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राजस्थान में आदिवासी जनसंख्या की दृष्टि से मीणा जाति का प्रथम स्थान है। यह राजस्थान के सभी क्षेत्रों में पाई जाती है लेकिन मुख्यतया जयपुर, अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और उदयपुर जिलों में निवास करती है। कर्नल टॉड के अनुसार अजमेर से लेकर आगरा तक काली खोह पर्वतमाला को मीणा जाति का मूल निवास मानते हैं। मीणा जाति अपनी उत्पत्ति भगवान विष्णु के दसवें अवतार अर्थात् मत्स्यावतार से होना मानती है। मीणा शब्द की उत्पत्ति 'मीन' शब्द से हुई है जिसका अर्थ 'मछली' होता है। कुछ लोगों का मानना यह भी है कि मीणा बहुल होने के कारण ही अलवर, भरतपुर आदि क्षेत्र को 'मत्स्य प्रदेश' कहा जाता था। मीणा जनजाति के गुरु आचार्य मगनसागर मुनि थे। आचार्य मुनि मगन सागर ने ही मीणा जाति की ''मीन पुराण'' की रचना की है।

जयपुर राज्य में मीणाओं का ऐतिहासिक परिदृश्य-

राजपूताना के कई राज्यों में मीणा जनजाति शताब्दियों से निवास करती रही है। मीणा जन्मजात सैनिक थे और अपने आपको क्षत्रिय मानते थे। ढूँढाड़ क्षेत्र के खोहगंग, आमेर, भांडारेज, मांची, गेटोर, झोटवाड़ा, नरेठ, शोभनपुर आदि इलाकों में सैंकड़ों वर्षों तक मीणाओं के जनपद रहे हैं। इन स्थानों पर मीणा शासकों का प्राचीन काल से ही आधिपत्य रहा था। कर्नल टॉड के अनुसार दुल्हराव ने खोहगंग के मीणा शासक आलनसिंह को परास्त कर ढूंढाड़ में कछवाहा राज्य की नींव डाली। इस युद्ध में आलनसिंह एवं उसके करीब 1500 मीणा  साथी मारे गए। मीणा स्त्रियाँ अपने पति के साथ सती हो गई। खोहगंग के निकट आज भी उनकी छतरियां और देवल पाए जाते हैं। इसके बाद दुल्हराव ने मांची के मीणा शासक राव नाथू मीणा को हरा कर अपने राज्य का विस्तार किया।
परवर्ती कछवाहा शासकों कोकिल और मैकुल ने गेटोर, आमेर, झोटवाड़ा आदि मीणा जनपदों के शासकों को हरा कर अपने राज्य की वृद्धि की। इस प्रकार ढूंढाड़ में मीणाओं का शासन समाप्त हो गया। किन्तु लम्बे समय तक मीणाओं का एक वर्ग छापामार युद्ध करके शासक वर्ग को चुनौती देता रहा। तब कछवाहा शासकों ने उन्हें संतुष्ट करने के लिए कृषि करने के लिए भूमि आवंटित की। फलतः उन्होंने राजपूतों की अधीनता स्वीकार कर ली तब ये अधिकांश मीणा कृषि करने लगे। ये 'जमींदार मीणा' कहलाने लगे। के. एस. सिंह ने अपने वर्गीकरण में बताया है कि जमींदार मीणा को बडागांव मीणा भी कहा जाता है
इसके अतिरिक्त मीणाओं का एक वर्ग अब भी लड़ाई का रास्ता अख्तियार किये हुए था। उनसे शासन ने समझौता करके उन्हें राज्य में शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी दी। ये मीणा चौकीदारी करते थे और एवज में गाँव वालों से चौथ वसूला करते थे। ये मीणा 'चौकीदार मीणा' कहलाने लगे। चौकीदार मीणा को पहले अपराधिक जाति अधिसूचित किया गया था जिसे बाद में अन-अधिसूचित कर दिया गया इस प्रकार मीणाओं के दो मुख्य भेद हो गये। जो मीणा खेती करते थे, वे 'जमींदार मीणा' तथा जो चौकीदारी करते थे, वे 'चौकीदार मीणा' कहलाने लगे। वे जयपुर रियासत के खजाने के संरक्षक और पहरेदार थे। मीणा प्रमुख नए प्रमुख की माथे पर अपने अंगूठे से खून के साथ एक तिलक लगा उसे प्रमुख नियुक्त करता था।

