक कल्याण के लिए अपने बेटे को बलिदान करवा देना इत्यादि वे पवित्र लक्ष्य एवं कार्य थे जो वास्तव में प्रशंसा के योग्य हैं। इन उत्तम गुणों के कारण मेहाजी श्रेष्ठ क्षत्रिय कहलाए तथा लोक कल्याण के कार्यों के कारण वे लोक देवता के रूप में पूजे गए।
मेहा जब चौदह वर्ष के थे तब उन्होंने अपने साथियों को संगठित करके एक शक्तिशाली दल का गठन किया तथा अवसर मिलते ही उन्होंने अपने पिता के हत्यारे ऊदा के जांगल प्रदेश पर आक्रमण कर उसका वध कर दिया एवं अत्याचारी को समाप्त करने के अपने क्षत्रिय धर्म का पालन किया।
इसके पश्चात मेहा पहिलाप गाँव में बस गए। वे चारों तरफ उज्जवल क्षत्रिय के नाम से प्रसिद्ध हो गए। राजपूती धर्म का पालन कर उनको यह यश किशोर अवस्था में ही प्राप्त हो गया। अपने नए स्थान पहिलाप का विकास करने के उन्होंने उस क्षेत्र में तीन तालाब खुदवाए जिनमें से एक तालाब उनके नाम से प्रसिद्ध हुआ तथा दो अन्य के नाम लूंआसर एवं हरभूसर पड़े। एक दिन पहिलाप गाँव भी छोड़ दिया। उस समय राव चूंडा ने मुसलमानों से युद्ध कर नागौर पर कब्जा कर लिया था। मेहा ने राव चूंडा से भेंट की और नागौर के तहत आए भूंडेल में अपना स्थान बनाया। राव चूंडा का जोइयां से जब युद्ध हुआ तब चूंडा की ओर से मेहा का पुत्र आल्हणसी बहुत ही वीरता से लड़ा तथा उस युद्ध में खेत रहा। अपने बेटे के वियोग से मेहाजी अत्यंत दुःखी हुए, परंतु साथ ही उनको अपने पुत्र के क्षत्रिय धर्म निभाने के कारण अपार हर्ष भी था। फिर भी बेटे के वध का बदला लेने के लिए वे सदैव चिंता में रहते थे। एक मौके पर राव अड़कमल चूंडावत ने मेहा को आल्हणसी का बदला नहीं लेने का ताना मारा। उस ताने का नतीजा यह निकला कि उन्होंने इसका बदला ले लिया। मेहा को मारने के लिए कई बार दुश्मनों ने प्रयास किया, परंतु मेहा अपनी बुद्धि और चातुर्य के कारण सदैव बच निकले।
मेहा दूरदर्शी थे। वे भारी से भारी विपदा को पहले से भाँप लिया करते थे। ऐसा माना जाता है कि वे शुकन-शास्त्र के अच्छे ज्ञाता थे एवं शकुन के बल के कारण ही वे सचेत हो जाते थे। मेहा का संपूर्ण जीवन धर्म की रक्षा करने में ही बीता। आखिर में जैसलमेर के राव राणगदेव भाटी से युद्ध करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। वीरों की अंतिम सेज रणभूमि ही होती है और मेहा ने भी इस कहावत को चरितार्थ किया।
क्षत्रिय धर्म का पालन करना, आगा-पीछा सोचकर कदम उठाना, भविष्य के संबंध में शांत चित्त से विचार करना, दृष्ट से बदला लेना, लोक कल्याण के लिए अपने बेटे को बलिदान करवा देना इत्यादि वे पवित्र लक्ष्य एवं कार्य थे जो वास्तव में प्रशंसा के योग्य हैं। इन उत्तम गुणों के कारण मेहाजी श्रेष्ठ क्षत्रिय कहलाए तथा लोक कल्याण के कार्यों के कारण वे लोक देवता के रूप में पूजे गए।
राजस्थान की योजनाएँ-
पालनहार योजना
पालनहार योजना का उद्देश्य अनाथ बच्चों (जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी हो अथवा उनको न्यायिक आदेशों के तहत मृत्यु-दण्ड या आजीवन कारावास की सजा हो चुकी हो अथवा माता-पिता दोनों में से एक की मृत्यु हो चुकी हो व दूसरे को मृत्यु-दण्ड या आजीवन कारावास की सजा हो चुकी हो अथवा जिसके पिता की मृत्यु हो चुकी हो व विधवा माता निराश्रित पेंशन हेतु पात्रता रखती हो अथवा विधिवत पुनर्विवाह करने वाली विधवा माता की संतान हो अथवा कुष्ठ/ एड्स पीड़ित माता/पिता की संतान हो अथवा नाता जाने वाली महिला की संतान हो) को पारिवारिक माहौल में शिक्षा, भोजन, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
यह योजना दिनांक 08 फरवरी 2005 से लागू की गई। आरम्भ में यह अनुसूचित जाति के अनाथ बच्चों हेतु संचालित की गई थी, जिसे दिनांक 1 अगस्त 2005 से सभी जातियों के अनाथ बच्चों हेतु लागू किया गया।
इस योजना में अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा आदि के लिए पालनहार को अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। पालनहार परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रूपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
ऐसे अनाथ बच्चों को 2 वर्ष की आयु में आंगनबाड़ी केन्द्र पर तथा 6 वर्ष की आयु में स्कूल भेजना अनिवार्य है।
प्रत्येक अनाथ बच्चे हेतु पालनहार परिवार को 5 वर्ष की आयु तक के बच्चे हेतु 500 रूपए प्रतिमाह की दर से तथा स्कूल में प्रवेश होने के बाद 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक 675 रुपए प्रतिमाह की दर से अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त वस्त्र, जूते, स्वेटर एवं अन्य आवश्यक कार्य हेतु 2000 रुपए प्रति अनाथ की दर से वार्षिक अनुदान भी दिया जाता है।
यह योजना दिनांक 08 फरवरी 2005 से लागू की गई। आरम्भ में यह अनुसूचित जाति के अनाथ बच्चों हेतु संचालित की गई थी, जिसे दिनांक 1 अगस्त 2005 से सभी जातियों के अनाथ बच्चों हेतु लागू किया गया।
इस योजना में अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा आदि के लिए पालनहार को अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। पालनहार परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रूपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
ऐसे अनाथ बच्चों को 2 वर्ष की आयु में आंगनबाड़ी केन्द्र पर तथा 6 वर्ष की आयु में स्कूल भेजना अनिवार्य है।
प्रत्येक अनाथ बच्चे हेतु पालनहार परिवार को 5 वर्ष की आयु तक के बच्चे हेतु 500 रूपए प्रतिमाह की दर से तथा स्कूल में प्रवेश होने के बाद 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक 675 रुपए प्रतिमाह की दर से अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त वस्त्र, जूते, स्वेटर एवं अन्य आवश्यक कार्य हेतु 2000 रुपए प्रति अनाथ की दर से वार्षिक अनुदान भी दिया जाता है।