इस प्रकार से मीणाओं के दो प्रमुख वर्ग पाए जाते हैं (के. एस. सिंह (1998) ने अपनी पुस्तक में भी इन्ही दो वर्गों का उल्लेख किया है)- 
(1) जमींदार मीणा
(2) चौकीदार मीणा।
इसके अलावा उजला मीणा, मेला मीणा (Dhedia Meena), आदिया मीणा, रावत मीणा, लुहार मीणा, खाती मीणा, सुरतेवाल मीणा, चौथिया मीणा, भील मीणा, आडू मीणा भी मीणाओं के अन्य वर्ग है। सुरतेवाल मीना, उन मीना के वंशज माने जाते हैं, जो मध्य क्रम के कुछ जाति समूहों, विशेष रूप से माली के साथ मिश्रित हो गए। जो दूसरी जातियों के साथ मिश्रित नहीं हो सके वे अपने आपको असली मीणा कहते है
वे मीणा जो धार्मिक सुधारवादी आंदोलन के प्रभाव के अधीन आ गए तथा जिन्होंने भैंस के मांस को खाना छोड़ दिया, वे उजला मीणा कहाए गए जबकि जिन्होंने अपनी ये भोजन आदत नहीं त्यागी वे मेला मीणा (Dhedia Meena) कहे गए । उजला मीणा अधिकतर जयपुर और अलवर में थे, वे गहलोत मीणा भी कहलाते हैं 
इसके अलावा दस्सा मीणा और बिस्सा मीणा नामक दो अन्य वर्गीकरण भी हैदस्सा मीणा आपराधिक प्रवृत्ति के माने जाते थे तथा ये अपने परिवार के मृतक का दाह-संस्कार करते हैं बिस्सा मीणा आपराधिक प्रवृत्ति को त्याग चुके थे तथा ये अपने परिवार के मृतक को दफनाते हैं
चोथिया मीणा, वे हैं जो मीणाओं के क्षेत्र से गुजरने वाले यात्रियों से चौथ (लेवी) वसूलते थे। 
कर्नल टॉड ने मीणाओं को 12 राजपूत समुदायों से उत्पन्न माना है जिनमें चौहान, तंवर, जादौन, परिहार, कच्छवाहा, सोलंकी, सांखला, गहलोत आदि हैं, आगे 5200 उपवर्गों में विभाजित हो गई।
मीन इतिहास के अनुसार मीणाओं को 12 पाल और 32 तड़ में विभाजित माना गया है। ये 32 तड़ भगवान विष्णु के 32 अवतार मानी गई है

मीणा जनजाति कुल 24 खापों में विभाजित मानी जाती है। इन वर्गों में आपस में विवाह संबंध सामान्यतः नहीं होता है। इनमें से कुछ निम्न हैं-
प्रतिहार या पडिहार मीणा - टोंक बूंदी क्षेत्र में रहते है। ये परिहार राजपूतों से संबंधित माने जाते हैंAD 1451 में एक प्रतिहार राजपूत राजा सूरजमल ने एक मीणा कन्या से विवाह किया था
रावत मीणा -          राजपूतों से वैवाहिक संबंध वाले (अजमेर-मेरवाड़ा में ) ।
सुरतेवाला मीणा -     अन्य जातियों से विशेष कर माली से  वैवाहिक संबंध रखने वाले।
भील मीणा  -    ये लोग सिरोही, उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं चित्तोड़गढ़ जिले में प्रमुख रूप से निवास करते हैं।

इसके बारें में अधिक जानकारी के लिए ये शोध पढ़े-

इसके बारें में अधिक जानकारी के लिए ये शोध पढ़े- http://shodhganga.inflibnet.ac.in/jspui/bitstream/10603/193763/10/10_chapter5.pdf
देवली ब्रिटिश रेजिमेंट- योद्धा वर्ग के रूप में मीणाओं की स्थिति के कारण ब्रिटिश युग में उनको सेना में भर्ती किया गया था और मीणाओं के लिए देवली रेजिमेंट के नामक एक अलग रेजिमेंट बनाया गया था [Armed Forces : Units : Indian Infantry : 42nd Deoli Regiment, by Sunner lan (2001) Osprey publication]  

मीणाओं का सामाजिक जीवन -

मीणा लोग अपने को सामाजिक पदानुक्रम (social heirarchy) में सामाजिक रूप से श्रेष्ठ मानते हैं। हालाँकि ये ब्राह्मणों की श्रेष्ठता को स्वीकार करते हैं किन्तु ये अपनी जाति को अपने क्षेत्र के राजपूत, ठाकुर, जाट, गुर्जर, महाजन आदि जातियों के तुल्य मानते हैं तथा इनके साथ अंतर-भोजन प्रतिबंधित नहीं मानते हैं। मीना कुछ जातियों के साथ संरक्षक-ग्राहक संबंध बनाए रखती है। वे उच्च हिंदू जातियों के साथ संस्कारों को साझा करते हैं।
ब्रिटिश शासन काल में Criminal tribes Act of 1871 के तहत मीणाओं को जरायम पेशा जाति में शामिल किया गया था। एक लेखक ने लिखा है कि आप इस जाति के बस उस दर्द की कल्पना करें जिसमें आपको जन्म से आपराधिक समझा जाए। मीना समुदाय को बहुत सारे शोषण का सामना करना पड़ा और यह इस तरह के अत्याचारों के खिलाफ समुदाय ने संघर्ष किया था

विवाह -

प्राचीनकाल में मीणा जाति में ब्रह्म विवाह, राक्षस विवाह एवं गंधर्व विवाह का प्रचलन था लेकिन वर्तमान में अन्य जातियों की तरह रीति रिवाज के अनुसार विवाह होते हैं। इनमें प्रायः बाल विवाह का प्रचलन है लेकिन गौना वयस्क होने पर ही किया जाता है। मीणाओं में नाता प्रथा (नतारा प्रथा)  भी प्रचलित है। इस प्रथा में स्त्री अपने पति, बच्चों को छोड़कर दूसरे पुरुष से विवाह कर लेती है।  अधिकांश मीणाओं में सगोत्र विवाह प्रचलित है तथा ये मधुर संबंध बनाएं रखते हैं। 

विवाह विच्छेद एवं झगड़ा - 

छेड़ा फाड़ना -  

यह विवाह-विच्छेद या तलाक की प्रथा है, जिसके अन्तर्गत पुरूष नई साड़ी के पल्लू में रूपया बांधकर उसे चौड़ाई की तरफ से फाड़कर पत्नी को पहना देता हैं। ऐसी स्त्री को समाज द्वारा परित्यक्ता माना जाता है।

झगड़ा राशि -   

जब कोई पुरूष किसी दूसरे पुरूष की स्त्री को भगाकर ले जाता है तो झगड़ा राशि के रूप में उसे उसके पूर्व पति एवं समाज को जुर्माना चुकाना पड़ता हैं, जिसे झगड़ा राशि कहते हैं। इस राशि का निर्धारण पंचायत द्वारा किया जाता है। 

परिवार व गाँव -

इनमें संयुक्त परिवार प्रथा का प्रचलन है तथा परिवार पितृ सत्तात्मक होते हैं। निःसंतान दंपति को गोद लेने का अधिकार होता है। मीणाओं में घर एक एकल इकाई है जबकि उनमें कुटुंब भी माना जाता है। सम्पूर्ण गाँव (ढाणी या थोक) में आमतौर पर एक ही वंश का कबीला होता हैमीणा जाति के गांव 'ढाणी' या थोक कहलाते है। प्रत्येक थोक या ढाणी का नेतृत्व एक पटेल करता है