Sunday, June 12, 2011
राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड की योजनाएँ
अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान हेतु राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड की स्थापना 28 मार्च, 1980 को की गई। स्थापना से ही यह अजा, जजा, सफाई कर्मचारी/स्वच्छकार, विकलांग वर्ग के आर्थिक उत्थान हेतु निरन्तर कार्यरत है।
निगम के कार्य-
1. अजा के व्यक्तियों को स्वरोजगार हेतु आर्थिक संसाधन उपलब्ध करा स्वावलम्बी बनाना।
2. अजा के प्रतिभाशाली युवाओं के शैक्षणिक उन्नयन हेतु शैक्षिक, तकनीकी व दक्षता उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।
3. अजा के लघु एवं सीमान्त काश्तकारों को कृषि विकास हेतु उन्नत कृषि यंत्र एवं लघु सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना।
4. अजा बाहुल्य क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का सृजन करना।
लाभार्थी की पात्रता-
1. बीपीएल हो।
2. राजस्थान का मूल निवासी हो।
3. आयु 18 वर्ष से कम नहीं हो।
4. पूर्व में निगम द्वारा किसी भी योजना में अधिकतम 10,000 रु. अनुदान का लाभार्थी नहीं होना चाहिए।
5. किसी संस्था/निगम या सरकार का अवधि पार ऋण बकाया नहीं हो।
6. वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 20000 रु. एवं शहरी क्षेत्र में 21400 रु. से अधिक नहीं हो।
अनुदान राशि-
बीपीएल प्रार्थी को 10,000 रु. या इकाई लागत का 50 प्रतिशत जो भी कम हो, राशि अनुदान का देय है। शेष इकाई लागत राशि बैंक द्वारा ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
निगम द्वारा संचालित योजनाएँ-
>सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार से विशेष केन्द्रीय सहायता योजना-
1. पैकेज ऑफ प्रोग्राम बैंकिंग योजना-
विभिन्न व्यवसायों पर अनुदान एवं बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अन्तर्गत स्वरोजगार हेतु उद्योग/ सेवा/छोटे व्यवसाय (जैसे सिलाई कार्य, सीमेंट जालियां बनाना, चर्मकार्य, लुहारी कार्य, रेडीमेड गारमेन्ट, फल सब्जी की दुकान, ऊँटगाड़ी, बैलगाड़ी, मनिहारी, बिजली के सामान की दुकान, रेडियो टी.वी. सेवा केन्द्र, आटा चक्की, ड्राईक्लीन दुकान, फर्श घिसाई आदि) के लिए लागत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो, अनुदान उपलब्ध कराया जाता है तथा शेष राशि बैंक से ऋण के रूप में दी जाती है।
2. ऑटो रिक्शा बैंकिंग योजना-
यह अजा के बीपीएल परिवारों के व्यक्ति को स्वरोजगार हेतु ऑटो रिक्शा योजना संचालित है। आवेदक के पास ऑटो रिक्शा का ड्राईविंग लाइसेन्स अनिवार्य है। इसमें चयनित व्यक्ति को 50000 रु. का पेट्रोल ऑटो रिक्शा अथवा 80000 रु. का डीजल ऑटो रिक्शा की इकाई लागत का ऑटो दिलवाया जाता है जिसमें अधिकतम 10000 रु. अनुदान देय होता है। शेष राशि बैंक ऋण से दी जाती है।
3. व्यक्तिगत पम्पसैट योजना (बैंकिंगयोजना)-
अजा के बीपीएल वाले लघु एवं सीमान्त कृषकों को अपनी भूमि पर सिंचाई के साधन विकसित करने की दृष्टि से 5 से 10 HP का पम्पसैट उपलब्ध कराया जाता है। योजना मेँ इकाई लागत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो, अनुदान दिया जाता है। पम्पसेट ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टेण्डर्ड (बी.एस.आई.) मार्क का होना चाहिए।
4. उन्नत भैंस/गाय योजना (बैंकिंग योजना)-
अजा के गरीब परिवारों को डेयरी विकास कार्य से लाभान्वित करने के लिए उन्नत नस्ल की भैंस /गाय उपलब्ध कराने का प्रावधान है। गाय/भैंस को रखने हेतु शेड का निर्माण लाभार्थी द्वारा किया जाता है। डेयरी चलाने के लिए 3 उन्नत नस्ल भैंस/ गाय हेतु अधिकतम 10000 रु. अनुदान एवं शेष राशि बैंक ऋण से दिया जाता है। उन्नत नस्ल की भैंस की औसत इकाई लागत 31000 रु. एवं संकर गाय की इकाई लागत 26300 रु. नाबार्ड द्वारा निर्धारित है।
5. कार्यशाला योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
अजा के बीपीएल शिल्पियों को शिल्पशाला, बुनकर को बुनकरशाला निर्माण हेतु लागत का 50 प्रतिशत या रु 10000 जो भी कम हो, अनुदान देय होता है। प्रार्थी की भूमि स्वयं की होनी चाहिए।
6. कुआँ गहरा करना (गैर बैंकिंग योजना)-
बीपीएल अजा के खेतों के कुओं में जिनका जलस्तर नीचे चला गया है व कुएं में कठोर परत की वजह से वे स्वयं गहरा नहीं करा सकते हैं, उन्हें गहरा करने का कार्य भूजल विभाग एवं जल विकास निगम के माध्यम से आधुनिक मशीनों से ब्लास्टिंग द्वारा कराया जाता है। इसमें लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 10000 रु. अनुदान ब्लास्टिंग कार्य संतोषप्रद होने पर भूजल विभाग को दी जाती है। इसमें मलबा निकालने का कार्य स्वयं को करना होता है।
7. कूप विद्युतीकरण योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
अजा के गरीब परिवारों के आर्थिक उत्थान हेतु कुओं पर विद्युतीकरण कराया जाता है। इसमेँ लागत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो, अनुदान देय है। कृषि भूमि स्वयं के नाम या वह सह खातेदार हो। अनुदान राजस्थान विद्युत वितरण निगम को कनेक्शन मांग पत्र जारी होने के बाद भेजा जाता है।
8. आधुनिक कृषि यंत्र योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
बीपीएल अजा लघु सीमांत कृषक/कृषि मजदूर को अधिक उत्पादन हेतु लागत, आवश्यकता व उपयोगिता को देखते हुए आधुनिक कृषि यंत्र लागत का 50 प्रतिशत या रु. 3000 (जो भी कम हो) के अनुदान पर उपलब्ध कराए जाते हैँ। कृषक आवश्यकतानुसार एक से अधिक यंत्र ले सकता है, लेकिन अनुदान सीमा अधिकतम रु. 10000 है। इसमें पौध संरक्षण, बण्ड फोरमर, मूंगफली छीलने की मशीन आदि एवं अधिक कीमत के यंत्रों में पावर स्प्रेयर, कल्टीवेटर, डिस्क प्लॉ का भी प्रावधान हैं।