जाति पंचायत-

मीणाओं में जाति पंचायत का सामाजिक नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये सामाजिक झगड़े विवाद यथा- नाता, विवाह विच्छेद, मौसर, ऋण आदि का निपटारा इन पंचायतों में करते हैं। इनमें सबसे बड़ी पंचायत "चौरासी पंचायत" होती है।  मीणा जाति के घरों के समूह को 'ढाणी' या थोक कहलाते है। थोक का मुखिया 'पटेल' कहलाता है।  पटेल का चयन वंशानुगत आधार पर होता है 
  • पंच पटेल एक समूह है जिसमें सभी थोक के पटेल शामिल होते हैं, जो गांव के विभिन्न मामलों की देखभाल करते हैं 
  • पंच महाजन - बहु-जाति-समुदाय वाले गांव में पंच महाजन नामक एक अन्य परिषद होती है, जो अंतर-समुदाय विवादों की देखती है और सामाजिक मानदंडों के रखरखाव को सुनिश्चित करती है पंच महाजन संस्था में मीणा जाति का प्रतिनिधित्व पटेलों द्वारा किया जाता हैं 
  • खेड़ा पंचायत- इनमें खेड़ा पंचायत नाम की एक वृहद् पंचायत होती है, जिसमें 6 मील की परिधि तक के गाँव सम्मिलित होते हैंप्रत्येक पंच पटेल द्वारा खेड़ा पंचायत में अपने प्रतिनिधि को नियुक्त किया जाता है
  • समाज पंचायत- वे विवाद जो खेड़ा पंचायत में नहीं सुलझाए जा सकते हैं उन्हें समाज पंचायत में लाया जाता है। इसका परिक्षेत्र 15 मील की परिधि तक होता है 
  • गड़ातपेशी या परगना पंचायत- यह मीणाओं के पंचायत सामाजिक नियंत्रण का उच्चतम निकाय है। इसका परिक्षेत्र सम्पूर्ण मीणा समाज होता है

मेले और त्यौहार-

मीणा जाति में मेले एवं त्योहारों का भी विशेष महत्व है। श्री महावीरजी {करौली}, सवाई माधोपुर के गणेशजी तथा सीकर के जीणमाता के मंदिर पर मीणाओं के मेले लगते हैं। जीणमाता मीणाओं की आराध्य देवी है। जीणमाता का मेला रेवासा (सीकर) में नवरात्रों के दौरान आयोजित होता है। सिरोही जिले के पोसालिया गाँव के समीप गौतम महादेव में भरने वाला ''भूरिया बाबा का मेला'' मीणाओं का एक विशाल मेला है। यह दो दिवसीय वार्षिक मेला पश्चिमी राजस्थान के आदिवासियों का सबसे बड़ामेला है। 
मीणा जनजाति के लोग विभिन्न उत्सव में नृत्य करते हैं तथा गीत भी गाते हैं। इनकी स्त्रियाँ प्रायः देवी देवताओं के गीत गाती है। होली के दिन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा क्षेत्र और डूंगरपुर में "नेजा नृत्य" किया जाता है। माता की रामनवमी का उत्सव लोक देवता देवकाजी की पूजा के लिए मनाया जाता हैदेवकाजी के 23 भाई और एक बहन थी  

पहनावा -

मीणा पुरुष धोती कमीज पहनते हैं तथा सिर पर साफा बाँधते हैं। स्त्रियाँ घाघरा, काँचली ओढ़नी का प्रयोग करती है। शहरी क्षेत्र में व्यक्ति पेंट, शर्ट आदि आधुनिक वस्त्र भी पहनते हैं।