9. कुटीर ज्योति योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही इस योजना में अजा गरीब परिवार के घर में एक पाईण्ट (एक बल्ब) लगाया जाता है। इसमें प्रति लाभार्थी अधिकतम 2017 रु. का अनुदान देय है।
10. भूमि आवंटन योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
वर्ष 2001-02 से प्रारम्भ की गई योजना इन्दिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में बीपीएल अजा व्यक्ति को उपनिवेशन विभाग द्वारा भूमि आवंटित की जाती है। पात्र आवंटियों को भूमि की कीमत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो अनुदान उपनिवेशन विभाग को भेजा जाता है।
निगम के कार्य-
1. अजा के व्यक्तियों को स्वरोजगार हेतु आर्थिक संसाधन उपलब्ध करा स्वावलम्बी बनाना।
2. अजा के प्रतिभाशाली युवाओं के शैक्षणिक उन्नयन हेतु शैक्षिक, तकनीकी व दक्षता उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।
3. अजा के लघु एवं सीमान्त काश्तकारों को कृषि विकास हेतु उन्नत कृषि यंत्र एवं लघु सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना।
4. अजा बाहुल्य क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का सृजन करना।
लाभार्थी की पात्रता-
1. बीपीएल हो।
2. राजस्थान का मूल निवासी हो।
3. आयु 18 वर्ष से कम नहीं हो।
4. पूर्व में निगम द्वारा किसी भी योजना में अधिकतम 10,000 रु. अनुदान का लाभार्थी नहीं होना चाहिए।
5. किसी संस्था/निगम या सरकार का अवधि पार ऋण बकाया नहीं हो।
6. वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 20000 रु. एवं शहरी क्षेत्र में 21400 रु. से अधिक नहीं हो।
अनुदान राशि-
बीपीएल प्रार्थी को 10,000 रु. या इकाई लागत का 50 प्रतिशत जो भी कम हो, राशि अनुदान का देय है। शेष इकाई लागत राशि बैंक द्वारा ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
निगम द्वारा संचालित योजनाएँ-
>सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार से विशेष केन्द्रीय सहायता योजना-
1. पैकेज ऑफ प्रोग्राम बैंकिंग योजना-
विभिन्न व्यवसायों पर अनुदान एवं बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अन्तर्गत स्वरोजगार हेतु उद्योग/ सेवा/छोटे व्यवसाय (जैसे सिलाई कार्य, सीमेंट जालियां बनाना, चर्मकार्य, लुहारी कार्य, रेडीमेड गारमेन्ट, फल सब्जी की दुकान, ऊँटगाड़ी, बैलगाड़ी, मनिहारी, बिजली के सामान की दुकान, रेडियो टी.वी. सेवा केन्द्र, आटा चक्की, ड्राईक्लीन दुकान, फर्श घिसाई आदि) के लिए लागत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो, अनुदान उपलब्ध कराया जाता है तथा शेष राशि बैंक से ऋण के रूप में दी जाती है।
2. ऑटो रिक्शा बैंकिंग योजना-
यह अजा के बीपीएल परिवारों के व्यक्ति को स्वरोजगार हेतु ऑटो रिक्शा योजना संचालित है। आवेदक के पास ऑटो रिक्शा का ड्राईविंग लाइसेन्स अनिवार्य है। इसमें चयनित व्यक्ति को 50000 रु. का पेट्रोल ऑटो रिक्शा अथवा 80000 रु. का डीजल ऑटो रिक्शा की इकाई लागत का ऑटो दिलवाया जाता है जिसमें अधिकतम 10000 रु. अनुदान देय होता है। शेष राशि बैंक ऋण से दी जाती है।
3. व्यक्तिगत पम्पसैट योजना (बैंकिंगयोजना)-
अजा के बीपीएल वाले लघु एवं सीमान्त कृषकों को अपनी भूमि पर सिंचाई के साधन विकसित करने की दृष्टि से 5 से 10 HP का पम्पसैट उपलब्ध कराया जाता है। योजना मेँ इकाई लागत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो, अनुदान दिया जाता है। पम्पसेट ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टेण्डर्ड (बी.एस.आई.) मार्क का होना चाहिए।
4. उन्नत भैंस/गाय योजना (बैंकिंग योजना)-
अजा के गरीब परिवारों को डेयरी विकास कार्य से लाभान्वित करने के लिए उन्नत नस्ल की भैंस /गाय उपलब्ध कराने का प्रावधान है। गाय/भैंस को रखने हेतु शेड का निर्माण लाभार्थी द्वारा किया जाता है। डेयरी चलाने के लिए 3 उन्नत नस्ल भैंस/ गाय हेतु अधिकतम 10000 रु. अनुदान एवं शेष राशि बैंक ऋण से दिया जाता है। उन्नत नस्ल की भैंस की औसत इकाई लागत 31000 रु. एवं संकर गाय की इकाई लागत 26300 रु. नाबार्ड द्वारा निर्धारित है।
5. कार्यशाला योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
अजा के बीपीएल शिल्पियों को शिल्पशाला, बुनकर को बुनकरशाला निर्माण हेतु लागत का 50 प्रतिशत या रु 10000 जो भी कम हो, अनुदान देय होता है। प्रार्थी की भूमि स्वयं की होनी चाहिए।
6. कुआँ गहरा करना (गैर बैंकिंग योजना)-
बीपीएल अजा के खेतों के कुओं में जिनका जलस्तर नीचे चला गया है व कुएं में कठोर परत की वजह से वे स्वयं गहरा नहीं करा सकते हैं, उन्हें गहरा करने का कार्य भूजल विभाग एवं जल विकास निगम के माध्यम से आधुनिक मशीनों से ब्लास्टिंग द्वारा कराया जाता है। इसमें लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 10000 रु. अनुदान ब्लास्टिंग कार्य संतोषप्रद होने पर भूजल विभाग को दी जाती है। इसमें मलबा निकालने का कार्य स्वयं को करना होता है।
7. कूप विद्युतीकरण योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
अजा के गरीब परिवारों के आर्थिक उत्थान हेतु कुओं पर विद्युतीकरण कराया जाता है। इसमेँ लागत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो, अनुदान देय है। कृषि भूमि स्वयं के नाम या वह सह खातेदार हो। अनुदान राजस्थान विद्युत वितरण निगम को कनेक्शन मांग पत्र जारी होने के बाद भेजा जाता है।
8. आधुनिक कृषि यंत्र योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
बीपीएल अजा लघु सीमांत कृषक/कृषि मजदूर को अधिक उत्पादन हेतु लागत, आवश्यकता व उपयोगिता को देखते हुए आधुनिक कृषि यंत्र लागत का 50 प्रतिशत या रु. 3000 (जो भी कम हो) के अनुदान पर उपलब्ध कराए जाते हैँ। कृषक आवश्यकतानुसार एक से अधिक यंत्र ले सकता है, लेकिन अनुदान सीमा अधिकतम रु. 10000 है। इसमें पौध संरक्षण, बण्ड फोरमर, मूंगफली छीलने की मशीन आदि एवं अधिक कीमत के यंत्रों में पावर स्प्रेयर, कल्टीवेटर, डिस्क प्लॉ का भी प्रावधान हैं।
9. कुटीर ज्योति योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही इस योजना में अजा गरीब परिवार के घर में एक पाईण्ट (एक बल्ब) लगाया जाता है। इसमें प्रति लाभार्थी अधिकतम 2017 रु. का अनुदान देय है।
10. भूमि आवंटन योजना (गैर बैंकिंग योजना)-
वर्ष 2001-02 से प्रारम्भ की गई योजना इन्दिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में बीपीएल अजा व्यक्ति को उपनिवेशन विभाग द्वारा भूमि आवंटित की जाती है। पात्र आवंटियों को भूमि की कीमत का 50 प्रतिशत या 10000 रु. जो भी कम हो अनुदान उपनिवेशन विभाग को भेजा जाता है।
Saturday, June 11, 2011
राजस्थान सामान्य ज्ञान-
आवासीय विद्यालय योजना
इस योजना के अंतर्गत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन "राजस्थान रेजीडेन्सियल एजूकेशनल इन्स्टीट्यूशन्स सोसायटी" (राईस) द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के एक लाख रुपए से कम वार्षिक आय वाले गरीब परिवारों के बालक-बालिकाओं को शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु 14 आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 10 विद्यालय जर्मनी के बैंकिंग समूह K f W ('Kreditanstalt für Wiederaufbau' meaning Reconstruction Credit Institute) के सहयोग से एवं 4 विद्यालय राज्य सरकार द्वारा निर्मित किए गए हैं।
इन विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में स्थापित विद्यालयों में 80 प्रतिशत स्थान अनुसूचित जनजाति के लिए, 12 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लिए, 8 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इन आवासीय विद्यालयों में एससी, एसटी व ओबीसी के अनाथ, बीपीएल, परित्यक्ता, विधवा महिला के परिवारों के बालक/ बालिकाओं को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाती है।
बालिकाओं के विद्यालय-
इन 14 विद्यालयों में 7 विद्यालय बालिकाओं के लिए हैं जो निम्नलिखित हैं-
1. खोडन (बांसवाड़ा)
2.भैसवाड़ा (जालौर)
3.हिंगी (कोटा)
4. पावटा (नागौर)
5. छाण (सवाईमाधोपुर)
6. आटूण (भीलवाड़ा)
7. वजीरपुरा (टोंक)
बालकों के लिए संचालित विद्यालय-
इस योजना में निम्नलिखित 7 विद्यालय बालकों के लिए संचालित हैं-
1. मण्डोर (जोधपुर)
2. केनपुरा (पाली)
3. खेड़ा आसपुर (डूँगरपुर)
4. बगड़ी (दौसा)
5. अटरू (बारां)
6. हरियाली (जालौर)
7. मण्डाना (कोटा)
इनमें से हरियाली (जालौर) निष्क्रमणीय पशुपालकों के बालकों के लिए एवं मण्डाना (कोटा) भिक्षावृत्ति एवं अन्य अवांछित वृत्तियों में लिप्त परिवारों के बालकों के लिए संचालित हैं।
इनके संचालन में नि:शुल्क शिक्षा, आवास, भोजन, गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, स्टेशनरी, चिकित्सा आदि सुविधाओं पर लगभग एक करोड़ रूपए प्रतिमाह व्यय किया जा रहा है।
इन विद्यालयों का स्तर कक्षा 6 से 12 तक है। सत्र 2010-11 में स्वीकृत छात्र क्षमता 6464 है। इसके विरूद्ध वर्तमान में 5797 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
इसके अलावा पशुपालकों के बालकों के लिए दो विद्यालय क्रमश: झालावाड़ एवं सागवाड़ा (डूँगरपुर) में निर्माणाधीन हैं।
इन विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में स्थापित विद्यालयों में 80 प्रतिशत स्थान अनुसूचित जनजाति के लिए, 12 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लिए, 8 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इन आवासीय विद्यालयों में एससी, एसटी व ओबीसी के अनाथ, बीपीएल, परित्यक्ता, विधवा महिला के परिवारों के बालक/ बालिकाओं को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाती है।
बालिकाओं के विद्यालय-
इन 14 विद्यालयों में 7 विद्यालय बालिकाओं के लिए हैं जो निम्नलिखित हैं-
1. खोडन (बांसवाड़ा)
2.भैसवाड़ा (जालौर)
3.हिंगी (कोटा)
4. पावटा (नागौर)
5. छाण (सवाईमाधोपुर)
6. आटूण (भीलवाड़ा)
7. वजीरपुरा (टोंक)
बालकों के लिए संचालित विद्यालय-
इस योजना में निम्नलिखित 7 विद्यालय बालकों के लिए संचालित हैं-
1. मण्डोर (जोधपुर)
2. केनपुरा (पाली)
3. खेड़ा आसपुर (डूँगरपुर)
4. बगड़ी (दौसा)
5. अटरू (बारां)
6. हरियाली (जालौर)
7. मण्डाना (कोटा)
इनमें से हरियाली (जालौर) निष्क्रमणीय पशुपालकों के बालकों के लिए एवं मण्डाना (कोटा) भिक्षावृत्ति एवं अन्य अवांछित वृत्तियों में लिप्त परिवारों के बालकों के लिए संचालित हैं।
इनके संचालन में नि:शुल्क शिक्षा, आवास, भोजन, गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, स्टेशनरी, चिकित्सा आदि सुविधाओं पर लगभग एक करोड़ रूपए प्रतिमाह व्यय किया जा रहा है।
इन विद्यालयों का स्तर कक्षा 6 से 12 तक है। सत्र 2010-11 में स्वीकृत छात्र क्षमता 6464 है। इसके विरूद्ध वर्तमान में 5797 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
इसके अलावा पशुपालकों के बालकों के लिए दो विद्यालय क्रमश: झालावाड़ एवं सागवाड़ा (डूँगरपुर) में निर्माणाधीन हैं।
विकलांग विवाह एवं परिचय सम्मेलन योजना-
यह निःशक्त युवक /युवतियों को विवाह पर सुखद दाम्पत्य जीवन व्यतीतकरने में सहायता उपलब्ध करवाए जाने की योजना है जो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा सम्पूर्ण राजस्थान राज्य में संचालित है।