पूजा-

महादेव जी या शिवजी तथा कालिका माता मीणाओं के सर्वोच्च देवी-देवता है ये महादेव की झूठी शपथ कभी नहीं खाते हैं इसके अलावा इनमें कुछ लोक देवताओं की भी पूजा का प्रचलन है मीणा जाति के देवी-देवताओं को 'बुझ देवता' कहते है। बांकी माता का मंदिर, रायसर, जयपुर में हैं जो ब्याडवाल मीणाओं की कुलदेवी है दांतमाता का मंदिर, जमवारामगढ़ में है जो सीहरा मीणाओं की कुल देवी है। इसके अलावा ये सीतला माता, पिपलो माता, पाले माता, बुजड़ा देवता, भैरों, रघुबू नाथ जी, मामजी, कालिका माता, विरासनी माता, बडवासन माता, बंजारी माता, चोथ माता, जीण माता, आसावारी माता , पीपलाद माता, धीआवान, बाकी आदि की पूजा करते हैं जो इनके कुल देवी या देवता होते हैंये मानते हैं कि मीणा पुजारी (श्यामा) उनकी अनावश्यक आत्माओं से रक्षा करता है। इसके अलावा बालाजी (हनुमानजी), राम , कृष्ण, गणेश आदि भी इनमे पूज्य हैं

आर्थिक स्थिति अन्य -

  • मीणा जनजाति प्रधानत: कृषक वर्ग है जो कृषि के साथ साथ पशुपालन भी करते हैं। ये लोग अच्छे कृषक होते है। मक्का, ज्वार, बाजरा, चना, गन्ना, कपास आदि की खेती करते हैं। 
  • ये स्त्री पुरुष गोदना गुदवाना पसंद करते हैं।
  • मीणा जनजाति में बँटाईदारी कृषि व्यवस्था का भी प्रचलन है।
  • ये लोग परंपरागत रूप से अच्छे तीरंदाज होते है। 
  • ये लोग मांसाहारी होते है।
  • मीणा समाज में शिक्षा का तेजी से प्रसार होने तथा सरकारी सेवाओं में आरक्षण अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के कारण मीणा जनजाति की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

13 टिप्पणियाँ:

  1. Gramsevak bharti ke samagri dale

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  2. धन्यवाद जी इस वेबसाइट पर सभी के लिए सामग्री है। कृपया अन्य पोस्ट्स भी देखें।

    ReplyDelete
  3. bhai yeh jo galat likha hai na isko hata dena Charamkar(Chamar) Meena.Tu mujhe ek bhi esa Meena bata de jo charamkar ho ya charmkari ka kaam karta ho.varna tera blog band kar dunga.
    I'm also a Computer Science Engineering student.
    rvshnkrmeena@gmail.com
    https://www.facebook.com/profile.php?id=100004752577244

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    Replies
    1. सही बात भाई मीणा ऐसा काम नही करता है

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    2. हमारी तरफ है चमरिया मीणा क्या गलत लिखा है,तू कम्प्यूटर सांइस का स्टुडेंट है तो क्या।

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  4. Have u any evidence,proof or fact by which it can be say that padiyar/pratihar meena r those who eaten the buffalo.Earlier a PHD scholar was try to search the evidence in this support,but nothing was found in this regard.Ultimately,it had concluded that things was arbitrary & spreaded one to another.As seem to be word padiyar drive from "pada"(buffalo),It was assumed, padiyar meena may be eat pada.But as various fact has been found that the padiyar meena which mostly resides near by aravali hills passes at bundi devali(tonk) was accomplished in guerrilla war which is executed as "palat kar war karaney waley"Which is also say in one word as pratihar which converted & spoken in local language as padiyar.
    Now any people or writer say arbitrary that padiyar is buffalo/pada eaten,the things provoke the feelings of the people who belongs padiyar meena.Hence it is condemnable,should be stopped immediately.

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  5. Writer of details should be show correct information about Meena tribe

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  6. Plss tell me.
    Wat is called of meena in UP.

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