पात्रता-
> निःशक्त युवक की आयु 21 वर्ष तथा युवती की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
> प्रार्थी के पास मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी निर्योग्यता प्रमाणपत्र हो।
> प्रार्थी राजस्थान का मूल निवासी हो।
> संरक्षक/ माता-पिता अथवा स्वयं रोजगार में हो तो समस्त स्रोतों से वार्षिक आय 50000 रुपए से अधिक ना हो।
अनुदान राशि-
प्रति दम्पत्ति 25,000 रुपए अनुदान सहायता स्वीकृत की जाती है तथा निःशक्त युवक/युवतियों के विवाह परिचय सम्मेलन आयोजित करने वाली स्वयंसेवी संस्था को अधिकतम 20,000 रुपये आयोजन व्यय के रूप में स्वीकृत किए जाते हैं। अनुदान की राशि दम्पत्ति के दोनों विकलांग होने पर अथवा दोनों में से एक के विकलांग होने पर भी अधिकतम 25,000 रुपए ही है।
पात्रता-
> निःशक्त युवक की आयु 21 वर्ष तथा युवती की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
> प्रार्थी के पास मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी निर्योग्यता प्रमाणपत्र हो।
> प्रार्थी राजस्थान का मूल निवासी हो।
> संरक्षक/ माता-पिता अथवा स्वयं रोजगार में हो तो समस्त स्रोतों से वार्षिक आय 50000 रुपए से अधिक ना हो।
अनुदान राशि-
प्रति दम्पत्ति 25,000 रुपए अनुदान सहायता स्वीकृत की जाती है तथा निःशक्त युवक/युवतियों के विवाह परिचय सम्मेलन आयोजित करने वाली स्वयंसेवी संस्था को अधिकतम 20,000 रुपये आयोजन व्यय के रूप में स्वीकृत किए जाते हैं। अनुदान की राशि दम्पत्ति के दोनों विकलांग होने पर अथवा दोनों में से एक के विकलांग होने पर भी अधिकतम 25,000 रुपए ही है।
जानें शिक्षा से जुड़े संस्थानों को-3 "इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय(इग्नू)"
Creative Teachers: जानें शिक्षा से जुड़े संस्थानों को-3
"इंदिरा गाँधी...: "शिक्षा की व्यापक आवश्यकताओं के मद्देनजर देश के सबसे प्रमुख मुक्त विश्वविद्यालय 'इदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू)' की स्थापन..."
"इंदिरा गाँधी...: "शिक्षा की व्यापक आवश्यकताओं के मद्देनजर देश के सबसे प्रमुख मुक्त विश्वविद्यालय 'इदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू)' की स्थापन..."
मीणा समाज का भूरिया बाबा का प्रसिद्ध मेला
सिरोही जिले के पोसालिया से करीब 10 किमी दूर ग्राम चोटिला के पास सुकड़ी नदी के किनारे मीणा समाज के आराध्यदेव एवं प्राचीन गौतम ऋषि महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है जिसे "भूरिया बाबा" के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। वस्तुतः मीणा समुदाय के लोग गौतम महादेव को भूरिया बाबा के नाम से पुकारते हैं। इस मंदिर के परिसर में पश्चिमी राजस्थान के आदिवासियों का सबसे बड़ा दो दिवसीय वार्षिक मेला भरता है। इस वर्ष यह मेला 14 एवं 15 अप्रैल को भरा। मीणा समाज के लिए यह मेला अत्यंत महत्वपूर्ण और भारी आस्था का प्रतीक होता है। मेले को लेकर मीणा समाज की ओर से जोर शोर से तैयारियाँ की जाती है तथा मंदिर को खूब सँवार कर आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है।
इस मेले में प्रतिवर्ष सिरोही, पाली व जालोर जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से मीणा समाज के लाखों लोग भाग लेते हैं। मेले से एक दिन पूर्व से ही यहाँ श्रद्धालुओं के आने जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
मीणा समाज में भूरिया बाबा के प्रति इतनी अगाध श्रद्धा है कि वे उनके नाम की शपथ लेकर कभी झूठ नहीं बोलते एवं गलत कार्य नहीं करते हैं।
विसर्जित की जाती है पूर्वजों की अस्थियां भी-
यहाँ गौतम ऋषि महादेव मंदिर के समीप नदी के एक पवित्र कुंड है जिसे गंगा कुंड के नाम से पुकारा जाता है। मेले के दिन मीणा समाज के लोग कई युगों से चल रही परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन इस पवित्र कुंड में करते हैं। इससे पूर्व इस पवित्र कुंड में गंगा के पानी का प्रवाह होने होता है तथा उपस्थित मीणा समाज के लोग जयकारे लगाकर गंगा मैया की आरती और पूजा-अर्चना करते हैं। यह मान्यता है कि गंगा मैया के कुंड में अस्थियों का विसर्जन करने से उनके पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि मीणा समाज के भक्तजनों को कई वर्षों पूर्व स्वयं गौतम ऋषि महादेव ने इस कुंड में अपने पूर्वजों की अस्थियां विसर्जित करने का वरदान दिया था।
भूरिया बाबा का यह मेला मीणा समाज के लिए एक सांस्कृतिक और सामाजिक वार्षिक उत्सव की तरह होता है। यहाँ मेले की वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए मीणा समाज के लोग अपनी एताइयों (अस्थाई बसेरों) में अपने रिश्तेदारों, मित्रों तथा विशेषकर जवाइयों को बुला कर उनकी मेहमान नवाजी करते हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि मेले के दौरान ये लोग अपने जवाई को एताई में बुलाते हैं व उनके स्वागत एवं सम्मान में महिलाएं व युवतियां लोकगीत गाती हैं। इस अवसर पर मीणा समाज के लोग अपने जवान लड़के-लड़कियों के शादी के रिश्ते भी तय करते हैं। एताइयों पर रिश्तेदारों, जवाइयों व मित्रों को भोजन, मिष्ठान, सुरमा की मनुहार की जाती है।
मेले में श्रद्धा और आस्था का ज्वार इतना अधिक होता है कि संपूर्ण परिसर में दिन भर भूरिया बाबा के जयकारे गूँजते रहते हैं। महाआरती में काफी संख्या में शरीक श्रद्धालु हवन कुण्ड में नारियल की आहुतियां देकर सुख समृद्धि की कामना करते हैं।
मेले में उत्साह एवं उमंग की अनूठी सांस्कृतिक झाँकी दृष्टिगत होती है जब युवा पांवों में घुंघरू हाथ में रंग-बिरंगी रिबन व अन्य सामग्री के साथ सज धज कर नृत्य करते बाबा के यश गाते नजर आते हैं। आदिवासियों का उत्साह इतना अधिक होता है कि मेले की अंतिम घड़ी तक वे गोदने गुदवाने, हाट बाजार से खरीददारी करने, सगे संबंधियों से मिलने व खाने-पीने की मनुहार करने की ललक बनी रहती है। अंतिम समय में मेलार्थियों के भारी मन से विदाई गीतों के साथ जुदा होते हैं।
अत्यंत कड़े होते हैं मेले के नियम-
गौतम ऋषि मेला प्रबंधन कमेटी की ओर से जारी किए गए सभी नियमों की पालना इस मेले में करना अति आवश्यक है। मेले के दौरान हथियार नहीं लाने, शराब पीकर नहीं आने, हरे पेड़ नहीं काटने, झगड़ा फंसाद नहीं करने, वीडियो व फोटोग्राफी की दुकानें नहीं लगवाने, एताइयों पर ट्रैक्टर नहीं लाने, कमेटी की अनुमति के बिना वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी नहीं करने, रात्रि 8 बजे के बाद मेले में महिलाएं के नहीं घूमने आदि के कड़े नियमों की पालना सभी को करनी होती हैं।
इस मेले की एक और विशेषता यह भी है कि इसमें लाखों की संख्या में लोग आने के बावजूद पुलिस का प्रवेश नहीं होता है। मेले की संपूर्ण व्यवस्था को अनुशासित करने एवं कानून व्यवस्था के दायित्व का निर्वहन समाज के परगनावार पंच करते हैं। वे अपने परगने के जागरूक व निष्ठावान युवकों को हाट बाजार, मंदिर मार्ग और एताइयों सहित विभिन्न स्थानों पर निगरानी के लिए तैनात करते हैं। केवल मेला स्थल के बाहर की व्यवस्था पुलिस प्रशासन के हवाले होती है।
इस मेले में प्रतिवर्ष सिरोही, पाली व जालोर जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से मीणा समाज के लाखों लोग भाग लेते हैं। मेले से एक दिन पूर्व से ही यहाँ श्रद्धालुओं के आने जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
मीणा समाज में भूरिया बाबा के प्रति इतनी अगाध श्रद्धा है कि वे उनके नाम की शपथ लेकर कभी झूठ नहीं बोलते एवं गलत कार्य नहीं करते हैं।
विसर्जित की जाती है पूर्वजों की अस्थियां भी-
यहाँ गौतम ऋषि महादेव मंदिर के समीप नदी के एक पवित्र कुंड है जिसे गंगा कुंड के नाम से पुकारा जाता है। मेले के दिन मीणा समाज के लोग कई युगों से चल रही परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन इस पवित्र कुंड में करते हैं। इससे पूर्व इस पवित्र कुंड में गंगा के पानी का प्रवाह होने होता है तथा उपस्थित मीणा समाज के लोग जयकारे लगाकर गंगा मैया की आरती और पूजा-अर्चना करते हैं। यह मान्यता है कि गंगा मैया के कुंड में अस्थियों का विसर्जन करने से उनके पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि मीणा समाज के भक्तजनों को कई वर्षों पूर्व स्वयं गौतम ऋषि महादेव ने इस कुंड में अपने पूर्वजों की अस्थियां विसर्जित करने का वरदान दिया था।
भूरिया बाबा का यह मेला मीणा समाज के लिए एक सांस्कृतिक और सामाजिक वार्षिक उत्सव की तरह होता है। यहाँ मेले की वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए मीणा समाज के लोग अपनी एताइयों (अस्थाई बसेरों) में अपने रिश्तेदारों, मित्रों तथा विशेषकर जवाइयों को बुला कर उनकी मेहमान नवाजी करते हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि मेले के दौरान ये लोग अपने जवाई को एताई में बुलाते हैं व उनके स्वागत एवं सम्मान में महिलाएं व युवतियां लोकगीत गाती हैं। इस अवसर पर मीणा समाज के लोग अपने जवान लड़के-लड़कियों के शादी के रिश्ते भी तय करते हैं। एताइयों पर रिश्तेदारों, जवाइयों व मित्रों को भोजन, मिष्ठान, सुरमा की मनुहार की जाती है।
मेले में श्रद्धा और आस्था का ज्वार इतना अधिक होता है कि संपूर्ण परिसर में दिन भर भूरिया बाबा के जयकारे गूँजते रहते हैं। महाआरती में काफी संख्या में शरीक श्रद्धालु हवन कुण्ड में नारियल की आहुतियां देकर सुख समृद्धि की कामना करते हैं।
मेले में उत्साह एवं उमंग की अनूठी सांस्कृतिक झाँकी दृष्टिगत होती है जब युवा पांवों में घुंघरू हाथ में रंग-बिरंगी रिबन व अन्य सामग्री के साथ सज धज कर नृत्य करते बाबा के यश गाते नजर आते हैं। आदिवासियों का उत्साह इतना अधिक होता है कि मेले की अंतिम घड़ी तक वे गोदने गुदवाने, हाट बाजार से खरीददारी करने, सगे संबंधियों से मिलने व खाने-पीने की मनुहार करने की ललक बनी रहती है। अंतिम समय में मेलार्थियों के भारी मन से विदाई गीतों के साथ जुदा होते हैं।
अत्यंत कड़े होते हैं मेले के नियम-
गौतम ऋषि मेला प्रबंधन कमेटी की ओर से जारी किए गए सभी नियमों की पालना इस मेले में करना अति आवश्यक है। मेले के दौरान हथियार नहीं लाने, शराब पीकर नहीं आने, हरे पेड़ नहीं काटने, झगड़ा फंसाद नहीं करने, वीडियो व फोटोग्राफी की दुकानें नहीं लगवाने, एताइयों पर ट्रैक्टर नहीं लाने, कमेटी की अनुमति के बिना वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी नहीं करने, रात्रि 8 बजे के बाद मेले में महिलाएं के नहीं घूमने आदि के कड़े नियमों की पालना सभी को करनी होती हैं।
इस मेले की एक और विशेषता यह भी है कि इसमें लाखों की संख्या में लोग आने के बावजूद पुलिस का प्रवेश नहीं होता है। मेले की संपूर्ण व्यवस्था को अनुशासित करने एवं कानून व्यवस्था के दायित्व का निर्वहन समाज के परगनावार पंच करते हैं। वे अपने परगने के जागरूक व निष्ठावान युवकों को हाट बाजार, मंदिर मार्ग और एताइयों सहित विभिन्न स्थानों पर निगरानी के लिए तैनात करते हैं। केवल मेला स्थल के बाहर की व्यवस्था पुलिस प्रशासन के हवाले होती है।
Friday, June 10, 2011
जाने शिक्षा से जुड़े संस्थान NUEPA को
Creative Teachers: जाने शिक्षा से जुड़े संस्थानो को -2: "NUEPA National University for Educational Planning and Administration राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय (न्यूपा), शैक्ष..."
राजस्थान समसामयिक घटनाचक्र
पाली में ट्रीटमेंट प्लांट में गैस रिसाव
औद्योगिक शहर पाली में पुनायता रोड स्थित प्रदूषित जल परिशोधन संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लांट) के एक हौज में सफाई हेतु उतरे दो श्रमिकों की दिनांक 7 जून को जहरीली गैस से मौत हो गई। इन श्रमिकों को बचाने के लिए उतरे दस अन्य श्रमिक भी गैस रिसाब की वजह से अचेत हो गए। बताया जाता है कि पुनायता रोड औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को स्वच्छ करने के लिए चल रहे तीन नंबर के प्लांट में बने एक हौज में पाइप जाम होने से बंद हो गया था और इसे साफ करने उतरे दो श्रमिक प्रेमसिंह और सुरेश खटीक जहरीली गैस से बेहोश होकर पानी में डूब गए। उन्हें बचाने के लिए हौज में उतरे श्रमिकों में से दस अन्य श्रमिक गैस की वजह से अचेत हो गए।
इनका बांगड़ अस्पताल में उपचार चल रहा है। यह प्लांट राज्य सरकार के जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अंतर्गत चलाया जा रहा है। इस ट्रीटमेंट प्लांट में सोलह वर्ष पूर्व एक जून 1995 को भी इसी तरह का हादसा हुआ था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी।
डॉ. चंद्रभान बने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष-
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान को केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी के स्थान पर कांग्रेस का नया प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
डॉ. चंद्रभान का जन्म 6 मई 1952 को झूंझुनू जिले के जयसिंहपुरा गांव में हुआ तथा वे एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण कर डॉक्टर बने।
श्री चंद्रभान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की थी तथा वे 1989 में भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी रहे थे। बाद में वे कांग्रेस में आ गए। वे कांग्रेस पार्टी में प्रदेश महामंत्री और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वे अशोक गहलोत के पूर्व कार्यकाल में भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
शिक्षा विभाग की भर्तियों में इंटरव्यू समाप्त करने पर विचार-
राज्य सरकार शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक, व्याख्याता सहित अन्य पदों के लिए लिखित परीक्षा के बाद होने वाले इंटरव्यू की व्यवस्था समाप्त कर इन पदों के लिए मैरिट का निर्धारण सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर करने पर विचार कर रही है। ऐसा राज्य सरकार विभाग की भर्तियों में इंटरव्यू के कारण हो रही देरी को देखते हुए करना चाहती है। राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग में भविष्य में होने वाली भर्तियों में केवल लिखित परीक्षा की प्रक्रिया को अपनाने के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग से सिफारिश की है।
राज्य का पहला मिल्क पाउडर कारखाना प्रारंभ होगा कोटा में
राज्य का निजी क्षेत्र का प्रथम मिल्क पाउडर बनाने का कारखाना कोटा के एग्रोफूड पार्क में चालू होने की तैयारी हो चुकी है। शिव एडिबल प्रा. लि. का 35 करोड़ रुपए की लागत का यह कारखाना 15 जुलाई तक प्रारंभ होने की उम्मीद है। जिससे करीब 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
फैक्टरी प्रबंधन के अनुसार-
> इस कारखाने के संचालन के लिए प्रतिदिन करीब दो लाख लीटर दूध की जरूरत होगी, जिसमें एक लाख लीटर दूध से 8 टन मिल्क पाउडर बनाया जाएगा तथा एक लाख लीटर लिक्विड दूध से पनीर, छाछ, मक्खन और शुद्ध घी तैयार किया जाएगा।
> इस ऑटोमेटिक प्लांट में एक लाख लीटर दूध से रोजाना आठ टन पाउडर बनेगा। गाय के एक लीटर दूध में 8 से 8.5 प्रतिशत एसएनएफ (S.N.F.) होता है। इसके आधार पर ही दूध के पाउडर की मात्रा तय होती है।
> लगभग 30 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में फैले इस कारखाने में बनने वाले मिल्क पाउडर की आपूर्ति पूरे राजस्थान में होगी जबकि लिक्विड दूध, छाछ, पनीर एवं शुद्ध घी की सप्लाई हाड़ौती संभाग के चारों जिलों में की जाएगी।
> इस फैक्ट्री चलाने के लिए आवश्यक दो लाख लीटर दूध की आपूर्ति के लिए किसानों को बाजार दर से 15 प्रतिशत कीमत अधिक दी जाएगी।
क्या होता है SNF?
दूध के दो भाग होते हैं-
1. वसा
2. SNF
SNF का विस्तार Solid Not Fat अर्थात् वसा के अलावा जो ठोस पदार्थ दूध में मौजूद होते हैं, जैसे विटामिन, खनिज लवण, प्रोटीन, शर्करा आदि मिल कर SNF बताते हैं।
औद्योगिक शहर पाली में पुनायता रोड स्थित प्रदूषित जल परिशोधन संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लांट) के एक हौज में सफाई हेतु उतरे दो श्रमिकों की दिनांक 7 जून को जहरीली गैस से मौत हो गई। इन श्रमिकों को बचाने के लिए उतरे दस अन्य श्रमिक भी गैस रिसाब की वजह से अचेत हो गए। बताया जाता है कि पुनायता रोड औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को स्वच्छ करने के लिए चल रहे तीन नंबर के प्लांट में बने एक हौज में पाइप जाम होने से बंद हो गया था और इसे साफ करने उतरे दो श्रमिक प्रेमसिंह और सुरेश खटीक जहरीली गैस से बेहोश होकर पानी में डूब गए। उन्हें बचाने के लिए हौज में उतरे श्रमिकों में से दस अन्य श्रमिक गैस की वजह से अचेत हो गए।
इनका बांगड़ अस्पताल में उपचार चल रहा है। यह प्लांट राज्य सरकार के जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अंतर्गत चलाया जा रहा है। इस ट्रीटमेंट प्लांट में सोलह वर्ष पूर्व एक जून 1995 को भी इसी तरह का हादसा हुआ था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी।
डॉ. चंद्रभान बने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष-
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान को केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी के स्थान पर कांग्रेस का नया प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
डॉ. चंद्रभान का जन्म 6 मई 1952 को झूंझुनू जिले के जयसिंहपुरा गांव में हुआ तथा वे एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण कर डॉक्टर बने।
श्री चंद्रभान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की थी तथा वे 1989 में भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी रहे थे। बाद में वे कांग्रेस में आ गए। वे कांग्रेस पार्टी में प्रदेश महामंत्री और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वे अशोक गहलोत के पूर्व कार्यकाल में भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
शिक्षा विभाग की भर्तियों में इंटरव्यू समाप्त करने पर विचार-
राज्य सरकार शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक, व्याख्याता सहित अन्य पदों के लिए लिखित परीक्षा के बाद होने वाले इंटरव्यू की व्यवस्था समाप्त कर इन पदों के लिए मैरिट का निर्धारण सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर करने पर विचार कर रही है। ऐसा राज्य सरकार विभाग की भर्तियों में इंटरव्यू के कारण हो रही देरी को देखते हुए करना चाहती है। राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग में भविष्य में होने वाली भर्तियों में केवल लिखित परीक्षा की प्रक्रिया को अपनाने के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग से सिफारिश की है।
राज्य का पहला मिल्क पाउडर कारखाना प्रारंभ होगा कोटा में
राज्य का निजी क्षेत्र का प्रथम मिल्क पाउडर बनाने का कारखाना कोटा के एग्रोफूड पार्क में चालू होने की तैयारी हो चुकी है। शिव एडिबल प्रा. लि. का 35 करोड़ रुपए की लागत का यह कारखाना 15 जुलाई तक प्रारंभ होने की उम्मीद है। जिससे करीब 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
फैक्टरी प्रबंधन के अनुसार-
> इस कारखाने के संचालन के लिए प्रतिदिन करीब दो लाख लीटर दूध की जरूरत होगी, जिसमें एक लाख लीटर दूध से 8 टन मिल्क पाउडर बनाया जाएगा तथा एक लाख लीटर लिक्विड दूध से पनीर, छाछ, मक्खन और शुद्ध घी तैयार किया जाएगा।
> इस ऑटोमेटिक प्लांट में एक लाख लीटर दूध से रोजाना आठ टन पाउडर बनेगा। गाय के एक लीटर दूध में 8 से 8.5 प्रतिशत एसएनएफ (S.N.F.) होता है। इसके आधार पर ही दूध के पाउडर की मात्रा तय होती है।
> लगभग 30 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में फैले इस कारखाने में बनने वाले मिल्क पाउडर की आपूर्ति पूरे राजस्थान में होगी जबकि लिक्विड दूध, छाछ, पनीर एवं शुद्ध घी की सप्लाई हाड़ौती संभाग के चारों जिलों में की जाएगी।
> इस फैक्ट्री चलाने के लिए आवश्यक दो लाख लीटर दूध की आपूर्ति के लिए किसानों को बाजार दर से 15 प्रतिशत कीमत अधिक दी जाएगी।
क्या होता है SNF?
दूध के दो भाग होते हैं-
1. वसा
2. SNF
SNF का विस्तार Solid Not Fat अर्थात् वसा के अलावा जो ठोस पदार्थ दूध में मौजूद होते हैं, जैसे विटामिन, खनिज लवण, प्रोटीन, शर्करा आदि मिल कर SNF बताते हैं।
Thursday, June 9, 2011
राजस्थान सामान्य ज्ञान क्विज- 9 जून 2011
1. राजस्थान की प्रथम पंचवर्षीय योजना में सर्वाधिक व्यय किस कार्य पर किया गया?
उत्तर- सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण पर
2. राजस्थान में जल संरक्षण की परंपरागत विधि 'खडीन' का आविष्कारक किस जाति को माना जाता है?
उत्तर- पालीवाल ब्राह्मणों को
3. राजस्थान के रेगिस्तान में जल संरक्षण करने तथा खेती में उपयोग लेने की परंपरागत विधि 'खडीन' का आविष्कार किस जिले में हुआ था?
उत्तर- जैसलमेर में
4. नागौर जिले का डेगाना किसके खनन के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर- टंग्स्टन के लिए
5. राजस्थान में 1986 में स्थापित एक अभिकरण "R. E. D. A." का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- Rajasthan Energy Development Agency
6. राजस्थान के बारां जिले में जनवरी 1989 में शुरू अंता विद्युत परियोजना किस संसाधन पर आधारित है?
उत्तर- प्राकृतिक गैस पर
7. 11 अगस्त 1972 में प्रारंभ 'राजस्थान परमाणु शक्ति परियोजना' की डिजाइन और प्रारंभिक इंजीनियरिंग कार्य में किस देश के वैज्ञानिकों ने किया?
उत्तर- कनाडा
8. उपयुक्त दशा के कारण राजस्थान के किस जिले में पवन ऊर्जा के विकास की सर्वाधिक संभावनाएँ विद्यमान है?
उत्तर- जैसलमेर में
9. खनिज संसाधनों से संपन्न होने के कारण भूगर्मवेत्ताओं ने राजस्थान को क्या संज्ञा दी है?
उत्तर- खनिजों का संग्रहालय
10. राजस्थान में जेम पार्क कहाँ स्थित है?
उत्तर- जयपुर में
उत्तर- सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण पर
2. राजस्थान में जल संरक्षण की परंपरागत विधि 'खडीन' का आविष्कारक किस जाति को माना जाता है?
उत्तर- पालीवाल ब्राह्मणों को
3. राजस्थान के रेगिस्तान में जल संरक्षण करने तथा खेती में उपयोग लेने की परंपरागत विधि 'खडीन' का आविष्कार किस जिले में हुआ था?
उत्तर- जैसलमेर में
4. नागौर जिले का डेगाना किसके खनन के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर- टंग्स्टन के लिए
5. राजस्थान में 1986 में स्थापित एक अभिकरण "R. E. D. A." का पूरा नाम क्या है?
उत्तर- Rajasthan Energy Development Agency
6. राजस्थान के बारां जिले में जनवरी 1989 में शुरू अंता विद्युत परियोजना किस संसाधन पर आधारित है?
उत्तर- प्राकृतिक गैस पर
7. 11 अगस्त 1972 में प्रारंभ 'राजस्थान परमाणु शक्ति परियोजना' की डिजाइन और प्रारंभिक इंजीनियरिंग कार्य में किस देश के वैज्ञानिकों ने किया?
उत्तर- कनाडा
8. उपयुक्त दशा के कारण राजस्थान के किस जिले में पवन ऊर्जा के विकास की सर्वाधिक संभावनाएँ विद्यमान है?
उत्तर- जैसलमेर में
9. खनिज संसाधनों से संपन्न होने के कारण भूगर्मवेत्ताओं ने राजस्थान को क्या संज्ञा दी है?
उत्तर- खनिजों का संग्रहालय
10. राजस्थान में जेम पार्क कहाँ स्थित है?
उत्तर- जयपुर में
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